American Women: अमेरिका जाना अभी बहुत से देशों के युवाओं का ड्रीम है और वहां से आने वाली हजार बुरी खबरों के बावजूद हमारे यंग मैन ही नहीं, यंग गर्ल्स भी अमेरिका में लंबे समय के लिए जाने के लिए छटपटा रहे हैं. दूसरी ओर गैलप के सर्वे ने कहा है कि अमेरिका की यंग गर्ल्स में 15 से 44 की उम्र वाली 40-42% अमेरिका छोड़ कर कहीं और बसना चाहती हैं. इसी ऐज के यंग मैन में सिर्फ 18-20% बाहर जाना चाहते हैं.

अमेरिका की लड़कियां 2008 से ही देश छोड़ने को उतावली होने लगी थीं जब रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश प्रैसिडैंट थे. यह इच्छा बराक ओबामा के राष्ट्रपति काल में फिर बढ़ी पर जो बाइडन के प्रैसिडैंट बनने के बाद कुछ कम हुई. अब डोनाल्ड ट्रंप के युग में तो तेजी से बढ़ी है.

इस की वजह तो गैलप सर्वे में साफ नहीं है पर यह साफ है कि अगर भारत से लड़कियां दूसरे देशों में जाना चाहती हैं और अमेरिका से भी जाना चाहती हैं तो वजह बढ़ता कट्टरवाद है. अमेरिका और भारत दोनों धार्मिक फंडामैंटलिज्म की ओर बढ़ रहे हैं.

इस फंडामैंटलिज्म में सीधे व साफ शब्दों में तो औरतों पर पाबंदियां नहीं लगाई गईं पर वीकली चर्च में जाना लगभग जबरदस्ती बना दिया जाता है जहां बारबार प्रीस्ट बाइबल के उन हिस्सों को दोहराता जहां लड़कियों को अच्छी पत्नी, अच्छी मां, अच्छी घरवाली, अच्छी सेविका बनो का उपदेश दिया जाता है.

अमेरिका में जम कर अबौर्शन पर बहस चल रही है और एक के बाद एक राज्य अबौर्शन पर रोक लगा कर लड़कियों से काम करने, पैसा कमाने, युवकों के बराबर बनने और सब से बड़ी बात मरजी से सैक्स की आजादी छीन रहे हैं. जो सैक्स की आजादी में शादी करे बिना अपनी खुशी से सैक्स कर केप्रैगनैंट हो जाएं उन के लिए बड़ी आफत खड़ी कर दी जाती है.

रिपब्लिकनों की आंखों के तारे चार्ली कर्क के टीवी व हालों के शो बहुत पौपुलर हुए थे क्योंकि वह औरतों को बाइबल के अनुसार चलने को बारबार कहता था और मेलफीमेल औडियंस जम कर तालियां बजाते थे. उन की गोली मार कर हत्या कर दी गई तो उन्हें शहीद का सा दर्जा दे दिया गया है.

यह जनाब जम कर औरतों को कहते रहे हैं कि औरतों का काम तो घरों में रहना, खाना पकाना, बच्चे पैदा करना और सब से बड़ी बात पतियों की भरपूर सेवा करना ही है. इन के हाल भरे रहते थे. यूट्यूब प्रवचन के लाखों दर्शक होते थे. ऐसे माहौल में युवा लड़कियां क्यों न अमेरिका छोड़ना चाहेंगी. यह बात दूसरी है कि हर लड़की को यह मौका नहीं मिलेगा क्योंकि जो मौका वे चाहती हैं, कहीं नहीं मिलेगा. धर्मगुरुओं के चंगुल हर जगह हैं, बराबर के से.

अमेरिका की बड़ी उम्र की औरतें उन यंग औरतों से चिढ़ी रहती हैं जो पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़ी हैं और अपना घर खुद चला सकती हैं. दूसरी पुरातनपंथी अपने पतियों की गुलामी करती रहीं. व्हाइट या गैरव्हाइट औरतें आज बेहद जैल्स हैं कि जेन जी हो या मिलेनियल जैनरेशन अपने मन की कर सकती है. इन की संख्या अभी भी रेशो में कम है और इसलिए ऐजिंग औरतें राजनीति में दखल दे कर ऐसी पौलिसियां बनवा रही हैं जो औरतों के विरुद्ध जाएं.

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