PG safety tips : गुरुग्राम के सेक्टर-38 में एक PG की आड़ में क्या चल रहा था इसका अंदाजा बाहर से देख कर कोई नहीं लगा सकता था. बाहर बोर्ड था – “लड़कियों के लिए पीजी ” अंदर चल रहा था देह व्यापार का जाल.
राज्य महिला आयोग की टीम और गुरुग्राम पुलिस ने छापेमारी कर इस सेक्स रैकेट का खुलासा किया है. कार्रवाई के दौरान विदेशी युवतियों समेत 8 महिलाएं और 13 पुरुष मिले. पुलिस के अनुसार पीजी संचालक साहिल अपनी पत्नी के साथ मिलकर ये नेटवर्क चला रहा था. मौके से शराब की बोतलें, बड़ी मात्रा में कंडोम, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद हुए. सदर थाने में अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम और फॉरेनर्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई.
यह महज एक खबर नहीं है. यह हर उस लड़की, हर उस माँ-बाप के लिए चेतावनी है जिन का बच्चा दूसरे शहर में पीजी में रहता है.
ये रैकेट चलता कैसे है
इस तरह के मामलों की पड़ताल में पाया गया है कि पैटर्न लगभग एक जैसा होता है —
पहला जाल – पीजी का नाम: आरोपी अच्छी सोसाइटी में एक मकान किराए पर लेकर ” गर्ल्स पीजी / बॉयज पीजी” का बोर्ड लगा देते हैं. असली किरायेदारों को एक दो कमरे दे देते हैं ताकि बाहर से सब सामान्य लगे.
दूसरा जाल – स्पा सेंटर का कनेक्शन: इस केस में भी महिला को स्पा सेंटर से रेस्क्यू किया गया था. महिला ने आरोप लगाया कि साहिल ने उसे झांसा देकर एक ठिकाने पर बंधक बनाकर रखा था और वहाँ उससे गलत काम करवाया जाता था.
विदेशी महिलाओं को अक्सर टूरिस्ट वीजा, जॉब या स्पा में अच्छी सैलरी का झांसा देकर लाया जाता है. फिर पासपोर्ट रख लिया जाता है और कहा जाता है कि पहले कर्ज चुकाओ.
तीसरा जाल – नेटवर्क: पति-पत्नी की जोड़ी अक्सर इसलिए बनाई जाती है ताकि पुलिस को शक न हो. पत्नी लड़कियों से बात करती है, उन्हें भरोसा दिलाती है. पति ग्राहक लाता है. मोबाइल और सीसीटीवी से पूरा कंट्रोल रखा जाता है.
पति अपनी पत्नी को इस काम में क्यों लपेटते हैं–
इसके पीछे सिर्फ पैसा नहीं बल्कि एक पूरी सोची समझी चाल होती है.
1. पुलिस की नज़र से बचने के लिए परिवार का मुखौटा:
अगर एक अकेला आदमी पीजी में लड़कियों को लाए ले जाए तो पड़ोसियों और पुलिस को तुरंत शक होगा. पर जब साथ में पत्नी हो तो लोग सोचते हैं कि ये तो पति-पत्नी हैं, फैमिली पीजी चला रहे हैं. पत्नी होने से वो धंधे की जगह “घर” जैसा लगता है. मकान मालिक भी जल्दी मकान दे देता है.
2. लड़कियों का भरोसा जीतने के लिए – औरत ही औरत को फंसाती है:
कोई नई लड़की खासकर विदेशी या छोटे शहर से आई लड़की, किसी अनजान आदमी पर भरोसा नहीं करेगी. पर एक औरत जब उसे कहती है, “बहन, डरो मत मैं भी यहीं रहती हूँ, ये तो हमारा काम है, यहाँ कोई खतरा नहीं ” तो वह भरोसा कर लेती है. इस रैकेट में पत्नी का रोल “भरोसा दिलाने वाली” का होता है. वह ही लड़कियों को मैनेज करती है, उन्हें समझाती है, धमकाती भी है.
3. पत्नी खुद भी पीड़िता हो सकती है – घरेलू हिंसा का जाल:
बहुत से केस में कहानी दूसरी होती है. पति पहले पत्नी को मारता-पीटता है, कर्ज में डुबो देता है, फिर कहता है, “अगर तूने मेरा साथ नहीं दिया तो मैं तुझे छोड़ दूंगा, बच्चों को मार दूंगा.” कई महिलाएं डर और आर्थिक मजबूरी के कारण इस अपराध में शामिल हो जाती हैं. वो बाहर से आरोपी लगती हैं पर अंदर से वो भी बंधक होती हैं.
