Karan संग गोवा में मस्ती करती दिखीं Tejasswi, #Tejran फैंस हुए खुश

बिग बॉस 16 भले ही इन दिनों सोशलमीडिया पर छाया हुआ है. लेकिन फैंस के बीच बिग बॉस 15 में बनीं तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा की जोड़ी आज भी फैंस का दिल जीतती है. #Tejran के नाम से पौपुलर ये कपल इन दिनों गोवा में छुट्टियां मना रहा है, जिसकी फोटोज और वीडियोज फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं सोशलमीडिया पर वायरल भी कर रहे हैं.

गोवा में बॉयफ्रेंड संग की खूब मस्ती

 

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टीवी के पौपुलर कपल्स में गिने जाने वाले एक्टर करण कुंद्रा अपनी गर्लफ्रेंड तेजस्वी प्रकाश संग इन दिनों गोवा में छुट्टियां मना रहे हैं, जिसकी फोटोज और वीडियोज एक्ट्रेस अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर रही हैं. वहीं हाल ही में बॉयफ्रेंड करण कुंद्रा के साथ अपने ‘खूबसूरत पलों’ की वीडियो शेयर की है, जिसमें उनकी हंसी नहीं रुक रही है. एक्ट्रेस की इस खुशी पर फैंस जमकर प्यार लुटा रहे हैं और वीडियो को जमकर वायरल कर रहे हैं.

 

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एक्ट्रेस संग बिताते हैं खूबसूरत पल

 

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बिग बॉस 15 खत्म होने के बावजूद भी एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश के साथ वक्त बिताने का एक्टर करण कुंद्रा एक भी मौका नहीं छोड़ते हैं. जहां वह सीरियल नागिन 6 के सेट पर पहुंचते हुए दिखते हैं तो वहीं उनके साथ लौंग ड्राइव पर घूमते हुए नजर आते हैं. इसके अलावा हाल ही में एक्टर ने अपनी 38वां बर्थडे एक्ट्रेस और परिवार संग सेलिब्रेट किया था, जिसे देखकर फैंस काफी खुश हुए थे और उन्होंने जमकर प्यार लुटाया था.

 

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बता दें, तेजस्वी और करण का प्यार रियलिटी टीवी शो बिग बॉस 15 के घर में हुआ था. जहां दोनों की कई लड़ाईयां हुई थीं. लेकिन काफी उतार चढ़ाव के बावजूद दोनों ने अपने प्यार को शो से निकलने के बावजूद कायम रखा था. वहीं शो के बाद दोनों की शादी की खबरें भी सोशलमीडिया पर छाई थीं. हालांकि एक्ट्रेस ने इन खबरों को केवल अफवाह बताया था.

पाखी की मनमानी के बीच बरखा संग नाची अनुपमा! वीडियो वायरल

स्टार प्लस के टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ पाखी के कारण कपाड़िया हाउस में बवाल मचा हुआ है तो वहीं बरखा अपनी नई चालों से अनुपमा को परेशान करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही है. हालांकि एक वायरल वीडियो में अपनी सारी नाराजगी छोड़ अनुपमा और बरखा (Anupama And Barkha Dance Reels) डांस करती दिख रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल वीडियो को झलक…

बरखा संग नाची अनुपमा

 

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सीरियल में भले ही पाखी की बद्तमीजी से अनुपमा और बरखा परेशान दिख रही हैं. लेकिन औफस्क्रीन सीरियल के सेट पर दोनों मस्ती करती दिख रही हैं. दरअसल, सोशलमीडिया पर एक्टिव रहने वाली अनुपमा यानी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) ने हाल ही में एक वीडियो फैंस के शेयर किया है, जिसमें वो अपनी ऑनस्क्रीन जेठानी ‘बरखा’ यानी एक्ट्रेस अशलेषा सावंत  (Barkha Aka Ashlesha Sawant) संग ठुमके लगाती दिख रही हैं. इस ट्रेंडिग वीडियो को अनुपमा फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और जमकर कमेंट में उनकी तारीफ कर रहे हैं.

 

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सेट पर मस्ती करती हैं रुपाली

 

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ऑनस्क्रीन हो या ऑफस्क्रीन एक्ट्रेस रुपाली गांगुली आए दिन अपनी डांस (Rupali Ganguly Dance video) की वीडियो शेयर करती रहती हैं, जिसे फैंस काफी पसंद करते रहते हैं. हालांकि अनुज कपाड़िया यानी एक्टर गौरव खन्ना संग उनकी #reels को फैंस काफी पसंद करते रहते हैं. इसके अलावा एक्ट्रेस कई बार फनी रील्स से फैंस को एंटरटेन करती हुई भी नजर आती हैं, जो सोशलमीडिया पर काफी वायरल होती हैं.

 

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बेटी पाखी के कारण परेशान है अनुपमा

 

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सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो पाखी की बद्तमीजियां एक बार फिर बढ़ने लगी है, जिसके कारण अनुपमा काफी परेशान है. दरअसल, अपकमिंग एपिसोड में शादी के फंक्शन्स के लिए पाखी शाह हाउस जाने से मना कर देगी, जिसके कारण अनुपमा गुस्से में नजर आएगी और पाखी की अक्ल ठिकाने लाते दिखेगी. हालांकि पाखी नहीं सुधरेगी और वह कपाड़िया हाउस पर हक जमाने की बात कहती नजर आएगी.

कांटा- भाग 3 : क्या शिखा की चाल हुई कामयाब?

‘‘देख पागल मत बन… दूसरे की नहीं अपने मन की आवाज सुन कर चल. तू उस जैसी नहीं है. तेरे साथ तेरा बच्चा है, तू साधारण स्तर की पढ़ीलिखी है, बाहरी समाज का तु झे कोई अंदाजा नहीं है. अगर वह खाईखेली लड़की नवीन से तलाक भी ले ले तो भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पर तू क्या करेगी? हम हैं ठीक है पर पापा को जानती है न कितने न्यायप्रिय हैं… तू गलत हुई तो यहां से तु झे तिनके का सहारा भी नहीं मिलने वाला. मैं कुछ भी नहीं कर सकती.’’

मां की बात सुन कर स्तब्ध रह गई रूपा कि मां ने जो कहा स्पष्ट कहा, उचित बात कही. उस के मन में शिखा कांटा बोना चाहे और वह बोने दे तो अपना ही सर्वनाश करेगी.

मां ने नवीन से भी इस विषय पर बात की, यह सोच कर कि भले ही बेटी को सम झाया हो उन्होंने पर उस के मन का कांटा जड़ से अभी नहीं उखड़ा होगा.

नवीन ने उस दिन अचानक फोन कर के रूपा से कहा, ‘‘रूपा, बहुत दिन से तुम ने कुछ खिलाया नहीं. आज रात डिनर करने आऊंगा.’’

रूपा खुश हुई, ‘‘ठीक है भैया… मैं आप की पसंद का खाना बनाऊंगी.’’

