रोजसुबह उठ कर अपने लिए चायनाश्ता बनाबना कर ऊब चुका था देव. मन ही मन सोचता कि काश, अनु होती, तो वह बैड टी का मजा ले रहा होता. घड़ी पर नजर डाली, तो 9 बज चुके थे. झटपट उठ कर फ्रैश होने के बाद उस ने एक चूल्हे पर चाय रखी और दूसरे पर ब्रैड सेंकने लगा. जब से अनु मायके गई थी देव का रोज सुबह का यही नाश्ता होता था. दोपहर का खाना वह औफिस की कैंटीन में खा लेता और रात के खाने का कुछ पता नहीं होता. कभी बाहर से मंगवा लेता, तो कभी खुद कुछ बना लेता. अनु के बिना 15 दिन में ही उस की हालत खराब हो गई है, तो आगे और दिन कैसे गुजरेंगे, सोच कर ही वह सिहर उठा. तभी अनु का फोन आ गया.

‘‘गुड मौर्निंग जानू,’’ अनु पति देव को प्यार से जानू बुलाती थी, ‘‘कैसे हो? मन लग रहा है मेरे बिना?’’ हमेशा की तरह एक किस के साथ अनु ने पूछा.

‘‘अच्छा हूं पर बहुत ज्यादा नहीं. तुम बताओ क्या कर रही हो?’’ बात करते हुए जब ब्रैड जलने की बदबू आई तो अचानक देव चीख पड़ा.

‘‘क्या हुआ देव?’’ घबरा कर अनु ने पूछा.

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‘‘हाथ जल गया यार,’’ देव हाथ झटकते हुए बोला, ‘‘बहुत हंसी आ रही है न? हंस लो हंस लो, अभी तुम्हारे हंसनेखेलने के दिन हैं बेबी…अभी तो तुम वहां महारानी की तरह रह रही होगी. मांभाभियां तरहतरह के व्यंजन बना कर खिला रही होंगी. और मैं यहां खुद हाथ जला रहा हूं.’’

‘‘अच्छा, और पापा कौन बनेगा? पता भी है तुम्हें कि मां बनने में कितनी तकलीफ सहनी पड़ती है औरतों को? देखा है मैं ने भाभी को, जब चिंटू पैदा होने वाला था तब उन्हें कितनी तकलीफ हुई थी. मैं तो सोच कर ही डरी जा रही हूं कि कहीं मुझे भी…’’

‘‘जरूरी तो नहीं कि भाभी की तरह तुम्हें भी तकलीफ हो… आ जाऊंगा न डिलिवरी के कुछ दिन पहले ही, अनु को धैर्य बंधाते हुए देव ने कहा और फिर फोन रख दिया.

चाय के साथ उसी जली ब्रैड को किसी तरह निगल कर औफिस चला गया. अनु थी तब न तो उसे सुबह जल्दी उठने की चिंता होती थी और न ही नाश्तेचाय की. अब उसे सब समझ में आने लगा कि अनु अपनी जगह कितनी सही थी, आज देव का वजन संतुलित है तो सिर्फ अनु की वजह से, क्योंकि वही उस के पीछे पड़ कर उसे वौक पर ले जाती और जिम भी भेजती थी. हैल्थ को ले कर जरा भी लापरवाही अनु को पसंद नहीं थी.

उधर फोन रख कर अनु देव को ले कर चिंतित हो उठी. सोचने लगी कि अगर यहां आना जरूरी न होता, तो वह हरगिज न आती. दरअसल, शादी के 5 साल बाद अनु मां बनने जा रही थी. जब वह पहली बार मां बनने वाली थी तब उस की मां ने कहा था कि वह यहां आ जाए, क्योंकि डिलिवरी के वक्त किसी अनुभवी का साथ होना जरूरी है. लेकिन वह नहीं मानी थी और यह बोल कर आने से मना कर दिया था कि देव सब संभाल लेगा.

मगर वही हुआ जिस बात का अनु की मां को डर था. अचानक 1 दिन के लिए औफिस के जरूरी काम से देव को बाहर जाना पड़ गया. देव ने कहा भी कि वह नहीं जाएगा, चाहे कितना भी जरूरी क्यों न हो, पर अनु ने यह कर उसे भेज दिया कि काम में लापरवाही अच्छी नहीं और फिर क्या एक दिन भी वह अपना खयाल नहीं रख सकती? देव के जाने के अगले दिन वह नहाने बाथरूम गई तो उसे ध्यान ही नहीं रहा कि बाथरूम गीला है. वहां थोड़ी फिसलन भी थी. जैसे ही बाथरूम में घुसी, उस का पैर फिसल गया और वह गिर पड़ी. वह तो अच्छा था कि घर का मेन दरवाजा खुला था, तो उस के चीखने की आवाज से पड़ोसी दौड़े आए और उसे जल्दी अस्पताल ले गए. मगर लाख कोशिश के बाद भी डाक्टर अनु के बच्चे को नहीं बचा पाए. उस के बाद कई साल तक अनु मां नहीं बन पाई. डाक्टर का कहना था कि स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कते हैं इलाज के बाद ही यह मां बन पाएगी.

