Interview: बिहार की पहली महिला आईपीएस आईपीएस मंजरी जाहार की कहानी किसी को भी प्रेरित कर सकती है. वे बिहार की रहने वाली है और शादी के बाद ससुराल में उन्हें काफी कुछ सहना पड़ा. मगर इस के खुद की मेहनत और जन्म से बिहार की पहली और देश की 5वीं महिला आईपीएस अफसर आप बिहार से आने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी और देश की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारियों में एक रही है हम सब से पहले आप के बचपन और शिक्षा के शुरुआती वर्षों के बारे में जानना चाहते हैं? परिवार काफी कंजर्वेटिव सोच रखता था.
उन की यह सोच ही नहीं थी यह जीवन मेरा है इस की दिशा अब मैं खुद तय करूंगी क्योंकि मेरे परिवार में बहुत से लोग आईएएस और आईपीएस प्रोफेशन से जुड़े हैं. जब उनकी इज्जत घर में, समाज में देखती तो मुझे अच्छा लगता था. सब उन के साथ बड़े सम्मान से पेश आते. घर के फैसलों में उन की राय काफी माने रखती थी. उन को देख कर ही मैं ने मन बनाया कि अब मुझे भी पीएससी की तैयारी करनी चाहिए.
आप ने पटना यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स किया है. ऐसे में आप की शिक्षा ने आप को आईपीएस बनने में किस तरह मदद की?
यह सच है कि आप क्या पढ़ रहे हैं वह आप को यूपीएससी जैसे प्रसटिजियस एग्जाम में कैसा करेंगे यह तय करता है. जिस वक्त मैं ने पीएससी की तैयारी शुरू की तब मुझे नहीं पता था कि क्या पढ़ना है, क्या एग्जाम की रुपरेखा होगी. उस के लिए मैं ने अपने परिवार में इस प्रोफैशन से जुड़े लोगों से मदद ली साथ ही उस वक्त दिल्ली के करोलबाग में राव स्टडी सर्कल के राव साहब से मुझे काफी मदद मिली.
उन्होंने मुझे पाठ्यक्रम से अलग जो पढ़ने के लिए कहा उसे मैं ने पूरी मेहनत से लगन से पढ़ा. उस दौरान
यूपीएससी की तैयारी के साथ ही मैं ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए इंग्लिश ऑनर्स भी किया. यह मेरे लिए काफी मददगार रहा क्योंकि मेरा कालेज पाठ्यक्रम और यूपीएससी का इंग्लिश पाठ्यक्रम लगभग एक था.बहरहाल पहले वक्त में लोग किसी अन्य जैसे इंजीनियरिंग या डाक्टर की डिगरी के बाद यूपीएससी को नहीं चुनते थे.
ट्रेनिंग में 1 या 2 ऐसे परिवीक्षाधीन अधिकारी रहे होंगे जो डाक्टरी लाइन से तो नहीं अलबत्ता इंजीनियरिंग की डिगरी लेकर जरूर आए थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. बहुत से लोग एनईईटी और जेईई जैसे ऐग्जाम देते हैं पूरी डिगरी कर के फिर यूपीएससी को चुनते हैं. मैं मानती हूँ, यह गलत है. देश में डाक्टरों की काफी कमी है ऐसे में आप को जिस प्रोफैशन के लिए तैयार हुए है उसी को पूरे मन से निभाना चाहिए.
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के दौरान सब से बड़ी चुनौती क्या रही ?
यह बहुत ही कठिन परिक्षा है. ऐसे में मैं खुश हूँ कि मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया और मुझे अच्छा करने और मन लगा कर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. मैं खुश हूं कि मैं दृढ़संकल्पी भी हूं. मुझे कभी अपने फैसले पर संदेह नहीं हुआ. कभी मुझे आत्मसंदेह नहीं हुआ कि क्यों मैं यह इतनी कठिन परीक्षा की तैयारी करने लगी. हाँ मुझे पता था कि यह परीक्षा काफी कठिन है और इस के लिए बहुत ही मेहनत करने
की आवश्यकता है जो मैं ने की.
