Hindi Story : यह  बिलकुल सच है कि दिल्ली दिल वालों की है. मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कसबे से दिल्ली आया था मैडिकल की कोचिंग लेने. मेरे किसान पिताजी की इच्छा थी कि मैं डाक्टर बन कर सेवा करूं. उन्होंने किसी तरह इंतजाम कर के मु झे यहां भेजा था. मेरा भी डाक्टर बनने का सपना था.

कोचिंग के पास ही में पीजी में रहने लगा. जहां रहता था वहां से कोचिंग के लिए पैदल का लगभग 20 मिनट का रास्ता था. रिकशे के पैसे बचाने के चक्कर में मैं पैदल ही कोचिंग जाता. 2-3 दिन पैदल गया चौथे दिन एक लड़की ने मु झ से कहा जो मेरी कोचिंग क्लास की थी और मेरे ही बैच की थी, ‘‘क्या तुम लाजपत नगर में रहते हो?’’

‘‘हां, आप कैसे जानती हैं?’’

‘‘मैं ने तुम्हें वहां से आते हुए देखा है. मैं भी वहीं से आती हूं.’’

‘‘आप भी पीजी में हैं क्या?’’

‘‘नहीं मैं तो यहीं दिल्ली की हूं खुद का घर है. अगर आप को एतराज न हो तो आप मेरे साथ मेरी स्कूटी से कोचिंग आ जा सकते हो.’’

उस ने यह प्रस्ताव इतनी शीघ्रता और सहजता से रख दिया कि मैं हैरान हो गया क्योंकि जब मैं अपने कसबे से ओटो से शहर में स्कूल जाता था तब कसबे की एक संपन्न परिवार की लड़की अपनी स्कूटी से स्कूल जाती थी तब मैं ने उस से कहा था हमारी राह एक है क्यों न साथ में चलें. पैट्रोल के आधे पैसे मैं दे दूंगा लेकिन उस ने साफ इनकार करते हुए यह कह दिया कि लोग क्या कहेंगे? और इस दिल्ली वाली लड़की ने तो अपनेआप ही बोल दिया.

मैं ने भी उस का प्रस्ताव आत्मीयता से स्वीकार कर लिया और रोज उस के साथ स्कूटी से

कोचिंग आनेजाने लगा.

2-3 दिन बाद वह कोचिंग के समय अनुसार पीजी के बाहर जोर से स्कूटी का हौर्न बजाने लगी. उस दिन में थोड़ा लेट हो गया था. चाय पी रहा था. पीजी वाली आंटी ने खिड़की से नीचे  झांका और मु झ से मुसकरा कर बोलीं, ‘‘किसी लड़की से कोचिंग के लिए लिफ्ट लेते हो?’’

‘‘जी आंटी, कोचिंग की है.’’

यह सुन कर आंटी मुसकरा दी और मैं धड़ाधड़ सीढि़यों से ऐसे उतरने लगा जैसे कहीं मेरी फ्लाइट मिस न हो जाए.

‘‘यार, अपना व्हाट्सऐप नंबर दो न इस तरह हौर्न बजाना अच्छा नहीं लगता.’’

उस के इस बिंदास अंदाज पर मैं अचंभित हो उठा.

अब वह मेरे साथ मेरी बाजू में ही बैठने लगी थी. अकसर वह हंस कर कहती, ‘‘तुम राहुल और मैं अंजली कितने बढि़या नाम हैं हम दोनों के.’’

एक दिन कोचिंग खत्म होने के बाद मैं ने उस से कहा, ‘‘अंजलि, आज मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगा.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘अपना कुछ सामान खरीदना है मु झे

मार्केट से.’’

‘‘कैसा सामान?’’ वह मुसकरा कर बोली.

‘‘अरे भई लेना है अपना कुछ पर्सनल सामान.’’

‘‘बताओ तो सही कौन सा पर्सनल सामान लेना है?’’ उस ने मु झे छेड़ने के अंदाज में कहा.

यह सुन कर मैं चिढ़ गया, ‘‘मैं क्यों बताऊं? क्या तुम लड़कियां कुछ बताती हैं? क्या

सामान लेती हैं?’’

‘‘हां, मैं बताती हूं तुम्हें हम लड़कियां क्या सामान खरीदती हैं. तुम बौएज अंडरगारमैंट्स खरीदते हो तो हम लड़कियां भी खरीदती हैं. तुम लोग शेविंग का सामान परफ्यूम आदि लेते हो तो हम क्रीम, लिपस्टिक इत्यादि खरीदती हैं. हम लोगों में सबकुछ समान है सिवा एक चीज के.’’

