सवाल-
मेरे पति की उम्र 48 साल है. उन्हें शुगर है. कुछ दिनों से उन के सामने के दांत हिलने लगे हैं. इस कारण उन्हें खानेपीने में काफी परेशानी हो रही है. कृपया कोई समाधान बताएं ताकि वे इस समस्या से छुटकारा पा सकें?
जवाब-
डायबिटीज होने पर शुगर का कंट्रोल बिगड़ने से मसूढ़ों के स्वास्थ्य पर उलटा असर पड़ता है. मसूढ़ों में इन्फैक्शन हो जाने से सूजन हो जाती है और दांत हिलने लगते हैं. मसूढ़ों का यह विकार पायरिया कहलाता है. इस स्थिति में पहली जरूरत शुगर पर कंट्रोल करने की है. अच्छा होगा कि इस के लिए आप के पति अपने डायबिटोलौजिस्ट से मिलें. खानपान में संयम बरतने, नियमित शारीरिक कसरत करने और डाक्टरी सलाह पर समय से दवा लेने से ब्लड शुगर पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं. यह संभव है कि उन की ब्लड शुगर बहुत बढ़ी हुई हो और स्थिति को भांपते हुए डायबिटोलौजिस्ट उन्हें इंसुलिन लेने की सलाह दें. इस सूरत में आप के पति का इंसुलिन से कतराना ठीक नहीं होगा. यकीन मानिए जब तक उन की ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होगी तब तक पायरिया कंट्रोल में नहीं आने वाला. मगर ब्लड शुगर के साथसाथ उन्हें मसूढ़ों की तंदुरुस्ती पर भी ध्यान देने की सख्त जरूरत है. मसूढ़ों और दांतों की सुबह नाश्ते के बाद और रात में सोने से पहले सौफ्ट टूथब्रश से सफाई व हर भोजन करने के बाद ऐंटीसैप्टिक माउथवाश से कुल्ला करने, डैंटल हाईजीनिस्ट से मसूढ़ों और दांतों की सफाई और डैंटल सर्जन की देखरेख में ली गई दवा पायरिया से छुटकारा दिलाने में सहायक है.
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बिना चीनी वाला भोजन न केवल कई तरह की गंभीर बीमारियों से बचाता है, बल्कि वजन कम करने में भी मदद करता है. लेकिन ऐसे भोजन लेना शुरू करने से पहले कुछ चीजों को समझ लेना बेहद जरूरी है.
शुगरफ्री भोजन क्या है
शुगरफ्री भोजन का मतलब है कि उस में हर तरह की जरूरत से ज्यादा या छिपी चीनी का सेवन बंद. इस में सिंपल कार्बोहाइडे्रट भी शामिल हैं. रोजाना 350 कैलोरी से अधिक शुगर लेने से मोटापा, मधुमेह और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
इस के अलावा जरूरत से ज्यादा शुगर लेना शरीर के इम्यून सिस्टम को भी कमजोर बनाता है. कुछ लोग सोचते हैं कि शुगरफ्री भोजन का अर्थ है हर तरह की चीनी लेना बंद कर देना. लेकिन ऐसा नहीं है. इस में अनाज और फलों की मात्रा को कम करना चाहिए, लेकिन बंद बिलकुल नहीं करना चाहिए.
कैसे करता है काम
शुगरफ्री भोजन करने से ब्लड शुगर में अचानक बदलाव नहीं आता. इस में ज्यादा ग्लाइसेमिक से युक्त खाने वाली चीजें शामिल होती हैं, जिन का सीधा असर ब्लड शुगर और ग्लूकोज के स्तर पर पड़ता है. कम ग्लाइसेमिक से युक्त चीजें पचाने में ज्यादा मुश्किल होती हैं. इन्हें लेने से मैटाबोलिक रेट में सुधार होता है और आप पेट भरा हुआ महसूस करते हैं. आप के शरीर में प्रोटीन और वसा से ऊर्जा पैदा होती है. इस से धीरेधीरे वजन भी कम होने लगता है.
शुगरफ्री डाइट प्लान
ऐसे भोजन में कई खाने वाली चीजों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है. कुछ को ही शामिल किया जाता है. खट्टे फल ज्यादा खाए जाते हैं.
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