हैल्दी रिलेशनशिप के लिए फायदेमंद हो सकती है Kiss

भारत में किस सिर्फ रील लाइफ में ही देखने को मिलता है, रियल लाइफ में नहीं. इस किस सीन को परदे पर देख कर हम खुश तो होते हैं, लेकिन जब इस पर अमल की बात आती है तो खुलेपन की बात तो छोडि़ए, बैडरूम में भी ज्यादातर दंपती एकदूसरे को सपोर्ट नहीं करते हैं. जबकि किस पर हुए कई सर्वे बता चुके हैं कि इस से कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होता है.

कई महिलाएं और पुरुष अकसर यह बहाने बनाते देखे जा सकते हैं कि सुनो न, आज मन नहीं है बहुत थक गया हूं/गई हूं. कल करेंगे प्लीज. जब आप अपने पार्टनर के साथ चंद प्यार भरे लमहे गुजारना चाहें और ऐसे में आप का पार्टनर कल कह कर बात टाल दे तो आप को बुरा लगना स्वाभाविक है. लेकिन क्या आप ने कभी यह सोचा है कि ऐसा कह कर आप अपना रिश्ता तो खराब नहीं कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो सावधान हो जाएं. बहुत से ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं, जो एकदूसरे की फीलिंग्स को इसी तरह हर्ट कर अपना रिश्ता बिगाड़ लेते हैं. सभी को प्यार को ऐक्सप्रैस करने का हक है. ऐसे में पार्टनर जब इस तरह से संबंध को रोकेगाटोकेगा तो इस से न सिर्फ आप का रिश्ता प्रभावित होगा वरन मन में भी खटास आएगी. इतना ही नहीं, ऐसा करना आप के शारीरिक व मानसिक संतुलन पर भी बुरा असर डालेगा. आप को मालूम होना चाहिए कि किस थेरैपी दे कर आप का पार्टनर पल भर में आप की सारी थकान को गायब कर सकता है. इसलिए इसे मना करने से पहले थोड़ा सोच लें. आइए, अब जानें किस की खूबियों को:

रिश्ता मजबूत बनाता है किस: यह तो हम सभी जानते हैं कि लिपलौक करने से रिश्ता अधिक मजबूत बनता है. एकदूसरे के साथ लिपलौक करने से एकदूसरे के प्रति ऐक्स्ट्रा प्यार का एहसास मिलता है. ऐसा लगता है कि मेरा पार्टनर मुझ से बेहद प्यार करता है. किस करने से औक्सीटौसिन हारमोन बनता है, जो रिश्तों को ज्यादा मजबूत बनाता है. सैक्सुअल प्लैजर को बढ़ाता है: सैक्स करने से जहां दिनभर की थकान या किसी भी तरह का तनाव तो कम होता ही है, आप का रिश्ता भी ज्यादा स्ट्रौंग बनता है. लेकिन किसी भी किस के बिना आप की सैक्स ड्राइव अधूरी रहती है. सैक्स से पहले किस आप का सैक्सुअल प्लैजर बढ़ाता है. आसान शब्दों में कहें तो सैक्स करने से पहले अपने पार्टनर के साथ एक किस सैशन जरूर करें. ऐसा करना आप के प्लैजर को न सिर्फ बढ़ावा देगा, बल्कि आप के पार्टनर को भी पूरी तरह से संतुष्ट करेगा.

स्पिट स्वैपिंग भगाए बीमारी: चुंबन करते समय जब तक स्पिट स्वैपिंग न हो तब तक किस करना बेमानी सा है. किस या लिपलौक करते समय अपने पार्टनर के साथ बेझिझक हो पूरा मजा लें और स्पिट यानी थूक आने पर पोंछें नहीं, बल्कि उस की स्वैपिंग करें, क्योंकि यह कई संक्रमणों को दूर करता है. सैक्स के दौरान किए जाने वाले किस से इम्यूनिटी भी बढ़ती है.

मिलती हैं जहां की खुशियां: एकदूसरे को बारबार किस करने से पार्टनर की आप के प्रति सैक्स के प्रति इच्छा कितनी है, का भी पता चलता है. ज्यादातर केसेज में अधिकतर महिलाएं सैक्स के प्रति बड़ी रिजर्व रहती हैं. वे पार्टनर क्या सोचेगा सोच कर सैक्स में खुल कर सपोर्ट नहीं कर पातीं. ऐसा करना न सिर्फ आप को सैक्स के प्रति रूखा दिखाएगा, बल्कि आप के पार्टनर को भी जिस्मानी तौर पर संतुष्ट नहीं कराएगा. किस करते वक्त एंडोफिंस नाम का तत्त्व निकलता है जो आप को खुश रखने में मदद करता है. अगर आप टैंशन में हैं या गहन सोचविचार में तो पार्टनर को किस करना आप के लिए दवा का काम करेगा.

