साउथ अफ्रीका का ट्रिप प्लान करना इतना आसान नहीं है क्योंकि वहां क्राइम रेट काफी ज्यादा है. कनाडा ने तो अपने सिटिजंस के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है कि वहां जाने से पहले अच्छी तरह सोचसमझ लें.

खुद साउथ अफ्रीका वाले कहते हैं कि यहां क्रिमिनल्स बहुत ऐक्टिव हैं इसलिए हमेशा सावधान रहें. फिर भी आजकल जब पाकिस्तान, ईरान और मिडल ईस्ट के ऊपर से एअर स्पेस बंद हो जाने के कारण हवाई किराया बढ़ गया है, साउथ अफ्रीका जाना अच्छा रहेगा.

साउथ अफ्रीका का ट्रिप प्लान करने से पहले वहां का तापमान देख लें. श्यामली परिवार के साथ दिसंबर में साउथ अफ्रीका गई. सब ने शौर्ट्स वगैरह रख लिए. क्योंकि एआई से तापमान चैक किया था. उस ने 26-27 डिग्री बताया था. लेकिन जोहान्सबर्ग पहुंचे तो वहां बारिश हो गई. तापमान काफी कम हो गया. उन के पास सही कपड़े नहीं थे, इसलिए उन का ट्रिप ज्यादा अच्छा नहीं रहा. बेहतर यही है कि थोड़ेबहुत पूरी बाजू वाले कपड़े रख लें. जरूरी नहीं है कि हर जगह बारिश हो या गरमी ही हो.

संबित पत्नी और बच्चों के साथ साउथ अफ्रीका घूमने गया. जोहान्सबर्ग में उन का पहला दिन था. सब बहुत उत्साहित थे. लेकिन जब उठ कर देखा तो बारिश हो रही थी. नाश्ता कर के उन्होंने बारिश थमने का इंतजार किया. कमरे में आए तो बच्चे सो गए. 12 बजे तक बारिश नहीं रुकी तो सोचा कहीं निकल लेते हैं, वहां जाने तक शायद बारिश बंद हो जाए. सब को तैयार होतेहोते डेढ़ बज गया. जब पहली जगह पहुंचे तो वहां बारिश बिलकुल नहीं थी. रास्ते में भी कहीं बारिश नहीं थी. बहुत अफसोस हुआ कि आधा दिन खराब हो गया.

कहांकहां घूमना है उस की लिस्ट बनाएं

वैसे तो साउथ अफ्रीका बहुत बड़ा है और लोग हर जगह घूमने जाते हैं. ज्यादातर लोग जोहान्सबर्ग, डर्बन और कैप टाउन का रुख करते हैं क्योंकि इसी में 10-12 दिन का समय लग जाता है. अगर टूर महीने का हो तो अलग बात है, लेकिन 10-12 दिनों में इतने ही शहर घूमा जा सकता है. तो पहले देख लें कि कौन से शहरों में जाना है, वहां क्याक्या देखना है, किस जगह का कितने टिकट होगा, कौन सी जगह की टाइमिंग क्या है, छुट्टी किस दिन होती है, किस टाइम जाना ठीक रहेगा, क्या पहनना होगा, क्या साथ ले जाना होगा सब लिख लें ताकि वहां जा कर अच्छे से ऐंजौय कर सकें.

जोहान्सबर्ग

गोल्ड रीफ थीम पार्क: इस में देखने के लिए बहुत कुछ है. बहुत सारी राइड्स हैं. अच्छाखासा समय बिता सकते हैं. लेकिन जाने से पहले टाइमिंग पता कर लें. गूगल जाने से पहले उन की वैबसाइट पर जरूर चैक करें. वहां वाटर स्पोर्ट्स की काफी ऐक्टिविटीज हैं, उस हिसाब से कपड़े पहन कर जाएं. साथ में एक जोड़ी कपड़े रख लें ताकि आते समय बदल सकें.

साउथ अफ्रीकन नैशनल म्यूजियम औफ मिलिटरी हिस्ट्री: यह म्यूजियम बहुत बड़ा और शानदार है. बहुत कुछ देखने को मिलेगा. लेकिन टिकट अच्छाखासा है, इस के लिए तैयार रहना होगा. वहां लोकल लोगों के लिए अलग टिकट रेट है. 16 देशों के लिए अलग टिकट लगता है. उन देशों को एसएडीसी कहते हैं. बाकी देशों के लिए 120 जार प्रति व्यक्ति लगते हैं. मंदिरा ने इंटरनैट से देख कर लिस्ट बनाई थी, लेकिन उस में यह नहीं बताया गया था, इसलिए उन को वहां जा कर काफी हैरानी हुई. हाल्स के अंदर फोटो नहीं खींच सकते. हालांकि बाहर भी काफी कुछ है, जहां फोटोग्राफी कर सकते हैं. वहां खानेपीने का सामान ले जा सकते हैं. बाहर काफी बड़ी जगह है, जो पिकनिक के लिए एकदम सही है.

जेम्स हाल म्यूजियम औफ ट्रांसपोर्ट: इस में विंटेज कारों का लुत्फ उठा सकते हैं. विदेशी बसें, ट्राम, ट्रेन, बाइक, साइकिल, टायरों का इतिहास, तांगा, बग्गी सबकुछ है वहां पर. इस की कोई फीस नहीं है. दानपेटी रखी है, चाहें तो उस में कुछ पैसे डाल सकते हैं. बस वे रजिस्टर में ऐंट्री करवाएंगे. अंदर भी कैमरा और मोबाइल दोनों ले जा कर आराम से फोटो खींच सकते हैं.