शाम को नवीन सुजीत के साथ ही आया.

रूपा ने चाय के साथ पकौड़े बनाए.

नवीन ने चाय पीते हुए पूछा, ‘‘रात को क्या खिला रही हो?’’

‘‘आप की पसंद के हिसाब से पालकपनीर, सूखी गोभी, बूंदी का रायता और लच्छा परांठे… और कुछ चाहें तो…’’

‘‘नहींनहीं, बहुत बढि़या मेनू है. तुम बैठो. हां, सुजीत तू एक काम कर. रबड़ी ले आ.’’

सुजीत रबड़ी लेने चला गया तो नवीन ने कहा, ‘‘रूपा, आराम से बैठ कर बताओ पूरी बात क्या है?’’

रूपा चौंकी, ‘‘क्या भैया?’’

‘‘सुजीत को लग रहा है तुम पहले जैसी सहज नहीं हो… उसे तुम्हारे व्यवहार से कोई शिकायत नहीं है पर उसे लगता है तुम पहले जैसी खुश नहीं हो… लगता है कुछ है तुम्हारे मन में.’’

रूपा चुप रही.

‘‘रूपा तुम चुप रहोगी रही तो तुम्हारी समस्या बढ़ती ही जाएगी. बात क्या है? क्या सुजीत के किसी व्यवहार ने तुम्हें आहत किया है?’’

‘‘नहीं, वे तो कभी तीखी बात करते ही नहीं.’’

‘‘पतिपत्नी का रिश्ता बहुत सहज होते हुए भी बहुत नाजुक होता है. इस में कभीकभी बुद्धि को नजरअंदाज कर के मन की बात काम करने लगती है. तुम्हारे मन में कौन सा कांटा चुभा है मु झे बताओ?’’

रूपा ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है.’’

‘‘रूपा, पतिपत्नी का रिश्ता एकदूसरे के प्रति विश्वास पर टिका होता है. मु झे लगता है सुजीत के प्रति तुम्हारे विश्वास की नींव को धक्का लगा है. पर क्यों? सुजीत ने कुछ कहा है क्या?’’

शिखा ने जो संदेह का कांटा उस के मन में डाला था उस की चुभन की अवहेलना नहीं कर पा रही थी वह. इसी उल झन में उस की मानसिक शांति भंग हो गई थी. अब वह पहले जैसी खिलीखिली नहीं रहती थी और सुजीत से भी अंतरंग नहीं हो पा रही थी. उस की मानसिक उधेड़बुन उस के चेहरे पर मलिनता लाई ही, व्यवहार में भी फर्क आ गया था.

उस ने सिर  झुका कर जवाब दिया, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है भैया.’’

‘‘नहीं रूपा, तुम्हारे मन की उथलपुथल तुम्हारे मुख पर अपनी छाप डाल रही है. ज्यादा परेशान हो तो तलाक ले लो. सुजीत तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार है.’’

रूपा चौंकी उस की आंखें फैल गईं, ‘‘तलाक?’’

‘‘क्यों नहीं? तुम सुजीत के साथ खुश

नहीं हो.’’

‘‘भैया, मैं बहुत खुश हूं. सुजीत के बिना अपना जीवन सोच भी नहीं सकती. दोबारा तलाक की बात न करना,’’ और वह रो पड़ी.

‘‘तो फिर पहले जैसा भरोसा, विश्वास क्यों नहीं कर पा रही हो उस पर? उसे कभीकभी तुम्हारी आंखों में संदेह क्यों दिखाई देता है?’’

‘‘मैं सम झ रही हूं पर…’’

‘‘अपने मन से कांटा नहीं निकाल पा रही हो न? यह कांटा शिखा ने बोया है?’’

वह फिर चौंकी. नवीन को उस ने असहाय नजरों से देखा.

‘‘रूपा, कोईकोई मुरगी अंडा देने योग्य नहीं होती और वह दूसरी मुरगी का अंडा देना भी सहन नहीं कर पाती. कुछ औरतें भी ऐसी ही होती हैं, जो न तो अपने घर को बसा पाती हैं और न ही दूसरे के बसे घरों को सहन कर पाती हैं. उन्हें उन घरों को तोड़ने में ही सुख मिलता है. शिखा उन में से एक है और तुम उस की शिकार हो. उस ने चंद्रा का घर भी तोड़ने के कगार पर ला खड़ा किया था. मुश्किल से संभाला था उसे. अब उस के लिए वहां के दरवाजे बंद हैं तो तुम्हारे घर में घुस गई. तुम ही बताओ पहले कभी आती थी? अब बारबार क्यों आ रही है?’’

सिहर उठी रूपा. यह क्या भयानक भूल हो

गई है उस से… अपने सुखी जीवन में अपने हाथों ही आग लगाने चली थी. सुजीत जैसे पति पर संदेह. वह भी कब तक सहेंगे. उसे पापा, मां तो उसे एकदम सहारा नहीं देंगे…

फिर बोली, ‘‘भैया, शिखा तो बीमार है.’’

‘‘हां मानसिक रोगी तो है ही. पर तुम अपने को और अपने घर को बचाना चाहती हो तो अभी भी समय है संभल जाओ. सुजीत को अपने से उकताने पर मजबूर मत करो. जितना नुकसान हुआ है जल्दी उस की भरपाई कर लो.’’

‘‘वह मैं कर लूंगी पर आप…’’

‘‘मेरा तो दांपत्य जीवन कुछ है ही नहीं. घर भी नौकर के भरोसे चलता है और चलता रहेगा.’’

‘‘भैया, मैं कुछ करूं?’’

नवीन हंसा, ‘‘क्या करोगी? पहले अपना घर ठीक करो.’’

‘‘कर लूंगी पर आप के लिए भी सोचती हूं.’’

‘‘लो, सुजीत रबड़ी ले आया,’’ नवीन बोला.

शांति, प्यार, लगाव जो रूपा के हाथ से निकल रहे थे अब उस ने फिर उन्हें कस कर पकड़ लिया. मन ही मन शपथ ली कि अब सुजीत पर कोई संदेह नहीं करेगी. फिर सब से पहला काम उस ने जो किया वह था सुजीत को सब खुल कर बताना, वह सम झ गई थी कि लुकाछिपी करने से लाभ नहीं… जिस बात को छिपाया जाता है वह मन में कांटा बन कर चुभती है. और कोई भी बात हो एक न एक दिन खुलेगी ही. तब संबंधों में फिर से दरार पड़ेगी. इसलिए अपने मन में जन्मे विकार तक को साफसाफ बता दिया.

सारी बात ध्यान से सुन कर सुजीत हंसा,

‘‘मुझे पता था कि बेमौसम के बादल आकाश में ज्यादा देर नहीं टिकते. हवा का  झोंका आते ही उड़ जाते हैं. इसलिए तुम्हारे बदले व्यवहार से मैं आहत तो हुआ पर विचलित नहीं, क्योंकि मु झे पता था कि एक दिन तुम्हें अपनी भूल पर जरूर पछतावा होगा और तब सब ठीक हो जाएगा.’’

