Monsoon Special: रेनी सीजन में ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

मौनसून आ गया है, ऐसे में चिलचिलाती गरमी से छुटकारा मिलता है. जीभर कर इस मौसम को जी लेने का मन करता है, फ्रैंड्स व अपनों के साथ इस मौसम में मस्ती करने को मन बेताब रहता है. इस मौसम में खानेपीने का भी अपना ही मजा होता है, लेकिन यह मौसम दिल व दिमाग को जितना सुकून पहुंचाता है, उतना ही इस मौसम में अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट करने की भी जरूरत होती है क्योंकि बारिश के मौसम में इन्फैक्शन व फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा सब से ज्यादा होता है.

ऐसे में स्ट्रौंग इम्यूनिटी वाला व्यक्ति ही हैल्दी लाइफ जीने के साथसाथ बीमारियों को खुद पर हावी होने से रोक पाता है.

तो आइए जानते हैं इस संबंध में वाशी के फोर्टिस हीरानंदानी हौस्पिटल के इंटरनल मैडिसिन की डाइरैक्टर डाक्टर फराह इंगले से:

क्या है इम्यूनिटी

इम्यूनिटी जिसे रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कहते हैं शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा प्रणाली होती है, जो शरीर को बाहरी तत्त्वों से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती है. जैसे ही कोई वायरस, बैक्टीरिया शरीर पर हमला करता है, तो यह प्रतिरक्षा प्रणाली उस पर हमला करने के लिए सक्रिय हो जाती है. यह प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल होती है क्योंकि इस कार्य में अलगअलग तरह की कोशिकाएं लगी होती हैं, जो बाहरी तत्त्वों से शरीर को सुरक्षा प्रदान कर के उसे हैल्दी बनाए रखने की कोशिश करती हैं.

इम्यूनिटी कई तरह की होती है जैसे ऐक्टिव इम्यूनिटी. यह हमारे शरीर को तब मिलती है, जब हम किसी बैक्टीरिया, वायरस के संपर्क में आते हैं. ऐसे में हमें पहले से मिली ऐंटीबौडीज व इम्यून सैल्स उस बाहरी तत्त्व को नष्ट करने में जुट जाती हैं.

इम्यूनिटी का दूसरा प्रकार है पैसिव इम्यूनिटी, जिस में वायरस बगैरा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाहरी मदद से ऐंटीबौडीज प्रदान की जाती हैं. लेकिन शरीर तभी बाहरी तत्त्वों से लड़ने में सक्षम हो पाता है, जब वह अंदर से स्ट्रौंग हो और शरीर को अंदर से स्ट्रौंग बनाने के लिए जरूरी है अच्छे खानपान के साथसाथ कुछ हैल्दी हैबिट्स को भी अपनाने की खासकर के मौनसून के मौसम में.

ईट राइट फूड

शरीर की भूख को शांत करने के लिए खाना तो सभी खाते हैं, लेकिन हमें यह सम?ाना बहुत जरूरी है कि सिर्फ पेट भर लेने से शरीर की इम्यूनिटी बूस्ट नहीं होती है बल्कि सही फूड का चुनाव करना बहुत जरूरी है ताकि शरीर की न्यूट्रिशन संबंधित जरूरतें पूरी होने से आप की इम्यूनिटी भी बूस्ट हो सके. इस के लिए बारिश के मौसम में इन चीजों को अपनी डाइट व रूटीन में जरूर शामिल करें. ये फूड्स आप को हैल्दी रखने के साथसाथ आप को पूरा दिन ऐनर्जेटिक भी रखने का काम करेंगे.

विटामिन सी रिच फूड्स

अगर आप अपनी इम्यूनिटी पर वर्क कर रहे हैं, तो खासकर के मौनसून के मौसम में अपनी डाइट में विटामिन सी रिच फूड्स व फ्रूट्स जैसे अनार, औरेंज, केला, ऐप्पल, अंगूर, कीवी, ब्रोकली, यलो बेल पेपर्स, टमाटर, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर शामिल करें क्योंकि ये सभी न्यूट्रिएंट्स से भरे होने के साथसाथ ऐंटीऔक्सीडैंट्स में भी रिच होते हैं, जो बैक्टीरिया, वायरस से शरीर को फुल प्रोटैक्शन देने के साथसाथ हमें अंदर से स्ट्रौंग बनाने का काम भी करते हैं.