लिंडफील्ड विक्टोरियन हाउस म्यूजियम: अगर एआई से लिस्ट बनाते हैं तो यह म्यूजियम जरूर दिखेगा, लेकिन यहां जा कर आप को निराशा होगी. राखी बच्चों और पति के साथ खुशीखुशी म्यूजियम देखने गई. टैक्सी ड्राइवर ने एक घर के आगे टैक्सी रोक दी और कहा कि आप की डैस्टिनेशन आ गई है. लेकिन वहां एक छोटा सा घर था, जिस के गेट पर बिजली के तार लगे थे. उस गेट की साइड में एक परचा लगा था, जिस में लिंडफील्ड विक्टोरियन हाउस म्यूजियम लिखा था.

बच्चे टैक्सी से उतरने लगे तो राखी और उस के पति ने उन को रोक दिया और ड्राइवर से कहा कि वे तो म्यूजियम देखने आए हैं, लेकिन यह तो घर है. ड्राइवर ने पूछा कि आप ने कहां से देखा था. उन्होंने अपनी लिस्ट दिखाई. ड्राइवर ने इंटरनैट से फोटो निकाला और उन्हें दिखाया कि यही घर है. फिर उस ने कहा कि वे वहां पर मालिक को कौल कर लें. लेकिन राखी ने ड्राइवर से रिक्वैस्ट की कि वह कौल कर ले. ड्राइवर ने कौल की तो पता लगा कि वहां जाने के लिए पहले से अपौइंटमैंट लेनी पड़ती है. यह जान कर बच्चे बहुत मायूस हो गए. टैक्सी के पैसे बरबाद हुए सो अलग. इसलिए इसे लिस्ट में शामिल न करें.

अपार्टेड म्यूजियम: ज्यादा उम्मीदें लगाएंगे तो आप को निराशा मिल सकती है. इसलिए जाने से पहले टाइमिंग, टिकट कीमत वगैरह सब चैक कर के जाएं. घर से तो चैक करें ही, जब जोहान्सबर्ग में हों तो भी चैक कर लें क्योंकि कई बार हालात के हिसाब से टाइमिंग बदल सकती है.

साइंस बोनो साइंस सैंटर जोहान्सबर्ग: इस में बच्चों के देखने के लिए काफी कुछ है खासकर जो बच्चे साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं. वहां जाने से पहले टिकट और टाइमिंग अच्छी तरह चैक कर लें.

जेम्स ऐंड ईथल ग्रे पार्क: यहां पर कुछ खास नहीं है. आम पार्क है जैसे सिटी पार्क होते हैं. इसे छोड़ सकते हैं.

टौप औफ अफ्रीका (कार्लटन सैंटर): इस में डैक होता है. मतलब लिफ्ट से सब से ऊपर ले जाते हैं. पूरे शहर का नजारा देखने को मिलता है. अगर दूसरे देशों में इसे देख चुके हैं तो इसे छोड़ा जा सकता है.

बाटनिकल गार्डन: बहुत बड़ा है. थोड़े गुलाब के फूल हैं, अलगअलग रंगों के. हरियाली है. इस की कोई फीस नहीं है. हां, कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है. फोन ले कर जा सकते हैं. इसे भी छोड़ सकते हैं.

जू लेक: पाखी ने जू लेक के लिए टैक्सी बुक की. ड्राइवर को पता नहीं था. वह आसपास चक्कर काटता रहा, लेकिन पाखी को चपत लग गई. उसे कम से कम 20 जार यानी 5 सौ रुपए ज्यादा देने पड़े. वहां ज्यादा कुछ नहीं है. इसे भी छोड़ सकते हैं.

जोहान्सबर्ग जू: ज्यादातर मंगलवार को बंद रहता है. जाने से पहले टाइमिंग और टिकट चैक कर लें. टिकट काउंटर पर मिल जाती है, लेकिन लंबी लाइन मिल सकता है.

कौस्टिट्यूशनल हिल ह्यूमन राइट्स: साउथ अफ्रीका के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां जा सकते हैं. साउथ अफ्रीका को आजादी कब मिली, वोट डालने का अधिकार कब मिला, इन सब के बारे में जानकारी दी गई है. इस की कोई फीस नहीं है.

गांधी स्कवेयर: गांधीजी के जवानी के दिनों का स्टैचू लगा है. 10-15 मिनट काफी हैं. सक्वेयर के बाहर के एरिया में पैदल घूमना सुरक्षित नहीं है.

मंडेला हाउस: यह मंडेला परिवार की विरासत है. इस में विदेशियों के लिए टिकट अलग है. पहले से पता कर के जाना बेहतर रहेगा. इस की वैबसाइट पर जानकारी लें ताकि सबकुछ पहले से क्लीयर हो जाए.

खरीदारी

वैसे तो कहीं भी ट्रिप पर जाएं तो शौपिंग का खयाल दिमाग से निकाल ही देना चाहिए क्योंकि घूमने में काफी खर्च हो जाता है. वहां पर शौपिंग करेंगे तो वह खर्च भी ट्रिप में जुड़ जाएगा, जिस से बाद में लगेगा कि बहुत पैसा खर्च हो गया. बाद में किसी और ट्रिप के लिए सोचना पड़ेगा, साथ ही सामान उठाने का झंझट होगा. तय रकम से ज्यादा का सामान हो गया तो कस्टम पर पैसे भी देने पड़ेंगे. वैसे भी साउथ अफ्रीका में खरीदने लायक कुछ ज्यादा नहीं है. इसलिए खरीदारी के बारे में ज्यादा न सोचें. घूमने का मजा लें.

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