‘‘हमारा तो सब ठीक हो गया, पर नवीन भैया उन का क्या होगा?’’

‘‘शिखा के स्वभाव में परिवर्तन लाना नामुमकिन है.’’

‘‘नहीं, हमें कोशिश करनी चाहिए. नवीन भैया कितने अच्छे हैं.’’

‘‘बिगड़े संबंध को ठीक करने के लिए दोनों के स्वभाव में नमनीयता होनी चाहिए, जो शिखा में एकदम नहीं है.’’

‘‘फिर भी हमें प्रयास तो करना ही चाहिए,’’ रूपा ने कहा तो सुजीत चुप रहे.

फिर 3-4 दिन बाद रूपा ने दोनों को डिनर पर बुलाया. दोनों ही आए पर अलगअलग. रूपा फूंकफूंक कर कदम रख रही थी. शिखा को बोलने का मौका न दे कर स्वयं ही हंसे, बोले जा रही थी. जरा सी भी बात बिगड़ती देखती तो अपने बेटे को आगे कर देती. उस की मासूम बातें सब को मोह लेतीं. पूरा वातावरण खुशनुमा रहा. वैसे भी रूपा की आंखों से सुख, प्यार  झलक रहा था.

शिखा के मन में क्या चल रहा है, पता नहीं पर वह सामान्य थी. 2-4 बार मामूली मजाक भी किया. खाने के बाद सब गरम कौफी के कप ले कर ड्राइंगरूम में जा बैठे. बेटा सो चुका था.

बात सुजीत ने ही शुरू की, ‘‘यार काम, दफ्तर और घर इस से तो जीवन ही नीरस बन गया है. कुछ करना चाहिए.’’

नवीन ने पूछा, ‘‘क्या करेगा?’’

‘‘चल, कहीं घूम आएं. हनीमून में बस शिमला गए थे. फिर कहीं निकले ही नहीं.’’

‘‘हम भी शिमला ही गए थे. पर अब

कहां चलें?’’

रूपा ने कहा, ‘‘यह हम शिखा पर छोड़ते हैं. बोल कहां चलेगी?’’

शिखा ने कौफी का प्याला रखते हुए कहा, ‘‘शिमला तो हो ही आए हैं. गोवा चलते हैं?’’

रूपा उछल पड़ी, ‘‘अरे वाह, देखा मेरी सहेली की पसंद. हम तो सोचते ही रह जाते.’’

‘‘वहां जाने के लिए समय चाहिए, क्योंकि टिकट, ठहरने की जगह बुक करानी पड़ेगी. इस समय सीजन है… आसानी से कुछ भी नहीं मिलेगा और वह भी 2 परिवारों का एकसाथ,’’ नवीन बोला.

सुजीत ने समर्थन किया, ‘‘यह बात एकदम ठीक है. तो फिर?’’

‘‘एक काम करते हैं. मेरे दोस्त का एक फार्महाउस है. ज्यादा दूर नहीं. यहां से

20 किलोमीटर है. वहां आम का बाग, सब्जी की खेती, मुरगी और मछली पालन का काम होता है. बहुत सुंदर घर भी बना है और एकदम यमुना नदी के किनारे है. ऐसा करते हैं वहां पूरा दिन पिकनिक मनाते हैं. सुबह जल्दी निकल कर शाम देर रात लौट आएंगे.’’

रूपा उत्साहित हो उठी, ‘‘ठीक है, मैं ढेर सारा खानेपीने का सामान तैयार कर लेती हूं.’’

‘‘कुछ नहीं करना… वहां का केयरटेकर बढि़या कुक है.’’

शनिवार सुबह ही वे निकल पड़े. आगेपीछे 2 कारें फार्महाउस के

गेट पर रुकीं. चारों ओर हरियाली के बीच एक सुंदर कौटेज थी. पीछे यमुना नदी बह रही थी. बेटा तो गाड़ी से उतरते ही पके लाल टमाटर तोड़ने दौड़ा.

थोड़ी ही देर में गरम चाय आ गई. सुबह की कुनकुनी धूप सेंकते सब चाय पीने लगे. बेटे के लिए गरम दूध आ गया था.

रूपा ने कहा, ‘‘भैया, इतने दिनों तक हमें इतनी सुंदर जगह से वंचित रखा. यह तो अन्याय है.’’

नवीन हंसा, ‘‘मैं ने सोचा था ये सब फूलपौधे, नदी, हरियाली, कुनकुनी धूप हम मोटे दिमाग वालों के लिए हैं बुद्धिमानों के लिए नहीं.’’

‘‘ऐसे खुले वातावरण में सब के साथ आ कर शिखा भी खुश हो गई थी. उस के मन की खुंदक समाप्त हो गई थी. अत: वह हंस कर बोली, ‘‘तू सम झी कुछ? यह व्यंग्य मेरे लिए है.’’

सुजीत बोला, ‘‘तेरा दिमाग भी तो मोटा है… तू कितना आता है यहां?’’

‘‘जब भी मौका मिलता है यहां चला आता हूं. ध्यान से देखेगा तो मेरे लैंडस्केपों में तु झे यहां की  झलक जरूर दिखेगी… देख न यहां काम करने वाले सब मु झे जानते हैं.’’

शिखा चौंकी, ‘‘तो क्या कभीकभी जो देर रात लौटते हो तो क्या यहां आते हो?’’

‘‘हां. यहां आ कर फिर दिल्ली के हंगामे में लौटने को मन नहीं करता. बड़ी शांति है यहां.’’

‘‘तो तेरी कविताएं भी क्या यहीं की

उपज हैं?’’

‘‘सब नहीं, अधिकतर.’’

शिखा की आंखें फैल गईं, ‘‘क्या तुम कविताएं भी लिखते हो? मु झे तो पता ही नहीं था.’’

‘‘3 काव्य संग्रह निकल चुके हैं… एक पर पुरस्कार भी मिला है. तु झे पता इसलिए नहीं है, क्योंकि तू ने कभी जानने की कोशिश ही नहीं की कि हीरा तेरे आंचल से बंधा है. तेरी सौत कोई हाड़मांस की महिला नहीं यह कविता और चित्रकला है. इन के बाल नोच सके तो नोच. भैया ही कवि परिजात हैं, जिस की तू दीवानी है.’’

‘‘कवि परिजात?’’ प्याला छूट गया, उस

के हाथों से और फिर दोनों हाथों से मुंह छिपा कर रो पड़ी.

रूपा कुछ सम झाने जा रही थी मगर सुजीत ने रोक दिया. कान में कहा, ‘‘रोने दो… बहुत दिनों का बो झ है मन पर… अब हलका होने दो. तभी नौर्मल होगी.’’

थोड़ी देर में स्वयं ही शांत हो कर शिखा ने रूपा की तरफ देखा, ‘‘देख ले कितने धोखेबाज हैं.’’

रूपा यह सुन कर हंस पड़ी.

