Parenting Tips :  6 साल का रुद्र पहली कक्षा का छात्र है. वह हमेशा अपने पेरैंट्स से ?ाठ बोलता है जैसेकि होमवर्क पूरा न होने और टीचर द्वारा इस की वजह पूछने पर हर दिन कुछ न कुछ ?ाठ बोल कर खुद को बचा लेता है. स्कूल में पढ़ाए गए विषय को वह बताता नहीं. कहता है कि टीचर ने कुछ पढ़ाया नहीं. ऐसे में परीक्षा होने पर लिख नहीं पाता क्योंकि उस ने कुछ पढ़ा ही नहीं होता.

ऐसे करीब 6 महीने बीत गए स्कूल से शिकायत आने लगी. उस की मां मीना जब स्कूल गई तो पता चला कि वह स्कूल में कुछ भी नोटडाउन नहीं करता. पीछे बैठ कर खेलता रहता है. बारबार टीचर के कहने पर भी सुनता नहीं, इसलिए उस की टीचर ने मां को बुला कर सारी बात बताई.

मीना समझ नहीं पा रही थी कि वह बच्चे को कैसे सही रास्ते पर लाए क्योंकि वह स्कूल में ही नहीं घर पर भी हमेशा झूठी बात को ऐसे बताता है कि कोई पकड़ नहीं पाता कि वह झूठ बोल रहा है. वर्किंग मीना परेशान है कि आखिर इस का समाधान क्या है क्योंकि उस की इस आदत को सुधारना जरूरी था और मातापिता दोनों ऐसा कर नहीं पा रहे थे.

सैंटर औफ अट्रैक्शन बनना पसंद

असल में छोटे बच्चे कई बार झूठ बोलते हैं क्योंकि वे अपनी कल्पना और असली बातों के बीच फर्क को ठीक से नहीं समझ पाते. उन के लिए जो वे सोचते हैं या सपने देखते हैं वही उन्हें सच लगता है. उन्हें अभी यह भी पूरी तरह समझ नहीं आता कि दूसरे लोग क्या सोचते या क्या महसूस करते हैं. इसलिए वे कभीकभी बिना मतलब के भी झूठ बोल देते हैं क्योंकि उन्हे सबका ध्यान अपनी ओर खींचना होता है.

इस बारे में गुरुग्राम, मदरहुड अस्पताल के कंसल्टैंट बाल रोग विशेषज्ञ डा. बीर सिंह यादव कहते हैं कि बच्चे डर की वजह से भी झूठ बोलते हैं जैसे डांट पड़ने से बचने के लिए या सजा से बचने के लिए भी इस का सहारा लेते हैं. कुछ बच्चे पेरैंट्स या किसी का ध्यान पाने के लिए भी झूठ बोलते हैं ताकि लोग उन की ओर देखें या उन की बात सुनें. यह सब उन के बड़े होने और सीखने का हिस्सा होता है. अगर मातापिता उन्हें प्यार से समझाएं और बारबार सही और गलत का फर्क बताएं तो धीरेधीरे बच्चे सच बोलना सीख जाते हैं.

इस के अलावा बच्चों के झूठ बोलने में पेरैंट्स की भूमिका भी बड़ी होती है क्योंकि कई बार वे पेरैंट्स को किसी से झूठ बोलते हुए सुनते हैं. मसलन, घर पर हैं लेकिन फोन पर कह दिया नहीं हैं. काम कर नहीं रहे पर कह दिया कर रहा हूं आदि. कई छोटीछोटी बातों को बच्चे नोटिस करते हैं और वे भी उन्हें अनचाहे सीखते जाते हैं. इस बात का पेरैंट्स को विशेष ध्यान रखना चाहिए.

खुद को भी परखें

बच्चे अपने मातापिता को देख कर बहुत कुछ सीखते हैं. वे वही बोलते हैं और वही करते हैं जो वे रोज अपने घर में देखते हैं. अगर मातापिता सच बोलते हैं तो बच्चे भी सच बोलना सीखते हैं. अगर मातापिता गलती होने पर चिल्लाते या मारते हैं तो बच्चे भी वही तरीका अपनाते हैं. मातापिता बच्चों को कैसे सम?ाते हैं, कैसे डांटते हैं और कैसे प्यार देते हैं, इन सब बातों का बच्चे पर गहरा असर पड़ता है. अगर घर का माहौल शांत और प्यार भरा होगा तो बच्चा भी शांत रहेगा. अगर घर में हमेशा डर और गुस्सा होगा तो बच्चे का वैसा ही बनने की संभावना अधिक होती है.

