Stories : मोहिनी देवी अपने दरवाजे के पास औटो से उतरीं और मुख्य दरवाजा खोलने के लिए दरवाजे के पास आ कर एक बार अपने चारों तरफ देखा. आसपास के लोग उन्हें बहुत अजीब नजरों से देख रहे थे और एकदूसरे को देख कर व्यंग्यात्मक ढंग से मुसकरा रहे थे.
बगल के मकान में रहने वाली विमला ने तो सामने वाली सीमा से कहा भी, ‘‘यह देखो आ गई जेल से छूट कर. क्या शान से आई है. लगता है कहीं से पुरस्कार जीत कर आई हो. कैसेकैसे लोग हैं, हम कितना अच्छा समझते थे इन्हें पर ये दहेज की लालची निकलीं. बहू को सताती हैं, दहेज मांगती हैं और नहीं देने पर घर से निकाल देती हैं, उस के के सारे जेवर रख लेती हैं, कैसी हैं ये. ऐसे लोगों का तो चेहरा देखना भी गुनाह है.’’
मोहिनी देवी की आंखें भर आईं. कांपते हाथों से दरवाजा खोला और अपने बगीचे में आ कर जमीन में ही बैठ गईं. बाहर से लोगों की शर्मनाक टिप्पणियां आ कर कानों में पिघले शीशे के समान जलन दे रही थीं. थोड़ी देर बाद मुख्य दरवाजा खोला, भीतर जा कर सोफे पर बैठ कर आंखें बंद कर लीं. उन की आंखों से झरझर आंसू बह रहे थे. उन्हें 6 महीने पहले का दृश्य याद आ रहा था...
6 महीने पहले तक यही पड़ोसी उन की कितनी तारीफ करते थे. उन्होंने किस की समय पर मदद नहीं की. यही पड़ोसी उन के मददगार स्वभाव और मृदु व्यवहार की तारीफ करते थकते नहीं थे. लेकिन इन 6 महीनों में क्या से क्या हो गया. आज किसी को उन की सचाई पर विश्वास नहीं रहा. हाय रे निष्ठुर संसार. कितनी उमंग से उन्होंने बेटे रंजन की शादी की थी. रंजन के लिए लड़की पूनम का पता उन की मौसी की बेटी ने दिया था.
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