‘‘कितनी भी अकड़ दिखाओ शिखा पर प्यार तुम नवीन को करती ही हो… ये सारी हरकतें तुम्हारी नवीन को खोने के डर से ही थीं… पर उन्हें आप ने आंचल से बांधे रखने का रास्ता तुम ने गलत चुना था,’’ सुजीत बोला.

नवीन बोला, ‘‘छोड़ यार, अब हम

दूसरा हनीमून गोवा चल कर ही मनाते हैं…

जब भी टिकट और होटल में जगह मिलेगी तभी चल देंगे.’’

रूपासुजीत दोनों एकसाथ बोले,‘‘जय हो.’’

कांटा- भाग 2 : क्या शिखा की चाल हुई कामयाब?

यह सुन रूपा अवाक रह गई. बोली, ‘‘मेरे घर में ऐसा क्या है, जो देखने आएगी?’’

‘‘जो उस के घर में नहीं है. देख रूपा,

वह बहुत धूर्त, ईर्ष्यालु है… बिना स्वार्थ के वह एक कदम भी नहीं उठाती… तू उसे ज्यादा गले मत लगाना.’’

‘‘मां वह आती ही कहां है? वर्षों बाद तो मिली है.’’

‘‘यही तो चिंता है. वर्षों बाद अचानक तेरे घर क्यों आई?’’

रूपा हंसी, ‘‘ओह मां, तुम भी कुछ कम शंकालु नहीं हो… अरे, बचपन की सहेली से मिलने को मन किया होगा… क्या बिगाड़ेगी मेरा?’’

‘‘मैं यह नहीं जानती कि वह क्या करेगी पर वह कुछ भी कर सकती है. मु झे लग रहा है वह फिर आएगी… ज्यादा घुलना नहीं, जल्दी विदा कर देना… बातें भी सावधानी से करना.’’

अब रूपा भी घबराई, ‘‘ठीक है मां.’’ मां की आशंका सच हुई. एक दिन फिर आ धमकी शिखा. रूपा थोड़ी शंकित तो हुई पर उस का आना बुरा नहीं लगा. अच्छा लगने का कारण यह था कि सुजीत औफिस के काम से भुवनेश्वर गए थे और बेटा स्कूल… बहुत अकेलापन लग रहा था. उस ने शिखा का स्वागत किया. आज वह कुछ शांत सी लगी.

इधरउधर की बातों के बाद अचानक बोली, ‘‘तेरे पास तो बहुत सारा खाली समय होता है… क्या करती है तब?’’

रूपा हंसी, ‘‘तु झे लगता है खाली समय होता है पर होता है नहीं… बापबेटे दोनों की फरमाइशों के मारे मेरी नाक में दम रहता है.’’

‘‘जब सुजीत बाहर रहता है तब?’’

‘‘हां तब थोड़ा समय मिलता है. जैसे आज वे भुवनेश्वर गए हैं तो काम नहीं है. उस समय मैं किताबें पढ़ती हूं. तु झे तो पता है मु झे पढ़ने का कितना शौक है.’’

‘‘पढ़ तो रात में भी सकती है?’’

रूपा सतर्क हुई, ‘‘क्यों पूछ रही है?’’

‘‘देख रूपा, तू इतनी सुंदर है कि 20-22 से ज्यादा की नहीं लगती… अभिनय, डांस भी आता है. हमारे चैनल में अपने सीरियल बनते हैं. एक नया सीरियल बनना है जिस के लिए नायिका की खोज चल रही है. सुंदर, भोली सी कालेज स्टूडैंट का रोल है. तु झे तो दौड़ कर ले लेंगे. कहे तो बात करूं?’’

रूपा हंसने लगी, ‘‘तू पागल तो नहीं हो

गई है?’’

‘‘क्यों इस में पागल होने की क्या बात है?’’

‘‘कालेज, स्कूल की बात और है सीरियल की बात और. न बाबा न, मु झे घर से ही फुरसत नहीं. फिर मैं टीवी पर काम करूं यह कोई पसंद नहीं करेगा.’’

‘‘अरे पैसों की बरसात होगी. तू क्या सुजीत से डरती है?’’

‘‘उन की छोड़. उन से पहले मांपापा ही डांटेंगे. फिर अब तो बेटा भी बोलने लग गया है. मु झे पैसों का लालच नहीं है. पैसों की कोई कमी नहीं है. सुजीत हैं, पापा हैं.’’

शिखा सम झ गई कि रास्ता बदलना पड़ेगा. अत: फिर सामान्य बातें करतेकरते अचानक बोली, ‘‘तू सुजीत पर बहुत भरोसा करती है न?’’

यह सुन रूपा अवाक रह गई, बोली, ‘‘तेरा दिमाग तो ठीक है? वे मेरे पति हैं. मेरा उन पर भरोसा नहीं होगा तो किस पर करूंगी?’’

‘‘तु झे पूरा भरोसा है कि भुवनेश्वर ही गए हैं काम से?’’

‘‘अरे, मैं ने खुद उन का टूअर प्रोग्राम देखा है. मैं उस होटल को भी जानती हं जिस में वे ठहरते हैं. मैं भी तो कितनी बार साथ में गई हूं. इस बार भी जा रही थी पर बेटे की परीक्षा में हफ्ता भर है, इसलिए नहीं जा पाई. फिर वे अकेले नहीं गए हैं. साथ में पी.ए. और क्लर्क रामबाबू भी हैं. दिन में 2-3 बार फोन भी करते हैं.’’

‘‘तू सच में जरूरत से ज्यादा मूर्ख है. तू मर्दों की जात को नहीं पहचानती. बाहरी जीवन में वे क्या करते हैं, कोई नहीं जानता.’’

रूपा अंदर ही अंदर कांप गई. शिखा की उपस्थिति उसे अखरने लगी थी. मम्मी

की बातें बारबार याद आने लगीं. पर घर से धक्के मार उसे निकाल तो नहीं सकती थी. उस ने सोचा कि इस समय खुद पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है… शिखा की नीयत पर उसे भरोसा नहीं था.

‘‘मैं घर और बच्चे को छोड़ कर सुजीत के पीछे ही पड़ी रहूं तो हो गया काम… फिर उन पर मु झे पूरा विश्वास है. दिन में कई बार फोन करते हैं… उन के साथ जो गए हैं उन्हें भी मैं अच्छी तरह जानती हूं.’’

‘‘बाप रे, तू तो सीता को भी मात देती लगती है.’’

इस बार शिखा हंसहंसते लोटपोट हो गई.

‘‘फोन वे करते हैं. तु झे क्या पता कि भुवनेश्वर से कर रहे हैं या मनाली की खूबसूरत वादियों में किसी और लड़की के साथ घूमने…’’

हिल गई रूपा, ‘‘यह क्या बक रही है? मेरे पति ऐसे नहीं हैं.’’

‘‘सभी मर्द एकजैसे होते हैं.’’

‘‘नवीन भैया भी ऐसे नहीं हैं.’’

