Parenting Tips for Honesty : मुंबई की एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रहने वाला 6 साल का रुद्र पहली कक्षा का छात्र है. वह हमेशा अपने पेरेंट्स से झूठ बोलता रहता है जैसे कि होम वर्क पूरा न होने और टीचर के इसकी वजह के पूछने पर हर दिन कुछ न कुछ झूठ बोलकर खुद को बचा लेता है. स्कूल में पढ़ाई गई विषय को वह बताता नहीं, कहता है कि टीचर ने कुछ पढ़ाया नहीं, ऐसे में परीक्षा होने पर लिख नहीं पाता, क्योंकि उसने कुछ पढ़ा ही नहीं होता, ऐसे करीब 6 महीने बीत गए, स्कूल से शिकायत आने लगी. उसकी माँ मीना जब स्कूल गई, तो पता चला कि वह स्कूल में कुछ भी नोटडाउन नहीं करता, पीछे बैठकर खेलता रहता है.
बार – बार टीचर के कहने पर भी वह सुनता नहीं, इसलिए उसकी टीचर ने माँ को बुलाकर सारी बात बताई. मीना समझ नहीं पा रही थी कि वह इस बच्चे को कैसे सही रास्ते पर लाए, क्योंकि वह स्कूल में ही नहीं घर पर भी हमेशा झूठी बात को ऐसे बताता है कि कोई पकड़ नहीं पाता कि वह झूठ बोल रहा है. वर्किंग मीना परेशान है, आखिर इसका समाधान क्या है, क्योंकि उसकी इस आदत को सुधारना जरूरी था और माता – पिता दोनों ऐसा कर नहीं पा रहे थे.

सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होती है पसंद
असल में छोटे बच्चे कई बार झूठ बोलते हैं, क्योंकि वे अपनी कल्पना और असली बातों के बीच फर्क को ठीक से नहीं समझ पाते. उनके लिए जो वे सोचते हैं या सपने देखते हैं, वही उन्हें सच लगता है. उन्हें अभी यह भी पूरी तरह समझ नहीं आता कि दूसरे लोग क्या सोचते हैं या क्या महसूस करते हैं. इसलिए वे कभी-कभी बिना मतलब के भी झूठ बोल देते हैं, क्योंकि उन्हे सबका ध्यान अपनी ओर खींचना होता है. इस बारें में गुरुग्राम, मदरहुड अस्पताल के कंसल्टेंट बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.बीर सिंह यादव कहते है कि बच्चे डर की वजह से भी झूठ बोलते हैं, जैसे डाँट पड़ने से बचने के लिए या सज़ा से बचने के लिए भी इसका सहारा लेते है. कुछ बच्चे पेरेंट्स या किसी का ध्यान पाने के लिए भी झूठ बोलते हैं, ताकि लोग उनकी ओर देखें या उनकी बात सुनें. यह सब उनके बडे होने और सीखने का हिस्सा होता है. अगर माता-पिता उन्हें प्यार से समझाएँ और बार-बार सही और गलत का फर्क बताएं, तो धीरे-धीरे बच्चे सच बोलना सीख जाते हैं.
इसके अलावा बच्चों के झूठ बोलने में पेरेंट्स की भूमिका बड़ी होती है, क्योंकि कई बार वे पेरेंट्स को किसी से झूठ बोलते हुए सुनते है, मसलन घर पर है, लेकिन फोन पर कह दिया नहीं है. काम कर नहीं रहे, पर कह दिया कर रहा हूं आदि, कई छोटी – छोटी बातों को बच्चे नोटिस करते है और वे भी उसे अनचाहे सीखते जाते है, जिसे पेरेंट्स को नोटिस करना जरूरी होता है. बच्चे के झूठ बोलने कारण कई होते है, जिसे पेरेंट्स को समय रहते सुधार लेना जरूरी होता है.

बच्चे की सही परवरिश को सीखें
बच्चे अपने माता-पिता को देखकर ही बहुत कुछ सीखते हैं. वे वही बोलते हैं और वही करते हैं, जो वे रोज़ अपने घर में देखते हैं. अगर माता-पिता सच बोलते हैं, तो बच्चे भी सच बोलना सीखते हैं. अगर माता-पिता गलती होने पर चिल्लाते हैं या मारते हैं, तो बच्चे भी वही तरीका अपनाते हैं. माता-पिता बच्चों को कैसे समझाते हैं, कैसे डाँटते हैं और कैसे प्यार देते हैं, इन सब बातों का बच्चे पर गहरा असर पड़ता है. घर का माहौल अगर शांत और प्यार भरा होगा तो बच्चा भी शांत रहेगा. अगर घर में हमेशा डर और गुस्सा होगा, तो बच्चे की वैसी ही बनने की संभावना अधिक होती है.