सैल्फ कंट्रोल

डाक्टर कहते हैं कि अगर बच्चा झूठ बोलता है तो मातापिता को गुस्सा नहीं करना चाहिए. पहले शांत रहनाचाहिए और प्यार से बात करनी चाहिए. बच्चे से पूछें कि उस ने झुठ क्यों बोला, उसे किस बात का डर था या वह क्या चाहता था. उसे धीरेधीरे समझाएं कि कहानी बनाना और सच बोलना अलगअलग बातें होती हैं. उसे यह भी बताएं कि सच बोलना क्यों जरूरी है. बहुत सख्त सजा देने के बजाय बच्चे को सम?ाना ज्यादा अच्छा होता है. जब बच्चा सच बोले तो उस की तारीफ करें ताकि उसे अच्छा लगे और वह आगे भी सच बोले. पेरैंट्स को भी अपनी आदतें सुधारने की जरूरत होती है, उन्हें भी झूठ बोलने से बचना चाहिए क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने बड़ों को करते देखते हैं.

अपनी आदतें सुधारें

हर पेरैंट्स को यह समझना जरूरी होता है कि उन की हर छोटीबड़ी आदत का बच्चों पर असर पड़ रहा है. बच्चे वही करते हैं जो वे रोज अपने घर में देखते हैं. अगर मातापिता शांत हो कर बात करते हैं तो बच्चे भी वैसे ही बात करना सीखते हैं. अगर वे जल्दी गुस्सा करते है या चिल्लाते हैं तो बच्चे भी वैसा ही करने लगते हैं. अगर वे कहते कुछ हैं और करते कुछ अलग हैं तो बच्चे सम?ा नहीं पाते कि सही क्या है और गलत क्या है. पेरैंट्स का शांत, समझदार और प्यार भरा व्यवहार बच्चों को सही रास्ता दिखाने में बहुत मदद करता है.

सिखाएं ऐटिकेट्स

आजकल के अधिकतर पेरैंट्स कामकाजी हैं और काम के बाद जब भी उन्हें समय मिलता है मोबाइल पर रील्स देखने लग जाते हैं. ऐसे में बच्चों पर उन का ध्यान कम होता जाता है, जिस का असर उन पर पड़ता है. डाक्टर कहते हैं कि किसी भी गलत बात पर पेरैंट्स ऐटिट्यूड न दिखा कर अगर माफी मांग लेते हैं तो बच्चा भी सीखता है कि माफी मांगना गलत नहीं.

इस के अलवा हर दिन की छोटीछोटी बातें जैसे बच्चों की बात ध्यान से सुनना, गलती होने पर माफी मांगना और जो वादा किया है उसे पूरा करना, इन सब से बच्चे का स्वभाव बनता है. बच्चों से उन की उम्र के अनुसार ही उम्मीद रखनी चाहिए. किसी भी बात पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए.

सजा देने से बचें

सिर्फ सजा देने के बजाय बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि सही काम क्या है क्योंकि

कई बार बच्चे को कुछ सिखाए बिना पेरैंट्स

सजा देने लगते है जैसा 4 साल के तक्ष ने मां से ?ाठ बोला और पिता ने उसे दरवाजे से बाहर

खड़ा कर रख दिया. वह रोने लगा कि अब

कभी झूठ नहीं बोलेगा, फिर उसे अंदर आने दिया. घर का माहौल ऐसा होना चाहिए कि बच्चा बिना डरे अपनी गलती बता सके. जब बच्चा अच्छा काम करे तो उस की तारीफ करें और धैर्य रखें क्योंकि बच्चे धीरेधीरे सीखते हैं और समझदार बनते हैं.

इस तरह बच्चों की झूठ बोलने की आदत कोई बड़ी बीमारी नहीं है बल्कि एक सीखने का दौर है. अगर आप धैर्य, समझदारी और थोड़ा प्यार से काम लें तो यह आदत धीरेधीरे खत्म हो सकती है. बच्चों को डांटना या सजा देना, इस सिचुएशन को और भी खराब कर सकता है, इसलिए अपने बच्चे को सुनें, उसे समझें क्वालिटी टाइम दें और साथ मिल कर उसे सही रास्ता दिखाएं.

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