लेखक- अशोक शर्मा  

घटना 31 जनवरी, 2019 की है. सुबह के यही कोई 11 बज रहे थे. महानगर मुंबई के उपनगर माहीम धारावी (पूर्व) के जस्मिन मिल रोड पर स्थित है डायमंड

अपार्टमेंट. इस अपार्टमेंट के लोगों में उस समय अफरातफरी मच गई, जब अपार्टमेंट की 13वीं मंजिल पर रहने वाले मेहराज हुसैन ने 10वीं मंजिल के एक फ्लैट से उठते हुए धुएं के

बारे में लोगों को बताया. आग पूरी इमारत में न फैल जाए इसलिए उस ने यह जानकारी तुरंत फायरब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.

यह इलाका थाना शाहूनगर क्षेत्र में आता है इसलिए खबर मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम ने यह सूचना शाहूनगर थाने को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सुभाष सूर्यवंशी इंसपेक्टर मंदार लाड, हनुमान बैताल, सहायक इंसपेक्टर विशाल आरोसकर, एसआई तुकाराम दिघे, वसीम शेख, कांस्टेबल जंगम को साथ ले कर डायमंडअपार्टमेंट की ओर रवाना हो गए.

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पुलिस टीम के वहां पहुंचने के पहले ही वहां काफी लोगों की भीड़ जमा हो गई थी. फायरब्रिगेड की टीम तत्काल वहां पहुंच कर आग पर काबू पा चुकी थी. पता चला कि आग 10वीं मंजिल के फ्लैट नंबर 1010 में लगी थी.

थानाप्रभारी सुभाष सूर्यवंशी अपनी टीम के साथ लिफ्ट से सीधे फ्लैट नंबर 1010 में पहुंचे तो फ्लैट के अंदर की स्थिति देख कर स्तब्ध रह गए. वहां किचन में एक महिला तहसीन और एक 3 साल की बच्ची आलिया जली हुई अवस्था में पड़ी थी. शव और उस के आसपास काफी मात्रा में खाने वाला तेल फैला था.

बैडरूम में बैठा एक व्यक्ति अपनी छाती पीटपीट कर रो रहा था. पड़ोसियों ने बताया कि वह मृतका तहसीन का पति इलियास सैयद है.

पुलिस टीम ने जब मृतक महिला और बच्ची के शव का निरीक्षण किया तो पाया कि पहले किसी तेज धारदार हथियार से उन का गला काटा गया था. फिर उन के शरीर पर खाने वाला तेल डाल कर उन्हें जलाने की कोशिश की थी. यह सब स्पष्ट तौर पर हत्या की तरफ इशारा कर रहा था.

मामला काफी संदिग्ध था. थानाप्रभारी और उन की टीम अभी घटनास्थल की जांच पड़ताल और लोगों से पूछताछ कर ही रही थी कि तभी डीसीपी विक्रम देशमाने,

एसीपी अजीनाथ सातपूते मौका ए वारदात पर आ गए थे. उन के साथ ही फोरैंसिक और क्राइम ब्रांच की टीम भी वहां पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल और दोनों शवों का बारीकी से मुआयना किया.

फोरैंसिक टीम और क्राइम ब्रांच की टीम का काम खत्म होने के बाद थानाप्रभारी ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए माटुंगा सायन अस्पताल भिजवा दिए. फिर थाने लौट कर उन्होंने मृतक तहसीन के पति इलियास सैयद के बयान के आधार पर रिपोेर्ट दर्ज कर अपनी तफ्तीश शुरू कर दी.

इलियास सैयद ने अपने बयान में बताया कि पिछले 6 महीने से पत्नी तहसीन के साथ उस का रिश्ता ठीक नहीं था. कुछ फरमाइशें पूरी न होने के कारण वह

तनाव में रहती थी, जिस की वजह से उस ने बेटी आलिया के साथ आत्महत्या कर ली. इलियास ने पुलिस को आत्महत्या करने से पहले उसे भेजा गया वाट्सएप मैसेज भी दिखाया.

उस ने कहा कि जिस समय उस की पत्नी का आत्महत्या का मैसेज उस के मोबाइल पर आया था, उस समय वह अपनी दुकान पर था. जब तक वह दुकान बंद कर घर पहुंचा तब तक उस का संसार उजड़ चुका था. उस की बड़ी बेटी सायना इसलिए बच गई क्योंकि उस समय वह अपने स्कूल गई हुई थी.