दवा का काम करे किसिंग सैशन: हौट किसिंग सैशन के दौरान आप का शरीर एक ऐड्रेनलीन हारमोन रिलीज करता है, जो किसी भी तरह के दर्द को कम करने में मददगार होता है. अब दर्द को कम करने के लिए भी आप यह सैशन कई बार ट्राई कर सकते हैं. अगर आप के सिर में दर्द है तो लिपलौक जरूर ट्राई करें और इस का असर देखें और फिर इस का कोई साइड इफैक्ट भी नहीं होता है.

तनाव भगाए किस: दिन के ढलतेढलते इंसान भी काफी थकाथका सा महसूस करने लगता है, इसलिए सिर्फ अपने काम का दबाव या अपने हारमोनल बदलावों को ब्लेम करना गलत होगा. थके होने पर आप घर जा कर बस अपने पार्टनर के साथ एक किस थेरैपी लीजिए. यकीन मानिए, आप की थकान पलक झपकते छूमंतर हो जाएगी और आप फ्रैश महसूस करेंगे. दरअसल, किसिंग करने से कार्टिसोल नामक हारमोन लैवल कम होता है और आप के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. एंडोक्राइन सिस्टम से दिमाग भी स्वस्थ रहता है.

ऐक्स्ट्रा कैलोरीज करता है कम: अपनी हैल्थ के प्रति सचेत लोग अपनी अति कैलोरी को कम करने के लिए या तो ट्रेडमिल पर रनिंग करते हैं या फिर डाइट पार्ट फौलो करते हैं. अगर आप कभी जिम जाना भूल जाएं या पार्टी का मौका देख डाइट चार्ट को एक दिन के लिए फौलो न कर पाएं तब भी आप अपने पार्टनर के साथ किसिंग सैशन कर के अपनी कैलोरी बर्न कर सकते हैं. जी हां, जितनी कैलोरी आप की जिम सैशन में कम नहीं होगी उतनी आप की किसिंग सैशन में हो जाएगी. इतना ही नहीं, कैलोरी बर्न करने के अलावा किस करने से आप के चेहरे की भी ऐक्सरसाइज होती है. किस आप की स्किन मसल्स को भी टाइट करता है, जिस से आप दिखेंगे जवांजवां.

ऐलर्जी से छुटकारा: किस न सिर्फ तनावग्रस्त लोगों को सहज करता है, बल्कि कई बार ऐलर्जी जैसे खुजली आदि होने को भी दूर करता है.

डैंटिस्ट को भी रखे दूर: किस मुंह, दांतों और मसूड़ों की बीमारी से भी आप को दूर रखता है. मुंह में लार कम बने तो भी किसिंग फायदेमंद हो सकता है

प्रीमेच्योर बेबी बर्थ्स से जुड़े मिथ्स और फैक्टस

वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाले 15मिलियन बच्चों में से 1/5 भारत में जन्म लेते है  और पूरी दुनिया में 5साल से कम उम्र में बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण समय से पहले बच्चों का पैदा होना है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में इन नवजातों की गहन चिकित्सा और देखभाल की काफी जरूरत है,जो हमारे देश में समय पर संभव नहीं होता.

प्रीमेच्योर चाइल्ड बर्थ एंड केयर वीक पर समय से पहले  शिशुओं के जन्म के बारे में नवी मुंबई, कोकिलाबेन, धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल की कंसलटेंट, ऑब्सटेरिक्स और गायनेकोलॉजी डॉक्टर बंदिता सिन्हा कहती है कि आम तौर पर गर्भावस्था का पूरा समय 40 हफ़्तों का होता है, लेकिन कुछ मामलों में अचानक से ऐसी जटिलताएं हो जाती हैं कि 37 हफ़्तों की गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही शिशु का जन्म हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को प्री-टर्म या समय से पहले जन्म कहा है और इसकी तीन उप-श्रेणियां बताई हैं:

  • अत्यधिक अपरिपक्व (28 हफ़्तों से कम)
  • बहुत अपरिपक्व (28 से 32 हफ़्तों के बीच पैदा होने वाले शिशु)
  • मध्यम से देर से अपरिपक्वता (32 से 37 हफ़्तों के बीच पैदा होने वाले शिशु)