मैं ने दिन में 16 घंटे की पढ़ाई की. इस परीक्षा या जीवन में किसी भी परीक्षा के लिए छात्र का डिसिप्लिन होना बहुत जरूरी है. मेरे घर में शुरू से अनुशासन में रहना सिखाया गया था. हम 3 बड़ी बहनें थीं तो अपने डेली रूटीन में कैसे अनुशासन से रहना है यह पाठ हमें घर में सिखाया गया था और मेरे लिए काफी मददगार भी साबित हुआ. मैंने दिल्ली में पीजी में रह कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की.
मैं सुबह में राव साहब की बताई पुस्तकें पढ़ती, फिर उस के बाद अपने कालेज की क्लास करती और उस के बाद फिर से यूपीएससी की तैयारी में जुट जाती. मैं ने इस दौरान अनुशासन रखा. मैं न घूमने जाती, न
सिनेमा देखने न ही बाहर खाने जाती. सब दोस्तों को लगता था कि मैं ऐसे कैसे कर सकती हूं लेकिन मैं जानती थी कि मुझे इस कठिन परीक्षा को पास करने के लिए मेहनत करनी होगी, उसी संकल्प में पूरी मेहनत में जुटी थी.
हां आजकल यूपीएससी ऐस्पिरेंट्स रात को 2 बजे लाइब्रेरी में बैठे हैं या कैफे में पड़ रहे हैं. सुबह 3 बजे का अलार्म लगा कर उठ रहे हैं. ऐसा मैंने कभी नहीं किया. मैं अपने बनाए रूटीन को फॉलो करती थी. रात को 11 बजे तक सो जाती थी और सुबह 7 बजे से पढ़ाई शुरू कर देती थी.
पुरुषप्रधान व्यवस्था में एक महिला अधिकारी के रूप में सब से बड़ी चुनौती क्या रही ?
के हॉ. शुरुआती दिनों में ऐसा हुआ, मेरी ट्रेनिंग दौरान पुरुष परिवीक्षाधीन अधिकारियों के बराबर हमें ट्रेनिंग दी गई. उतनी ही मेहनत में ने भी की. लेकिन उस समय काफी कम महिलाएं उस क्षेत्र में थीं तो पोस्टिंग के दौरान महिला होने के कारण काफी जगह मुझे मेरी क्षमता के अनुसार पोस्टिंग नहीं दी गई. मैं खुश थी कि मुझे मेरे राज्य में पानी बिहार कैडर ही मिला.
लेकिन शुरुआती समय में मेरी पोस्टिंग ने मुझे निराश किया क्योंकि मेरे साथ ट्रेनिंग किए पुरुषों को फील्ड में और मुझे डैस्क जॉब असाइन की गई. उन दिनों आईजी पुलिस सब से बड़ी पोस्ट थी. वे भी शुरुआत में यह सोच रखते थे कि महिला है इस को कहाँ मैं पोस्टिंग टू. लेकिन मैं ने सभी संघर्षो को स्वीकार किया और जो भी काम मुझे सौंपा गया मैं ने उस को पूरी वैल्यू दी और पूरी लगन से पूरा किया
|
आप के अनुभव में किस तरह का व्यक्तित्व पुलिस सेवा में आगे बढ़ता है? पुलिस सेवा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि आप अनुशासन में रहना सीखें. अपने काम को वैल्यू दें जो काम आप को सौपा गया है उसे पूरी ईमानदारी के साथ पूरा करें. यूपीएससी जैसी परीक्षा को पास करने के लिए आप का दृढ़संकल्पी होना बहुत जरूरी है. उस के साथ ही आप को मैटल कॉन्फिडेंस होना बहुत जरूरी है. कई बार आप ऐसी स्थितियों में होते हैं जब आप को सोचसमझ कर फैसले करने पड़ते हैं.
