Stories : सुनीति बहुत देर से खिड़की से झांक रही थी. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने मम्मीपापा को क्या जवाब दे. बाहर बहुत शोरगुल था. सुनीति को इस बड़े शहर के शोरगुल से भी कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था. वह अपने खयालों में खोई हुई एकटक बाहर देख रही थी. तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी और उस का ध्यान भंग हो गया. फोन उस की फ्रैंड चित्राक्षी का था. उस ने सुनीति से पूछा, ‘‘फिर क्या सोचा तुम ने? क्या तुम शादी की खातिर अपनी इतनी अच्छी नौकरी छोड़ दोगी?’’
सुनीति ने जवाब दिया, ‘‘नहीं, ऐसा नहीं है कि मैं नौकरी छोड़ दूंगी. सवाल तो यह है कि मुझे शादी भी करनी है या नहीं.’’
चित्राक्षी ने कहा, ‘‘लेकिन अगर तुम्हें लड़का पसंद आ गया तो फिर?’’
सुनीति ने कहा, ‘‘तो फिर मैं यहां से ट्रांसफर ले लूंगी.’’
उस की फ्रैंड ने कहा, ‘‘देख जो कुछ भी करना, सोचसमझ कर करना,’’ कह कर चित्राक्षी ने मोबाइल रख दिया.
सुनीति फिर सोच में डूब गई. वह एक बहुत सुलझी हुई और समझदार लड़की थी. उस के लिए शादी के कई औफर आते थे. ऐसा नहीं था कि उसे अपने हिसाब का लड़का चुनने की आजादी नहीं थी लेकिन उस के पास ये सब सोचने का टाइम नहीं था इसलिए उस ने ये सब बातें अपने मम्मीपापा पर छोड़ना ही बेहतर समझा. सुबह अपने फ्लैट की किचन में कौफी बनाते समय उस का ध्यान अपने मोबाइल पर गया तो उस ने देखा कि उस की मम्मी ने 4-5 लड़कों के फोटोग्राफ भेजे थे. उस ने बड़े ही मजाकिया अंदाज में उन्हें देखना शुरू किया क्योंकि ऐसा पहले भी कई बार हो चुका था.
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