इंसान स्वार्थवश मानव तस्करी में लिप्त हो जाता है. जबकि, वह ज्ञान और विज्ञान का सामूहिक नतीजा है. वह कार्यकुशलता में अद्भुत है लेकिन उस की सोच उसे इंसान से हैवान बना देती है. और फिर वह किसी न किसी तरह की मानव तस्करी के अपराध में अपना नाम दर्ज करा लेता है.

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