पहली बार माता-पिता बन रहे दंपति पर समय से पहले जन्म का प्रभाव

शिशु का समय से पहले जन्म, खासकर अगर शिशु गंभीर रूप से अस्वस्थ हो, तो पूरे परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकता है. इस समस्या के बारे में जानकारी या पूर्व अनुभव न होने की वजह से निओनेटल यूनिट में शिशु के माता-पिता को बड़े संकट से गुज़रने की भावना महसूस होती है. सी-सेक्शन या सिजेरियन सेक्शन के ज़रिए कराए गए समय से पहले जन्म में, माताओं का जन्म के बाद पहले कुछ दिनों तक अपने नवजात शिशु के साथ बहुत कम या कोई संपर्क नहीं होता है. इससे माता-पिता पर तनाव और भी ज़्यादा बिगड़ जाता है. चिंता, डिप्रेशन, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), और कुल स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा रहता है. सिंगल साइट्स या अस्पतालों में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि यह नकारात्मक प्रभाव, खासकर गर्भावस्था पूरी होने के बहुत पहले जन्म के बाद पैदा होने वाले तनाव, लंबे समय तक बने रह सकते है.

समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के बारे में मिथ एंड फैक्स

मिथ

माता-पिता को अक्सर यह लगता है कि प्रसव के पहले की देखभाल ठीक से न की जाने की वजह से उनके शिशु का जन्म समय से पहले हुआ है.

फैक्ट्स

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि समय से पहले होने वाली प्रसूतियों में लगभग आधी प्रसूतियों के कारण अज्ञात रह जाते हैं.करीबन 30 प्रतिशत मामलों में मेमब्रेन्स का समय से पहले टूटना (PPROM) कारण होता है, जबकि 15-20 प्रतिशत मामलों में प्रीक्लेम्पसिया, प्लेसेंटल एब्रप्शन, गर्भाशय के भीतर विकास को प्रतिबंध (IUGR), और इलेक्टिव प्रीटर्म बर्थ आदि कारण होते हैं. 

मिथ

समय से पहले पैदा हुए बच्चों का माता-पिता के साथ जुड़ाव नहीं हो पाता है जो आगे की ज़िन्दगी को प्रभावित करता है.

फैक्ट्स

शिशु के साथ जुड़ाव बनाने के कई तरीकें हैं। एनआईसीयू दिनचर्या में शिशु के साथ जुड़ाव बनाने के नए रास्तें माता-पिता को खोजने चाहिए. कंगारू केयर यानी त्वचा से त्वचा का संपर्क करें, डायपर बदलें, शिशु का टेम्परेचर जांचें और अगर संभव है तो स्तनपान कराएं.

मिथ

दो साल की आयु तक शिशु अपने विकास के पड़ाव पार करेगा. 

फैक्ट्स

भाषा विकास, संतुलन और समन्वय जैसे मोटर कौशल और फाइन मोटर कौशल मसलन पेंसिल पकड़ पाना, पज़ल के टुकड़ें जोड़ना आदि विकसित होने में देरी हो सकती है. करीबन 40 प्रतिशत प्रीमैच्योर शिशुओं में मोटर कौशलों में ज़रा सी कमी देखी जा सकती है और माताओं को इन शिशुओं के साथ व्यवहार में कुछ कठिनाइयां महसूस हो सकती हैं.

गर्भावस्था पूरी होने के पहले पैदा हुए बच्चों की देखभाल कैसे करें

अपने प्रीमैच्योर शिशु के साथ एक ही बिस्तर पर ना सोएं.

सोफे, कुर्सी या बिस्तर पर शिशु को पकड़ें हुए कभी न सोएं, अगर आप थके हुए हैं या आपकी कोई दवा चल रही है तो ऐसा कभी न करें. अगर आप थक गए हैं, तो शिशु को उनके बिस्तर में या मोसेस बास्केट में सुरक्षित रूप से लिटा दें.

गर्भावस्था पूरी होने पर पैदा हुए शिशुओं की अपेक्षा समय से पहले पैदा हुए शिशुओं का अपने शरीर के तापमान पर नियंत्रण कम होता है. अपने शिशु के शरीर को ज़्यादा गर्म या ज़्यादा ठंडा न होने दें. बच्चे के पलंग को सीधी धूप से और हीटर और रेडिएटर से दूर रखें. कमरे का तापमान 16-20 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. 

योनि प्रसूति के फायदे

योनि प्रसूति होने से आप बड़ी सर्जरी या सी-सेक्शन से जुड़े जोखिमों से बच जाते हैं, जैसे कि गंभीर रक्तस्राव, निशान रह जाना, संक्रमण, एनेस्थीसिया के प्रभाव और सर्जरी के बाद का दर्द आदि। योनि प्रसूति के मामलों में जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी स्तनपान शुरू किया जा सकता है।

  • माता को ठीक होने में कम समय लगता है
  • स्तनपान जल्दी शुरू हो जाता है
  • सांस की बिमारियों का खतरा कम रहता है
  • शरीर की रोग प्रतिरोध प्रणाली अच्छे से काम कर पाती है
  • स्तनपान कराने की अधिक प्रवृत्ति अधिक होती है

हालांकि, जब अनिवार्य हो, तब सी-सेक्शन की सलाह दी जाती है.

