Nationalism in Indian films : हमारे देश में अमीर हो या गरीब हिंदू हो या मुसलमान हर हिंदुस्तानी अपने देश से प्यार करता है . हमेशा ऐसा कुछ करने की कोशिश करता रहता है जिसकी वजह से देश का नाम रोशन हो . बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं है जब से फिल्म इंडस्ट्री का निर्माण हुआ है देशभक्ति पर आधारित फिल्मों का निर्माण होता रहा है , फिर चाहे वह देशभक्ति पर आधारित फिल्म हकीकत हो , या जय जवान जय किसान हो या फिर आजाद भगत सिंह और हिंदुस्तान की कसम ही क्यों ना हो , आजादी की लड़ाई के दौरान आम लोगों में भी देशभक्ति का जज्बा , हर हिंदुस्तानी की रगो में खून की तरह बहता था, उसके पीछे भी खास वजह थी हमारे देश के वह वीर बहादुर देश प्रेमी जिन्होंने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते ना सिर्फ दर्दनाक यातनाएं सही बल्कि देश को आजादी दिलाने के लिए पूरी बहादुरी के साथ फांसी भी चढ़ गए, अगर हिंदुस्तान की सर जमीन का इतिहास उठा कर देखे तो रानी लक्ष्मी बाई, झांसी की रानी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह आजाद, महात्मा गांधी, छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, जैसे अनगिनत देशभक्त योद्धा है जिन्होंने भारत देश को आजादी दिलाने के लिए और दुश्मनों को भारत से भगाने के लिए अपनी जान भी दाव पर लगा दी , यही वजह थी कि उस दौरान देश भक्ति पर जो भी फिल्में बनती थी वह अमर हो जाती थी, पिछले 70 सालों में हिंदी की अनेक यादगार फिल्मों ने लोगों में देशभक्ति भाव, शौर्य , देश के लिए बलिदान का भाव भरा है. फिल्मों के विषय स्वतंत्रता संघर्ष, आक्रमण युद्ध देश के दुश्मनों के प्रति विद्रोह रहे हैं.
भारत में फिल्म उद्योग स्वतंत्रता आंदोलन के समय उभरा क्योंकि उस दौरान माना जा रहा था कि फिल्मों के माध्यम से देश भक्ति की भावना का संचार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन और विद्रोह दिखाने के लिए देशभक्ति पर आधारित फिल्मों का निर्माण सही मार्ग है, 1943 में कवि प्रदीप के खिलाफ उस वक्त वारंट जारी हो गया था जब मुंबई टॉकीज की फिल्म किस्मत में भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में उन्होंने गाना लिखा था , आज हिमालय की छोटी से फिर हमने ललकारा है दूर हटो दुनिया वालों यह हिंदुस्तान हमारा है. देश की आजादी के साथ-साथ देश प्रेम के जज्बे को लेकर कई फिल्में बनी जैसे कि झांसी की रानी आनंद मठ, ललकार, हिंदुस्तान की कसम, अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी, सुभाष चंद्र बोस पर बनी फिल्म बोस द फॉरगॉटेन हीरो आदि , देश भक्ति पर आधारित फिल्मों का सिलसिला जारी रहा और उसके बाद भी कई फिल्में जैसे बॉर्डर , मंगल पांडे, कारगिल, उरी द सर्जिकल स्ट्राइक, ललकार, गाज़ी अटैक आदि फिल्में बनी लेकिन जैसे-जैसे समय बदला देश भक्ति पर आधारित फिल्मों में भी बदलाव आने लगा , स्वतंत्रता के दौरान या स्वतंत्रता के बाद देशभक्ति पर बनी फिल्मों में अंग्रेजों या बाहरी देश के दुश्मनों के खिलाफ जैसे बाहरी मुस्लिम देश पाकिस्तान जो भारत के दुश्मन है उनके खिलाफ देश भक्ति पर आधारित फिल्मों का निर्माण हुआ , लेकिन पिछले कुछ सालों से देश भक्ति पर आधारित फिल्मों में भारी बदलाव आया है पेश है इसी खास सिलसिले पर एक नज़र….
देश भक्ति की फिल्में बनी धर्म भक्ति की फिल्में…..
