फोन आया तो लोगों का मिलना जुलना कम हुआ. लेकिन इससे लोगों के बीच दोस्तियां कम नहीं हुईं. इंटरनेट आया और उसके बाद वीडियो काॅलिंग तो मिलने जुलने की तकरीबन जरूरत ही खत्म हो गई. मगर इससे भी न तो लोगों का सदेह एक दूसरे से मिलना जुलना खत्म हुआ और न ही दोस्ती की जरूरत को वीडिया काॅलिंग दरकिनार कर पायी. लब्बोलुआब यह है कि दोस्ती जैसी भूमिका निभाने के लिए भले कितनी ही कम्युनिकेबल तकनीकें विकसित हो गई हों, लेकिन दुनिया में न तो दोस्त खत्म हुए हैं और न ही दोस्ती की जरूरत खत्म हुई है. शायद इसी आधार पर यह भी कहा जा सकता है कि भविष्य में भी कमी दोस्ती की जरूरत या दोस्तों का होना खत्म नहीं होगा. सवाल है इसकी वजह क्या है? निश्चित रूप से इसकी वजह है साइंस औफ फ्रेंडशिप.

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