प्राथमिक सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी के लिए सबसे आम संकेत इस प्रकार हैं:

  • आईवीएफ प्रेगनेंसी
  • एल्डरली प्राइमिग्रेविडा
  • प्रसव पीड़ा
  • भ्रूण की हृदय गति का पता न लगाना, फीटल मालप्रेजेंटेशन
  • एक से ज़्यादा गर्भधारण
  • सस्पेक्टेड मैक्रोसोमिया

कतरा-कतरा जीने दो – भाग 1

वह जनवरी की सर्द सुबह थी जब मैं ने पहली बार पीजी गर्ल्स होस्टल में प्रवेश किया था. वहां का मनोहारी वातावरण देख मन प्रफुल्लित हो गया. होस्टल के मुख्यद्वार के बाहर  एक तरफ  आम का बगीचा, खजूर और जामुन  के पेड़ थे तो दूसरी तरफ बड़ेबड़े कैंपस  वाले प्रोफैसर्स क्वार्टर. बीच में फूलों के खूबसूरत गार्डन के बीच 2 गर्ल्स होस्टल थे. एक तरफ साइंस होस्टल और दूसरी  तरफ आर्ट्स होस्टल. गेट के अंदर पांव रखते ही लाल-लाल गुलाब, गेंदे, सूरजमुखी के फूलों की महक और रंगत  ने मेरा इस तरह स्वागत किया कि पहली बार नए  होस्टल में आने  की मेरी  सारी घबराहट  उड़नछू हो गई.

सुबह के 11बज रहे  थे लेकिन कुहासे  की वजह से ऐसा लग रहा था मानो सूरज की किरणें अभीअभी बादलों की रजाई से निकल कर  अलसाई नजरों से हौलेहौले धरती पर उतर रही हों. ओस की बूंदों से नहाई हरीभरी, नर्म, मखमली दूब पर चलते हुए मैं ने  आर्ट्स होस्टल की तरफ  अपना रुख किया. सामने गार्डन में 2 लड़कियां बैठी चाय पी रही थीं. एक बिलकुल दूधिया गोरीचिट्टी, लंबे वालों वाली बहुत सुंदर सी लड़की और दूसरी हलकी सांवली, छोटेछोटे घुंघराले बालों वाली लंबी, दुबलीपतली व  बहुत आकर्षक सी लड़की.

मैं ने उन दोनों के करीब जा कर पूछा, ‘रागिनी सिंह,  साइकोलौजी  डिपार्टमैंट, फिफ्थ ईयर किस तरफ रहती हैं?’ गोरी वाली लड़की ने इशारा किया, इधर और घुंघराले बालों वाली लड़की ने  कहा, ‘मैं ही हूं. कहो, क्या बात है?’

मैं ने अपना परिचय देते हुए कहा, ‘मैं, अनामिका शर्मा,  इतिहास डिपार्टमैंट से हूं. मैं ने यहां ऐडमिशन लिया है.   जब तक सीनियर्स रूम खाली नहीं कर देतीं, तब तक मुझ से होस्टल वार्डन ने इंतजार करने को कहा था. लेकिन मुझे रोज 40 किलोमीटर दूर से  आ कर क्लास करने में तकलीफ होती थी, इसलिए  मुझे मेरे क्लासमेट और  आप के पड़ोसी संजीव सिंह ने आप के पास भेजा है. उस की बड़ी बहन फाइनल ईयर में हैं, लेकिन वे इस साल  इम्तिहान नहीं दे पाएंगी और होस्टल छोड़ रही हैं. इसलिए रूम न. 101 की चाबी उस ने मुझे दी है और कहा है कि मैं  उस की बहन का जरूरी सामान आप के हवाले कर के इस रूम में  शिफ्ट हो जाऊं.’ मैं ने एक ही सांस में अपनी बात पूरी की.

रागिनी ने चौंक कर कहा, ‘रूम न. 101? अरे वाह भाई  संजीव, मुझे नहीं दिलवाया. होस्टल का सब से शानदार कमरा तुम्हें दिलवा दिया.’ रागिनी का चेहरा थोड़ी देर को बुझ गया लेकिन अगले ही पल वह मेरा सामान पकड़ कर मुझे मेरे कमरे में शिफ्ट करवाने में उत्साह से लग गई.

