प्रकृति का सबसे नायाब हस्ताक्षर
कुछ चीजें बस बनती नहीं, वक्त उन्हें रचता है।
धीरे-धीरे, परत दर परत, धैर्य, अनुभव और तपिश से तराशता हुआ ।
असली हीरा भी ऐसी ही एक अनकही सच्चाई है
जो धरती की गहराइयों में वर्षों तक ताप और दबाव सहकर
अपनी पहचान तक पहुंचता है।
वह अचानक नहीं चमकता, उसे गढ़ा जाता है।
और शायद इसी कारण उसकी आभा केवल दिखाई नहीं देती,
भीतर तक उतर जाती है।
आज जब विकल्पों की दुनिया में
लैब में तैयार किए गए हीरे भी मौजूद हैं,
तब असली हीरे का महत्व और स्पष्ट हो जाता है।
वह प्रकृति की देन है, वक्त की कसौटी पर खरा उतरा हुआ,
हर रूप में अद्वितीय।
लैब उसका आकार दे सकती है, पर उसकी यात्रा नहीं ।
उसकी कहानी नहीं।
ठीक एक स्त्री की तरह
जो जीवन के हर अनुभव, हर संघर्ष, हर सीख से
अपने व्यक्तित्व को गढ़ती है।
वह टूटती है, फिर संभलती है,
और हर बार पहले से अधिक प्रखर होकर उभरती है।
असली हीरा भी अंधेरे की कोख से निकलकर
अपनी असली चमक तक पहुंचता है।
दोनों की रोशनी बाहर से नहीं, भीतर से जन्म लेती है।
असली हीरा केवल सुंदर नहीं होता वह प्रमाणिक होता है।
वह वैभव नहीं, विरासत होता है।
पीढ़ियों तक साथ निभाने वाला, हर उस पल का साक्षी
जो जीवन में स्थायी हो।
जैसे हर स्त्री की कहानी अलग होती है, वैसे ही हर असली हीरा भी ।
वह केवल आभूषण नहीं
वक्त, सच्चाई और स्थायित्व की जीवित अभिव्यक्ति है।
एक ऐसा सौंदर्य जो क्षणिक नहीं, शाश्वत होता है।
उसकी चमक देखी नहीं जाती, महसूस की जाती है।

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