‘‘ठीक है, मैं बताती हूं कैसे परखेगी… जब वे टूअर से लौटें तो उन के कपड़े चैक करना… किसी महिला के केश, मेकअप के कोई दाग, फीमेल इत्र की गंध है या नहीं… 2-4 बार अचानक औफिस पहुंच जा.’’

‘‘छि:… छि:… कितनी गंदगी है तेरी सोच. मु झे अब नवीन भैया पर तरस आ रहा है. अपना घर, नवीन भैया का जीवन बिगाड़ चैन नहीं… अब मेरा घर बरबाद करने आई है. तू जा… मेरे सिर में दर्द हो रहा है. मैं सोऊंगी.’’

शिखा का काम हो गया था. अत: वह हंस कर खड़ी हो गई. बोली, ‘‘जी भर कर सो ले. मैं जा रही हूं.’’

शिखा तो हंसती हुई चली गई, पर रूपा खूब रोई. जब बेटा स्कूल से आया तो उसे ले कर सीधे मां के पास चली गई.

मां ने उसे आते देख सम झ गईं कि जरूर कोई बात है. पर उस समय कोई बात नहीं की. बेटे और उसे खाना खाने बैठाया फिर बेटे को सुलाने के बाद वे बेटी के पास बैठीं, ‘‘अब बोल, क्या बात है.’’

रूपा चुप रही.

‘‘क्या आज भी शिखा आई थी?’’

उस ने हां में सिर हिलाया.

‘‘मैं ने तु झे पहले ही सावधान किया था. वह अच्छी लड़की नहीं है. वह जिस थाली में खाती है उसी में छेद करती है. हां, उस की मां सौतेली हैं यह ठीक है पर वे उस की सगी मां से भी अच्छी हैं. जब तक वहां रही एक दिन उसे चैन से नहीं रहने दिया. बाप से  झूठी शिकायतें कर घर को तोड़ने की कोशिश करती रही. पर उस के पापा सम झदार थे. बेटी की आदत को जानते थे और अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास था, इसलिए शिखा अपने मकसद में कामयाब न हुई. अब जब से शादी हुई है तो बेचारे नवीन के जीवन को नरक बना रखा है… उस से भी मन नहीं भरा तो अब तेरे घर को बरबाद करने चली है… तू क्यों बैठाती है उसे?’’

‘‘अब घर आए को कैसे भगाऊं?’’

‘‘एक कप चाय पिला कर विदा कर दिया कर… बैठा कर बात मत किया कर. आज क्या ऐसा कहा जो तू इतनी परेशान है?’’

रूपा ने पूरी बात बताई तो वे शंकित हुईं और गुस्सा भी आया. वे अपनी बेटी को जानती थी कि उसे चालाकी नहीं आती है… उस के घर को तोड़ना बहुत आसान है. फिर बोली, ‘‘क्या तू यही मानती है कि सुजीत भुवनेश्वर नहीं गया है?’’

‘‘नहीं, मु झे उन पर पूरा विश्वास है. रामबाबू भी तो साथ हैं. यह तो शिखा कह रही थी.’’

‘‘फिर भी तू विचलित है, क्योंकि संदेह का कांटा वह तेरे मन में गहरे उतार गई है. देख संदेह एक बीमारी है. अंतर इतना है कि इस का कोई इलाज नहीं है. दूसरी बीमारियों की दवा है, उन का इलाज किया जा सकता है पर संदेह का नहीं. शिखा ने यह बीमारी तु झे लगाई है. अब अगर तु झ से सुजीत को लगे और वह तु झ पर शक करने लगे तब क्या करेगी?’’

कांप गई रूपा, ‘‘मु झ पर?’’

‘‘क्यों नहीं? उस के पीछे तू क्या करती है, उसे क्या पता. हफ्ताहफ्ता बाहर रहता है… तब तू एकदम आजाद होती है. जब तू उस पर शक करेगी तो वह भला क्यों नहीं कर सकता?’’

रूपा को काटो तो खून नहीं.

कांटा- भाग 1 : क्या शिखा की चाल हुई कामयाब?

रूपापत्रिका ले कर बैठी ही थी कि तभी कालबैल की घंटी बजी. दरवाजा खोला तो सामने उस की बचपन की सहेली शिखा खड़ी थी. शिखा उस की स्कूल से ले कर कालेज तक की सहेली थी. अब सुजीत के सब से घनिष्ठ मित्र नवीन की पत्नी थी और एक टीवी चैनल में काम करती थी.

रूपा के मन में कुछ देर पहले तक शांति थी. अब उस की जगह खीज ने ले ली थी. फिर भी उसे दरवाजा खोल हंस कर स्वागत करना पड़ा, ‘‘अरे तू? कैसे याद आई? आ जल्दी से अंदर आ.’’

शिखा ने अंदर आ कर पैनी नजरों से पूरे ड्राइंगरूम को देखा. रूपा ने ड्राइंगरूम को ही नहीं, पूरे घर को सुंदर ढंग से सजा रखा था. खुद भी खूब सजीधजी थी. फिर शिखा सोफे पर बैठते हुए बोली, ‘‘इधर एक काम से आई थी… सोचा तुम से मिलती चलूं… कैसी है तू?’’

‘‘मैं ठीक हूं, तू अपनी सुना?’’

सामने स्टैंड पर रूपा के बेटे का फ्र्रेम में लगा फोटो रखा था. उसे देखते ही शिखा ने कहा, ‘‘तेरा बेटा तो बड़ा हो गया.’’

‘‘हां, मगर बहुत शैतान है. सारा दिन परेशान किए रहता है.’’

शिखा ने देखा कि यह कहते हुए रूपा के उजले मुख पर गर्व छलक आया है.

‘‘घर तो बहुत अच्छी तरह सजा रखा है… लगता है बहुत सुघड़ गृहिणी बन गई है.’’

‘‘क्या करूं, काम कुछ है नहीं तो घर सजाना ही सही.’’

‘‘अब तो बेटा बड़ा हो गया है. नौकरी कर सकती हो.’’

‘‘मामूली ग्रैजुएशन डिग्री है मेरी. मु झे कौन नौकरी देगा? फिर सब से बड़ी यह कि इन को मेरा नौकरी करना पसंद नहीं.’’

‘‘तू सुजीत से डरती है?’’

‘‘इस में डरने की क्या बात है? पतिपत्नी को एकदूसरे की पसंदनापसंद का खयाल तो रखना ही पड़ता है.’’

शिखा हंसी, ‘‘अगर दोनों के विचारों में जमीनआसमान का अंतर हो तो?

यह सुन कर रूपा  झुं झला गई तो वह शिखा से बोली, ‘‘अच्छा तू यह बता कि छोटा नवीन कब ला रही है?’’

शिखा ने कंधे  झटकते हुए कहा, ‘‘मैं तेरी तरह घर में आराम का

जीवन नहीं काट रही. टीवी चैनल का काम आसान नहीं. भरपूर पैसा देते हैं तो दम भी निकाल लेते हैं.’’