दरअसल, होस्टल में फिफ्थ ईयर वाले स्टूडैंट्स के लिए  डबलबैड के कमरे नीचे के फ्लोर में थे और  सिक्स ईयर में ऊपर के फ्लोर में सिंगलबैड रूम था. मेरा कमरा ऊपर के फ्लोर में बालकनी के बिलकुल सामने था जहां बैठ कर होस्टल में आनेजाने वाले सभी लोग दिखाई देते थे. साथ ही, होस्टल के गार्डन का नजारा,  फूलों की खुश्बू, तलाब और आम के पेड़ से आती  ठंडी हवा व कोयल की कूक का खूब आनंद  मिलता था. इसलिए अपनेअपने डिपार्टमैंट से आने के बाद  ज्यादातर लड़कियां शाम ढलते ही मेरे कमरे के बाहर बनी विशाल बालकनी में कुरसी डाल कर बैठ जातीं व खूब मजाकमस्ती किया करती थीं. रागिनी और उस की सहेलियों के झुंड का हिस्सा बनने में मुझे देर नहीं लगी.

जल्दी ही रागिनी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई. एक तो संजीव मेरा क्लासमेट  था,  और  दूसरे, रागिनी से उस के घरेलू संबंध थे. इस वजह से हमारा परिचय प्रगाढ़ हो गया था. इस के अतिरिक्त  उसे मेरे रूम के सामने की बालकनी बहुत पसंद थी और  मेरी  चाय पीने की आदत. चाय रागिनी को भी बहुत पसंद थी लेकिन हमारे होस्टल के मैस में चाय मिलने का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए यह तय हुआ कि मेरे रूम में सुबहशाम की चाय बना करेगी और हम दोनों साथ पिया करेंगी. सुबह की चाय हमेशा वह ही बनाया करती थी और शाम की मैं.

दरअसल,  मेरी सुबह देर से उठने की आदत थी. मैं 8-9 बजे तक  सोया करती थी  और इतनी देर में  रागिनी नहाधो कर तैयार हो कर मेरे साथ चाय पीने को चली आया करती. पूरे अधिकार व बड़े प्यार से मेरे कमरे में आ कर मेरे बालों को कभी झकझोर कर, कभी सहला कर मुझे उठाती, और मां की तरह कहती, ‘चलो उठो, सुबह हो गई. जाओ तो जल्दी से ब्रश कर के आओ, तब तक मैं  तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.’

मेरे फ्रैश हो कर आने तक वह बड़ी तरतीब से मेरा बिस्तर, मेरी किताबें सही करती, स्टोव जला कर बढ़िया चाय बनाती और बाहर बालकनी में चेयर निकाल कर मेरे आने का इंतजार करती. मुझे उस के इस अपनत्व और  परवा पर बड़ा आश्चर्य होता. 2 दिनों के परिचय में भला किसी अजनबी का कोई  इस हद तक कैसे ख़याल रख सकता है. मैं ने एकाध बार  उस से कहा- ‘रागिनी, मुझे लगता है जैसे  तुम पिछले जन्म की मेरी मां हो. क्यों करती हो मेरी इतनी परवा?’

रागिनी अपने माथे पर झूलती  घुंघराले बालों की लटों को झटक कर कहती- ‘क्योंकि  तुम  एकदम मेरे भइयू की तरह हो. वैसे ही सिर पर तकिया रख कर सोती हो. मेरी एकएक बात ध्यान से सुनती हो. एकदम  वैसे ही  बात करती हो जैसे मेरा भइयू कहता है.’

‘बउवा, तू तो मेरी मां से भी ज्यादा मां है रे. रोज सुबह से शाम तक मेरा इतना ख़याल तो मेरी मां भी नहीं रखती.’ ‘घर पर भी मैं बहुत सवेरे उठती हूं. अम्माबाऊजी को सुबह का चायनाश्ता दे कर भइयू को उठाना और चाय बना कर पिलाना मेरी आदत है. वह अपना बिस्तर  और किताबें तुम्हारी ही तरह  कभी सही नहीं करता. सब मैं करती हूं.’

मैं ने एक बार पूछा… ‘भइयू तुम्हारा भैया है, रागिनी?  रागिनी ने उदास हो कर कहा- ‘नहीं, मेरा कोई भाई नहीं. अम्मा, बाऊजी और मैं घर के पुराने वाले  हिस्से में रहते हैं. बाहर नए 4 कमरे बाऊजी ने बनवाए थे,  उसी में किराए में भइयू, उस की बहनें गुड्डन, बिट्टन और  आंटीअंकल रहते हैं. वे लोग मेरे बचपन के समय से हमारे  घर में रह रहे हैं और हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं. गुड्डन, बिट्टन मेरी सहेलियां हैं, वे लोग अपने बड़े भाई  आशीष भैया को भइयू कहती हैं, तो मेरा भी वह भइयू बन गया. अम्मा, बाऊजी मुझे बउवा कहते हैं तो भइयू की मैं बउवा बन गई.’