‘‘किस चीज के?’’ आश्चर्य से मैं ने पूछा.

‘‘मंथ के वे 5-6 दिन.’’

मैं तो शरमा गया उस की यह बात सुन कर.

‘‘क्यों शर्म आ रही है राहुल? तुम तो

विज्ञान के छात्र हो इतना तो जानते ही हो. इन्हीं 5-6 दिनों फाइव और सिक्स से ही हम स्त्रीपुरुषों को मातापिता बनने का सुख और गौरव प्राप्त होता है.’’

वह और आगे कुछ बोलती मैं ने उसे बता दिया कि मु झे चश्मा, बैल्ट, रूमाल इत्यादि लेने हैं.

‘‘ओह तो हमारे हीरो को यह सब लेना है तो चलो करोलबाग की गफ्फार मार्केट वहां पर ये सब चीजें मिल जाएंगी और वहीं पर छोलेभठरें खाएंगे. बहुत दिन हो गए करोलबाग के छोलेभठरे खाए,’’ वह मचलते हुए बोली.

‘‘अरे तुम्हें देर हो जाएगी घर पर सब चिंता करेंगे.’’

‘‘नो टैंशन यार, मैं अभी मौम को व्हाट्सऐप मैसेज कर देती हूं,’’ कहते हुए उस की उंगलियां मोबाइल के कीपैड पर चलने लगीं और साथ ही वह बोलने लगी, ‘‘डियर मौम, मैं अपने कोचिंग वाले दोस्त राहुल के साथ हूं. मेरा खाना मत बनाना. मैं 10 बजे तक घर आ जाऊंगी लव यू मौम.’’

रात के 10 बजे तक हम करेंगे क्या? मैं घबरा गया. मु झे लगा यह लड़की मु झे गांव का

सीधासादा छोरा समझ कर कहीं फंसा न दे.

‘‘अरे यार, यह दिल्ली है यह रात को ही गुलजार होती है. मार्केट में सामान खरीदेंगे. खाएंगेपीएंगे, घूमेंगेफिरेंगे फिर आराम से घर लौट जाएंगे. तुम्हें क्या प्रौब्लम है? मैं ने तो अपनी मौम को मैसेज कर दिया है न?’’

‘‘अंजलि, इतनी रात में कहीं तुम्हारे किसी परिचित ने मेरे साथ तुम्हें देख लिया तो?’’ मैं ने आशंका व्यक्त करी.

‘‘यहां कोई किसी को नहीं देखता है सब खुद को देखते हैं कि हम कैसे लग रहे हैं यानी सब खुद में ही मस्त और सैल्फी में व्यस्त,’’ कह कर जोर से खिलखिला पड़ी. सच में हमें लौटने में रात के 10 बज गए.

‘‘चलो राहुल, आज मैं तुम्हें मौमडैड से भी मिलवा देती हूं फिर तुम्हें तुम्हारे पीजी छोड़ दूंगी.’’

उस की फैमिली से मिलने के बाद वह मु झे पीजी छोड़ गई.

रातभर मैं अंजलि की यादों में खोया रहा. उसे ले कर मेरे दिल में हलचल सी होने लगी. सीधे शब्दों में कहूं तो मु झे उस से प्यार हो गया. इस वजह से मैं पढ़ाई से थोड़ा भटक गया जिस का उसे एहसास हो रहा था.

अंजलि एक दिन गंभीर स्वर में बोली, ‘‘राहुल, हमारे घूमनेफिरने और

ज्यादा बातें करने का असर हमारी पढ़ाई पर पड़ रहा है इसलिए अब अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस करते हुए हमें अपने लक्ष्य को भूलना नहीं चाहिए. मैं ने तो ठान लिया है कि मु झे डाक्टर ही बनना है और डाक्टर से ही शादी करनी है.’’

बस उस की इसी बात से मेरे अंदर तमाम ऊर्जा, जोश और उत्साह भर गया. मैं ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही केंद्रित कर दिया और खुद को डाक्टर अंजलि के पति डाक्टर राहुल के रूप में कल्पना करने लगा… हमारी मेहनत रंग लाई. मेरा सलैक्शन आगरा के मैडिकल कालेज में हो गया और अंजलि का लखनऊ के और हम दोनों जुदा हो गए.