शिखा की यह बात रूपा को अच्छी नहीं लगी. फिर भी चुप रही, क्योंकि शिखा की बातों में ऐसी ही नीरसता होती थी. रूपा की शादी मात्र 20 वर्ष की आयु में हो गई थी. लड़का उस के पापा का सब से प्रिय स्टूडैंट था और उन के अधीन ही पी.एचडी. करते ही एक मल्टीनैशनल कंपनी में ऐग्जीक्यूटिव लग गया था. मोटी तनख्वाह के साथसाथ दूसरी पूरी सुविधाएं भी और देशविदेश के दौरे भी.

लड़के के स्वभाव और परिवार की अच्छी तरह जांच कर के ही पापा ने उसे अपनी इकलौती बेटी के लिए चुना था. हां, मां को थोड़ी आपत्ति थी लेकिन सम झने पर वे मान गई थीं. पापा मशहूर अर्थशास्त्री थे. देशविदेश में नाम था.

रूपा अपने वैवाहिक जीवन से बेहद खुश थी. होती भी क्यों नहीं, इतना हैंडसम और संपन्न पति मिला था. और विवाह के कुछ अरसा बाद ही उस की गोद में एक प्यारा सा बेटा भी आ गया था. शादी को 8 वर्ष हो गए थे. कभी कोई शिकायत नहीं रही. वह भी तो बेहद सुंदर थी. उस पर कई सहपाठी मरते थे, पर उस का पहला प्यार पति सुजीत ही थे.

बेटी को सुखी देख कर उस के मातापिता भी बहुत खुश थे.

बात बदलते हुए रूपा ने कहा, ‘‘छोड़ इन बातों को… इतने दिनों बाद मिली है… चल सहेलियों की बातें करती हैं.’’

शिखा थोड़ी सहज हुई. बोली, ‘‘तू भी तो कभी मेरी खबर लेने नहीं आती.’’

‘‘देख  झगड़े की बात नहीं… सचाई बता रही हूं… कितनी बार हम लोगों ने तु झे और नवीन भैया को बुलाया. भैया तो एकाध बार आए भी पर तू नहीं… फिर तू ने तो कभी हमें बुलाया ही नहीं.. अच्छा यह सब छोड़. बोल क्या लेगी चाय या ठंडा? गरम सूप भी है.’’

‘‘सूप ही ला… घर का बना सूप बहुत दिनों से नहीं पीया.’’

थोड़ी ही देर में रूपा 2 कप गरम सूप ले आई. फिर 1 शिखा को पकड़ा और दूसरा स्वयं पकड़ कर शिखा के सामने बैठ गई. बोली, ‘‘बता कैसी चल रही है तेरी गृहस्थी?’’

जब रूपा सूप लेने गई थी तब शिखा ने घर के चारों ओर नजर डाली थी. वह सम झ गई थी कि रूपा बहुत सुखी और संतुष्ट जीवन जी रही है. उस का स्वभाव ईर्ष्यालु था ही. अत: सहेली का सुख उसे अच्छा नहीं लगा. वह रूपा का दमकता नहीं मलिन व दुखी चेहरा देखना चाहती थी.

शिखा यह भी सम झ गई थी कि उस के सुख की जड़ बहुत मजबूत है. सहज उखाड़ना संभव नहीं. आज तक वह उसे हर बात में पछाड़ती आई है. पढ़ाई, लेखन प्रतियोगिता, खेल, अभिनय, नृत्य व संगीत सब में वह आगे रहती आई है. रूपा है तो साधारण स्तर की लड़की पर कालेज का श्रेष्ठ हीरा लड़का उस के आंचल में आ गया था. फिर समय पर वह मां भी बन गई. पति प्रेम, संतान स्नेह से भरी है वह. ऊपर से मातापिता का भरपूर प्यार, संरक्षण भी है उस के पास. संपन्नता अलग से.

यह सब सोच शिखा बेचैन हो उठी कि जीवन की हर बाजी उस से जीत कर यह अंतिम बाजी उस से हार जाएगी… पर करे भी तो क्या? कैसे उस की जीत को हार में बदले? कुछ तो करना ही पड़ेगा… पर क्या करे? सोचना होगा, हां कोई न कोई रास्ता तो निकालना ही होगा. रूपा में बुद्धि कम है. उसे बहकाना आसान है, तो कोई रास्ता निकालना ही पड़ेगा… जरूर कुछ सोचेगी वह.

मां से फोन पर बातें करते हुए रूपा ने शिखा के अचानक आने की बात कही तो वे शंकित

हो उठीं, ‘‘बहुत दिनों से उसे देखा नहीं… अचानक तेरे घर कैसे आ गई?’’

रूपा बेटे को दूध पिलाते हुए सहज भाव से बोली, ‘‘नवीन भैया तो आते रहते हैं… वही नहीं आती थी… उन से दूर की रिश्तेदारी भी है. सुजीत के भाई लगते हैं और दोस्त तो हैं ही. पर आज बता रही थी कि पास ही चैनल के किसी काम से आई थी तो…’’

‘‘मु झे उस पर जरा भी विश्वास नहीं. मु झे तो लगता है तेरा घर देखने आई थी,’’ मां रूपा की बात बीच ही में काटते हुए बोली.

मैं जौब करना चाहती हूं, लेकिन परिवार नहीं मान रहा?

सवाल-

मैं 26 वर्षीय युवती हूं. विवाह को 4 वर्ष हो चुके हैं. एक 3 वर्ष का बेटा है. घर में सासससुर और देवर है. हमारा अपना घर है. पति का अच्छा पैतृक व्यवसाय है, अर्थात आर्थिक रूप से काफी संपन्न हैं. मैं नौकरी करना चाहती हूं, परिवार वाले यही दलील देते हैं. विवाहपूर्व मैं नौकरी करती थी. इन लोगों के कहने पर ही मैं ने नौकरी छोड़ी थी. उसी कंपनी से मुझे फिर औफर आया है पर कोई नहीं मान रहा. मैं सारा दिन चूल्हेचौके में, जहां कोई खास काम मेरे करने लायक नहीं है, नहीं बिताना चाहती.

जवाब-

यदि पति और परिवार वाले आप के नौकरी करने के हक में नहीं हैं तो आप को इस की जिद नहीं करनी चाहिए. घर के कामकाज के साथसाथ आप पति के काम में मदद कर सकती हैं, बच्चे की देखभाल भलीभांति कर सकती हैं और अपनी कोई रुचि विकसित कर सकती हैं, किसी समाजसेवी संस्था में अपनी सेवाएं दे सकती हैं. इन के अलावा और भी कई काम हैं जिन्हें आप अपनी योग्यता और सुविधा के अनुसार घर पर रह कर कर सकती हैं.