रागिनी की हर बात में भइयू का जिक्र रहता. वह पढ़ाई में बहुत ही होशियार थी. जब भी कोई उस के अच्छे मार्क्स या सुंदर हैंडराइटिंग की बात करता, वह झट से कहती- ‘यह तो भइयू की वजह से है. बचपन से मुझे भइयू ने पढ़ाया है. मेरे नोट्स वही तैयार करता है और मेरी राइटिंग उन की राइटिंग देखदेख कर  ऐसी बनी है.’

Bigg Boss 16 : घर में पहुंचे फहमान खान तो फूट-फूट कर रोई सुंबुल  

हर साल की तरह इस साल भी बिग बॉस16 हिट शो की तरह फैंस को खूब एंटरटेन कर रहा है  एक तरफ कंटेस्टे  की लड़ाईयो को लुभा रही है वही, दूसरी तरफ शो में सुंबुल तौकीर खान, शालीन भनोट और टीना दत्ता का मामला अलग ही स्तर पर चल रहा है। इनकी कैमेस्ट्री लोगों को बेहद पसंद आ रही है। बता दे, कि इन दिनों बिग बॉस के घर एक नया मेहमान आया है जिनका नाम है फहमान खान.

जी हां, घर में फहमान खान की एंट्री हुई है हालांकि यह कहा जा रहा है कि ये वाइल्ड कार्ड एंट्री नहीं है बल्कि वह अपना सीरियल धर्मपत्नी को प्रमोट करने शो पहुंचे है.

 

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बता दें, कि वायरल वीडियो में देखा गया है कि जैसे ही फहमान खान घर में एंट्री लेते है सुंबुल उन्हे देख कर भावुक हो जाती है और फूट-फूट कर रोने लगती है उन्हे गले लगा लेती है. इसके बाद सुंबुल फहमान से कहती है कि “तू तो नहीं आने वाला था” इसी के जवाब फहमान कहते है कि “मुझे लगा की शो में तुझे मेरी ज़रुरत है” फिर सुंबुल फहमान खान को “आई लव यू” कहती है और कहा कि “शो में अब तू आ गया है मुझे अब किसी की भी ज़रुरत नहीं है”

 

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बता दे, कि बिग बॉस 16 के प्रोमो वीडियो में दिखया गया था कि शालीन भनोट. सुंबुल पर भड़कते हुए नज़र आते है इतना ही नहीं. उन्होंने सुंबुल के सामने हिसंक व्यवहार भी किया. इतना ही प्रोमो में ये भी दिखाया गया कि टीना दत्ता भी चीखते हुए कमरे में जाती है और जोर-जोर से कहती है कि मेरे करियर पर सवाल उठाया जा रहा है. दोनो के वर्क फ्रंट की बात करे तो, सुंबुल और फहमान खान शो ईमली में एक साथ नज़र आ चुके है.

बलात्कारियों को सजा दिलाने में डिंपल का साथ देगी Anupama, आएंगे नए ट्विस्ट

सीरियल अनुपमा (Anupama) में नए ट्विस्ट लाने में जहां मेकर्स कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इसी बीच बीते दिनों अनुपमा और अनुज की याद्दाश्त जाने की खबर ने फैंस को परेशान कर दिया था. हालांकि शो में डिंपल और उसके पति निर्मित के ट्रैक ने फैंस को तसल्ली दी. साथ ही अपकमिंग एपिसोड्स को लेकर दिलचस्पी बढ़ा दी है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Serial Update In Hindi)…

डिंपल की मदद करेगी अनुपमा

 

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सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड की बात करें तो पत्नी डिंपल के साथ हुए ब्लात्कार के बाद निर्मित उसका साथ देगा. वहीं उसे पुलिस केस के मामले में ना पड़ने की सलाह देगा. लेकिन अनुपमा और अनुज उसे समझाने की कोशिश करते दिखेंगे. दूसरी तरफ, पति के इस फैसले पर डिंपल अपना पक्ष लेते हुए निर्मित से भी रिश्ते तोड़ देगी, जिसके बाद अनुपमा और अनुज उसका सहारा बनते दिखेंगे. वहीं डिंपल के बलात्कारियों को सजा दिलाने में उसकी मदद करते हुए नजर आएंगे.

डिंपल को बहू बनाएगी अनुपमा!

 

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इसके अलावा खबरों की मानें तो अनुपमा, डिंपल को इंसाफ दिलाने के बाद उसे समर की वाइफ बनाने का फैसला लेगी. दरअसल, कहा जा रहा है कि सीरियल में डिंपल का नया ट्रैक आगे जाकर शाह फैमिली की बहू बनता हुआ दिखाई देगा. वहीं इसी के चलते बा और वनराज, एक बार फिर अनुपमा के खिलाफ खड़े होते हुए नजर आएंगे.

