छोटे रेस्तराओं और छोटे हलवाइयों का बिजनैस चौपट कर के एकछत्र राज कायम करने की तरकीब में फूड डिलिवरी प्लैटफौर्म स्वीगी और जोमैटो कोई सेवा नहीं कर रहे. यह एक कुटिल चाल है. पहले लोगों को समय पर खाना पहुंचा कर कैशबैक का औफर दे कर घर बैठे गरमगरम खाना भिजवा कर वह भी सस्ते में इन छोटे रेस्तराओं और हलवाइयों का दिवाला निकलवाया जाएगा और फिर टैलीकौम सेवाओं की तरह दाम बढ़ा दिए जाएंगे.

स्वीगी को 2018-19 में ₹2,364 करोड़ का घाटा हुआ और जोमैटो को ₹2,026 करोड़ का. यह भुगतान वे विदेशी कंपनियां कर रही हैं जो घरों पर कब्जा करने के लिए, लोगों के खाने में बदलाव लाने के लिए नए सिरे से टेस्ट बड तैयार करने के लिए सस्ते में सुलभ खाना दे रही हैं.

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स्वीगी आज देश के 500 शहरों में खाना सप्लाई करती है. 1 साल में 50 करोड़ और्डर लेती है. कौन सा रेस्तरां और हलवाई इस तरह के टैंकों की फौज का मुकाबला कर सकता है? हर रेस्तरां, हर हलवाई, हर घरेलू खाना बनाने वाली को कब्जे में ले कर, उन पर अपनी शर्तें थोप कर एक तरफ वे उन्हें लूटेंगी और जब कंपीटिशन नहीं रहेगा तो ग्राहकों को लूटेंगी.

बैंकों ने कै्रडिट कार्डों में यही किया है. पहले बड़े लुभावने विज्ञापन दिए कि क्रैडिट कार्ड के फायदे ही फायदे हैं. करोड़ों ने क्रैडिट कार्ड ले लिए, अब उन्होंने सरकार को भी फांस लिया जिस ने भुगतान क्रैडिट कार्ड से ही जबरदस्ती कराना शुरू कर दिया. एक बार क्रैडिट कार्ड की आदत पड़ी नहीं कि उन्होंने शर्तें थोपनी शुरू कर देती हैं. ₹10 कम रह जाएं तो ₹50 रुपए का जुरमाना वसूल कर लेती हैं क्रैडिट कार्ड कंपनियां.

इसी तरह स्वीगी और जोमैटो कंपनियां अब ग्राहकों को मजबूर करेंगी कि उन का बेस्वाद, ठंडा, न जाने कहां का बना खाना खाओ जो सस्ता पड़े पर शानदार पैकिंग में हो. वे सप्लायर्स का पैसा दबा लेंगी. डिलिवरी बौयज को कहेंगी कुछ देंगी कुछ. धुआंधार प्रचार का मारा ग्राहक कल को यही कहेगा कि भई खाना तो स्वीगी और जोमैटो का ही अच्छा है जैसे वह कीचड़ भरे गंगा के पानी में डुबकी लगाने के बाद कहता है कि उस के 3 जन्मों के पाप तर गए. यह दिमागी दीवालिएपन का एक नमूना है. पहले धर्म के दुकानदार ही बेवकूफ बनाते थे अब और बहुत से आ गए हैं जो तर्क और आदमी के अपने जजमैंट को पूरी तरह किल कर देते हैं.

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