इस से हम मौसमी बीमारियों जैसे कोल्ड व फ्लू से भी बच सकते हैं. शरीर खुद से विटामिन सी उत्पन्न नहीं करता है, इसलिए इस की शरीर में जरूरत को पूरा करने के लिए हमें फूड्स व सप्लिमैंट से ही इसे लेने की जरूरत होती है.

गुड इन्टेक औफ प्रोटीन

आप भले ही बाहर क्या हो रहा है, उसे कंट्रोल करने में असमर्थ हो सकते हों, लेकिन आप के शरीर में क्या हो रहा है इसे आप काफी हद तक अपनी डाइट से कंट्रोल कर के अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट कर सकते हैं. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन ए, सी, डी, बी6 व विटामिन बी12 बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन जितने जरूरी ये विटामिंस होते हैं, उतना ही जरूरी न्यूट्रिएंट इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए होता है.

एक औसत स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन अपने वजन के हिसाब से हर किलोग्राम पर 1 ग्राम प्रोटीन लेने की जरूरत होती है जैसे अगर आप का वजन 60 किलोग्राम है तो आप को रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन लेना होगा.

इस के लिए आप अपनी डाइट में मूंग दाल, एग, सोयाबीन, पनीर, मिक्स्ड स्प्राउट्स, बेक्ड रागी चकली, ओट्स ब्रैड, सीड्स, नट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स, पीनट बटर, दालें आदि को अपनी डाइट में शामिल करें. इस से आप खुद को फिट रखने के साथसाथ अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट कर के खुद को बीमारियों से भी बचा सकेंगे.

मिनरल्स भी बेहद जरूरी

अगर आप को खुद को स्वस्थ रखना है तो विटामिंस के साथसाथ शरीर की मिनरल्स संबंधित जरूरतों को भी पूरा करना होगा. मिनरल्स हड्डियों को मजबूत बनाने और मांसपेशियों को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी होते हैं. लेकिन अगर शरीर में इन की कमी हो जाए तो न्यू हैल्दी सैल्स नहीं बन पाते हैं, जो हमारी इम्यूनिटी को लो करने के साथसाथ हमें इन्फैक्शन होने का भी ज्यादा डर बना रहता है. ऐसे में हमें अगर अपनी इम्यूनिटी पर वर्क करना है और मौनसून में बीमारियों से खुद को बचाए रखना है तो अपनी डाइट में जरूरी मिनरल्स को शामिल करना न भूलें.

इस के लिए आप आयरन, जिंक, मैग्नीशियम, पोटैशियम, सेलेनियम को अपनी डाइट में शामिल करें. इन से मांसपेशियां मजबूत होने के साथसाथ दिमाग के विकास में तो मदद मिलती ही है, साथ ही नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है.

खुद को रखें हाइड्रेट

चाहे मौसम कोई भी क्यों न हो, खुद को हर मौसम में हाइड्रेट रखना बहुत ही जरूरी है खासकर मौनसून के सीजन में क्योंकि सुहावना मौसम व मौसम में ठंडक के कारण हमारे शरीर को पानी की जरूरत भले ही महसूस न हो, लेकिन पानी शरीर में बहुत ही अहम रोल निभाता है. यह शरीर की कोशिकाओं तक औक्सीजन पहुंचाने का काम करता है, जिस से शरीर सुचारु ढंग से काम करने में सक्षम हो पाता है. यह शरीर से टौक्सिंस को बाहर निकाल कर आप की इम्यूनिटी पर इस का खराब प्रभाव होने से रोकने में भी मददगार होता है.

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे रक्त प्रवाह में पोषक तत्त्वों पर अत्यधिक निर्भर होती है और हमारी ब्लड स्ट्रीम यानी रक्त प्रवाह काफी हद तक पानी पर, लेकिन अगर हम पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो हर और्गन सिस्टम तक न्यूट्रिएंट्स आसानी से व ठीक से नहीं पहुंच पाते हैं, इसलिए खुद को हाइड्रेट रखने व बौडी को डिटौक्स करने के लिए रोज 9-10 गिलास पानी का सेवन जरूर करें. इस के लिए आप नीबू पानी, नारियल पानी, जूस का भी सहारा ले सकते हैं.