 

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पाखी बना रही है प्लान

 

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सीरियल की बात करें तो हाल ही में अनुपमा-अनुज ट्रिप पर जाते हैं. जहां रास्ते में डिंपल और निर्मित एक कपल मिलता है, जिन पर गुंडे हमला कर देते हैं. हालांकि अनुपमा और अनुज उनकी मदद करते हैं. लेकिन इस दौरान डिंपल रेप का शिकार हो जाती है, जिसकी मदद के चलते अनुपमा उन्हें कपाड़िया हाउस ले आती है. दूसरी तरफ, पाखी, अपने पिता वनराज के इमोशन का फायदा उठाकर शाह हाउस में एंट्री करने और अनुपमा को परेशान करने का प्लान बनाती दिख रही है.

चित्र अधूरा है – भाग 3 : क्या सुमित अपने सपने साकार कर पाया

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हाथों की देखभाल के लिए अपनाएं ये 7 टिप्स

क्या आप भी अपने हाथों पर पूरा-पूरा ध्यान देती हैं, फिर भी वे सुंदर नजर नहीं आते? ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें सही देखभाल की आवश्यकता है. अब चूंकि सर्दी पड़ रही है इसलिए भी तो हाथों का बारबार रूखा होना स्वाभाविक है. ऐसा हाथों में कम औयल ग्लैंड्स होने के कारण होता है. कपड़े और बरतन धोते-धोते हाथों की स्थिति काफी खराब नजर आने लगती है. ऐसे में जरूरत है कि हाथों को नियमित तौर पर ऐक्सफोलिएट और मौइश्चराइज किया जाए. हाथों पर लगाने के लिए बहुत से पैक आप घर पर भी तैयार कर सकती हैं.

1. लाइम सौफ्टनर

1 बड़ा चम्मच नीबू का रस, 1 छोटा चम्मच चीनी और थोड़ा पानी मिला कर पेस्ट बना लें. इस मिक्सचर को हाथों पर 5 मिनट के लिए लगा कर छोड़ दें. फिर हाथों को गरम पानी से साफ कर के सुखा लें.

2. शुगर ऐक्सफोलिएट

वैजिटेबल/सनफ्लावर/बेबी या औलिव औयल के 2 बड़े चम्मच के साथ 3 बड़े चम्मच चीनी मिला कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को अपने हाथों पर 3-4 मिनट तक रगड़ती रहें. फिर गरम पानी से धो कर सुखा लें.

3. हनी एग सौफ्टनर

एक बाउल में थोड़ा सा शहद, अंडे का सफेद हिस्सा, 1 चम्मच ग्लिसरीन और 1 चम्मच बार्ली पाउडर लें. सब को अच्छी तरह मिला कर हाथों पर लगाएं. कुछ मिनट तक हाथों पर लगा रहने के बाद पानी से साफ कर लें.

4. टोमैटो लाइम सौफ्टनर

यदि आप के हाथ बेहद रूखे हैं, तो 1 नीबू और 1 टमाटर का जूस निकाल कर अच्छी तरह मिला लें. फिर 2-3 चम्मच ग्लिसरीन मिलाएं और इस पेस्ट से हाथों का मसाज करें. 4-5 मिनट के बाद गरम पानी से साफ कर लें.

5. नेल सौफ्टनर

औलिव आयल से नाखूनों की मसाज करें. इस के बाद गरम पानी में डुबाएं. इस से रक्तसंचार भी सुचारु रहता है और नाखून भी साफ व स्वस्थ रहते हैं.

6. नरिशिंग क्रीम

1/3 कप ग्लिसरीन और 2/3 कप गुलाबजल को मिला लें. इसे बोतल में भर कर फ्रिज में रख दें. जब भी हाथ रूखे लगें तो इस से हाथों की मसाज कर लें.

7. क्यूटिकल सौफ्टनर

औलिव औयल को गरम कर के क्यूटिकल्स पर लगाएं, लेकिन स्नान के बाद. क्यूटिकल्स पर मसाज करते हुए उंगली की टिप से उन्हें पीछे धकेलें.

मिशन: क्यों मंजिशी से नाखुश थे सब

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स्मार्टफोन के कारण क्या आपकी सेक्स लाइफ हो रही है खराब, पढ़ें खबर

क्या आप अपने यौन जीवन सें असंतुष्ट हैं? इसके पीछे कहीं न कहीं आपका स्मार्टफोन जिम्मेदार हो सकता है. एक ताजा अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है. दुरहाम विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि लोग अपने सेक्स साथी की बजाय फोन गैजेट के प्रति कहीं अधिक लगाव रखने लगे हैं.

यह अध्ययन कंडोम बनाने वाली अग्रणी कंपनी ‘ड्यूरेक्स’ की ओर से करवाया गया, जिसमें ब्रिटेन के 15 दंपति का विस्तृत साक्षात्कार लिया गया. समाचार पत्र ‘डेली मेल’ की रपट के अनुसार, 40 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल करने के लिए वे यौन संबंध बनाने को टालते रहते हैं.

