ड्रग्स से कम नहीं दूध की लत

By Maneka Sanjay Gandhi | 6 January 2017

एक दशक पहले, जब सरकार ने शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के लिए क्रमश: हरे और लाल रंग के डौट्स लगाने का प्रावधान किया, तब दूध उद्योग और सैकड़ों पढ़े-लिखे लोगों ने जोर डाला कि दूध एक शाकाहारी उत्पाद है (हालांकि इस का स्रोत पशु है), इसलिए इस पर हरे रंग का डौट लगाया जाना चाहिए. हमें झुकना पड़ा.

वहीं ऐसे लोग जो विशुद्ध रूप से शाकाहारी हैं, अकसर वे भी मानते हैं कि चीज उन की कमजोरी है. कहते हैं चीज से किसी गंदे मोजे सी बदबू आती है, ऐसा क्यों? दरअसल, फैट सोडियम और कोलैस्ट्रौल होने के कारण चीज एक हाईकैलोरी दुग्ध उत्पाद है. एक आम चीज में 70 फीसदी फैट होता है और जिस तरह का फैट होता है, वह मुख्यतया सैचुरेटेड यानी खराब किस्म का फैट होता है. इस से दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा होता है. पाश्चात्य डाइट में चीज सैचुरेटेड फैट का सब से बड़ा स्रोत है. अमेरिका में एकतिहाई वयस्क और 12.5 मिलियन बच्चे व किशोर मोटापे के शिकार हैं.

हमारे यहां बड़े पैमाने में लोग शाकाहारी हैं और हमारी रुचि घर के सेहतमंद खाने में है. इसीलिए हमें इन से काफी दूर होना चाहिए था. लेकिन हम भी मोटापा ग्रस्त देशों की सूची में शामिल हो चुके हैं. दिल संबंधी बीमारियों, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण मोटापा ही है.

दूध में नशा

औसतन 12 इंच के चीज पिज्जा के एकचौथाई हिस्से में लगभग 6 ग्राम सैचुरेटेड फैट और 27 मिलीग्राम कोलैस्ट्रौल के साथ 13 ग्राम फैट होता है. एक आउंस चीज में 6 ग्राम सैचुरेटेड फैट समेत 9 ग्राम फैट होता है. आंशिक रूप से स्किम्ड दूध में फैट की मात्रा कम होती है.

लेकिन हम दूध पीना और चीज/पनीर खाना जारी रखेंगे. बहुत सालों के बाद मैं ने जाना कि लोग आखिर दूध क्यों पीते हैं या चीज व पनीर क्यों खाते हैं. इसलिए नहीं कि यह उन के लिए जरूरी है या इसलिए कि कृष्ण पीते थे. लोग यह इसलिए लेते हैं, क्योंकि इस में नशे का पुट हुआ करता है.

पनीर के प्रति लोगों की कमजोरी होती है, इस का वैज्ञानिक कारण है. दूध हाजमे में सहायक होता है, क्योंकि इस में हलका सा मादक तत्त्व होता है, जो कैसोमौर्फिन कहलाता है. 1981 में एली हाजुम और उन के सहयोगियों ने वैलकम रिसर्च लैबोरेटरी में पाया कि दूध में रासायनिक मौर्फिन होता है, जो एक तरह का मादक पदार्थ है. कैसिन सभी स्तनधारियों के दूध में पाया जाने वाला प्रमुख प्रोटीन है. कैसोमौर्फिन की एक खासीयत यह है कि इस का मादक या नशीला असर होता है. दूसरे शब्दों में यह दुनिया सब से पुराने किस्म के ज्ञात ड्रग्स में से एक है. इस किस्म के नशीले पदार्थों में अच्छा महसूस करने और में एक तरह की खुशी के एहसास और शांतचित बनाने की क्षमता के साथ नींद से भी बोझिल हो जाने का एहसास जगाने की क्षमता होती है. इस की लत भी लग जाती है. अगर एकाएक इस का सेवन बंद कर दिया तो इस से दूसरों पर निर्भरता बढ़ जाती है और ‘विड्रौल सिंड्रोम’ का सामना करना पड़ता है.

चीज, पनीर, आइसक्रीम, मिल्क चौकलेट जैसे गाढ़े दुग्ध उत्पादों में सघन मात्रा में नशीला पदार्थ होता है. (डेयरी फ्री वीगन चीज में भी कभीकभी कैसोमौर्फिन मिलाया जाता है) लगभग 10 लिटर दूध से एक किलोग्राम चीज मिलता है. जब दूध चीज में तब्दील होता है, तो इस में निहित पानी अलग कर लिया जाता है और जो बचता है वह सघन फैट यानी वसा होता है. इसी कारण चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट ऊंचे दर्जे के नशीले पदार्थ माने जाते हैं. जाहिर है इस में जितनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ कैसिन होता है, उतना ही वह मन में अच्छा अहसास जगाता है. इसीलिए रात में सोने से पहले बहुत से लोग दूध पीते हैं.

जरा सोचिए, सुहागरात में नए-नवेले जोड़े के लिए दूध का गिलास क्यों रखा जाता है. अब सवाल है कि स्तनधारियों के दूध में आखिर नशीलापन क्यों होता है? इस बारे में फिजिशियन कमेटी फौर रिसपौंसिबल मैडिसिन के संस्थापक और अध्यक्ष डा. नील बर्नाड कहते हैं, ‘‘हो सकता है कि यह मां-बच्चे के बीच एक अनोखा संबंध स्थापित करने का एक उम्दा उपाय हो. मानसिक जुड़ाव हमेशा शारीरिक मजबूती प्रदान करता है. पसंद हो या न हो, मां का दूध नवजात के दिमाग में नशे की तरह काम करता है, जो मांबच्चे के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करता है. इसी कारण मां अपने बच्चे का पालनपोषण जीजान से करती है और नवजात बच्चे को मां की देखभाल की जरूरत भी होती है. हेरोइन या कोकीन की ही तरह कैसोमौर्फिन बहुत ही धीमी गति से आंतों में पहुंचता है और अतिसार को रोकने का काम करता है. दर्द निवारक दवाओं की तरह ही शायद चीज में निहित नशीला तत्त्व भी वयस्कों में कब्ज पैदा करता है.’’

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