क्वालिटी स्लीप

आप ने कुछ लोगों को कहते सुना होगा कि हम ने 10-12 घंटे की नींद भी ली, लेकिन फिर भी हम खुद को फ्रैश फील नहीं कर रहे हैं. लेकिन कोई व्यक्ति 5 घंटे की नींद के बाद भी खुद को काफी रिफ्रैश फील करने लगता है. बता दें कि क्वालिटी स्लीप हमारे इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने का काम करती है. अनेक स्टडीज से पता चला है कि जो लोग पूरी व अच्छी नींद नहीं लेते हैं, वे जल्दीजल्दी बीमार होने के साथासथ उन्हें कोल्ड वायरस होने का खतरा भी सब से ज्यादा रहता है.

इसलिए खुद को रिचार्ज करने व इम्यून सिस्टम को स्ट्रौंग बनाने के लिए हर व्यक्ति को रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद जरूर लेनी चाहिए क्योंकि यह शरीर का रक्षा नैटवर्क होता है, जो शरीर में संक्रमण को रोकता व सीमित करता है.

स्ट्रैस बस्टिंग ऐक्सरसाइज

ऐक्सरसाइज न सिर्फ स्ट्रैस से दूर रखने का काम करती है, बल्कि आप की मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के साथसाथ आप की इम्यूनिटी को स्ट्रौंग बनाने का भी काम करती है. यही नहीं बल्कि ऐक्सरसाइज ब्लड सर्कुलेशन को इंप्रूव करने, वेट को मैनेज करने के साथसाथ आप के गुड स्लीप में भी मददगार होती है. इसलिए रोज 30 मिनट ऐक्सरसाइज जरूर करें. डीप ब्रीथ, ब्रिस्क वाक, साइक्लिंग, डांसिंग, रनिंग, जौगिंग, ऐरोबिक्स जैसी ऐक्सरसाइज करें.

कैसी हो बच्चे की इम्यूनिटी वाली डाइट

अन्नपूर्णा और प्रीति दोनों ही अपने बच्चों को ले कर पार्क में घुमाने लाई थीं. अन्नपूर्णा का बेटा मयंक जहां बच्चों की हर ऐक्टिविटीज और गेम्स में भाग ले रहा था और जीत भी रहा था वहीं उस से 1 साल बड़ा प्रीति का बेटा किंचित थोड़ा सा खेल कर ही थक चुका था और एक कोने में बैठा एक पप्पी को तंग करने में मशगूल था.

प्रीति ने उदास स्वर में अन्नपूर्णा को अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा, ‘‘यार अन्नू तेरा बेटा तो बड़ा स्ट्रौंग है. उसे जब भी देखती हूं हमेशा ऐक्टिव दिखता है और हर चीज में अव्वल रहता है पर मेरा बेटा कहीं मन ही नहीं लगाता. बहुत जल्दी थक जाता है और उस की ग्रोथ भी ठीक से नहीं हो रही. मुझे लगता है किंचित उम्र में बड़ा है, मगर लंबाई में भी मयंक ने ही बाजी मारी है.’’

‘‘हां यार यह तो सच है कि मेरा बेटा हर जगह अव्वल आता है और इस की एक वजह यह है कि मैं ने शुरू से ही उस के खानपान पर पूरा ध्यान दिया है. मैं उसे हमेशा अच्छी डाइट देती हूं.’’

‘‘मगर मेरा बेटा तो खाने में इतने नखरे करता है कि क्या बताऊं. मुश्किल से कुछ गिनीचुनी चीजें खाता है. हां जंक फूड्स जितने भी दे दो उन्हें खुशीखुशी खाता है. तभी मैं उसे पिज्जा, बर्गर, फ्रैंच फ्राइज ही दे देती हूं खाने को. आखिर उस का पेट तो भरना है न इसलिए जो खाता है वही खिला देती हूं,’’ प्रीति ने परेशान स्वर में कहा.

‘‘मगर यह तो बिलकुल सही नहीं है प्रीति. इस तरह तो उसे सही पोषण ही नहीं मिलेगा. पोषण का ध्यान नहीं रखोगी तो आगे जा कर उस के शारीरिकमानसिक विकास में अवरोध आएगा. कम उम्र में ही बीमारियां घेरने लगेंगी. बच्चे जो खाना चाहते हैं वह दे देना सही नहीं. उन्हें वे चीजें ही खिलाओ जो उन के लिए जरूरी हैं,’’ अन्नपूर्णा ने समझया.

