कहर पर कहर. कहर दर कहर. कोरोना कहर, गरीबी कहर, मजदूरी कहर, मजबूरी कहर, बेरोजगारी कहर, पलायन कहर और अब तो घरवापसी भी एक कहर सा है. ये सारे कहर प्रवासी मजदूर परिवारों पर टूट पड़े हैं.

पेट के लिए रोटी, तन के लिए कपड़ा और रहने के लिए मकान बनवाने के सपने को पूरा करने के लिए अतिगरीब ग्रामीण अपनी झोंपड़ी से निकल बड़े शहरों को पलायन करते रहे हैं. रोटी, कपड़ा और मकान के उनके सपने किसी हद तक पूरे होते भी रहे हैं और वे सकुशल, सुरक्षित व प्रेमभाव के साथ घरवापसी करते रहे हैं.

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