कुछ अन्य प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे यौन संबंध स्थापित करते वक्त जल्दबाजी दिखाते हैं ताकि जल्द से जल्द वे अपने स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया के जरिए आए संदेशों को देख सकें या उनका जवाब दे सकें.

एक तिहाई प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे यौनक्रिया के बीच में ही आ रही कॉल उठा लेते हैं, जिससे यौनक्रिया बाधित होती है. एक चौथाई से अधिक प्रतिभागियों ने कहा कि अपने स्मार्टफोन एप का इस्तेमाल उन्होंने अपनी यौनक्रिया के फिल्मांकन के लिए किया, जबकि 40 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी यौनक्रिया के दौरान स्मार्टफोन के जरिए तस्वीरें खीचीं.

प्रतिभागियों का साक्षात्कार लेने वाले मार्क मैककॉरमैक ने कहा कि बेडरूम में स्मार्टफोन का इस्तेमाल आपके संबंध को खतरे में डाल सकता है. जब प्रतिभागियों ने जानना चाहा कि स्मार्टफोन उनकी यौन संतुष्टि को कैसे बढ़ा सकता है तो जवाब सुनकर गए और जवाब था स्मार्टफोन को ऑफ रखकर.

फैमिली के लिए ऐसे बनें फुली Insured

क्‍या आप पूरी तरह से इंश्‍योर्ड (Insured) हैं? आप में से अधिकांश लोग शायद हां में उत्‍तर दें. आपके न रहने के बाद आपके परिवार की वित्‍तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए जीवन बीमा पॉलिसी है और अस्‍पताल में भर्ती होने पर हेल्थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी मेडिकल खर्च के लिए धन उपलब्‍ध कराएगी. लेकिन क्‍या यह पर्याप्‍त है? विशेषज्ञ इसे पर्याप्‍त नहीं मानते.

दुर्घटना के कारण यदि आपके अपंग होने की वजह से आय का जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई न तो जीवन बीमा पॉलिसी और न ही हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कवर कर पाएंगे. ऐसी स्थिति में पर्सनल एक्‍सीडेंटल कवर ही आपको बचा सकेगा.

पर्सनल एक्‍सीडेंट पॉलिसी स्‍थाई और अस्‍थाई विकलांगता के कारण आय को होने वाले नुकसान की वित्‍तीय भरपाई करती है. अगर दुर्घटना में पॉलिसी होल्डर की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे में बीमा कंपनी उसके नॉमिनी को सम एश्‍योर्ड राशि का भुगतान करती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि घर में आप अकेले कमाने वाले सदस्य हैं तो आपको अपने इंश्‍योरेंस पोर्टफोलियो में पर्सनल एक्‍सीडेंट पॉलिसी को जरूर जोड़ना चाहिए.

पर्सनल एक्‍सीडेंट पॉलिसी न केवल बड़ी दुर्घटनाओं को कवर करती है बल्कि यह छोटी दुर्घटनाओं में भी सहायता प्रदान करती है. यहां तक कि छोटे से एक्‍सीडेंट में होने वाले मामूली फ्रेक्‍चर को भी इसमें शामिल किया जाता है. इसके साथ ही यह पॉलिसी काफी किफायती होती है और इसका प्रीमियम कम होता है.

पर्सनल एक्‍सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी में पर्मानेंट टोटल डिसेबिलिटी, पर्मानेंट पार्शियल डिसेबिलिटी और टेंपरेरी टोटल डिसेबिलिटी शामिल होती है. मृत्यु या पर्मानेंट टोटल डिसेबिलिटी (शरीर के किसी अंग के काम करना बंद कर देना या आंखों की रोशनी खो जाने की स्थिति में) 100 फीसदी सम एश्‍योर्ड राशि का भुगतान किया जाता है. दुर्घटना के दौरान पर्मानेंट पार्शियल डिसेबिलिटी में अंगुली कट जाए तो पॉलिसी में स्पष्ट उल्‍लेखित की गई राशि दी जाती है.

हालांकि आपको ध्यान रखना चाहिए कि पर्सनल एक्सिडेंट पॉलिसी एक तरह से बेनेफिट स्कीम होती है. यह मृत्यु या फिर विकलांगता की स्थिति में ही कवर मुहैया कराती है. अगर किसी बीमारी के कारण मृत्यु या फिर विकलांगता होती है तो यह इंश्योरेंस पॉलिसी किसी भी तरह का कवर नहीं देती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पर्सनल एक्‍सीडेंट कवर खरीदते हुए कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी का चयन करना चाहिए.

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