मेघना को सब 'मोटीमोटी' कह कर चिढ़ाते थे. जब उस की शादी हुई थी तब वह 52 किलो की थी, पर आज शादी के 5 साल बाद 2 बच्चों की मां बनने पर उस का वजन 70 किलो हो गया है. इसी तनाव में किसी ने मेघना को सलाह दी कि वह जिम जौइन कर ले, ताकि अपना वजन कम कर सके.

मेघना ने घर के पास के ही एक जिम में जानकारी ली और फीस जमा कर के शुरू कर दिया अपना वजन घटाना. पर जिम के पहले दिन जब ट्रेनर ने मेघना को वेट ट्रेनिंग की सलाह दी तो उसे लगा कि वजन कम करने में वेट ट्रेनिंग का क्या रोल है?

ट्रेनर ने समझाया तो मेघना ने मन मार कर अपने उस की बात मानी और कार्डियो, जुंबा और लाइट ऐक्सरसाइज के साथसाथ वेट ट्रेनिंग भी की. इस का नतीजा चौंकाने वाला था.

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ऐसा क्यों होता है कि जिम में वेट ट्रेनिंग को सिर्फ पुरुषों की ही ऐक्सरसाइस माना जाता है? महिलाओं को वेट ट्रेनिंग करने से क्या फायदा होता है?

इसी सिलसिले में मुंबई के वर्ली इलाके में 'आइडियल बौडी फिटनैस' नामक जिम में फिटनैस इंस्ट्रक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट अंजू गुप्ता ने बताया, "जिम में कार्डियो और वेट ट्रेनिंग में बहुत फर्क होता है. आज से कई साल पहले जिम में वेट रूम में जाने से पहले खुद मैं भी कार्डियो पर ज्यादा ध्यान देती थी. लेकिन वेट ट्रेनिंग ने मेरी बौडी शेप को एकदम से बदल दिया.

"बहुत सी महिलाएं कार्डियो ट्रेनिंग पर इसलिए ज्यादा जोर देती हैं, क्योंकि वे वेट ट्रेनिंग को पुरुषों का काम मानती हैं और सोचती हैं कि डंबल उठाने से उन की बौडी मर्दाना हो जाएगी. पर ऐसा नहीं है. इस से न केवल वेट लौस होता है, बल्कि महिलाएं पहले से ज्यादा ऐक्टिव बन जाती हैं."

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