Hindi Short Story : बिगड़ी हुई स्त्रीकितने  दिन हो गए हैं, 2 महीने, 3 महीने या कुछ ज्यादा ही. कपड़े देते हुए, खाना परोसते या सामान पैक करते बस हाथ छू भर जाते हैं या वही उस के गाल पर अपने अधर रख देती है, बस उस से ज्यादा कुछ नहीं. सुधीर की टूरिंग जौब है और 1-2 दिन के लिए घर आना तो थकान उतारने और गहरी नींद लेने की चाह में रात बिता देने में ही बीत जाता है. दिनभर औफिस की व्यस्तता रहती है और इतवार हो तो घर के बहुत सारे अधूरे कामों को पूरा करने के चक्कर में सुधीर चक्करघिन्नी सा दौड़ता रहता है.

सास चाहती हैं कि बेटा कुछ पल उन के साथ बैठे तो मानस पापा को छोड़ना ही नहीं चाहता. उन की फरमाइशें पूरी करने की खुशी से सुधीर आनंदित रहता है. उस का क्या है, वह तो पत्नी है. उसे तो सुधीर की व्यस्तता को, उस की नौकरी की प्रतिबद्धता को समझना चाहिए. वैसे भी कोई नईनवेली दुलहन तो है नहीं. शादी को ही 15 साल हो गए हैं. अगर समय से बच्चा हो जाता तो वही 13-14 साल का होता. बेशक अभी 5 साल का है मानस, लेकिन वह तो 40 की हो चुकी है और वह 42 वसंत पार कर चुका है. अपनी अपेक्षा और उम्मीदों को सीमा में बांध लेना उसे सीख लेना चाहिए. अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना आ जाना चाहिए, चाहे कोई भी इच्छा हो.

वह कभी सुधीर के पास जा कर उस के जिस्म पर उंगलियां फिराने की कोशिश करती तो

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