4. पैसे का पूरा कंट्रोल घर में रहे:
अगर बाहर की किसी तीसरी महिला को इस काम में लगाया तो उसे हिस्सा देना पड़ेगा और वो कभी भी पुलिस को बता सकती है. पत्नी को लगाने से पैसा घर में ही रहता है. पति को लगता है कि पत्नी कभी उसके खिलाफ नहीं जाएगी क्योंकि बदनामी दोनों की होगी.
5. कानून से बचने का भ्रम:
कई अपराधियों को लगता है कि अगर पत्नी साथ होगी तो पुलिस महिला को गिरफ्तार नहीं करेगी या हल्की धारा लगेगी. ये उनका भ्रम है. कानून में अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत जो भी इस नेटवर्क को चलाता है, चाहे वो महिला हो या पुरुष वो दोनों आरोपी हैं. हां अगर साबित हो जाए कि पत्नी को जबरन करवाया गया तो उसे पीड़िता माना जा सकता है.
पीजी में रहने वाली हर बेटी के लिए सेफ्टी लिस्ट
1. मकान मालिक का वेरिफिकेशन जरूरी: पीजी लेते ही सबसे पहले मकान मालिक का आधार कार्ड, पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म मांगिए. अगर वो टालमटोल करे तो समझिए कुछ गड़बड़ है.
2. असली रेंट एग्रीमेंट: बिना लिखित एग्रीमेंट के कभी पीजी में मत रहिए. उसमें किराया, सुविधा और नियम साफ लिखे होने चाहिए.
3. अनजान लड़कियों की भीड़: अगर आपके पीजी में रोज नई नई लड़कियां आ रही हैं, रात में अलग-अलग गाड़ियां आ रही हैं और उन लड़कियों को आपसे मिलने जुलने नहीं दिया जा रहा तो ये रेड फ्लैग है.
4. आपका कमरा, आपका ताला: अपने कमरे में हमेशा अपना ताला लगाइए. पीजी संचालक के पास डुप्लीकेट चाबी होना कानूनन गलत है अगर आप मना करें तो.
5. सीसीटीवी: कॉमन एरिया में सीसीटीवी सुरक्षा के लिए ठीक है पर बाथरूम, कमरे के अंदर या कपड़े बदलने की जगह के आसपास कैमरा दिखे तो तुरंत पुलिस को बताइए.
6. लोकेशन शेयर: हमेशा अपनी लाइव लोकेशन माँ-पापा या भाई के साथ शेयर करके रखिए और एक भरोसेमंद पड़ोसी बना लीजिए.
7. महिला आयोग का नंबर सेव करें: अपने फोन में 1091 (महिला हेल्पलाइन), 112 और अपने जिले के महिला आयोग का नंबर सेव करके रखिए.
अगर आपको शक हो तो क्या करें
सीधे 112 पर कॉल करें. नाम गुप्त रखा जाता है.
महिला हेल्पलाइन (दिल्ली पुलिस/आपातकालीन): 1091 या 112
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) 24×7 हेल्पलाइन: 14490
दिल्ली महिला आयोग संपर्क नंबर: 011-20841044 / 011-23379181
नेशनल ह्यूमन ट्रैफिकिंग हेल्पलाइन – 1933
आप कह सकती हैं – “मुझे अपने पीजी में कुछ गलत लग रहा है क्या आप जांच कर सकते हैं?” पुलिस बिना आपका नाम बताए जांच करती है.
माता-पिता के लिए
– महीने में एक बार अचानक बिना बताए पीजी देखने जाइए.
– बेटी के दो दोस्तों के नंबर अपने पास रखिए.
– उसे ये भरोसा दीजिए कि अगर उसे पीजी में कुछ भी अजीब लगे तो वो आपको बिना डरे बता सकती है. आप उसे डांटेंगे नहीं बल्कि उसके साथ खड़े होंगे.
सतर्क रहने की जरूरत
पीजी संचालक पति पत्नी हैं तो ज्यादा सतर्क रहिए: इसका मतलब ये नहीं कि हर पति पत्नी गलत हैं पर अगर पीजी में सिर्फ पति-पत्नी ही सब कुछ मैनेज कर रहे हैं, कोई स्टाफ नहीं, कोई रजिस्टर नहीं और रात में अलग-अलग लोगों का आना-जाना है तो सतर्क हो जाइए.
उस पीजी वाली “भाभी” से बचिए जो कहे , “तुम बहुत सुंदर हो, मॉडलिंग / स्पा में पार्ट-टाइम कर लो, 50 हजार मिलेगा.” ये सबसे बड़ा जाल है. कोई भी असली जॉब पीजी में नहीं मिलता. अपना एग्रीमेंट, अपनी चाबी: बिना पुलिस वेरिफिकेशन और लिखित एग्रीमेंट के कभी पीजी मत लीजिए.