‘‘और जो वह न खाए तो?’’

‘‘तो देने का तरीका बदलो. मान लो उसे दाल खाना पसंद नहीं, मगर दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत होती हैं. ऐसे में आप चीला बना कर दाल खिला सकती हो. मसलन, कभी बेसन का तो कभी मूंग दाल का स्वादिष्ठ चीला खिलाइए. वह इनकार कर ही नहीं पाएगा. इसी तरह वह दूध नहीं पी रहा तो उसे पनीर की सब्जी खिलाइए या दूध में चौकलेट फ्लेवर का बौर्नविटा या हौर्लिक्स मिला कर दीजिए. अगर वह हरी सब्जी नहीं खा रहा तो उन्हें बनाने का अंदाज बदल कर देखिए या सब्जी भर कर परांठा बना लीजिए.’’

‘‘यार तूने तो मेरी आंखें खोल दीं. कितने अच्छे तरीके बताए हैं तूने. मैं कल से ही ट्राई करती हूं,’’ खुश हो कर प्रीति ने अन्नपूर्णा का शुक्रिया किया.

यह सच है कि बच्चे अकसर खाने में आनाकानी करते हैं, पर आप को उन्हें हैल्दी खाना खाने की आदत डालनी होगी. बच्चों की सेहत का बचपन से ही खयाल रखने की जरूरत होती है ताकि उम्र के साथ उन की सेहत और इम्यूनिटी मजबूत हो और उन के शरीर को तमाम इन्फैक्शन और बीमारियों से लड़ने की ताकत मिले. बढ़ती उम्र में बच्चों को सही और भरपूर पोषण की जरूरत होती है जिस में प्रोटीन, विटामिन जैसे कई तरह के पोषक तत्त्व शामिल हैं.

अगर बच्चों की डाइट में इन का अभाव हो जाए तो उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं घेर सकती हैं. पहले यह जानना होगा कि आप के बढ़ते बच्चे की डाइट में कौन से पोषक तत्त्व शामिल करने जरूरी हैं और इस के लिए कौन से चीजें खिलानी जरूरी हैं.

बढ़ते बच्चों के लिए जरूरी पोषक तत्त्व

प्रोटीन: अच्छे विकास और ताकत के लिए प्रोटीन बच्चों की डाइट में ज़रूर होना चाहिए. यह एक ऐसा तत्त्व है जिस की जरूरत सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी होती है. यह तत्त्व शरीर के सैल्स के निर्माण, भोजन को ऐनर्जी में बदलने, इन्फैक्शन से लड़ने और शरीर में औक्सीजन के लैवल को बनाए रखने में मदद करता है. प्रोटीन की पूर्ति के लिए सोयाबीन, दालें, अंडा, चिकन और डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कराएं.

कैल्सियम: बच्चों के शरीर को कैल्सियम की बहुत आवश्यकता होती है क्योंकि उन की हड्डियां, दांत कैल्सियम से ही मजबूत होते हैं. 35 साल की उम्र तक पीक बोन मास बनता है, इसलिए मजबूत हड्डियों के निर्माण के लिए भी सही मात्रा में कैल्सियम का सेवन करना बहुत जरूरी है. आप उन्हें दूध, दही, पनीर सहित अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स दें जिन में पर्याप्त मात्रा में कैल्सियम मौजूद होता है. उन्हें सुबह की धूप लेने की आदत भी डालनी चाहिए ताकि विटामिन डी शरीर को मिले.

फाइबर: फाइबर के सेवन से पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है, पोषक तत्त्वों का अवशोषण ठीक से होता है. हर बच्चे के आहार में फाइबर को जरूर शामिल करना चाहिए. इसके लिए आप ब्रोकली, सेब, नट्स, ऐवोकाडो, नाशपाती आदि दे सकती हैं.

आयरन: इस के सेवन से बच्चे का विकास ठीक तरह से होता है क्योंकि आयरन रैड ब्लड सैल्स के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है जो पूरे शरीर में औक्सीजन पहुंचाती हैं. खून की कमी से कई तरह के रोग पैदा होते हैं. इस के विपरीत जब शरीर में आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है तो इस से खून तो तेजी से बनता ही है साथ ही ध्यान और एकाग्रता में भी सुधार आता है.

यही वजह है कि बढ़ते बच्चों के लिए आयरन बहुत जरूरी होता है. इस के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली, अंडा, मांस, चुकंदर, साबुत अनाज, बींस, नट्स, ड्राई फू्रट आदि देने चाहिए.

