Farshi Salwar : आपको मुग़ल घराने की रानियां याद है ना, अरे वही लखनऊ तथा हैदराबाद के शाही घरानों की रानियाँ जो अपने पहनावे के लिए जानी जाती थी. ये रानियां उस समय यही फरशी सलवार पहनती थी. दरअसल, यह सलवार नवाबों और मुगलिया शाही घरानों की महिलाओं का पहनावा रही है और यह उनकी शान और रईसियत का प्रतीक मानी जाती थी. हालाँकि ये फैशन अब दोबारा से लौट आया है. अभी हाल ही में आलिया भट्ट ने भी गणेश महोत्सव में फरशी सलवार पहनी थी.
फरशी’ शब्द फारसी के ‘फर्श’ से बना है, जिसका मतलब होता है ‘ज़मीन’. यानी की इतना लम्बा की वह जमीन को छुएं. इस तरह सलवार-सूट का ट्रेंड एक बार फिर ज़ोरों पर है. हाल के दिनों में सिंपल स्ट्रेट पैंट्स और प्लाज़ो की जगह घेरदार, रॉयल और ड्रेप वाली सलवारों ने ले ली है, जिनमें से ‘फरशी सलवार’ बेहद लोकप्रिय हो रही है.
डिजाइन कैसा है
फरशी सलवार एक पारंपरिक, बेहद शाही और घेरदार सलवार होती है. यह एक बहुत ही लंबी, ढीली और चौड़े घेर वाली सलवार होती है जो टखनों से नीचे जाकर इसमें हल्की गेदरिंग या फ्लेयर दिया जाता है,जो चलते वक्त फर्श पर खूबसूरती से फैलती या लहराती है.
शाही घेर और फॉल है इसमें ख़ास
आम पटियाला या नॉर्मल सलवार के मुकाबले इसका कट बिल्कुल अलग होता है. ऊपर कमर से लेकर घुटनों तक यह हल्की सीधी या हल्की फिटेड होती है, लेकिन घुटनों के नीचे से इसका बहुत बड़ा ‘A-लाइन’ या छतरीनुमा घेर निकलता है.
लंबाई कैसी है इसकी
इसकी लंबाई इतनी होती है कि पैर का निचला हिस्सा पूरी तरह ढक जाता है और यह चलने पर फर्श पर खूबसूरत ड्रेप बनाती है.
चौड़ा गोटा या बॉर्डर से बानी होती है
फरशी सलवार के निचले हिस्से यानी मोहरी पर भारी जरी, गोटा-पत्ती, या ज़रीदोज़ी की चौड़ी पट्टी या एम्ब्रॉयडरी की जाती है, जिससे नीचे की ओर वजन रहता है और सलवार का फॉल अच्छा आता है.
किसके साथ पहने इसे-
शार्ट कुर्ती के साथ
यह सलवार शार्ट कुर्ती के साथ अच्छी लगती है क्यूंकि कुर्ती शार्ट होने के कारण इसका घेर का लुक पूरा दिखाई देता है. वैसे भी फरशी सलवार का मुख्य आकर्षण उसका नीचे का घेरा होता है, इसलिए इसे हमेशा शॉर्ट या घुटनों से थोड़ी ऊपर तक की कुर्ती के साथ पहना जाता है ताकि सलवार की पूरी बनावट और नक्काशी साफ नज़र आए.
पारंपरिक लुक के लिए अंगरखा पैटर्न की शॉर्ट कुर्ती या ए-लाइन स्ट्रेट कट कुर्ता के साथ भी इसे पहना जा सकता है.
भारी दुपट्टा के साथ
इसे अक्सर शाही अंदाज़ में एक कंधे पर भारी दुपट्टा डालकर या हाथ पर लेकर स्टाइल किया जाता है.
शादी या खास मौकों के लिए दुपट्टे को दोनों कोहनी या हाथों पर पीछे से फैलाकर टिकाएं ताकि सामने से कुर्ती और सलवार की एम्ब्रॉयडरी पूरी दिखे.
फुटवियर
यह लंबाई में काफी लंबी होती है, इसलिए इसे मुख्य रूप से हील्स या ऊंची जूतियों के साथ पहना जाता है ताकि चलते समय सलवार का घेरा सही जगह पर टिका रहे.
अगर आपकी हाइट अच्छी है, तो आप भारी वर्क वाली राजस्थानी या पंजाबी जूती के साथ भी इसे पेयर कर सकती हैं.
ज्वेलरी और एक्सेसरीज़
चांदबाली और पासा/झांसी झूमर
फरशी सलवार का ओरिजिन अवधी/मुगलिया फैशन से है, इसलिए इसके साथ माथे पर पासा और कान में चांदबालियाँ या झुमके सबसे खूबसूरत लगते हैं.
हथफूल या स्टेटमेंट रिंग्स
हाथों में भारी चूड़ियों की जगह हथफूल या एक-दो बड़ी स्टेटमेंट रिंग्स क्लासिक लुक देती हैं.
पोटली बैग
पोटली बैग कैरी करने के लिए क्लच के बजाय ज़री या गोटा-पत्ती वाला एम्ब्रॉयडर्ड पोटली बैग सबसे अच्छा रहता है.
यह सलवार सिलवाते समय किन बातों का धयान रखें
फरशी सलवार के लिए ऐसा कपड़ा लें जिसमें प्राकृतिक लचक और फॉल हो जैसे सिल्क, चंदेरी, जॉर्जेट, क्रेप या वेलवेट.
कॉटन या स्टार्च वाले कपड़े से बचें, क्योंकि इससे घेरा नीचे लटकने के बजाय फैला-फैला और फूला हुआ दिखेगा.
नाप देते समय वही हील्स या जूतियाँ पहनें जो आप इसके साथ पहनने वाली हैं.
फरशी सलवार का असली लुक तभी आता है जब यह फर्श को छुए. इसलिए सामान्य सलवार की तुलना में इसकी लंबाई 3 से 4 इंच ज्यादा रखी जाती है ताकि नीचे खूबसूरत ड्रेप बने.
सलवार की मोहरी में चौड़ी बुकरम या कैनवास ज़रूर लगवाएं. इससे घेरे की शेप बनी रहती है.
नीचे 4 से 6 इंच का चौड़ा गोटा-पत्ती, ज़रीदोज़ी या कढ़ाई वाला बॉर्डर लगवाएं. बॉर्डर के वजन से सलवार नीचे जमती है और फॉल बहुत शानदार आता है.
