पित्ती को चिकित्सकीय भाषा में अर्टिकैरिया कहा जाता है. अर्टिकैरिया 20% लोगों को उन के जीवन के किसी न किसी स्तर पर जरूर प्रभावित करता है. यह कई पदार्थों या स्थितियों के कारण होता है. यह त्वचा की एक प्रतिक्रिया है, जिस से चकत्ते पड़ जाते हैं और उन में खुजली होती है. यह खुजली मामूली से ले कर गंभीर स्थिति तक हो सकती है. तेज खुजलाने, शराब का सेवन करने, ऐक्सरसाइज करने और भावनात्मक तनाव से खुजली की समस्या और गंभीर हो सकती है.

अर्टिकैरिया के प्रकार

अर्टिकैरिया निम्न प्रकार के होते हैं:

ऐक्यूट अर्टिकैरिया : ऐक्यूट अर्टिकैरिया में सूजन 6 सप्ताह से कम समय तक रहती है. भोजन, दवा, संक्रमण इस के होने के सब से सामान्य कारण हैं. कीड़े के काटने और किसी आंतरिक रोग के कारण भी यह समस्या हो सकती है.

क्रौनिक अर्टिकैरिया : क्रोनिक अर्टिकैरिया में सूजन 6 सप्ताह से अधिक समय तक रहती है. इस के कारणों को पहचानना कठिन है. इस के कारण ऐक्यूट अर्टिकैरिया के समान हो सकते हैं, लेकिन इस में औटोइम्युनिटी, गंभीर संक्रमण और हारमोन असंतुलन भी सम्मिलित हो सकते हैं.

फिजिकल अर्टिकैरिया : फिजिकल अर्टिकैरिया सर्दी, गरमी, पसीने आदि के कारण हो सकता है. यह केवल उन्हीं स्थानों पर होता है जहां त्वचा इन ट्रिगरों के सीधे संपर्क में आती है.

लक्षण –

अर्टिकैरिया के कारण निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं :

– लाल, अत्यधिक खुजली वाले अंडाकार या कीड़े के आकार के  चकत्ते. चकत्तों का आकार कुछ मिलीमीटर से कई इंच तक हो सकता है.

– जब लाल चकत्ते को बीच से दबाया जाता है तो यह सफेद या पीला पड़ जाता है.

– अर्टिकैरिया के चकत्ते शरीर के किसी भी भाग पर दिखाई दे सकते हैं. ये अपना आकार बदल सकते हैं, दूसरे स्थान पर फैल सकते हैं, गायब हो सकते हैं और पुन: प्रकट हो सकते हैं. अधिकतर अर्टिकैरिया के लक्षण 24 घंटों में चले जाते हैं, लेकिन क्रौनिक अर्टिकैरिया के लक्षण कई महीनों या वर्षों तक रह सकते हैं.

ट्रिगर/कारण

अनुसंधानों में अर्टिकैरिया के  कई कारणों की पहचान की गई है, लेकिन सभी कारकों के बारे में पता नहीं है. अर्टिकैरिया के सामान्य कारक निम्न हैं :

भोजन : कई लोगों में कुछ भोज्यपदार्थ अर्टिकैरिया के  लिए ट्रिगर का कार्य करते हैं जैसे मछली, मूंगफली, अंडा, दूध आदि.

दवा : कई दवाओं से भी यह समस्या हो सकती है. ऐस्प्रिन, पेनिसिलीन और ब्लड प्रैशर की दवा से यह समस्या अधिक होती है.

सामान्य ऐलर्जन: पराग कण, पशुओं की मृत त्वचा और कीड़ों के डंक जैसे सामान्य ऐलर्जन से भी यह समस्या हो सकती है.

पर्यावरणीय कारक: इन में गरमी, सर्दी, सूर्य का प्रकाश, पानी सम्मिलित हैं. इस के अलावा ऐक्सरसाइज और भावनात्मक तनाव के कारण भी त्वचा पर पड़ने वाले दबाव से अर्टिकैरिया की समस्या हो सकती है.

चिकित्सकीय अवस्था: कभीकभी अर्टिकैरिया की समस्या ब्लड ट्रांसफ्यूजन, इम्यून तंत्र से संबंधित गड़बडि़यों, थायराइड, हारमोन की गड़बड़ी, कैंसर के  कुछ प्रकार जैसे लिंफोमा या बैक्टीरिया का संक्रमण जैसे हैपेटाइटिस, एचआईवी आदि के कारण भी हो सकती है.

आनुवंशिकता: आनुवंशिक अर्टिकैरिया के मामले कम देखे जाते हैं. यह कुछ निश्चित ब्लड प्रोटीन्स के कम स्तर या असामान्य कार्यप्रणाली से संबंधित हैं, जो इसे नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि आप का रोगप्रतिरोधक तंत्र किस प्रकार कार्य करेगा.

डाक्टर से संपर्क

अगर अर्टिकैरिया की समस्या निम्नलिखित लक्षणों के साथ आए तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें :

– शरीर के कई भागों पर बड़ी संख्या में त्वचा पर चकत्ते पड़ना.

– चक्कर आना.

– सनसनाहट महसूस होना.

– सांस लेने में कष्ट होना.

– छाती में जकड़न महसूस होना.

– ऐसा महसूस होना जैसे जीभ या गले में सूजन आ गई हो.

अर्टिकैरिया का उपचार घर पर ही कुछ सामान्य सावधानियां रख कर किया जा सकता है. लेकिन अगर 5 दिन में लक्षण दूर न हो कर गंभीर हो जाए तो डाक्टर से संपर्क करें.

(डा. रोहित बत्रा, डर्मैटोलौजिस्ट ऐंड विटिलिगो ऐक्सपर्ट, सर गंगाराम हौस्पिटल, नई दिल्ली)