कोचिंग के दौरान न उस ने और न मैं ने कभी अपने मन के भाव व्यक्त करे लेकिन मु झे पूरा विश्वास था कि मेरी मुहब्बत एकतरफा नहीं है. हम अकसर फोन पर बातें करते, व्हाट्सऐप चैटिंग और वीडियो काल्स करते लेकिन सिर्फ अपनी पढ़ाई को ले कर बातें करते. कभी इश्कमुहब्बत का जिक्र नहीं होता. कई बार मेरे मन में आया कि उस अपने प्यार का इजहार कर दूं लेकिन हिम्मत ही नहीं हुई. फिर मैं ने ठान लिया कि डाक्टर बनते ही उसे प्रपोज कर दूंगा. हो सकता है वह भी इसी दिन के इंतजार में हो क्योंकि अकसर बातों के दौरान वह मु झे स्वीटू, बाबू, शोना गोलूमोलू शब्दों से संबोधित करती थी तो मेरा मन गुदगुदा उठता था और मैं उस का यही अर्थ निकलता था कि उस के मन में भी मेरे प्रति प्रेम के भाव हैं.

आखिर वह दिन भी आ गया जिस का मु झे इंतजार था. हम दोनों का

एमबीबीएस पूरा हो गया. उस ने एक दिन मैसेज किया, ‘‘राहुल, 14 फरवरी वैलेंटाइनडे को मैं तुम्हें एक सरप्राइज दूंगी. मैं ने एक छोटी सी पार्टी रखी है दिल्ली में. रैस्टोरैंट की लोकेशन तुम्हें व्हाट्सऐप कर दूंगी प्लीज टाइम पर आ जाना.’’

यह पढ़ कर मेरा मन बल्लियों उछल गया.

वैलेंटाइनडे वाले दिन ठीक टाइम पर मैं उस के लिए गिफ्ट ले कर उसी रैस्टोरैंट पहुंच गया. मैं ने गिफ्ट तो बैग में रख लिया और गुलाब कोट की जेब में क्योंकि उस की तरह मैं भी अपनी मुहब्बत का इजहार कर के उसे सरप्राइज देना चाहता था. मेरे दिल की धड़कन तेज रफ्तार से चल रही थी, गला सूख रहा था.

सामने गेट से अंजलि गुलाबी साड़ी पहने खुला पल्ला लहराते हुए एक आसमान से उतरी परी के समान आई और मु झे पीला गुलाब थमा कर मेरे गले लग कर बोली, ‘‘हैप्पी वैलेंटाइनडे.’’

पीला गुलाब देख कर मेरा दिल कांच की तरह टूट गया और दिमाग सुन्न हो गया.

वह हलकी सी आवाज लगाते हुए बोली, ‘‘अक्षत, प्लीज कम हियर.’’

तभी एक 6 फुट लंबा, गोरा, स्मार्ट और आकर्षक नवयुवक आया और उस से शायराना अंदाज में बोला, ‘‘तुम ने पुकारा और हम चले आए दिल हथेली पर ले आए…’’

‘‘राहुल, यह है यह मेरा मंगेतर डाक्टर अक्षत मेरे बचपन का दोस्त. इसे और इस की मुहब्बत को हासिल करने के लिए मु झे डाक्टर बनना पड़ा क्योंकि इसे डाक्टर बीवी ही चाहिए थी और मु झे अक्षत,’’ कहते हुए उस के सीने से लग गई और अक्षत ने भी उसे अपनी बांहों के मजबूत घेरे में कस लिया.

यह देख कर मु झे लगा मेरे अंदर कुछ टूट कर बिखर गया है. मेरा हाथ कोट की जेब में गया और मैं ने गुलाब को जोर से मसल दिया और उस में लगे कांटों की वजह से मेरी हलकी सी चीख सी निकल गई.

अंजलि घबरा गई, ‘‘क्या हुआ राहुल? आर यू ओके?’’

‘‘यस, आई एम फाइन. बस तबीयत थोड़ी बेचैन सी लग रही है इसलिए वापस होटल जा रहा हूं. सौरी, गाइज पार्टी फिर कभी.’’

‘‘प्लीज राहुल, तुरंत हौस्पिटल चलिए. इस बेचैनी को हलके में मत लीजिए. हम डाक्टर हैं. हमें सम झना चाहिए इस बात को. कहीं आप का बीपी न हाई हो गया हो.’’

अक्षत थोड़ा परेशान स्वर में बोला, ‘‘इट्स ओके डाक्टर अक्षत, मेरा बीपी हमेशा नौर्मल रहता है. बस थोड़ा आराम करूंगा तो बेहतर महसूस करूंगा,’’ बेहद रूखे स्वर में यह कहते हुए मैं वहां से निकल पड़ा. सीधे होटल जा कर अपने रूम में पलंग पर निढाल हो गया.

