सवाल-

मैं 26 साल की हूं और 8 महीने पहले ही विवाह के बंधन में बंधी हूं. पति का व्यवहार मेरे प्रति बहुत प्रेमभरा है और उन के परिवार वाले भी मेरा पूरा आदर करते हैं. मैं खुद पर गर्व करती हूं कि मुझे इतना अच्छा जीवनसाथी मिला है. मगर मन ही मन बहुत परेशान भी हूं. वह इसलिए कि मेरे पति को गुटका खाने की आदत है. मैं ने सुना है कि गुटका-तंबाकू चबाने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है. क्या यह सच है? उन्हें 2-3 बार गुटका छोड़ने के लिए कह चुकी हूं, लेकिन बात को हंस कर टाल देते हैं. बताएं क्या करूं?

जवाब-

यह सच है कि गुटका, तंबाकू, खैनी चाबाना सेहत के लिए नुकसानदेह है. राष्ट्रीय कैंसर रजिस्टरी के अनुसार यह लत भारतीय पुरुषों और स्त्रियों में कैंसर होने का सब से बड़ा कारण है. गुटकातंबाकू चबाने वालों के मुंह, जीभ, होंठ, गला, खाने की नली और अमाशय का कैंसर होने की प्रबल आशंका रहती है और यदि किसी कारण इलाज में देर हो जाए तो बीमारी के लाइलाज होते देर नहीं लगती.

गुटकेखैनी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के पीछे कौनकौन से ठोस कारण हैं, इस पर भी बहुत कुछ काम किया जा चुका है. चिकित्सा वैज्ञानिकों ने गुटकेखैनी में अब तक 28 ऐसे हानिकारक रसायनों को भी खोज निकाला है जिन के चबाने से यह संकट उपजता है. इन रसायनों में नाइट्रोसामीन, पोलोनियम 210 और पौलिसायक्लिक ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन प्रमुख हैं.

गुटका खाने से मसूड़ों और मुंह का स्वास्थ्य तो बिगड़ता ही है, धमनियों के लचीलेपन और उन की रक्तवाहक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है, जिस से शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त आपूर्ति में खलल पड़ने लगता है. कोरोनरी धमनियों का आयतन सिकुड़ जाए तो दिल का दौरा भी पड़ सकता है. इसी प्रकार मस्तिष्क की धमनियों में खून का दौरा घटने से मस्तिष्क की कामकाजी क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है.

आप अपने पति को समझाएं कि यदि उन्हें अपने स्वास्थ्य और आप का जरा भी खयाल है, तो मन चाहे जितना भी ललचाए, गुटके का साथ छोड़ दें, उसे हाथ भी न लगाएं. इसी में सब का भला है.

अगर आप के पति संकल्प लेने के बाद भी इस बुरी आदत को न छोड़ सकें तो अच्छा होगा कि आप उन्हें किसी ऐसे मनोचिकित्सक के पास ले जाएं जो डीएडिक्शन के क्षेत्र में विशेष रूप से अनुभवी हो और जरूरत पड़ने पर दवा देने के साथसाथ आप के पति को आवश्यक काउंसलिंग भी दे सकें.

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