‘यह   मेरा अंतिम मैसेज है और मैं तुम्हें सभी जगह ब्लौक कर रही हूं. यह मैं काफी सोचविचार कर के कर रही हूं. दरअसल, दोस्ती की मेरी और तुम्हारी परिभाषा बिलकुल अलग है और तुम्हारा व्यवहार दूसरी बार ऐसा हुआ है तो मेरे लिए यह सम झने का पर्याप्त कारण है कि तुम मेरे प्रति ही नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति क्या सोच रखते हो. गुड बाई विवेक.’

इस मैसेज को देख कर सन्न रह गया विवेक. उस ने  झट से रमा को फोन किया. जैसाकि रमा ने बताया था उस ने उसे ब्लौक कर दिया था. स्वाभाविक था काल लगी नहीं.

अब विवेक को अपनी नासम झी पर अफसोस होने लगा था. अपने अनुचित व्यवहार से उस ने रमा की दोस्ती को हमेशा के लिए खो दिया था. सारे दृश्य एकएक कर उस की आंखों के सामने से गुजरने लगे थे…

कोई 6 वर्ष पहले दोनों मिले थे जब दोनों का ट्रांसफर गुरुग्राम स्थित औफिस में हुआ था. शुरुआत के कुछ महीनों तक कोई खास दोस्ती नहीं थी दोनों में. इस का कारण शायद उम्र का फासला रहा होगा. रमा लगभग 30 वर्ष की रही होगी और विवेक पैंतालीस का. पर एक प्रोजैक्ट के सिलसिले में दोनों का एकदूसरे से मिलनाजुलना होने लगा. धीरेधीरे दोनों में दोस्ती हो गई.

रमा कोऐजुकेशन में पढ़ी थी, साथ ही बड़े शहर में ही पलीबढ़ी थी. अत: पुरुषों से दोस्ती में उसे कोई परेशानी नहीं थी.

विवेक ग्रामीण परिवेश से आया था. कभी स्कूलकालेज में कोई महिला मित्र नहीं रही थी. अत: वह महिलाओं से नजदीकी नहीं रखता था. सच पूछा जाए तो वह इस विचार का व्यक्ति था कि एक महिला और एक पुरुष सिर्फ मित्र नहीं हो सकते, यदि हैं तो उन में जिस्मानी संबंध जरूर होगा.

रमा के सरल व्यवहार का वह कुछ और ही अर्थ लगाता था. धीरेधीरे वह बीचबीच में उस के साथ वयस्क चुटकुले भी सा झा कर लिया करता था. रमा उस के चुटकुलों पर हंस दिया करती थी. विवेक अपनी पत्नी को रमा के बारे में कुछ भी नहीं बताता था और जैसाकि रमा ने बताया था उस का पति उस के औफिस के मामलों में कोई दखल नहीं देता था.

इन बातों का विवेक ने यह मतलब लगाया था कि रमा उस से प्यार करने लगी है. रमा सिर्फ यह सम झती थी कि विवेक उस का सहकर्मी है और खुल कर बातें कर लिया करता है. इस प्रकार दोनों अपनीअपनी सम झ के अनुसार जी रहे थे.

मामले में मोड़ तब आया जब उस प्रोजैक्ट में इष्टभ शामिल हो गया. इष्टभ करीब 37-38 वर्ष का नौजवान था. किसी कारण से उस ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था और शादी का अनुभव कुछ ऐसा था कि वह दूसरी शादी के मूड में बिलकुल नहीं था. परंतु अन्य मामलों में वह रमा के अधिक समान था.

इष्टभ भी बड़े शहर में पलाबढ़ा था. कोऐजुकेशन में पढ़ा था और महिलाओं से दोस्ती उस के लिए सामान्य बात थी. सब से बड़ी बात कि खानेपीने के मामले में वह आधुनिक था. अत: रमा उस के अधिक करीब आ गई थी.