अंजलि के साथ बिताए वक्त को सारी रात याद करता रहा. सोचता रहा कि क्या अंजलि वाकई में मु झ से प्यार नहीं करती थी… सिर्फ मेरी भावनाओं से खेल रही थी… मगर क्यों? सोचतेसोचते कब आंख लग गई पता ही नहीं चला.

सुबह व्हाट्सऐप चैक किया तो अंजलि का मैसेज था ‘‘राहुल, मु झे तो आज ही

पता चला कि तुम मु झ से प्यार करते हो क्योंकि मैं ने तुम्हारा मसला हुआ गुलाब देख लिया था जो हड़बड़ी में तुम से वहीं रैस्टोरैंट में गिर गया था. तुम्हारी हलकी सी चीख, बेचैनी और अक्षत के प्रति बेरुखी से सब परदाफाश हो गया वरना मु झे तो कभी पता ही नहीं चलता. अगर तुम कोचिंग टाइम में ही बोल देते तो मैं सब क्लीयर कर देती. एक लड़की के मात्र हंसनेबोलने, खुला व्यवहार और उन्मुक्त स्वभाव का होने का यह अर्थ निकालना कि यह लड़की आप से प्यार करती है या प्यार का नाटक कर रही है तो यह सरासर गलत है.

‘‘मैं ने तो तुम्हें कभी उस नजर से देखा ही नहीं सिर्फ एक अच्छा, प्यारा और परवाह करने वाला दोस्त ही माना. क्या एक लड़की और लड़के की दोस्ती का मतलब सिर्फ प्यार ही होता है? मेरी नजर में तो नहीं. मेरी शरारतों और नादानियों को जो सजा दोगे मु झे मंजूर है लेकिन मु झे कभी गलत मत सम झना. तुम मु झे हमेशा दिल्ली वाली गर्लफ्रैंड के रूप में याद रखना दोस्त.’’

मुसकराहट और दिल की इमोजी के साथ उस का मैसेज पढ़ने के बाद दिल के बजाय मेरे दिमाग ने काम करना शुरू कर दिया.

उस के साथ बिताया वक्त, घटना और हर बात याद आने लगी… क्या लड़की के हंसनेबोलने और उस के स्वच्छंद स्वभाव और व्यवहार का यह अर्थ निकालना कि वह आप से प्यार करती है… उस ने कभी मेरे साथ निर्लज्ज व्यवहार नहीं किया. वह हमेशा खुल कर हंसतीबोलती थी.

यह उस का बिंदास स्वभाव था लेकिन पूरी तरह से मर्यादित था. उस के मन में मेरे प्रति गलत भाव नहीं थे. तभी तो हमारी दोस्ती में कभी खटास नहीं आई. उस के यार, स्वीटू, गोलूमोलू, शोना, बाबू बोलने को मैं प्यार सम झ बैठा. यह प्यार नहीं था. यह तो उस के मन के पवित्र भाव थे. तभी तो वह मु झे बे िझ झक इन शब्दों से संबोधित कर लेती थी.

अगर मैं उस वक्त उस से प्यार का इजहार कर देता और वह इनकार कर देती तो मेरा दिल टूटने के साथसाथ मेरा डाक्टर बनने का सपना भी टूट कर बिखर गया होता. आज मैं डाक्टर हूं तो अपने उसी प्यारे से बिंदास दोस्त की वजह से हूं. दिल और दिमाग में जो भी गलतफहमियां और बातें थीं वे सब बारिश पड़ने के बाद खुले आसमान की तरह साफ हो गईं. मन को एक सुकून और और असीम शांति का अनुभव हुआ.

जल्द ही अपने मोबाइल में ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रैंड’ को सेव कर लिया और फिर मैसेज टाइप करने लगा, ‘दिल्ली वाली गर्लफ्रैंड, मैं तुम से कोई प्यारव्यार नहीं करता था.

वह गुलाब तो मैं अपनी वैलेंटाइन के लिए लाया था जो फ्लाइट मिस हो जाने की वजह से दिल्ली नहीं आ सकी. और हां सुनो, आज शाम उसी रैस्टारैंट में मेरी तरफ से पार्टी है 2 दोस्तों की सच्ची दोस्ती की. साथ में अपने लंगूर यानी अक्षत को भी लाना. प्लीज आना जरूर. लव यू दिल्ली वाली गर्लफ्रैंड’ टाइप कर के मुसकराहट और दिल वाली इमोजी लगा कर वह मैसेज मैं ने उसे व्हाट्सऐप कर दिया.

धड़कते दिल की इमोजी के साथ ‘ओके’ लिखा. उस का रिप्लाई मैसेज पढ़ कर मैं मुसकरा गया.

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