एक के बाद एक रेवती के साथ जो घटता गया, वह उस के दुखों को और बढ़ाता गया. जिस मानसिक यंत्रणा से वह गुजर रही थी, देख कर लगता था जैसे जिंदगी उस की परीक्षा ले रही थी कि वह कितने दुख झेल सकती है.
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