खैर, इस बार अनु प्रैगनैंट हो गई. डाक्टर ने अच्छी तरह समझा दिया कि इस बार कोई लापरवाही न बरती जाए. जहां तक हो सके अनु आराम करे. देव और अनु ने भी इस बार कोई रिस्क लेना नहीं चाहा. सोच लिया देव ने कि चाहे उसे कितनी भी तकलीफ क्यों न हो, वह अनु को उस की मां के घर छोड़ आएगा.

शाम को औफिस से आते ही देव सोफे पर लेट गया. थक कर इतना चूर हो गया था कि लेटते ही उसे नींद आ गई. आंखें तब खुलीं जब अनु का फोन आया.

‘‘लगता है बहुत थक गए हो? एक काम करो, बाहर से ही कुछ मंगवा लो,’’ कह अनु ने फोन रख दिया.

देव अपने लिए खाना और्डर करने जा ही रहा था कि तभी दरवाजे की घंटी बज उठी.

‘इस वक्त कौन हो सकता है? मन ही मन सोचते हुए देव ने एक नजर दरवाजे पर और दूसरी घड़ी पर डालते हुए दरवाजा खोला तो सामने एक सुंदर, छरहरी, गोरी 30-32 साल की महिला खड़ी मुसकरा रही थी.

अपने घर, वह भी रात के इस वक्त किसी अनजान महिला को देख देव हकला कर बोला, ‘‘आ… आप… आप कौन?’’

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‘‘जी मैं प्रिया, आप के ऊपर वाले फ्लोर में रहती हूं,’’ पूरे आत्मविश्वास से उस महिला ने जवाब दिया.

‘‘पर मैं तो आप को…’’

‘‘हां, आप मुझे नहीं जानते, पर मैं आप को जानती हूं,’’ देव की बात को काटते हुए वह महिला बोली, ‘‘अनु के हसबैंड हैं आप और अभी वे अपने मायके गई हुई हैं डिलिवरी के लिए,’’ उस ने कहा. उस की बात सुन देव हैरानी से उसे देखने लगा. फिर सोचने लगा कि इसे इतना सबकुछ कैसे पता है? और वह उसे कैसे नहीं जानता, जबकि दोनों एक ही बिल्डिंग में रह रहे हैं?

‘‘ज्यादा मत सोचिए, क्योंकि अभी 1 महीने पहले ही मैं यहां शिफ्ट हुई हूं और वैसे भी आप सुबह औफिस चले जाते हैं और आते ही माचिस की डब्बी में बंद हो जाते हैं, तो आप को कैसे पता चलेगा कि कौन नया आदमी आया और कौन पुराना आदमी चला गया?’’

‘‘पुराना आदमी मतलब?’’ देव ने पूछा.

‘‘पुराना आदमी मतलब कि जो पहले आप के ऊपर अमन दंपती रहते थे न, उन्हीं के घर में मैं रहने आई हूं.’’

‘‘अच्छा…’’ देव ने अपनी याददाश्त पर जोर डाला. उसे याद आया कि हां ऊपर पंजाबी दंपती रहते थे.

‘‘मगर यह माचिस की डब्बी… क्या मतलब?’’ देव ने पूछा.

वह मुसकराते हुए बोली, ‘‘क्या अपने घर के अंदर नहीं बुलाएंगे? बाहर से ही सरका देने का इरादा है?’’

‘‘अरे, प्लीज आइए न,’’ देव थोड़ा सरक गया ताकि वह घर के अंदर दाखिल हो सके.

‘‘माचिस की डब्बी का मतलब है यह अपार्टमैंट,’’ सोफे पर बैठते हुए वह महिला बोली, ‘‘देख नहीं रहे हैं कितने छोटेछोटे कमरे हैं. कभीकभी तो दम घुटने लगता है मेरा अपने घर में. बड़े शहरों की यही समस्या है. सुविधाएं तो बहुत होती हैं, पर जगह बहुत सीमित और लोग भी यहां के इतने मतलबी की किसी को किसी से लेनादेना नहीं. घर में घुसते ही ऐसे पैक हो जाते हैं जैसे माचिस की डब्बी में तीली.’’

उस की बातों पर देव को हंसी आ गई.

‘‘अरे बातोंबातों में मैं भूल ही गईर् कि मैं आप के लिए खाना ले कर आईर् हूं,’’ कहते हुए प्रिया ने उसे खाना दिया.

खाना देख कर देव चौंका. फिर कुछ बोलता कि उस से पहले वह बोल पड़ी, ‘‘मैं समझ गई. आप यही कहना चाह रहे हैं न कि इस की क्या जरूरत थी? लेकिन लगा खुद के लिए बना ही रही हूं जो जरा ज्यादा बना लेती हूं. वैसे सुबह की जली ब्रैड की खुशबू उतनी भी खराब नहीं थी,’’ बोल कर जब व हंसी, तो देव को भी हंसी आ गई.

बातोंबातों में ही उस ने बताया कि वह लखनऊ से है और उस का पति दुबई में अपना व्यापार करता है. वह भी वहीं रह रही थी, पर उसे अपने देश के लोगों के लिए कुछ करना था, इसलिए वह यहां आ कर एक एनजीओ से जुड़ गई.

‘‘आज के लिए बस इतना ही और बरतन की चिंता मत कीजिएगा. सुबह आ कर ले जाऊंगी,’’ कह कर वह चली गई.