आप मैदान में हैं वहां हजारों की भीड़ जमा और आप एक लीडर की भूमिका में होते हैं आप के साथ जो पुलिस बल है वह अपने अगले कदम के लिए आप के फैसले का इंतजार कर रहा होता है और आप को तुरंत सही ऐक्शन भी लेना है और उस के साथ ही अपने सीनियरजूनियर सब को उस फैसले पर ले कर चलना होता है. तो आप की मैंटल स्ट्रेंथ ऐसे समय में काफी परखी जाती है तो आप उस पर जरूर काम करें.
आप के अनुसार आईपीएस बनने के लिए पढ़ाई के अलावा कौन सी आदतें जरूरी होती हैं?
पहले के मुकाबले अब पाठ्यक्रम काफी बदला है. अगर में यूपीएससी के सामान्य अध्ययन विषय की बात करूं तो उस का दायरा अब किसी पुस्तक तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि काफी विस्तृत हो गया है. तो उस के लिए अब यह जरूरी है कि आप अपने आप को अपडेट रखें.
अखबार को अपना दोस्त बना लें, उस के अलावा एक विषय आप को अलग से चुनना होता है उस पर आप पहले से ध्यान दें. मैं ने पहले एक विषय के तौर पर सामाजिक विज्ञान पढ़ा था लेकिन राव साहब ने मुझे सलाह दी कि मैं इतिहास पढ़े तो मैं खुद को उस के लिए तैयार किया.
क्या तैयारी के दौरान कभी ऐसा लगा कि यह रास्ता बहुत कठिन है?
यूपीएसी की परीक्षा बेहद कठिन है यह सोचसमझ कर ही मैं ने इस के लिए तैयारी करनी शुरू की थी. इस में मुझे मेरे परिवार का राव साहब का काफी साथ भी मिला. मैं कभी आत्मसंदेह की स्थिति में नहीं आई. ह. पढ़ाई काफी कठिन थी लेकिन मैं ने अपनेआप को पहले से अनुशासन में रखा था तो मेरे लिए मेहनत करना उस से थोड़ा आसान हो गया. में 16 घंटे पड़ती थी.
राव साहब ने पहले ही दिन में 2 अखबारटाइम्स ऑफ इंडिया और द स्टेट्समैन पढ़ने के लिए कहा था जिन को मैं पूरे नियम से पड़ती थी, साथ ही वे जो अन्य किताबें मुझे पढ़ने के लिए कहते मैं नियम से उन को पढ़ती थी. मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ती थी. बहरहाल, तैयारी के दौरान मैं ने खुद को समाज से अलग कर लिया था. न मैं कभी किसी जगह घूमने जाती थी, न किसी घर के शादीसमारोह में मैं शामिल हुई.
सब जानते थे मैं तैयारी में जुटी हूं और मेरे परिवार ने उस समय मेरा काफी साथ दिया. जो छात्र आईपीएस बनना चाहते हैं उन्हें स्कूल के समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए? अब समय पहले जैसा नहीं है. पहले कालेज की पढ़ाई के दौरान तय करते थे कि आप को भविष्य में क्या बनना है. लेकिन अब बच्चे बचपन में तय कर लेते हैं कि उन को भविष्य में क्या करना है और यह जरूरी भी है.
अब पहले की तुलना में हर क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ गई है. ऐसे में आप को पढ़ाई के दौरान ही भविष्य क्या
होगा यह सोच कर विषय चुनने चाहिए और किसी अन्य कौशल को भी सीखना चाहिए जो आप के कैरियर में लाभदायक हो.
क्या आप के कैरियर में ऐसा कोई समय आया जब आप ने अपने फैसले पर सवाल उठाया?
मेरे समय में महिला पुलिस अधिकारी होना अपने आप में चुनौती थी. लोग आप को और आप के फैसलों को उस सम्मान से नहीं देखते थे. लेकिन मैं अपने काम को ले कर हमेशा ईमानदार रही. यही चीज मेरे लिए काफी मददगार साबित हुई.