जहां एक तरफ उस की पत्नी तहसीन का मैसेज आत्महत्या की तरफ इशारा कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ एक प्रश्न भी खड़ा हो रहा था. वो यह कि अगर मान लिया जाए कि तहसीन ने बेटी के साथ अपना गला काट कर आत्महत्या की कोशिश की थी तो फिर उन दोनों के ऊपर तेल कहां से आया. वहां आग किस ने लगाई.

ये बातें एकदूसरे के विपरीत थीं, जिन से किसी गहरी साजिश की गंध आ रही थी. इस साजिश पर थानाप्रभारी ने अपनी टीम के साथ गंभीरता से विचार किया.

फिर मामले की तफ्तीश इंसपेक्टर मंदार लाड को सौंप दी.

इंसपेक्टर मंदार लाड ने अपनी तफ्तीश शुरू करने के पहले मृतक तहसीन और आलिया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन किया. जिस से यह साफ हो गया था कि मामला आत्महत्या का नहीं, हत्या का है. इस हत्या का रहस्य क्या था. इस का परदाफाश करने के लिए मंदार लाड ने अपनी टीम के साथ पुन: घटनास्थल का निरीक्षण किया.

मंदार लाड ने आसपास के लोगों से भी पूछताछ की. जब उन्होंने इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को ध्यान से देखा तो उन की नजर एक संदिग्ध बुरकाधारी महिला पर जा कर ठहर गई, जो इमारत की लिफ्ट के बजाए सीढि़यों से आ रही थी. वह इलियास सैयद के फ्लैट तक गई थी. जबकि इमारत के अंदर 2-2 लिफ्ट लगी हुई थीं.

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पुलिस हैरान थी कि वह महिला लिफ्ट के बजाए 10वीं मंजिल तक सीढि़यों से क्यों गई? आखिर वह बुर्काधारी कौन थी और उस समय वह इस फ्लैट में क्या करने गई थी. पुलिस टीम ने वह फुटेज इमारत में रहने वालों को दिखाई तो उन्होंने संदेह उसी इमारत की रहने वाली आफरीन बानो पर जाहिर किया, जो अकसर इलियास सैयद के साथ देखी जाती थी.

इलियास सैयद पहले से ही पुलिस के शक के दायरे में था. आफरीन बानो का नाम जुड़ने से शक पूरी तरह यकीन में बदल गया. इस के पहले कि पुलिस टीम इलियास सैयद को गिरफ्तार कर उस से पूछताछ करती, वह और आफरीन दोनों फरार हो गए. यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने उन दोनों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी.

एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने उन दोनों को सीएसटी रेलवे स्टेशन पर उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह शहर छोड़ कर गांव जाने की तैयारी में थे. थाने में जब उन से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपने आप को तहसीन और आलिया हत्याकांड से अनभिज्ञ बताया. मगर थोड़ी ही देर में वह टूट गए और अपना गुनाह स्वीकार कर लिया.

पुलिस तफ्तीश और उन दोनों के बयानों के आधार पर डबल मर्डर की जो कहानी उभर कर सामने आई, उस की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार से थी— 34 वर्षीय इलियास सैयद मूलरूप से जनपद झांसी का रहने वाला था. लगभग 20 साल पहले रोजीरोटी की तलाश में उस ने मुंबई का रुख किया था. गांव में जो

थोड़ीबहुत काश्तकारी थी उसे उस के मातापिता के साथ उस के भाई संभालते थे. परिवार बड़ा होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी.

मुंबई उपनगर धारावी माहीम में उस के गांव के कुछ लोग रहते थे, जो रेडीमेड कपड़ों का कारोबार करते थे. इलियास भी उन्हीं के साथ काम पर लग गया. धीरेधीरे

जब वह रेडीमेड कपड़ों के काम में माहिर हो गया तो उस ने पहले किराए पर एक दुकान ली. उस के बाद वह स्वयं की एक दुकान ले कर उसे चलाने लगा. दुकान चली तो उस के परिवार की आर्थिक गाड़ी भी पटरी पर लौटने लगी.

इस के बाद घर वालों ने उस की शादी अपने एक पुराने रिश्तेदार की बेटी तहसीन से कर दी.

