Alimony rights India law : एक समय ऐसा भी था जब मांबाप बेटी को सिखा कर भेजते थे कि बेटी की मां के घर से डोली उठनी चाहिए और पति के घर से अर्थी. यानी बतौर सुहागन और मरते दम तक चाहे कितना ही टफ टाइम क्यों न हो पति का साथ न छोड़ना, जिंदगीभर पति का साथ निभाना और मरते दम तक पति व परिवार को ही अपना सबकुछ समझना.
कई सालों तक कई महिलाओं ने इस सीख को अपनी जिंदगी का मकसद बना भी लिया और मरते दम तक अपनी शादी नहीं तोड़ी. ऐसी कई शादियां सिल्वर जुबली और गोल्डन जुबली तक पहुंचीं, जिन्हें सिर्फ उन के बच्चों ने ही नहीं, बच्चों के बच्चों यानी नातीपोतों ने भी याद रखा.
अगर फिल्म इंडस्ट्री की बात करें तो अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, अनिल कपूर, धर्मेंद्र आदि कई सैलिब्रिटीज है जिन्होंने अपनी शादी संभाल कर रखी.
शादी को बचाए रखने में आदमी से भी कहीं ज्यादा औरत का हाथ होता है क्योंकि वही एक ऐसी होती है जो सारे रिश्तों को संभाल कर रखती है. कई बार अगर आदमी अर्थात पति आवारा बादल भी बन जाए तो भी पत्नी अपनी जमीन नहीं छोड़ती क्योंकि एक औरत के लिए उस के पति के साथसाथ परिवार और बच्चों की भी सब से ज्यादा अहमियत होती है. लेकिन सबकुछ सहने के बाद भी पत्नी की हर कुरबानी को नजरअंदाज करते हुए अगर एक पति कई सालों के रिश्ते को ताक पर रख कर अपने ऊपर निर्भर पत्नी को बीच मझधार छोड़ देता है और किसी दूसरी औरत के साथ अपनी नई दुनिया बसा लेता है तो ऐसे मर्दों को सबक सिखाने के लिए और उन तलाकशुदा औरतों की आर्थिक व्यवस्था के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी व्यवस्था यानी ऐलीमनी के तौर पर आर्थिक व्यवस्था की है.
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