रुचि को स्थानीय प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका की नौकरी मिल गई. उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे, क्योंकि यह शहर का सब से नामी स्कूल था, अच्छी तनख्वाह, आनेजाने के लिए बस और सभ्यसुसंस्कृत परिवार के विद्यार्थी. उस ने अपने लिए विद्यालय के हिसाब से कपड़े सिलवाए.

पहले दिन ही जब वह स्कूल पहुंची तो उस के होश उड़ गए. जब उसे ड्रैस कोड से संबंधित एक सर्कुलर दिया गया और यही नहीं अगले दिन उसे क्व12 हजार भी जमा करने को कहा गया, क्योंकि वहां पर सब अध्यापिकाओं को यूनीफौर्म पहननी होती है जो उस नामचीन विद्यालय की प्रिंसिपल निर्धारित करती हैं और सब से मजे की बात यह है कि प्रिंसिपल खुद अपने लिए कोई ड्रैस कोड निर्धारित नहीं करती हैं. वे खुद प्लाजो, स्कर्ट, सूट, साड़ी या चुस्त चूड़ीदार पहन सकती हैं पर मजाल है कोई भी टीचर बिना यूनीफौर्म के स्कूल आ जाए.

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