यह बात विवेक को गंवारा नहीं थी. उस ने बात ही बात में रमा को भलाबुरा सुना दिया था और उस पर आरोप मड़ दिया था कि उस ने उस का स्थान इष्टभ को दे दिया है. रमा उस के इस आरोप से सन्न रह गई. उम्र में अधिक होने के कारण वह विवेक का सम्मान करती थी. सहकर्मी होने के नाते हंसीमजाक कर लेती थी. उस ने बहुत ही कठोरतापूर्वक विवेक को सम झा दिया कि वह किसी प्रकार के भ्रम में न रहे और उस के ऊपर किसी प्रकार का अधिकार न सम झे.

इस के बाद काफी दिनों तक विवेक और रमा में बातचीत बंद भी रही. इष्टभ इन बातों से बिलकुल अनजान था.

संयोग से इष्टभ को नोएडा स्थित औफिस में भेज दिया गया. कुछ दिनों के बाद रमा और विवेक में स्थिति सामान्य हो गई. विवेक ने माना कि वह कुछ ज्यादा ही अधिकार जता रहा था रमा के ऊपर. रमा ने भी मान लिया कि उस की गलती से विवेक को गलतफहमी हो गई. इस बार उन की मित्रता पहले से भी अच्छी हो गई थी.

एक दिन किसी कारण से रमा विवेक के महल्ले में आने वाली थी. विवेक ने उसे अपने घर में आमंत्रित कर लिया. रमा आई और विवेक और उस की पत्नी मीना से मिली. मीना ने बड़े उत्साह से रमा का स्वागत किया. अपने हाथ के बने पकवान खिलाए. दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई. इस के बाद बीचबीच में रमा विवेक के घर आने लगी. कभीकभी मीना विवेक के हाथों रमा के लिए कुछ पकवान भी भेज देती थी.

इस बीच विवेक ने कंपनी बदल ली. पर रमा के साथ उस की दोस्ती और भी प्रगाड़ हो

गई. अब रमा समय निकाल कर उस के घर आने लगी और मीना के साथ समय बिताने लगी. इसी बीच एक दिन जब वह विवेक के घर पहुंची तो विवेक घर में अकेला था. मीना किसी सहेली के घर किसी उत्सव में शामिल होने गई थी. विवेक रमा को देख कर खुश हो गया. उस ने आगे बढ़ कर रमा को अपनी बांहों में ले लिया और बोला, ‘‘बड़े अच्छे समय पर आई हो, आज मीना घर में नहीं है.’’

रमा ने विवेक को धक्का दे कर खुद को छुड़ाया और गुस्से से तमतमा कर बोली, ‘‘मैं तो सम झ रही थी कि तुम अब सुधर चुके हो पर तुम्हारी नीयत आज भी वैसी ही है. मीना की उपस्थिति के कारण ही तुम शरीफ बने रहते हो.’’

‘‘कम औन रमा, किसी को क्या पता चलना है? मीना 2 दिनों के बाद आएगी. लैट अस ऐंजौय,’’ विवेक ने उसे सम झाते हुए कहा.

‘‘जस्ट शटअप,’’ रमा ने कहा और  झटके से बाहर निकाल गई.

विवेक भौचक्का रह गया. थोड़ी देर में वह संभला और दरवाजे से बाहर आया. रमा अभी भी लिफ्ट लौबी में लिफ्ट की प्रतीक्षा कर रही थी.

‘‘रमा…’’ विवेक ने कुछ कहना चाहा.

रमा ने गुस्से में उसे सीसीटीवी कैमरे की ओर इशारा किया. तब तक लिफ्ट आ चुकी

थी. रमा लिफ्ट में प्रवेश कर गई. विवेक भौचक्का वहीं खड़ा रह गया. लिफ्ट नीचे चली गई तो वह अंदर आ गया.

एक बार विवेक के मन में विचार आया कि रमा को व्हाट्सऐप पर मैसेज दे. पर तभी उसे खयाल आया कि रमा तो उसे ब्लौक कर चुकी है. अब उस के पास एक दोस्त के खोने का अफसोस करने के अलावा कोई और चारा नहीं था.

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