Tinnitus Treatment : 30 साल के संदीप को हमेशा कान में कुछ सुनाई पड़ती है, बाहर कुछ साउंड न होने पर भी उसे लगता है कि कुछ आवाज उस के कानों तक आ रही है। परेशान हो कर उस ने डाक्टर की सलाह ली, जिस में पता चला कि वह हमेशा कान में हैडफोन लगा कर तेज आवाज में गाना सुनना पसंद करता है, जिस से उसे यह समस्या हुई है क्योंकि गाने को बंद करने के बाद भी उसे सीटी जैसी आवाज कानों में आती रहती है.

कई बार उस ने अपनी गर्लफ्रैंड से भी पूछा कि क्या कोई आवाज उसे सुनाई दे रही है? उस के मना करने पर पहले तो वह इसे अपना भ्रम समझा, लेकिन बाद में उसे असहजता महसूस होने लगी. इलाज के बाद और कई दिनों तक हैडफोन न लगाने के बाद इसे इस साउंड से नजात मिली.

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असल में टिनिटस (Tinnitus) कान से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिस में व्यक्ति को ऐसी आवाज सुनाई देती है, जिसे आसपास मौजूद अन्य लोग नहीं सुन पाते.

आमतौर पर यह आवाज घंटी बजने, भिनभिनाहट, सीटी जैसी आवाज या फुसफुसाहट के रूप में महसूस हो सकती है.

टिनिटस कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक लक्षण (symptom) है, जो कान या सुनने से जुड़ी प्रणाली में किसी समस्या का संकेत दे सकता है.

इस बारे में दिल्ली के बिरला हौस्पिटल की आंख, नाक, कान गला विशेषज्ञ डा. दीप्ति सिन्हा कहती हैं कि यह स्थिति तब पैदा होती है, जब दिमाग सुनने वाली प्रणाली से आने वाले संकेतों को गलत तरीके से समझने लगता है और ऐसी आवाज बना लेता है, जो वास्तव में मौजूद नहीं होती. अकसर यह समस्या भीतरी कान (inner ear) की नाजुक हेयर सैल्स को नुकसान पहुंचने के कारण होती है, जो ध्वनि संकेतों को दिमाग तक पहुंचाने का काम करती हैं. लंबे समय तक तेज आवाज में रहना, कान का परदा फटना, कान में संक्रमण या कुछ बीमारियां भी टिनिटस का कारण बन सकती हैं.

टिनिटस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इस की संभावना अधिक बढ़ जाती है क्योंकि सुनने की क्षमता धीरेधीरे कम होने लगती है, हालांकि यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, आजकल यूथ में भी देखने को मिल रहा है. उन में टिनिटस का अनुभव तब होता है, खासकर जबजब उन की आदतों या काम में तेज आवाज का लगातार संपर्क होना होता है. इस के अलावा उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी बीमारियां भी सुनने की समस्याओं और टिनिटस के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.

हैडफोन है बड़ी समस्या

अगर हैडफोन को लंबे समय तक बहुत तेज आवाज में इस्तेमाल किया जाए तो यह भीतरी कान की हेयर सैल्स को नुकसान पहुंचा सकता है. इस से सुनने की क्षमता कम होना और टिनिटस दोनों हो सकते हैं. यह नुकसान कई बार स्थायी भी हो सकता है. इस से बचने के लिए 60/60 का नियम अपनाना फायदेमंद माना जाता है यानि संगीत को अधिकतम 60% वौल्यूम पर 60 मिनट से अधिक न सुनना.

विटामिंस की कमी

कुछ मामलों में विटामिन B12 और जिंक की कमी को टिनिटस से जोड़ा गया है, जबकि ऐसा बहुत कम लोगों में पाया गया. अगर टिनिटस के साथ पोषण की कमी से जुड़े अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो डाक्टर से जांच करवाना और जरूरत पड़ने पर सप्लिमैंट लेना मददगार साबित हो सकता है.

मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं

डाक्टर आगे कहती हैं कि टिनिटस का मुख्य कारण मनोवैज्ञानिक नहीं होता. आमतौर पर यह भीतरी कान की संरचना या श्रवण तंत्रिका (auditory nerve) से जुड़ी समस्या के कारण होता है. हालांकि तनाव और चिंता इस की तीव्रता को बढ़ा सकते हैं. कई लोगों को महसूस होता है कि तनाव या चिंता के समय कानों में बजने वाली आवाज अधिक स्पष्ट हो जाती है.

टिनिटस में व्यक्ति बाहरी आवाज के बिना ही आवाज महसूस करता है, लेकिन इसे केवल मन का भ्रम नहीं माना जाता. यह अकसर किसी सुनने से जुड़ी समस्या या अन्य स्वास्थ्य स्थिति का संकेत भी हो सकता है.

यदि टिनिटस लंबे समय तक बना रहे या परेशान करे, तो ईएनटी (कान नाक गला) विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है ताकि इस के कारण का पता लगाया जा सके और उचित उपचार किया जा सके.

डाक्टर की सलाह कब लें

यदि टिनिटस के साथ निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है :

-सुनने की क्षमता में कमी
-सिर घूमने जैसा महसूस होना (वर्टिगो)
-कान में मैल (earwax) जमा होना या संक्रमण
-अगर टिनिटस अचानक शुरू हो और इस के साथ सुनने में कमी या चक्कर आएं, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है.

इलाज

टिनिटस का कोई एक निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन इस के प्रबंधन के लिए ध्वनि थेरैपी (Sound therapy), हियरिंग एड्स और काउंसलिंग (CBT) बहुत प्रभावी हैं. मूल कारण (जैसे वैक्स, तनाव या कान का संक्रमण) का इलाज कराने से राहत मिल सकती है.

जीवनशैली में बदलाव, जैसे कैफीन कम करना और शांत वातावरण में रहना वगैरह इस के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

टिनिटिस से बचाव के तरीके

जीवनशैली से जुड़े कुछ बदलाव टिनिटस के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं :

-लंबे समय तक बहुत तेज आवाज वाले वातावरण या गाना सुनने से बचें और जरूरत पड़ने पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करें.

-ईयरबड्स या हैडफोन का इस्तेमाल करते समय सुरक्षित सुनने की आदत अपनाएं.

-तनाव कम करने के लिए रिलैक्सेशन तकनीक का अभ्यास करें.

-नियमित रूप से हियरिंग टेस्ट करवाएं, खासकर यदि आप को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किडनी की बीमारी है.

इस प्रकार समय रहते जांच और सही मैनेजमेंट से टिनिटस के प्रभाव को कम किया जा सकता है और लंबे समय तक सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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