देव उसे जाते देखता रह गया. फिर सोचने लगा कि कैसी अजीब औरत है यह?

सुबह भी बरतन लेने के बहाने वह देव के लिए आलूपरांठे और दही ले कर पहुंच गई.

‘‘इस की क्या जरूरत थी प्लीज, आप नाहक परेशान हो रही हैं,’’ देव बोला.

मगर वह कहने लगी, आप में मुझे अपने भाई का अक्स दिखाई देता है जो अब इस दुनिया में नहीं रहा.

‘‘ओह, सौरी, मेरा इरादा आप का दिल दुखाने का नहीं था,’’ अफसोस जताते हुए देव बोला.

अब वह रोज देव के लिए कुछ न कुछ बना कर ले आती और देव उसे मना नहीं

कर पाता.

देव अनु को सब बताना चाहता था, पर डर भी रहा था कि वह फिर उसे डांटेगी और कहेगी कि क्यों वह इतनी जल्दी किसी पर भरोसा कर बैठता है? लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी वह चुप न रह सका और अनु को सब बता दिया.

सुनने के बाद अनु कहने लगी, ‘‘हां… याद आया. मेरे यहां आने के 1 हफ्ता पहले ही वह हमारे ऊपर वाले फ्लैट में शिफ्ट हुई थी. ज्यादा तो नहीं, पर हलकीफुलकी बातें हुई थीं उस से. बता रही थी कि  वह भी लखनऊ से है. चलो कोई नहीं, खाना तो मिल रहा है न तुम्हें घर जैसा… पर सिर्फ खाना ही खाना, कुछ और मत खाने लगना,’’ देव को छेड़ते हुए वह हंस पड़ी.

अब तो यह रोज की बात हो गई. देव के लिए वह अकसर घी, मसालों में सराबोर सब्जियां, चावल, पूरी रायता, दाल, सलाद, मिठाई आदि ले कर पहुंच जाती और जब देव कहता कि क्यों वह उस के लिए इतना परेशान होती है तो वह कहती कि उसे भी इसी तरह का खाना पसंद है, तब देव ने हैरानी से पूछा, ‘‘आप इतनी फिट कैसे हैं?’’

वह बोली, ‘‘मैं रोज वाक पर तो जाती ही हूं, जिम जाना भी नहीं भूलती.’’

‘‘यह बात है तो फिर कल से मैं भी आप को जौइन करता हूं,’’ देव ने कहा.

प्रिया उछल पड़ी. अब रोज सुबहसवेरे दोनों वाक पर निकल जाते और शाम को जिम जाना भी दोनों के रूटीन में शामिल हो गया.

एक दिन जब देव अपने होने वाले बच्चे का जिक्र करने लगा, तो अचानक प्रिया का

चेहरा उदास हो गया.

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कारण पूछने पर वह कहने लगी, ‘‘कुदरत ने उसे मां बनने का मौका ही नहीं दिया. बहुत इलाज करवाया, पर सभी डाक्टरों का यही कहना था कि मैं कभी मां नहीं बन सकती. अब मैं ने और पति ने यह तय किया है कि अनाथ बच्ची को गोद ले लेंगे.’’

देव उसे देखता रह गया. उसे लगा कि कितनी अच्छी औरत है यह जो एक अनाथ बच्ची को गोद लेने की सोच रही है. बोला, ‘‘वाह, कितना उत्तम विचार है आप का. आप को तो बच्चे का सुख मिलेगा ही, उस बच्चे को भी एक घर और मातापिता का सुख मिल जाएगा व उस की जिंदगी संवर जाएगी. अगर आप की तरह ही और लोगों की भी सोच हो जाए न, तो कोई भी बच्चा इस दुनिया में अनाथ नहीं रहेगा,’’ प्रिया के प्रति भावना से भर कर देव कहने लगा.

‘‘देवजी, कह तो आप सही रहे हैं पर हम किसी को इस बात के लिए फोर्स तो नहीं कर सकते हैं न? फिर वैसे भी बहुत से लोग बच्चे को गोद तो ले लेते हैं, पर वह प्यार और समर्पण नहीं दे पाते, जो उस बच्चे को चाहिए होता है. इस से तो अच्छा है बच्चा गोद ही न लें.’’

‘‘हां, सही कह रही हैं आप. वैसे अब काफी जांचपरख के बाद ही जरूरतमंदों को बच्चा गोद दिया जाता है,’’ देव की बात पर प्रिया ने भी सहमति जताई.

प्रिया का साथ पा कर देव का अकेलापन कुछ हक तक दूर होने लगा था. जब भी वह घर में बोर होने लगता, प्रिया के साथ कहीं घूमने निकल जाता और खाना भी बाहर ही खा कर आता.

प्रिया कहती, ‘‘क्या जरूरत थी बाहर खाना खाने की?’’

‘‘आप अकसर अपने हाथों से बना कर खिलाती हैं, तो क्या मैं आप को कभीकभार बाहर नहीं खिला सकता?’’

‘‘अच्छा, तो बाहर खाना खिला कर आप मेरे खाने का बदला चुकाना चाहते हैं?’’ प्रिया हंसते हुए बोली.