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जून का महीना था. सुबह के साढ़े 8 ही बजे थे, परंतु धूप शरीर को चुभने लगी थी. दिल्ली महानगर की सड़कों पर भीड़ का सिलसिला जैसे उमड़ता ही चला आ रहा था. बसें, मोटरें, तिपहिए, स्कूटर सब एकदूसरे के पीछे भागे चले जा रहे थे. आंखों पर काला चश्मा चढ़ाए वान्या तेज कदमों से चली आ रही थी. उसे घर से निकलने में देर हो गई थी. वह मन ही मन आशंकित थी कि कहीं उस की बस न निकल जाए. ‘अब तो मुझे यह बस किसी भी तरह नहीं मिल सकती,’ अपनी आंखों के सामने से गुजरती हुई बस को देख कर वान्या ने एक लंबी सांस खींची. अचानक लाल बत्ती जल उठी और वान्या की बस सड़क की क्रौसिंग पर जा कर रुक गई.

पूरी कहानी पढ़ने के लिए- चक्रव्यूह भेदन : वान्या क्यों सोचती थी कि उसकी नौकरी से घर में बरकत थी

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

संपेरन: क्या था विधवा शासिका यशोवती का वार

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4 Tips: ऐसे सिखाएं बच्चों को सेविंग करना

मोबाइल, इंटरनेट व शौपिंग क्रेज से बच्चों में खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. बच्चों की खर्चीली आदतों को देखते हुए हाल ही में कुछ बैंकों के ब्रांच मैनेजरों ने एक गोष्ठी का आयोजन किया. यहां बैंकर्स ने ‘बच्चों को सेविंग के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए?’ जैसे विचारों से लोगों को अवगत कराया तथा अपनी कई स्कीमें समझाईं. कई बैंक तो बच्चों के लिए डिफरेंट सेविंग स्कीम्स भी ला रहे हैं. बैंक अब बच्चों के लिए एटीएम कार्ड भी जारी कर रहे हैं. आज मातापिता के लिए बच्चों को पाकेटमनी देना तो स्टेटस सिंबल बन चुका है. वे यह नहीं समझते कि जानेअनजाने में वे अपने बच्चों के अंदर एक ऐसी आदत को जन्म दे रहे हैं, जो भविष्य में उन्हीं के लिए नुकसानदायक साबित होगी.

आज टीनएजर्स स्कूल की छुट्टी के बाद पान की दुकान पर सिगरेट, गुटखा इत्यादि खरीदते आसानी से दिख जाते हैं. कहींकहीं ये बच्चे शराब की दुकान पर बीयर खरीदते दिख जाते हैं. हो सकता है उस समय इन की माताएं किटी पार्टी और पिता व्यवसाय में व्यस्त हों. जेब में पैसा जरूरत को जन्म देता है, इसलिए अगर बच्चे को पैसे देना बहुत जरूरी है तो उस का उपयोग सिखाना उस से भी ज्यादा जरूरी है.

1. जरूरत पड़ने पर ही दें पैसा

अधिक पाकेटमनी देने से बच्चे अनावश्यक खर्च करते हैं. इसलिए बच्चों को जरूरत के मुताबिक ही पैसे देने चाहिए. आप बच्चों को उत्साहित करें कि वे पैसा बचाएं. यदि आप अपनी बेटी की पाकेटमनी में से कुछ पैसा उस के अकाउंट में जमा करा दें तो वह पैसा उसी के किसी काम आएगा.

2. मोबाइल और शौपिंग पर खर्च

खर्चीली लाइफस्टाइल के चलते बच्चों की पाकेटमनी का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है. छात्रा जेसिका का कहना है कि उस की पाकेटमनी का अधिकांश हिस्सा मोबाइल और शौपिंग पर खर्च होता है. पैसा बचने पर वह मम्मी के पास जमा करा देती है. छात्रा चारु का कहना है कि उस ने पेरेंट्स के साथ ज्वाइंट अकाउंट खुलवा रखा है. अपनी जरूरत पर खर्च करने के बाद बचने वाले पैसों को उस में जमा करा देती है. विनीत गोयल ने बताया कि अधिकांश खर्च क्रिकेट या दूसरे खेल के सामान खरीदने पर ही होता है. मनीष भारद्वाज का कहना है कि वह गेम्स खेलने और दोस्तों के साथ खानेपीने पर अपना पैसा खर्च करता है.

3. बचत है जरूरी

बच्चों के लिए पाकेटमनी को जरूरी मानने वाले मातापिता का कहना है कि अब बच्चे मोबाइल, गेम्स और फास्ट फूड पर खूब खर्च करते हैं. अत्यधिक खर्च करने से बच्चों की आदतें बिगड़ रही हैं. इसलिए बच्चों में बचत की आदत डालनी चाहिए.

4. जीरो बैलेंस पर अकाउंट

भारतीय स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर डी.के. तनेजा का कहना है कि 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को सेविंग के लिए प्रमोट करने के लिए एसबीआई ने जीरो बैलेंस पर अकाउंट खोलने की योजना बनाई है. बच्चे का अकाउंट और एटीएम कार्ड भी जीरो बैलेंस पर देते हैं. सहकार मार्ग स्थित राजस्थान स्टेट कोपरेटिव बैंक के ब्रांच मैनेजर सुनील दत्त आर्य के अनुसार, इस तरह के अकाउंट खुलवाने में अब मातापिता अधिक रुचि ले रहे हैं.

क्यों कठपुतली बन रही हैं महिलाएं

लगता है कि इंग्लैंड के बुरे दिन बुरी तरह आ गए है. लिज इस कंजर्वेटिव पार्टी का चुनाव बड़ी शिद्दोशहत से जीता था, केवल कुछ सप्ताहों में रिजाइन करने को मजबूर हो गई क्योंकि उस ने ब्रिटेन की ब्रैकिएट के बाद फसी दलदल में से निकालने के जो भी कदम उठाए वे आलू उबालने के लिए 5 पेज की रैसिपी की तरह के थे. उस से एक बहुत ही सीधासादा काम नहीं हुआ और उस ने नाहक महिला नेताओं के अगले कई सालों के लिए दरबाजे बंद कर दिए हैं.

इटली की जिर्योरियो मेलोनी, अमेरिका की हेनरी क्लिंटन और कमला हैरिस, भारत की मायावती, सुषमा स्वराज, प्रतिभा पाटिल, म्यांमार की आंग सान सू की तेजी से उभरी पर फिर गीले बारूद की तरह फुस्स हो गई. इंग्लैंड की मार्गरेट थैचर को आयरन लेडी कहा जाता था पर उन्हें भी बड़ी बेमुख्वती से निकाला गया. पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो बड़ी उम्मीदों से प्रधानमंत्री बनी पर थोड़े दिनों में अपनी चमक को खो बैठी थी. और हत्या नहीं हुई होती तो चुनावों में हार ही जातीं.

लिज ट्रस का कुछ ही दिनों में रिजाइन करना साबित करता हैै कि सत्ता के कैरीडोरों को संभालना किचन शैल्फ से कहीं ज्यादा उलझा हुआ है. सदियों से औरतों को इस तरह थोड़े से काम दिए गए हैं कि वे अंदर तक उतनी मजबूत नहीं बन पातीं जो एक शासक को होना चाहिए.

इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, जर्मनी की एंजेला मार्केल, न्यूजीलैंड जेङ्क्षसडा आर्डन, बांग्लादेश की शेख हसीना कुछ ऐसी हैं जिन्होंने अपनी जमीन बनाई पर इन में से कई को पद विरासत में मिला, अपनेआप उन्होंने जमीन से लड़ कर नहीं पाया.

ब्रिटेन आज आर्थिक संवाद में तो है ही, अब पौलिटिक उलझन में भी फंसा रहेगा क्योंकि जो भी प्रधानमंत्री बनेगा उसे अगले साल चुनाव लडऩे पड़ेंगे और इतने से दिनों में वह अपना काम कर पाएगा, उस का भरोसा नहीं है. अब ब्रिटेन के पौसीबल प्राइम मिनिस्टर पद के कैंडीडैटों में काफी सालों तक औरतों का नाम नहीं होगा, यह पक्का है.

दूसरे देशों में भी लिज इस का इस तरह की इंसल्ट के बाद पद छोडऩे का असर पड़ेगा और मीडिया नेताओं के रास्ते मुश्किल हो जाएंगे. जहां भी महिलाओं को चुना जाएगा अपने पिता, पति या रिश्तेदारों की वजह से या फिर एक कठपुतली की तरह. दुनिया में जो थोड़ेबहुत देशों में औरतें राजनीति में दबदबा बनाए रख रही हैं, उन में ज्यादातर सरोगैंट डाटर इनला या मदर इनला की तरह हैं जिन का रौब उन के चिकचिक करते  और हर काम में कमी निकालने और कोई एक स्ट्रीम व्यू रखने पर है. लिज ट्रस ने भी अपनी इकोनोमिक पौलिसी को एकदम एक्स्ट्रीय बिना सोचेसमझे बनाया था जो उन्हें ले डूबी.

Winter Special: सर्दियों में ऐसे करें पैरों की देखभाल

पैरों की सुंदरता के लिए जरूरी है कि चेहरे व हाथों की तरह पैरों पर भी विशेष ध्यान दिया जाए. पैरों की त्वचा मौसम से काफी हद तक प्रभावित होती है. इसलिए सर्दी के मौसम में हमारे पैरों को भी कुछ खास देखभाल की जरूरत होती है. स्नान से पहले पैरों पर तेल लगा कर त्वचा की मालिश करने से त्वचा मुलायम होती है. इस के लिए तिल का तेल या वेजीटेबल आयल इस्तेमाल किया जा सकता है. नहाने के तुरंत बाद त्वचा पर बौडी लोशन या क्रीम लगाने से त्वचा को नमी मिलती है. आयुर्वेद के अनुसार सर्दी के मौसम में मालिश के लिए सरसों का तेल अच्छा होता है लेकिन तिल का तेल पूरे साल इस्तेमाल किया जा सकता है. इस्तेमाल करने से पहले तेल को हलका गरम (कुनकुना) कर लें. ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन प्री बाथ ट्रीटमैंट के रूप में लैमन टरमरिक क्रीम लगाने की सलाह देती हैं. यह क्रीम केवल त्वचा को मुलायम ही नहीं बनाती बल्कि इस के नियमित प्रयोग से त्वचा का रंग भी साफ होने लगता है. यह पानी में घुले क्लोरीन व साबुन के दुष्प्रभाव से त्वचा को शुष्क होने से बचाती है. हलदी में ऐंटीसैप्टिक होने का गुण भी है, जिस से यह इन्फैक्शन से भी बचाव करती है.

अगर पारंपरिक घरेलू प्री बाथ ट्रीटमैंट चाहें, तो बेसन के साथ थोड़ा सा दूध या दही और चुटकी भर हलदी मिला कर पेस्ट तैयार किया जा सकता है. इस पेस्ट को नहाने से पहले पैरों पर 20 मिनट तक लगा रहने दें. 20 मिनट के बाद पैरों पर पानी डाल कर इसे रगड़ते हुए छुड़ा लें. यह इतनी अच्छी तरह पैरों की सफाई करता है कि आप को साबुन लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.

एडि़यों में दरारें

पैरों की शुष्क त्वचा के लिए 1 छोटा चम्मच शुद्ध ग्लिसरीन 50 मि.ली. गुलाबजल में डालें. इसे पैरों पर आधा घंटा लगाए रखने के बाद साफ पानी से धो कर पैर साफ कर लें. सर्दी में पैरों की एडि़यां सख्त होने या फटने की समस्या आम है. यह ठंडा और शुष्क मौसम सिर्फ त्वचा से नमी खत्म करने का ही कारण नहीं बनता, बल्कि यह रक्तसंचार में भी बाधा डालता है. परिणामस्वरूप पैरों की त्वचा खराब होती जाती है. शरीर के दूसरे हिस्सों के बजाय एडि़यों की त्वचा ज्यादा सख्त होती है. मोइश्चराइजर की कमी के कारण जीवित कोशिकाएं मृत कोशिकाओं में बदल जाती हैं जिस से डैड स्किन की परत बनती जाती है. यदि मोइश्चराइजर की कमी को दूर न किया जाए, तो एडि़यों में दरारें पड़ने लगती हैं और ये धीरेधीरे गहरी होने पर दर्द का कारण बन जाती हैं. एडि़यों की क्रीम द्वारा मालिश कर व ठंडी और शुष्क हवा से सुरक्षा कर पैरों की नियमित रूप से देखभाल कर के एडि़यों को फटने से रोका जा सकता है.

नियमित सफाई

रात को सोने से पहले हलके गरम (कुनकुने) पानी में थोड़ा नमक व शैंपू डाल कर पैरों को 20 मिनट तक डुबोए रखें. कुनकुना पानी एडि़यों की मृत त्वचा को मुलायम बनाता है. अब प्यूमिस स्टोन या हील स्क्रबर से एडि़यों को अच्छी तरह रगड़ें. मैटल स्क्रबर का इस्तेमाल न करें. पैरों को धोने के बाद क्रीम से त्वचा की मालिश करें. अब एडि़यों पर काफी मात्रा में क्रीम लगाएं. फिर एडि़यों पर साफ कौटन का कपड़ा, रुई या पट्टी बांधें. फिर सूती जुराबें पहन कर सो जाएं. इस से क्रीम एडि़यों पर लगी रहेगी व बिस्तर पर नहीं लगेगी. इस तरह सारी रात एडि़यों पर लगी हुई क्रीम एडि़यों की त्वचा को मुलायम बनाती है व मोइश्चराइजर की कमी भी पूरी करती है. इसे 1 सप्ताह तक दोहराएं. इस के अलावा बाजार में उपलब्ध फुट क्रीम लगा कर भी एडि़यों को किसी भी तरह के इन्फैक्शन से बचाया जा सकता है. यदि एडि़यों में दर्द हो या खून आता हो, तो डाक्टर से परामर्श करें.

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