हमें आईपीएस प्रोबेशनर्स के समय जिला लैवल की ट्रेनिंग दी गई थी लेकिन बोकारो स्टील सिटी में अच्छे प्रदर्शन के बाद मुझे नैशनल लेवल पर सीआईएसएफ और सीआरपीएफ में काम करने का मौका मिला. इस के साथ ही मुझे नैशनल पुलिस अकादमी में आईपीएस प्रोबेशनर्स को ट्रेनिंग देने का मौका मिला.
एक महिला अधिकारी के रूप में परिवार और समाज की अपेक्षाओं को संतुलित करना कितना कठिन रहा?
मैं बहुत सी लड़कियों से मिली हूं जो यह कहती हैं कि वे नौकरी करना चाहती हैं या पुलिसिंग के क्षेत्र में आना चाहती हैं, आगे पढ़ना चाहती हैं लेकिन उन का परिवार साथ नहीं दे रहा है. ऐसे में वे क्या करें? बगावत के मैं हमेशा खिलाफ रही हूं कि आप परिवार के फैसले को न मान कर बाहर निकल जाएं और फिर अपने कैरियर पर ध्यान दें. ऐसे में आप परेशान रहते हैं और सफल नहीं हो पाते हैं.
मैं जब भी यंग लड़कियों से मिलती हूं तो उन्हें सलाह देती हूं कि आप के परिवार वाले पढ़ाई या नौकरी के लिए नहीं मान रहे हैं तो बगावत पर न उतरें, अपने पासपड़ोस में परिवार में बड़े बुजुगों से बात करें, रिश्तेदारों से बात करें, उन्हें अपने पिता को समझाने के लिए कहें. आखिर किसी की बात तो परिवार की समझ में आएगी और फिर आप उन के साथ मिल कर अपने सपने पूरे करें.
शुरुआत में मेरे पुलिस सलैक्शन के समय पुलिस की नौकरी को अच्छा नहीं समझा जाता था.
पिताजी ने साफ इनकार कर दिया था कि अच्छा है आप ने यूपीएससी परीक्षा पास की लेकिन हम महिला होने के नाते आप के पुलिस में जाने के पक्ष में नहीं है. मगर मैं ने हार नहीं मानी.
फिर सब ने उन को किरण बेदी का उदाहरण देकर समझाया कि देखिए वे भी हैं जो इस क्षेत्र में काम
कर रही हैं. मेरा फिजिकल फिटनेस से दूर का नाता था तो पिताजी को लगा कि शायद यह मेहनत देख कर वापस आ जाए तो उन्होंने मेरा मन रखने के लिए कह दिया कि आप पुलिस अकादमी देख कर वापस आ जाना, लेकिन सब के समझाने से मान गए और उन को साथ ले कर मैं ने यह सफर शुरू किया.
आप ने परिवार, समाज और कैरियर इन तीनों के बीच संतुलन कैसे बनाया?
आप चाहे किसी भी प्रोफैशन में हों आप समाज के साथ जुड़ कर ही रहना होगा. मैं और मेरे पति दोनों आईपीएस रहे हैं. ऐसे में कई बार हम दोनों कई बार काम के चलते बाहर रहते तो ऐसे में जरूरी है कि आप अपने परिवार के साथ, ससुराल पक्ष हैं या आप के अपने परिवार वाले या फिर पासपड़ोस के लोग सब से जुड़ कर चलना चाहिए, मेरे साथसाथ बहुत अच्छी हाउस हैल्प थी जिस ने 32 सालों तक मेरे साथ काम
किया, बच्चों का खयाल रखा.
लेकिन बावजूद उस के मैं अपने पड़ोसियों को कह कर जाती थी कि बच्चों का ध्यान रखना एक बार तो मेरे बेटे को बहुत बुखार था लेकिन उस दिन इंस्पेक्शन के लिए टीम तैयार थी. अब ऐसे काम आप को 1 महीना पहले से तय करने होते हैं, सिर्फ आप अकेले नहीं हैं पूरी टीम आप के साथ तैयार होती तो आप उस को स्थगित या कैंसल भी नहीं कर सकते हो.