तहसीन सैयद देखने में जितनी सुंदर शोख चंचल थी, उतनी ही वह हसीन भी थी. उस से शादी कर के वह खुश था. उस ने पत्नी को अपने मांबाप की सेवा करने के

लिए कुछ दिनों अपने गांव में छोड़ दिया. लेकिन मुंबई में अकेले रहने पर इलियास का मन नहीं लग रहा था. लिहाजा वह पत्नी तहसीन को अपने साथ मुंबई ले आया.

मुंबई में वह माहीम धारावी के जस्मिन मिल रोड पर एक कमरा किराए पर ले कर रहने लगा. बाद में जब झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (स्लम रिहैबिलिटेशन अथारिटी) की मुफ्त घर देने की स्कीम आई तो उसे भी एक फ्लैट मिल गया. वह फ्लैट उसे वहीं पर बनाए गए डायमंड अपार्टमेंट की 10वीं मंजिल पर मिला था. वह अपने परिवार के साथ आवंटित फ्लैट नंबर 1010 में रहने लगा.

समय अपनी गति से चल रहा था. इलियास अपनी दुकान में व्यस्त रहता था और तहसीन अपने घर के कामों में मग्न रहती थी. समय के साथ इलियास 2 बेटियों का बाप बन गया था.

उस की बड़ी बेटी सायना 7 साल की थी, जो पास ही के स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती थी. जबकि छोटी बेटी आलिया 3 साल की थी. इलियास की घरगृहस्थी

ठीक चल रही थी. उस की शादी हुए 10 साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला.

एक कहावत है कि इंसान का वक्त कब और कैसे बदलेगा, कोई नहीं जानता. जो परिवार उस इमारत के अच्छे लोगों में गिना जाता था वही परिवार पिछले 6 महीनों से आसपड़ोस वालों के लिए सिरदर्द बन गया था. इस का कारण 22 वर्षीय आफरीन बानो थी, जो इलियास सैयद की जिंदगी में अचानक ही आ गई थी.

इलियास सैयद से उम्र में 10 साल छोटी आफरीन बानो की निगाहों में वह कशिश थी, जिस ने इलियास सैयद को अपनी पहली झलक में ही दीवाना बना लिया था.

हुस्न और यौवन में आफरीन उस की पत्नी तहसीन से कई गुना ज्यादा आकर्षक थी. आफरीन बानो अपने मातापिता और भाईबहनों के साथ उसी इमारत में रहती थी और माटुंगा में खालसा कालेज के पास स्थित एक प्राइवेट कंपनी में सेल्सगर्ल की नौकरी करती थी.

इलियास की आफरीन से उस समय मुलाकात हुई थी जिस समय वह अपने परिवार के साथ ईद के कपड़े लेने के लिए उस की दुकान पर गई थी. आफरीन को देख कर इलियास के चेहरे पर चमक आ गई थी. वैसे तो एक ही इमारत में रहने के कारण इलियास ने आफरीन को कई बार देखा था लेकिन गौर से देखने का मौका उसे उस दिन मिला था.

चूंकि उस दिन वह कपड़े खरीदने अपने घर वालों के साथ आई थी इसलिए उसे उस से साथ बात करने का मौका तो मिला लेकिन वह उस से खुल कर बात नहीं कर सका. उस दिन आफरीन और इलियास में काफी बातें हुई थीं. आफरीन ने अपने परिवार वालों के काफी कपड़े उस की दुकान से खरीदे.

आफरीन से नजदीकियां बढ़ाने के लिए इलियास ने उसे पैसों में भी काफी छूट दी थी, जिस से आफरीन काफी प्रभावित हुई थी. जब तक आफरीन इलियास सैयद की दुकान में रही, तब तक वह इलियास की आंखों की केंद्रबिंदु बनी रही.

कई बार इलियास और आफरीन बानो की नजरें कुछ इस प्रकार टकराई थीं कि दोनों के चेहरे सुर्ख हो गए थे. आफरीन एक सेल्सगर्ल थी, इसलिए अपने अनुभव से वह इलियास की नजरों और बातों से उस की भावनाओं को समझ गई थी.

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खरीदारी करने के बाद आफरीन जब उस की दुकान से बाहर निकली तो इलियास उसे छोड़ने के लिए बाहर तक आया. आफरीन ने एक हलकी मुसकराहट के साथ इलियास को बाय कहा और वहां से चली गई. लेकिन आग दोनों तरफ लग चुकी थी. उस रात दोनों एकदूसरे के खयालों में खोए रहे.

