लड़कियों का इंस्टाग्राम पर अपनी बोल्ड तस्वीरें पोस्ट करना कोई नई बात नहीं है. सैलिब्रिटी हो या आम लड़कियां सभी खूबसूरत दिखने की दौड़ में शामिल हैं. कोई अपनी पहचान ‘टिकटौक’ से बना रही है, तो कोई ब्लौगिंग से, मगर उन के लिए सब से अलग दिखने का तरीका है बोल्ड तस्वीरें पोस्ट करना, जिन में वे अपने पैर, पीठ, कमर, पेट, क्लीवेज आदि दिखाती नजर आती हैं.

कुछ लोग इन महिलाओं, लड़कियों की तस्वीरों पर तारीफों के पुल बांधते हैं, तो कुछ उन की निंदा करते हैं. तारीफ करने वाले इस बात से परिचित होते हैं कि ये बोल्ड तस्वीरें उन्होंने अपने महीनों की मेहनत से बनाई फिगर के बाद खींची हैं. वहीं दूसरी ओर वे लोग जो संस्कृति और सभ्यता की दुहाई देते हैं, भारतीय महिलाओंलड़कियों के चरित्र को संजोकर रखना चाहते हैं या फिर वे जो ऐसी फिगर नहीं पा सकते उन के लिए ये तस्वीरें किसी कलंक से कम नहीं.

महिलाओं का बोल्ड तस्वीरें पोस्ट करना गलत है या फिर लोगों की सोच, यह एक गंभीर मुद्दा है. इस पर केवल 1-2 लोगों की राय ले कर फैसला करना गलत होगा.

हम ने अलगअलग उम्र की महिलाओं से इस सवाल का जवाब देने को कहा:

लड़की: उम्र 22 वर्ष, ‘‘मुझे नहीं लगता कि इस में कोई बुराई है किसी भी लड़की को यह अच्छी तरह पता होता है कि उसे कैसी तस्वीरें पोस्ट करनी हैं. यहां लोगों की सोच ही गलत है. हां, लड़कियों को भी अपने आसपास के वातावरण का थोड़ा ध्यान रखना चाहिए. वे जैसी घर में हैं वैसी ही इमेज उन्हें सोशल मीडिया पर दिखनी चाहिए. फिर चाहे वह बोल्ड हो या नहीं.’’

लड़की: उम्र 24 वर्ष, ‘‘मेरा मानना है कि अगर कोई लड़की अपनी बोल्ड तस्वीर पोस्ट कर रही है तो वह कुछ सोचसमझ कर ही कर रही होगी. उसे अच्छे कमैंट भी मिलेंगे और बुरे भी. हर लड़की को बोल्ड और ब्यूटी में फर्क पता होना चाहिए. वैसे आजकल की लड़कियां बहुत समझदार हैं.’’

महिला: उम्र 40 वर्ष, ‘‘अगर महिलाएं अपनी टांगें या टौपलैस बैक दिखाना चाहती हैं

तो ठीक है, क्योंकि इतना तो चलता है. आजकल की जैनरेशन की सोच ठीक ही है. अगर वे इसे नहीं अपनाएंगी तो बैकवर्ड कहलाएंगी. समय के साथ इतना तो चेंज होना ही चाहिए. हां, अपना शरीर बहुत ज्यादा नहीं दिखाना चाहिए. पर थोड़ाबहुत दिखाना चलता है. स्कर्ट वाला फोटो हो या छोटे कपड़ों का सब लाइक करते ही हैं. इतना चलता है.’’

महिला: उम्र 44 वर्ष, ‘‘मुझे लगता है कि किसी भी लड़की को खास कर वह जो सैलिब्रिटी नहीं है, उसे अपनी अच्छी इमेज बनानी चाहिए. थोड़ीबहुत बोल्डनैस तो ठीक है, पर टौपलैस तस्वीरें या बिकिनी वाली तस्वीरें नहीं. मैं केवल उसी व्यक्ति को अपनी बोल्ड तस्वीरें दिखाना पसंद करूंगी जिस से मैं तारीफ चाहती हूं, हर चलतेफिरते आदमी को मुझे अपनी बोल्ड तस्वीरें दिखाने का कोई शौक नहीं है.’’

इन चारों के विचारों से साफ पता चलता है कि  बोल्डनैस एक हद तक ही होनी चाहिए. यदि बोल्डनैस हद से ज्यादा होगी तो उसे न्यूडिटी फैलाने से ज्यादा और कुछ नहीं कहा जा सकता.

क्या कहते हैं सैलिब्रिटीज

सैलिब्रिटीज और अभिनेत्रियों के विचार इन आम महिलाओं व लड़कियों से एकदम अलग हैं. टीवी अदाकारा श्रीजिता डे ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी बिकिनी में तस्वीरें पोस्ट कीं, जिन्हें देख कर कई फैंस ने उन्हें ट्रोल भी किया. इस ट्रोलिंग पर सवाल किए जाने पर श्रीजिता कहा कि किसी भी अभिनेत्री के लिए बोल्ड तस्वीरें खिंचवाना आम बात है. मुझे कुछ अलग करना था तो मैं भी बिकिनी पहन कर बर्फ पर चली गई. मुझे इस में कोई बुराई नहीं लगी.

बोल्ड तस्वीरों की सूची में बौलीवुड अभिनेत्री ईशा गुप्ता और दिशा पटानी भी हैं. हालांकि लोगों की ट्रोलिंग से बचने के लिए ये दोनों अकसर अपनी तस्वीरों से कमैंट का औपशन हटा देती हैं.

एम टीवी के शो ‘गर्ल्स औन टौप’ की ईशा यानी सलोनी चोपड़ा अकसर अपनी बोल्ड तस्वीरों के बारे में खुल कर अपने विचार रखती हैं. इंस्टाग्राम की एक कैप्शन में लिखती हैं, ‘‘मुझे तब यह बड़ा दिलचस्प लगता है कि जब मीडिया महिलाओं को सैक्सुलाइज करता है तो समाज को फर्क नहीं पड़ता, जब पुरुष महिलाओं को सैक्सुलाइज करते हैं, सरकार व स्कूल उन्हें सैक्सुलाइज करते हैं तो समाज को फर्क नहीं पड़ता, मगर जब एक महिला खुद की सैक्सुऐलिटी को कंट्रोल करती है तो समाज के लिए यह गलत व घृणित हो जाता है.’’

आखिर में बात वहीं आ कर रुक जाती है कि क्या बौल्डनैस गलत है? अगर नहीं तो किस हद तक वह सही है? मुझे लगता है कि किसी भी महिला के लिए अपनी स्थिति, समय और समाज को नजर में रखते हुए खुद को प्रदर्शित करना चाहिए और यदि उन्हें किसी चीज से फर्क नहीं पड़ता तो इस बात से भी वाकिफ होना चाहिए कि लोग तो कहेंगे, उन का काम है कहना.

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