देव झेंपते हुए कहता, ‘‘ऐसी बात नहीं है प्रियाजी, लेकिन हां, जब अनु आएगी तब एक दिन मेरे घर और दूसरे दिन आप के घर पार्टी होगी हमारी, ठीक है न?’’

प्रिया बोली, ‘‘डन.’’ प्रिया और देव की दोस्ती इतनी गहरी हो गई थी कि अब दोनों एकदूसरे पर विश्वास करने लगे थे.

सुबह से ही मौसम का मिजाज बिगड़ा लग रहा था. हवा तो नाम मात्र की भी नहीं चल रही थी. वातावरण इतना शुष्क कि पूछो मत. लेकिन कुछ देर बाद ही पूरे आकाश पर काले बादल मंडराने लगे. लग रहा था धूआंधार बारिश होगी. सच में कुछ पलों में ही बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बूंदाबादी और फिर झमाझम बारिश शुरू हो गई जिसे देख देव के चेहरे पर मुसकान दौड़ गई. वह बालकनी में खड़ा हो गया. सोचने लगा कि काश इस बारिश में पकौड़े मिल जाते, तो मजा आ जाता.

तभी प्रिया का फोन आ गया. बोली, ‘‘मैं गरमगरम पकौड़े बना रही हूं. आप जल्दी आ जाएं.’’

‘‘सच प्रियाजी? अभी आता हूं.’’

‘‘पकौड़े बहुत ही टेस्टी बने हैं, पेट भर गया पर मन नहीं भर रहा है,’’ एक और पकौड़ा उठाते हुए देव बोला.

प्रिया ने और पकौड़े उस की प्लेट में रख दिए और बोली, ‘‘अभी तो पार्टी शुरू हुईर् है.’’

‘‘अरे, सच में प्रियाजी… अब तो पेट फट जाएगा… इतना खिला दिया आप ने,’’ कह देव ने घड़ी पर नजर डाली. 9 बज चुके थे. सोचा अब चला जाए. पर प्रिया ने एक कप चाय और पीने की बोल कर उसे रोक लिया. चाय पीतेपीते देव का सिर घूमने लगा. कुछ ही पलों बाद वह वहीं सोफे पर लुढ़क गया. जब प्रिया को लगा कि वह बेसुध पड़ गया और अब उसे कोई होश नहीं है, तो उसे किसी तरह कमरे में सुला दिया.

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अनायास ही प्रिया के होठों पर मुसकान बिखर आई. बाथरूम में जा कर वह अपने शरीर को मलमल कर नहाते हुए गुनगुनाने लगी, ‘‘सजना है मुझे सजना के लिए… जरा उलझी लटें संवार लूं… हर अंग का रंग निखार लूं कि सजना है मुझे…’’

नहा कर उस ने कपड़े ऐसे पहने कि अंदर सब साफसाफ दिखाई दे रहा था. सजसंवर कर जब उस ने आईने के सामने खड़ी हो अपना अक्स निहारा, तो खुद में ही लजा गई. फिर उस ने पलंग पर सोए देव को निहारा. उस का गठीला बदन देख उस ने अपने होंठ को दांत से ऐसे दबा लिया जैसे अब बात उस की बरदाश्त के बाहर हो गई हो. हौले से देव के पास गईर् और फिर लाइट बंद कर दी.

मेघ जैसे पूरी रात गरजबरस कर शांत हो चुके थे, वैसे ही प्रिया भी आज पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी. मगर देव के जीवन में तूफान आ चुका था. सुबह जब देव की नींद खुली और प्रिया को अपने पास निर्वस्त्र पाया, तो उस के होश उड़ गए.

‘‘म… म… मैं यहां कैसे और आ… आप…’’ हकलाते हुए देव की आधी बातें उस के मुंह में ही रह गईं.

आंसू बहाते हुए प्रिया कहने लगी कि रात को देव ने उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. उस ने बहुत कहा भी कि वह उसे भाई मानती है, पर वह कहने लगा कि मानने से क्या होता है… वह उसे अच्छी लगती है. कितनी कोशिश की, पर देव की मजबूत बांहों से वह खुद को आजाद न कर पाई.

अपनी हरकतों पर देव शर्मिंदा हो गया. उसे लगा कि वह कितना नीच इंसान है, जो बहन समान औरत को अपनी वासना का शिकार बना डाला. उस ने कभी किसी औरत को नजर उठा कर भी नहीं देखा था, तो फिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई उससे?

जो भी हो, गलती तो हो ही चुकी थी और इस बात के लिए वह प्रिया से माफी भी मांगना चाहता था, पर उस की हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि वह प्रिया को फोन करे या उस के सामने जाए. प्रिया ने भी उस के बाद से उसे फोन करना बंद कर दिया था. कहीं प्रिया मेरे ऊपर बलात्कार का केस तो नहीं कर देगी? कर दिया तो क्या होगा? क्या बताएगा वह दुनिया वालों को…अनु को कैसे मुंह दिखाएगा वह? ये सब बातें सोचसोच कर देव की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ा जा रहा था. उस की ठंडी पड़ती आवाज सुन कर अनु पूछती भी कि क्या बात है सब ठीक तो है न? पर वह उसे कुछ भी बोल कर शांत कर देता.