एक सप्ताह के बाद आफरीन अपने कुछ सूट बदलने के बहाने से इलियास की दुकान पर फिर पहुंची. उस दिन दुकान पर सिर्फ आफरीन और इलियास ही थे. इस का फायदा उठाते हुए उस दिन दोनों में खुल कर बातें हुईं और दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर बढ़ता ही गया. इस के बाद तो जब भी दोनों को मौका मिलता, उस का पूरापूरा लाभ उठाते थे.

पहले तो यह सिलसिला सिर्फ दुकान तक ही सीमित था, लेकिन फिर यह मौल, पार्क और मल्टीप्लेक्स तक पहुंच गया. इलियास की दुकान अच्छी चलती थी, जिस से

उस की कमाई भी अच्छी होती थी, इसलिए वह आफरीन पर दिल खोल कर खर्च करता था. इतना ही नहीं, वह आफरीन का पूरी तरह खयाल रखता था. स्थिति यह

हो गई कि जब तक दोनों एकदूसरे को दिन में एक बार देख नहीं लेते थे, उन्हें चैन नहीं आता था.

इलियास आफरीन से कहता था कि जिस दिन वह उस की दुकान पर आ जाती है, उस दिन उस का धंधा दोगुना होता है. इस पर आफरीन हर दिन अपने औफिस

जाने के पहले एक बार उस की दुकान पर जाने लगी. दोनों कुछ समय तक एकदूसरे के साथ हंसीमजाक करते और फिर आफरीन चली जाती और इलियास अपने

काम में लग जाता था.

ऐसे में एक दिन जब आफरीन इलियास की दुकान पर पहुंची तो उस का चेहरा उतरा हुआ था. उदास चेहरे को देखते ही इलियास ने पूछा, ‘‘क्या बात है आफरीन,

आज तुम्हारा मूड कुछ ठीक नहीं लग रहा?’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.’’ आफरीन ने लापरवाही से कहा.

‘‘देखो, कुछ बात तो है, जो तुम मुझ से छिपा रही हो. बताओ, क्या बात है?’’ इलियास ने जोर दे कर कहा.

‘‘इलियास, मैं यह सोच रही हूं कि इस तरह कितने दिनों तक चलेगा. हमारेतुम्हारे परिवार को जब हमारे प्यार की बातें पता चलेंगी तो क्या होगा. तुम्हारा तो

मुझे पता नहीं लेकिन मेरा तो घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. फिर मैं क्या करूंगी?’’ वह गंभीर होते हुए बोली.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं इस से पहले ही तुम्हारे घर वालों से तुम्हारा हाथ मांग लूंगा.’’ इलियास बोला.

‘‘नहीं नहीं, ऐसा मत करना. अगर मेरे परिवार वालों को यह बात पता चली कि मैं एक निकाहशुदा इंसान से प्यार करती हूं तो मेरी आफत ही आ जाएगी.

इसलिए तुम पहले अपनी बीवीबच्चों के बारे में सोचो, फिर मेरा हाथ मांगना.’’ आफरीन ने इलियास को समझाया.

‘‘इस की चिंता तुम छोड़ो, मैं अपनी बीवी को समझा लूंगा.’’ इलियास सैयद ने आफरीन को भरोसा दिलाया.

फिर एक दिन इलियास ने इस बारे में अपनी पत्नी तहसीन से बात की. कोई भी औरत भले ही कैसी ही हो, वह यह नहीं चाहेगी कि उस का मर्द किसी दूसरी

औरत से प्यार करे. वह अपने प्यार को बांटने के लिए हरगिज तैयार नहीं होगी.

तहसीन को जब पता चला कि उस के शौहर का इसी बिल्डिंग में रहने वाली आफरीन से चक्कर चल रहा है तो उस के पैरों तले से जमीन जैसे खिसक गई.

उस ने यह बात कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उस का पति ऐसा करेगा. यानी तहसीन ने सौतन को स्वीकारने से मना कर दिया और वह इस का विरोध

करने लगी.

यह बात जब इलियास के परिवार और उस के नातेरिश्तेदारों को मालूम पड़ी तो उन्होंने भी इलियास को आड़े हाथों लिया. उसे समझायाबुझाया. लेकिन इलियास

आफरीन बानो के प्यार में कुछ इस तरह पागल था कि वह अपनी पत्नी और दोनों मासूम बच्चियों को भी भूल गया था.

