Hindi Story : निशिता अब और सब्र नहीं हो रहा. इंतजार है तो कल का जब तुम हमेशा के लिए मेरी हो जाओगी. हर वक्त बस तुम्हारा ही चेहरा मेरी आंखों के सामने रहता है. अब तुम्हारे बिना एकएक पल बिताना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है. आई रियली लव यू. डू यू लव मीटू?’’
मंगेतर मिलिंद की ये बातें सुन मेरी सांसें बेकाबू हो गईं.
‘‘निशिता, मैं बस तुम से वे 3 जादूई शब्द सुनना चाहता हूं. बोलो न निशी, माई लव. प्लीज, बोल दो. अब तो कल तुम्हारा नाम मुझ से जुड़ ही जाएगा. प्लीज, बोल दो न, जो मुझे इत्मीनान हो जाए कि तुम भी मुझे चाहने लगी हो.’’
मिलिंद की ये बातें मुझे मदहोश कर रही थीं. मेरी जबान तालू से चुपक गई थी. धौंकनी की तरह धुकधुकाते दिल के साथ मैं ने बस इतना कह कर लाइन काट दी, ‘‘कल, आज नहीं. थोड़ा सब्र करो.’’
मुझे अपने ऊपर आश्चर्य हो रहा था. इस मिलिंद ने मुझ पर कहीं जादू तो नहीं कर दिया. नहीं तो मुझ जैसी गंभीर शख्सियत की यह कैसी काया पलट हो गई कि उस की आवाज सुनते ही मैं जैसे किसी दूसरी ही दुनिया में पहुंच जाती हूं, अपने होश खो बैठती हूं.
कुछ ही देर में मेरी सांसें संयत हुईं और मैं मिलिंद के साथ बीते सुखद पलों में खो गई...
मिलिंद से मेरी मुलाकात 6 माह पहले ही हुई थी. वह एक रईस खानदानी परिवार की छोटी संतान था. उस का रिश्ता मुझे एक नामी औनलाइन मैट्रीमोनियल साइट के जरीए मिला था. मेरे परिवार का माहौल उस के परिवार की तुलना में देसी था. जहां मेरे पिता कोटा में एक परचूनी की सोना उगलती दुकान चलाते थे, वहीं उस के पिता शहर का एक प्रतिष्ठित कोचिंग सैंटर, मिलिंद और उस के बड़े भैया के साथ मिल कर चलाते थे.
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