मगर एक दिन खुद प्रिया अचानक उस के घर पहुंच गई, जिसे देख देव के पसीने छूट गए. हकलाते हुए किसी तरह उस की आवाज निकल पाई, ‘‘प्रियाजी, मैं… मैं आप से माफी मांगने ही जा…’’

‘‘किस बात की माफी देवजी? जो हुआ उस में न तो आप की गलती थी न ही मेरी. बस एक अनहोनी होनी थी सो हो गई. मिट्टी डालिए अब उस बात पर,’’ सुन कर देव की जान में जान आई. लगा उसे कि कितनी अच्छी औरत है यह.

‘‘मैं यहां किसी और काम से आई हूं देव. वह क्या है कि अचानक मुझे कुछ रुपयों की जरूरत पड़ गई है और अभी मेरे पास उतने पैसे नहीं है. आप मेरी मदद कर दें. मैं जल्द ही लौटा दूंगी,’’ कह उस ने देव की तरफ देखा.

‘‘कितने पैसे?’’ देव ने पूछा.

‘‘50 हजार. पैसे आते ही मैं आप को लौटा दूंगी,’’ देव की आंखों में झांकते हुए वह बोली.

मरता क्या न करता. लौकर में जितने भी पैसे पड़े थे उन्हें प्रिया को ला कर देते हुए बोला, ‘‘प्रियाजी, अभी तो मेरे पास 40 हजार रुपए ही हैं. आप रख लीजिए,’’ प्रिया को पैसे दे कर उसे लगा जैसे उस के मन का बोझ कुछ कम हुआ.

मगर अब तो वह उस से कभी 10 हजार, कभी 20 हजार, तो कभी 30 हजार मांगने पहुंच जाती और देव को देने ही पड़ते. आखिर देव भी इतने पैसे कहां से लाता भला? अत: एक दिन उस ने पैसे देने से मना कर दिया. मगर यह बात प्रिया को सहन नहीं हुई. बोली, ‘‘तुम्हें क्या लगता है देव, मैं उस बात को भूल गई?’’ तुरंत ही वह आप से तुम पर आ गई.

‘‘तुम्हारी करतूतों का कच्चा चिट्ठा है मेरे पास… देखना है?’’ कह कर उस ने वह वीडियो देव को दिखा दिया जिस में देव और प्रिया एकसाथ वीडियो में साफसाफ दिख रहे थे. देव प्रिया पर सवार है और वह उस से बचने की कोशिश कर रही है. वीडियो देखते ही देव की कंपकंपी छूट गई.

‘‘क्या कहते हो, दे दूं पुलिस को या फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर दूं? अनु भी देख लेगी, क्यों?’’

उस की हरकतें देख देव सिहर उठा. लगा, अगर यह वीडियो अनु ने देख लिया, तो अनर्थ हो जाएगा. अत: वह और पैसे देने को तैयार हो गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि वह उस के साथ ऐसा क्यों कर रही है? वह तो उसे अपना भाई समान मानती थी, फिर? यह बात जब देव ने पूछी, तो प्रिया कहने लगी, ‘‘क्योंकि तुम मुझे पसंद आ गए?’’ हंसते हुए वह बोली, ‘‘मजाक कर रही हूं. बात दरअसल यह है कि मुझे एक बड़ा सा घर लेना है और उस के लिए मुझे क्व50 लाख की जरूरत है, तो वे मुझे तुम से चाहिए. ठीक है एक बार में नहीं, थोड़ेथोड़े कर दे दो, पर देने तो पड़ेंगे तुम्हें देव, नहीं तो मैं क्या कर सकती हूं जान चुके हो तुम.’’

समझ गया देव कि ये सब प्रिया की सोचीसमझी चाल थी. जानबूझ कर उस ने उस से दोस्ती की थी ताकि उस से पैसे ऐंठे जा सके. बोला, ‘‘तो तुम ने ये सब जानबूझ कर किया… लेकिन तुम तो मुझे अपना भाई मानती थी न, तो फिर कैसे मेरे साथ संबंध… सिर्फ पैसे के लिए तुम इतनी नीचे गिर गई. ठीक है कर लो जो करना है, पर हारोगी एक दिन तुम कह देता हूं,’’ देव भर्राए गले से बोला.

‘‘जीतहार की किसे पड़ी है देव? मुझे तो सिर्फ पैसे से मतलब है. वह मिलता रहे, फिर मुझे कोई आपत्ति नहीं. वैसे एक बात कहूं? कहीं न कहीं प्यार करने लगी हूं मैं तुम से,’’ इठलाती हुई बोल कर वह देव के गले से लटक गई और उसे चूम लिया.

‘‘ठीक है अब चलती हूं, पर जबजब मेरे हाथों में खुजली हो रही हो, पैसे रख देना जितने मैं कहूं और हां, जब कभी मन हो आ भी जाना. मैं मना नहीं करूंगी,’’ कह कर वह हंस पड़ी.

आज देव को इस बात का एहसास हो रहा था कि अनु सही कहती थी, किसी इंसान को बिना जांचेपरखे उस पर भरोसा नहीं कर लेना चाहिए. पर उस वक्त वह उस की बातों को मजाक में उड़ा देता था पर आज वह खुद की नजरों में ही मजाक बन कर रह गया था.