उस का व्यवहार अपने परिवार के प्रति बदल चुका था. जिस की वजह से घर का माहौल बिगड़ गया था. पतिपत्नी में आए दिन लड़ाईझगड़े होने लगे. ऐसे माहौल में बच्चे भी डरेसहमे से रहते थे.

31 जनवरी, 2019 को करीब 10 बजे दोनों पतिपत्नी में आफरीन को ले कर जब बात चली तो उस का अंत भयानक हुआ. उस दिन इलियास अपने आपे से बाहर हो

गया था. इलियास किचन में काम कर रही तहसीन के पास गया. उस समय बड़ी बेटी सायना स्कूल गई हुई थी. छोटी बेटी आलिया सो रही थी.

गुस्से में सुलग रहे इलियास ने किचन में रखा चाकू उठाया. इस से पहले कि तहसीन कुछ समझ पाती, उस ने तहसीन का गला रेत दिया. एक चीख के साथ

तहसीन किचन में फर्श पर गिर गई. तहसीन की चीख सुन कर 3 साल की बेटी आलिया जागी तो वह मां की तरफ भागी.

इलियास ने उस मासूम को भी इस डर से नहीं छोड़ा कि कहीं वह पुलिस की गवाह न बन जाए. यानी उस ने बेटी की भी हत्या कर दी.

अपनी पत्नी और बेटी की हत्या करने के बाद वह बाथरूम में गया. खून सने कपड़े उस ने वहां उतार कर दूसरे कपड़े पहन लिए. फिर अपनी स्कूटी उठाई और सीधे

माटुंगा में आफरीन के पास गया. वह उस समय अपनी ड्यूटी पर थी. इलियास ने आफरीन को पत्नी तहसीन और बेटी आलिया की हत्या करने की जानकारी दे दी,

जिसे सुन कर आफरीन के होश उड़ गए थे.

कुछ देर बैठ कर दोनों ने शवों को ठिकाने लगाने के बारे में विचारविमर्श किया. दिन में उन के लिए शवों को बाहर ले जाना मुमकिन नहीं था. आखिर में उन्होंने

दोनों शवों को आत्महत्या का रूप देने की योजना बनाई.

फिर योजना के अनुसार वे उसे अंजाम देने के लिए चल दिए. इलियास डायमंड अपार्टमेंट से कुछ दूरी पर रुक गया. उस ने आफरीन को अपने घर भेज दिया. वहां जा कर आफरीन को क्या करना था, यह पहले ही तय हो गया था.

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आफरीन इमारत की सीढि़यों से चढ़ कर सीधे इलियास के फ्लैट के अंदर गई. उस ने बच्ची आलिया की लाश उठा कर तहसीन के पास डाल दी. फिर किचन में रखा 5 लीटर मूंगफली का तेल दोनों शवों पर डाल दिया.

इस के बाद आफरीन ने तहसीन का मोबाइल फोन उठा कर उस से इलियास सैयद के मोबाइल पर एक मार्मिक मैसेज भेजा, जिस में लिखा था, ‘आप को मुझ से

प्यार नहीं है इसलिए मैं आप को आजाद कर रही हूं. मैं अपनी बच्ची के साथ आत्महत्या कर इस दुनिया से जा रही हूं. आप जैसे भी रहें, खुश रहें. खुदा

हाफिज…आई लव यू.’

यह मैसेज भेजने के बाद आफरीन ने मोबाइल फोन तहसीन और आलिया के शवों के पास फेंक कर उन के शवों को आग के हवाले कर दिया. इस के बाद वह वहां

से निकल कर सीधे टैक्सी पकड़ कर माटुंगा अपने औफिस चली गई.

जबकि इलियास सैयद डायमंड अपार्टमेंट के आसपास ही रहा. जब आग का धुआं फ्लैट से निकलने लगा तो इलियास अपने फ्लैट में गया और रोने का ड्रामा करने लगा.

हत्या और आत्महत्या की यह साजिश दोनों ने बड़ी ही सूझबूझ के साथ रची थी, लेकिन पुलिस जांच के सामने उन की साजिश धरी रह गई.

दोनों अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने इलियास सैयद और आफरीन बानो के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जाए, जहां से उन्हें भायखला जेल भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक दोनों जेल की सलाखों के पीछे थे. आगे की जांच इंसपेक्टर मंदार लाड और उन के सहायक कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां) 

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