पिछले कुछ सालों से’ देश भक्ति की फिल्मों में भी भारी बदलाव देखने को मिला है , मौजूदा सरकार की भावनाओं को ध्यान में रख कर मेकर्स देश भक्ति पर आधारित फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं , क्योंकि मौजूदा सरकार हिंदू धर्म राम जन्मभूमि, अयोध्या, सनातनी धर्म को सहयोग करती है इसलिए फिल्म मेकर्स भी अपनी फिल्मों में रामायण या राम और अयोध्या से जुड़ी बातों का अपनी फिल्मों में प्रचार करती नजर आती है , जैसे की अति चर्चित फिल्म आर आर आर में ब्रिटिश राज के खिलाफ युद्ध दिखाया गया है लेकिन उसमें भी लड़ाई के दौरान रामायण का इस्तेमाल करके अंग्रेज से लड़ाई के दौरान धनुष बाण का उपयोग करके फिल्म का हीरो युद्ध करता दिखाई दिया , जहां पर बात ब्रिटिश के साथ युद्ध की है वहां फिल्म का हीरो रामायण का प्रचार करते हुए अनगिनत धनुष बाण चलाता नजर आता है , वही इस फिल्म की हीरोइन आलिया भट्ट को सीता का लुक दिया गया , 1947 से पहले जहां देश भक्ति की फिल्में बनती थी वही 2014 के बाद धर्म भक्ति पर आधारित फिल्में बनने लगी , जिसमें फिल्म मेकर्स भी सरकार से सहयोग के चक्कर में अपनी फिल्मों को धार्मिक भावना से जोड़ने लगे, जैसे अजय देवगन की दृश्यम 3 की कहानी को भी मॉडर्न रामायण के तौर पर प्रस्तुत किया गया , अक्षय कुमार की रामसेतु रामायण काल में बने रामसेतु पुल पर आधारित थी, इसके अलावा आदि पुरुष , कमल हसन की दशावतारम, रणबीर कपूर की ब्रह्मास्त्र, आदि कई फिल्मों ने देशभक्ति के बजाय धर्म और पौराणिक कहानियों की तरफ रुख कर लिया , एक समय ऐसा भी था जब कई मेकर्स जानबूझकर अपनी फिल्मों में धार्मिक कहानियों को जोड़ते थे, ताकि उनकी फिल्म रिलीज होने में कोई अड़चन ना आए.
अगर हम कोई विदेशी फिल्म देखें तो उस फिल्म में युद्ध में जाने से पहले औजारों की मरम्मत की जाती थी ताकि युद्ध के दौरान कोई अड़चन ना हो, लेकिन हमारे यहां पर फिल्मों में हीरो युद्ध में जाता है तो बहन या मां आकर उसको हल्दी कुमकुम का टीका करती है और रक्षा के लिए राखी भी बांधती है ,जिसके बाद फिल्मी स्टाइल में दुश्मन की तरफ से आई गोली उस राखी से टकरा के वापस लौट जाती है , ऐसे ही कई सारे फिल्मी और बिना सिर पैर के सीन आजकल देशभक्ति की फिल्मों में देखने को मिलते हैं.
फिल्म मेकर्स में मौजूदा सरकार का खौफ ….
आज के समय में किसी भी फिल्म निर्माण के वक्त फिल्म मेकर्स को चौकन्ना रहना पड़ता है क्योंकि अगर उनकी फिल्म में कुछ भी आज की राजनीति या धार्मिक भावना के खिलाफ है तो उनको फिल्म रिलीज करने से पहले कई सारी परेशानियों का धमकियां का सामना करना पड़ता है , इतना ही नहीं उनकी फिल्म रिलीज होने के लिए भी मुश्किलों में आ जाती है, जैसे शाहरुख खान की फिल्म जवान और पठान, संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती, मुश्किलों से रिलीज हुई , वही दिलजीत दोसांझ की फिल्म पंजाब 95 और सरदार जी 3 आखिर तक रिलीज नहीं हुई और दिलजीत दोसांझ को देशद्रोही तक कह कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई , ऐसी ही कई फिल्मों को विवादित और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के चलते रिलीज के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा , जिसके चलते फिल्म मेकर्स देश भक्ति की फिल्मों के निर्माण के दौरान धर्म भक्ति की भावनाओं को भी पूरी तरह ध्यान में रखकर फिल्म का निर्माण करते हैं ताकि करोड़ों में बनी उनकी देशभक्ति पर आधारित फिल्म विवादों की बलि ना चढ़ जाए .