एक दिन फिर उस ने देव को अपने घर बुलाया. जबरन उसे संबंध बनाने पर मजबूर किया और फिर 10 लाख की डिमांड कर बैठी.

‘‘अब मैं तुम्हें एक भी पैसा नहीं दूंगा.’’ गलती मेरी थी जो मैं ने तुम्हें पहचानने में भूल की, पर अब नहीं,’’ कह कर देव वहां से निकलने लगा. तभी प्रिया की बातों ने उसे रुकने पर मजबूर कर दिया. ‘‘ठीक है तो फिर मत दो पैसे, मैं भी यह वीडियो वायरल कर रही हूं,’’ कह कर उस ने अपना फोन औन किया ही था कि देव ने उस के हाथ से फोन छीन लिया.

‘‘क्या चाहती हो तुम?’’ देव ने अपनी आंखें तरेर कर पूछा. मन तो कर रहा था उस का कि प्रिया की जान ही ले ले, लेकिन वह ऐसा भी नहीं कर सकता था.

अपनी लटों को उंगलियों से घुमाते हुए बोली, ‘‘बस यही कि जबजब मैं पैसे मांगू, मुझे मिल जाने चाहिए और इस के लिए कोई बहाना नहीं, नहीं तो अंजाम क्या होगा जान चुके हो तुम.’’

बेचारा देव बुरी तरह से प्रिया के चंगुल में फंस चुका था. इस भंवर से निकलने का अब उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था.

9 महीने पूरे होते ही अनु ने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया और यह सोच कर जल्द ही वापस देव के पास आ गई कि अब वह उसे ज्यादा तकलीफ नहीं दे सकती. लेकिन यहां आ कर देव के बदले व्यवहार से वह अचंभित थी. जहां बच्चे के नाम से ही देव रोमांचित हो उठता था और कहता था कि वह अपने बच्चे के लिए यह करेगा, वह करेगा, उसे कभी अपनी गोद से नीचे नहीं उतारेगा. अब वही देव अंशुल को गोद में लेने से भी कतराता. अंशुल के लिए खिलौनेकपड़े खरीदने की बात पर ही वह भड़क जाता और कहता कि फालतू के खर्चे बंद करो.

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‘क्या हो गया है देव को? क्यों छोटीछोटी बातों पर इतना आवेग से भर जाता है? अब तो वह अनु से भी दूर भागने लगा था, क्योंकि जब भी अनु देव के करीब जाती, यह कह कर उस से दूर हट जाता कि आज नहीं, आज मैं बहुत थक गया हूं. लेकिन यह सब रोज की बातें होने लगी थीं.

एक रोज देव अपना मोबाइल चार्जर में लगा कर भूल गया और उसे पता ही नहीं

चला कि कब से उस का मोबाइल बज रहा है. हार कर अनु ने ही फोन उठा लिया. लेकिन अभी वह हैलो बोलती ही कि उधर से एक औरत की आवाज ने उसे सकते में डाल दिया. कहने लगी, ‘‘मैं तुम्हें 2 दिन से कौल कर रही हूं. उठाते क्यों नहीं? देखो, मुझे मजबूर मत करो, अगर मेरा दिमाग फिर गया तो जरा भी देर नहीं लगेगी मुझे यह वीडियो वायरल करने में. फिर जानते हो न तुम्हारा क्या हश्र होगा? सीधे से कह रही हूं क्व15 लाख दे दो अभी. फिर जब भी मांगू दे देना और हां, आज रात आ जाना, बदन टूट रहा है मेरा,’’ कह कर उस औरत ने फोन रख दिया.

सुन कर तो जैसे अनु के पैरों के नीचे की जमीन ही खिसक गई. उस का पूरा शरीर थरथराने लगा. कभी वह फोन को देखती, तो कभी देव को. समझ नहीं आ रहा था कि यह औरत है कौन और किस बात के वह देव से पैसे मांग रही है व कौन से वीडियो को वायरल करने की धमकी दे रही है? ढेरों सवाल उस के दिमाग में उथलपुथल मचाने लगे. पूछना चाहा देव से, मगर उस के कदम ठिठक गए, क्योंकि पहले वह उस बात की तह तक जाना चाहती थी.

आज गौर से अनु ने देव का चेहरा देखा, कितना सूख चुका था. दुबला भी कितना हो गया था बेचारा. क्यों नहीं समझ पाई मैं उस के मन के दर्द को? क्यों लड़ती रही बेवजह उस से? पूछती तो एक बार कि आखिर परेशानी क्या है उसे. अपनेआप में ही बोल अनु रो पड़ी. कुछ देर बाद फिर देव का फोन बजा और इस बार देव ने ही फोन उठाया. अनु सुन न ले कहीं, यह सोच कर वह कमरे से बाहर चला गया.

काफी देर बाद जब वह वापस आया, तो उस का चेहरा काफी उतरा हुआ था. रातभर अनु सो नहीं पाई. देखा देव भी टकटकी लगाए छत निहार रहा था.

‘‘देव,’’ बड़ी हिम्मत कर वह देव के करीब गई, ‘‘नहीं बताओगे मुझे कि इन दिनों तुम्हारे साथ क्या हुआ? हम ने वादा किया था न देव कि कभी एकदूसरे से कोई बात नहीं छिपाएंगे, तो फिर क्यों, क्यों तुम ने मुझ से इतनी बड़ी बात छिपाई?’’