खुद पर रखे कंट्रोल
डॉक्टर आगे कहते है कि अगर बच्चा झूठ बोलता है, तो माता-पिता को गुस्सा नहीं करना चाहिए. पहले शांत रहना चाहिए और प्यार से बात करनी चाहिए. बच्चे से पूछें कि उसने झूठ क्यों बोला, उसे किस बात का डर था या वह क्या चाहता था. उसे धीरे-धीरे समझाएँ कि कहानी बनाना और सच बोलना अलग-अलग बातें होती हैं. उसे यह भी बताएं कि सच बोलना क्यों ज़रूरी है. बहुत सख्त सज़ा देने की बजाय बच्चे को समझाना ज्यादा अच्छा होता है. जब बच्चा सच बोले, तो उसकी तारीफ करें, ताकि उसे अच्छा लगे और वह आगे भी सच बोले. पेरेंट्स को भी अपनी आदतें सुधारने की जरूरत होती है, उन्हे भी झूठ बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने बड़ों को करते हुए देखते हैं.

अपनी आदतें सुधारें
हर पेरेंट्स को ये समझना जरूरी होता है कि उनकी हर छोटी-बड़ी आदत का बच्चों पर असर पड़ रहा है. बच्चे वही करते हैं जो वे रोज़ अपने घर में देखते हैं. अगर माता-पिता शांत होकर बात करते हैं, तो बच्चे भी वैसे ही बात करना सीखते हैं. अगर वे जल्दी गुस्सा करते हैं या चिल्लाते हैं, तो बच्चे भी वैसा ही करने लगते हैं. अगर वे कुछ कहते हैं और करते कुछ अलग है, तो बच्चे समझ नहीं पाते कि सही क्या है और गलत क्या है. पेरेंट्स का शांत, समझदार और प्यार भरा व्यवहार बच्चों को सही रास्ता दिखाने में बहुत मदद करता है.
सिखाएं एटिकेट्स
आज कल के अधिकतर पेरेंट्स काम काजी है और काम के बाद जब भी उन्हे समय मिलता है, मोबाईल पर रील्स देखने लग जाते है, ऐसे में बच्चे पर उनका ध्यान कम होता जाता है, जिसका असर बच्चों पर पड़ता है. डॉक्टर कहते है कि किसी भी गलत बात पर पेरेंट्स एटिट्यूड न दिखाकर अगर माफी मांग लेते है, तो बच्चा भी सीखता है कि माफी मांगना गलत नहीं.
इसके अलवा हर दिन की छोटी-छोटी बातें, जैसे बच्चों की बात ध्यान से सुनना, गलती होने पर माफी माँगना और जो वादा किया है उसे पूरा करना, इन सब से बच्चे का स्वभाव बनता है. बच्चों से उनकी उम्र के अनुसार ही उम्मीद रखनी चाहिए. बहुत ज्यादा दबाव किसी भी बात पर नहीं डालना चाहिए.

सजा देने से बचे
सिर्फ सज़ा देने की बजाय बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि सही काम क्या है, क्योंकि कई बार बच्चे को कुछ सीखाए बिना पैरेंट्स सजा देने लगते है, जैसा 4 साल के तक्ष ने माँ से झूठ बोला और पिता ने उसे दरवाजे से बाहर खड़ा रख दिया, वह रोने लगा कि अब कभी झूठ नहीं बोलेगा, फिर उसे अंदर आने दिया. घर का माहौल ऐसा होना चाहिए कि बच्चा बिना डर अपनी गलती बता सके. जब बच्चा अच्छा काम करे, तो उसकी तारीफ करें और धैर्य रखें, क्योंकि बच्चे धीरे-धीरे सीखते हैं और समझदार बनते हैं.
इस प्रकार बच्चों की झूठ बोलने की आदत कोई बड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि एक सीखने का दौर है. अगर आप धैर्य, समझदारी और थोड़े प्यार से काम लें, तो ये आदत धीरे-धीरे खत्म हो सकती है. बच्चों को डांटना या सजा देना, इस सिचुएशन को और भी खराब कर सकता है, इसलिए अपने बच्चे को सुनें, समझें, क्वालिटी टाइम दें और साथ मिलकर उसे सही रास्ता दिखाएं. Parenting Tips for Honesty

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