ऐसे में जरूरी है कि आप सब अपने ऊपर न ले कर समाज में सब से जुड़ कर चलें. अब पुरुष अपने काम, अपने आराम को ज्यादा तवज्जो देते हैं लेकिन एक महिला के तौर पर आप को घर, बच्चे, परिवार सब को देखना होता है, इसलिए मदद मांगने के लिए न हिचकें और संबंध बना कर रखें.
रिटायरमेंट के बाद भी आप टीसीएस, एफआईसीसीआई और अन्य संस्थाओं से जुड़ी?
मेरा शुरू से ऐसा नेचर रहा है कि मैं अपने आप को व्यस्त रखना पसंद करती हूं. समाज से जुड़ी रहती हूं. इसलिए मैं ने खुद को रिटायरमेंट के बाद कभी ऐसे नहीं समझा कि अब काम न करूँ. मैं कोशिश करती हूं किसी तरह से लोगों को प्रेरणा देती रहूं, मुझे पहले भी अगर किसी कालेज में खासकर गर्ल्स कालेज में किसी लैक्चर के लिए बुलाया जाता था तो मैं कोशिश करती थी अपनी वरदी पहन कर जाऊं ताकि
बच्चियां प्रेरणा ले सकें.
जो युवा आज आईपीएस बनने का सपना देख रहे हैं उन्हें खुद को कैसे तैयार करना चाहिए ? बिलकुल अब काम करने के तरीकों में बदलाव आ रहा है. ऐसे में जरूरी है कि आप तकनीक के मामले में पीछे न रहे. समाज में क्या हो रहा है इस से अपडेटेड रहने के साथसाथ तकनीकी तौर पर भी खुद को अपडेट रखें. कुछ नया सीखने के लिए हमेशा तैयार रहे. टैक्नोलोजी को कैसे और कब इस्तेमाल करना है यह आप
को आना चाहिए,
आप ने ऑटोबायोग्राफी लिखी ‘मैडम सर’ यह शीर्षक काफी रोमांचक है आप ने इस को क्यों चुना?
मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था कि मुझे किताब लिखनी है. रिटायरमेंट के 13 साल बाद तक मेरा छोटा भाई मुझे कहता रहा कि मुझे लिखना चाहिए, कितनी कठिन परिस्थितियों में आप ने काम किया है वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा. सिर्फ इसी सोच के साथ मैं ने इस किताब पर काम शुरू किया. हालांकि लिखने कि लिए 1000 कहानियां और केस स्टडी हो सकती थी जो इस पुस्तक का हिस्सा बनती,
लेकिन इस में मैं ने सिर्फ उन किस्सों और केस को जगह दी जो मेरे दिल के करीब थे. इस किताब का नाम भी मेरे भाई ने ही सुझाया. मैं उस से जिक्र कर रही थी कि अब इस पुस्तक का नाम क्या रखा जाए तो उस ने एक झटके में कहा इस आत्मकथा का नाम आप मैडम सर’ रखो. मैं ने पूछा क्यों तो उस ने कहा कि बचपन में जब आप को सब संबोधन देते थे तो मैडम सर बोलते थे क्योंकि सिर्फ मैडम बोलने
की किसी को आदत नहीं थी.
ओहदा सिर्फ सर यानी पुरुष के नाम पर दिया जाता था. लेकिन आप ने इस को बदला है. उन दिनों एक
आईपीएस से मेरी मुलाकात हुई तो उन्होंने मुझे काफी धन्यवाद दिया कि हमारे संघर्षों के कारण अब उन्हें सिर्फ मैडम कह कर के संबोधित किया जाता है न कि मैडम सर यह सुन कर काफी अच्छा लगा.
आज की लड़कियों के लिए आप की सब से ईमानदार सलाह क्या होगी?
17 साल की मंजरी और सभी यंग गर्ल्स को हम यही कहेंगे कि मेहनत करो, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाओ, समाज में मिल कर रहो और जो करो ईमानदारी से करो.
मंजरी जारुहार