अनु की बात सुन देव सकपका गया. उसे लगा कि कहीं अनु को सब पता तो नहीं चल गया? उस के होंठ कुछ बोलने को हिले, मगर शब्द बाहर न आ सके.

‘‘सौरी मैं तुम्हारी तकलीफों को समझ न पाई और तुम से लड़तीझगड़ती रही, पर मैं भी तो एक इंसान ही हूं न देव, तो कैसे तुम्हारे मन में छिपे दर्द को देख पाती, जब तक तुम नहीं बताते…बताओ न कौन है वह औरत, जिस ने तुम्हें परेशान कर रखा है?’’

‘‘क… कौन औरत? नहीं तो, कोई नहीं,’’ चेहरे को दूसरी ओर घुमाते हुए देव बोला.

‘‘इधर देखो देव, मेरी तरफ,’’ देव का चेहरा अपनी ओर घुमाते हुए अनु बोली, ‘‘वही जिस का सुबह फोन आया था और तुम घबरा कर घर से निकल गए? देखो देव, जो सही है बताओ मुझे. हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं,’’ अनु ने कहा.

देव की आंखें भर आईं और फिर उस ने सारी बात प्रिया को बता दी.

सुन कर अनु की आंखें फटी की फटी रह गई. बोली, ‘‘इतनी बड़ी बात हो गई और तुम ने मुझे बताना जरूरी नहीं समझा, यह सोच कर कि मैं तुम्हें गलत समझूंगी? क्या इतना ही जाना तुम ने मुझे? मैं तुम्हारी पत्नी हूं देव, सुखदुख की साथी, तो भरोसा तो किया होगा मुझ पर? खैर, जो हो गया सो हो गया, पर अब मैं निकालूंगी तुम्हें इस भंवर से और इस के लिए हमें क्या करना होगा सुनो,’’ कह कर अनु ने देव को अपना प्लान बता दिया.

‘‘पर तुम्हें लगता है जैसा हम सोच रहे हैं वैसा हो पाएगा, क्योंकि वह बहुत ही शातिर औरत है. तुम नहीं जानती उसे,’’ शंकित होते हुए जब देव ने कहा, तो अनु ने उस के कंधे पर हाथ रख कर धैर्य बंधाया, जरूर हो पाएगा पर थोड़ा वक्त लगेगा. हम धीरज नहीं खोएंगे.’’

अपने प्लान के अनुसार कुछ ही दिनों में अनु ने प्रिया से गाढ़ी मित्रता कर ली. जब अनु को लगने लगा कि अब प्रिया उस की हर बात पर विश्वास करने लगी है, तो एक दिन उस ने अपना आखिरी दाव भी खेल डाला.

‘‘प्रिया, आज मुझे अंशुल को डाक्टर के पास ले कर जाना है शायद देर लग जाए, तो तुम मेरे घर की चाबी रखो और जब देव आए, तो उन्हें दे देना और हो सके, तो प्लीज उन्हें खाना खिला देना वरना वे भूखे रह जाएंगे, क्योंकि उन की आदत नहीं खुद से खाना निकाल कर खाने की, प्लीज,’’ हाथ जोड़ कर जब अनु ने कहा, प्रिया को तो लगा कि उसे मुंहमांगा इनाम मिल गया हो.

वह हंसते हुए बोली, ‘‘अरे, हाथ क्यों जोड़ रही हो अनु? यह तो मेरे लिए खुशी…मेरा मतलब है चाबी भी दे दूंगी और खिला भी दूंगी तेरे पिया को.’’

प्रिया को हंसते देख अनु का कलेजा जल उठा. लगा, उस के देव को रुला कर

यह चुड़ैल हंस रही है. हंस ले बेटा, कुछ समय और हंस ले, फिर मैं तुम्हें ऐसा सबक सिखाऊंगी कि जिंदगी भर याद रखेगी तू, मन ही मन बोलते हुए अनु के अधर टेढ़े हो गए.

अपने घर में प्रिया को देख देव शौक्ड हो गया. हकलाते हुए बोला, ‘‘तू… तुम यहां मेरे घर में? किसलिए आई हो?’’

पहले तो वह रहस्यमय ढंग से मुसकराई. फिर बोली, ‘‘तुम्हारी पत्नी ने अपनी सत्ता मुझे सौंप दी,’’ इठलाती हुई चाबी के गुच्छे को अपनी उंगलियों में घूमाती हुई प्रिया ने आंख मारी.’’

‘‘बंद करो अपनी बकवास… क्यों कर रही हो तुम ऐसा? आखिर बिगाड़ा क्या है मैं ने तुम्हारा? क्यों तुम मेरे पीछे हाथ धो कर पड़ी हो? प्रिया को परे धकेलते हुए देव लगभग चीख पड़ा,’’ तुम ने ही कहा था कि मुझ में तुम्हें अपने भाई का अक्स दिखाई देता है, जो अब इस दुनिया में नहीं रहा और यह सब… छि: शर्र्म नहीं आई तुम्हें ऐसा करते हुए?’’ जानबूझ कर देव ने फिर वही सब बातें दोहराईं, ‘‘उस दिन तुम ने प्लानिंग कर के मुझे अपने घर चायपकौड़े पर बुलाया था न? चाय में नशे की गोलियां भी जानबूझ कर मिलाई थीं, है न? रिश्ते के नाम पर धोखा दिया तुम ने मुझे? बलात्कार मैं ने नहीं, बल्कि तुम ने किया मेरा… बोलो क्या मैं झूठ बोल रहा हूं.’’

