सवाल-
मैं 34 वर्षीय महिला हूं. 7 सालों से बच्चेदानी में बारबार इन्फैक्शन होने से परेशान हूं. दवा लेने पर कुछ समय तक आराम रहता है, पर कुछ दिनों बाद समस्या फिर शुरू हो जाती है. कृपया बताएं क्या करूं?
जवाब-
अच्छा होता आप हमें अपनी समस्या के बारे में अधिक खुल कर लिखतीं. पहली जरूरत यह है कि यह ठीक से जानाबूझा जाए कि यह ऐसा कौन सा इन्फैक्शन है, जो बारबार आप को परेशान कर रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि आप अपने पर्सनल हाइजीन के बारे में लापरवाही बरत रही हों या फिर ऐसे किसी इन्फैक्शन से आप के पति भी पीडि़त हों, इसलिए उन की दवा न होने से यह इन्फैक्शन बारबार उन से आप में लौट आता हो?
अच्छा होगा कि आप अपनी गाइनोकोलौजिस्ट से इस विषय पर खुल कर बात करें और अपने बचाव के लिए उपयुक्त कदम उठाएं. यदि पति को भी इलाज की जरूरत हो तो उन्हें भी दवा लेने के लिए प्रेरित करें. इस प्रकार बारबार इन्फैक्शन होना ठीक नहीं. लापरवाही बरतने से स्थिति कभी अचानक ज्यादा भी बिगड़ सकती है.
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गर्भाशय का कैंसर भारत में तेजी से पांव पसार रहा है. दुनिया में इस मामले में भारत का पहला नंबर है. औरतों के इसे ले कर लापरवाही बरतने की वजह से यह तेजी से फैल रहा है. दक्षिणपूर्व एशिया, भारत और इंडोनेशिशा में कुल कैंसर मरीजों का एकतिहाई हिस्सा गर्भाशय के कैंसर से पीडि़त है. 30 से 45 साल की उम्र की औरतों में इस कैंसर का ज्यादा खतरा होता है, इसलिए इस आयु की औरतों को लापरवाही छोड़ कर सचेत होने की जरूरत है.
महिलाओं में बढ़ते गर्भाशय कैंसर के बारे में दिल्ली के एम्स के डाक्टर नीरज भटला ने पिछले दिनों पटना में महिला डाक्टरों के सम्मेलन में साफतौर पर कहा कि कैंसर को पूरी तरह डैवलप होने में 10 साल का समय लगता है. अगर पेशाब में इन्फैक्शन हो या पेशाब के साथ खून आए तो उसे नजरअंदाज न करें. अगर औरतें हर 2-3 साल पर नियमित जांच कराती रहें तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. गर्भाशय के कैंसर से बचाव के लिए हर 3 साल पर पैपस्मियर टैस्ट और स्तन कैंसर से बचाव के लिए हर 1 साल पर मैगोग्राफी करानी चाहिए. शुरुआती समय में इस का पता चलने पर आसानी से इलाज हो जाता है.
जानें क्यों होता है गर्भाशय कैंसर
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