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‘‘नहीं, सच कह रहे हो तुम. हां, धोखे से ही मैं ने उस रात तुम्हें अपने घर बुलाया और चाय में नशे की गोलियां भी मिलाईं और फिर कमरे तक भी मैं ही तुम्हें ले कर गई. तुम्हारे कपड़े भी मैं ने ही उतारे और बिलकुल वैसा ही करवाया जैसे मैं ने चाहा. लेकिन बलात्कार… ठहाके मार कर प्रिया कहने लगी, ‘‘हां, मैं ने ही तुम्हारा बलात्कार भी किया, पर तुम साबित कैसे करोगे देव बाबू? क्योंकि जो दिखता है वही बिकता है न, जानते नहीं?

‘‘जब मैं ने तुम्हें पहली बार औडी गाड़ी से निकलते देखा तो उसी वक्त फैसला कर लिया कि इस मोटे मुरगे को फंसाना है. सच कहती हूं अब इस माचिस की डब्बी में रहने का मन नहीं करता देव. लगता है एक बड़ा घर हो, गाड़ी हो, नौकरचौकर हों और शारीरिक सुख भी. दोगे न तुम मुझे ये सब?’’ कह कर वह फिर ठहाके लगाने लगी.

‘‘अच्छा, तो इसलिए तुम ने ये सब किया. ताकि मुझे ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठ सको.’’

‘‘हां देव, इसलिए कहती हूं मुझे 50 लाख दे दो, फिर तुम अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते हो लूंगी, लेकिन तुम हो कि पैसे देने में टालमटोल किए जा रहे हो.’’

‘‘अगर मैं और पैसे देने से इनकार कर दूं तो?’’ देव ने पूछा. यह सुन कर वह उस पर ऐसे गुर्राई जैसे देव ने उस से कर्ज ले रखा हो. बोली, ‘‘तो तुम मेरे चंगुल से कभी बच नहीं पाओगे यह भी समझ लो,’’ मगर उसे यह नहीं पता था कि अनु बाहर खड़ी उस की सारी करतूतें सुन ही नहीं रही थी, बल्कि साथ में पुलिस को भी ले कर पहुंच गई थी.

‘‘बचोगी तो अब तुम नहीं हमारे चंगुल से प्रिया,’’ अचानक पुलिस को अपने सामने देख. प्रिया के होश उड़ गए.

देव कुछ कहता उस से पहले ही वह नकली आंसू बहाते हुए पुलिस को बताने लगी कि देव ने उस का बलात्कार किया और अब उसे ब्लैकमेल कर रहा है यह कह कर कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी, तो वह दुनिया के सामने उस का वीडियो वायरल कर देगा.’’

‘‘कौन सा वीडियो, वही जो तुम ने बनाया था उस रात?’’ महिला पुलिस ने डंडा घुमाते हुए पूछा, तो वह थर्रा उठी, ‘‘शर्र्म नहीं आई तुम्हें एक शरीफ इंसान को परेशान करते हुए?’’ कह महिला ने एक तमाचा उस के गाल पर दे मारा.

पुलिस इंस्पैक्टर बताने लगा कि यह औरत ठग है… अब तक यह लाखों रुपयों की ठगी कर चुकी है. दिल्ली पुलिस को कब से इस की तलाश थी… इस का असली नाम प्रिया नहीं, बल्कि सोनम हैं.

जांच के बाद प्रिया के घर से लाखों रुपए और वैसे ही कई वीडियो बरामद हुए, जिन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जातेजाते प्रिया ने देव को ऐसे देखा जैसे कह रही हो यह तुम ने अच्छा नहीं किया.

‘‘1 मिनट इंस्पैक्टर साहब,’’ कह कर अनु ने पहले तो प्रिया को एक जोरदार तमाचा जड़ा, फिर बोली, ‘‘तुम्हें क्या लगा एक झूठे वीडियो के बल पर तुम मेरे पति को ब्लैकमेल करती रहोगी और वे होते रहेंगे? क्यों नहीं किया वायरल, कर देती? जानती थी कि ऐसा कर के तुम ही फंस जाओगी, इसलिए नहीं किया… शर्म आती है मुझे तुम जैसी औरतों पर, जो चंद रुपयों के लिए बिछ जाती हैं मर्दों के सामने और जब पकड़ी जाती हैं, तो कहती हैं कि मर्द ने ही आबरू लूटी. ले जाइए इंस्पैक्टर साहब इसे मेरी नजरों के सामने से और ऐसी सजा दीजिए ताकि फिर कभी किसी शरीफ इंसान को ठगने की सोचे तक नहीं.

‘‘थैंक्यू अनु, मुझे इस भंवर से निकालने के लिए. अगर तुम ने वह आखिरी दाव न खेला होता, तो पता नहीं मेरा क्या होता,’’ कह कर देव ने उसे अपनी बांहों में भर लिया.

अनु भी अपने देव के आगोश में समा गई.

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