विटामिन सी: विटामिन सी सर्दीजुकाम से लड़ने के साथसाथ और भी कई तरह से फायदेमंद होता है. यह रक्तवाहिकाओं की दीवारों को मजबूत करता है, घाव को सही करने के साथ ही दांतों और हड्डियों को भी मजबूती देता है. जब बच्चा बढ़ता है तो उस के शरीर को विटामिन सी की सख्त जरूरत होती है. इस तत्त्व की पूर्ति के लिए बच्चों को खट्टे फल, टमाटर, स्ट्राबेरी, आम, नाशपाती, ब्रोकली, पालक जैसी चीजें खिलाएं.

फौलेट: शायद बहुत कम लोगों को पता हो लेकिन फौलेट भी बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. यह बच्चों के शरीर के सैल्स को मजबूत और हैल्दी रखता है. इस विटामिन की कमी से बच्चों को एनीमिया रोग यानी शरीर में खून की कमी हो सकती है. बच्चों की बौडी में फौलेट की मात्रा बनी रहे इसलिए उन्हें मिक्स अनाज का दलिया, पालक, चने, मसूर की दाल और स्प्राउट्स जैसी चीजें दें.

कार्बोहाइड्रेट: यह भी बच्चों के बेहतर विकास के लिए एक जरूरी तत्त्व है. यह ऊतक के निर्माण और मरम्मत करने में महत्त्वपूर्ण है. कार्बोहाइड्रेट कई अलगअलग रूपों (शर्करा, स्टार्च, फाइबर) में आते हैं. लेकिन बच्चों को स्टार्च और फाइबर अधिक और चीनी कम देनी चाहिए. ब्रैड, आलू, पास्ता, चावल और अनाज आदि में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है.

बढ़ते बच्चों की डाइट में जरूर होनी चाहिए ये पौष्टिक चीजें:

दूध: दूध बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इस में कैल्सियम की पर्याप्त मात्रा होती है जिस से हड्डियां मजबूत बनती है. साथ ही दूध में विटामिन ए,बी2 और बी12 भी होते हैं जो शारीरिक विकास के लिए जरूरी हैं.

ब्रोकली: ब्रोकली में भरपूर मात्रा में कैल्सियम पाया जाता है. इस से बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं. आप अपने बच्चे को इस का सूप दे सकती हैं या फिर दूसरी सब्जियों के साथ मिला कर इसकी सब्जी तैयार कर सकती हैं.

बादाम: हर सुबह मुट्ठी भर बादाम बच्चों की याददाश्त, नजर और यहां तक कि मानसिक विकास में मदद कर सकते हैं. बादामों में कई प्रकार के खनिज, विटामिन और स्वस्थ वसा पाई जाती है जो शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है.

अध्ययनों के अनुसार बादाम, हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक हैं. इन में मौजूद विटामिन ई बच्चों की लंबाई बढ़ाने में सहायक माना जाता है.

डेयरी उत्पाद: प्रोटीन के अलावा, हड्डियों की बेहतर संरचना और मजबूती के लिए कैल्सियम की आवश्यकता होती है. डेयरी उत्पाद जैसे दही, पनीर, दूध और मक्खन में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है. दूध स्वस्थ वसा, फास्फोरस और मैग्नीशियम प्रदान करता है जो बच्चे की लंबाई को बढ़ाने में मदद करता है. 1 गिलास दूध में करीब 8 ग्राम तक प्रोटीन होता है जो मांसपेशियों के निर्माण में भी सहायक होता है.

अंडे: वसा और प्रोटीन का समृद्ध स्रोत अंडे सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. 1 बड़े अंडे में करीब 6 ग्राम प्रोटीन होता है. इस में मौजूद अमीनो ऐसिड हड्डियों के निर्माण को बढ़ावा देता है और उन्हें मजबूत बनाता है. इस के अतिरिक्त अंडों से विटामिन डी भी प्राप्त किया जा सकता है जो हड्डियों को कैल्सियम ठीक से अवशोषित करने में मदद करता है. अंडों में कोलीन नामक पोषक तत्त्व भी भरपूर मात्रा में होता है जो मस्तिष्क के विकास के लिए जरूरी होता है. अंडों को बौयल, फ्राई या किसी भी अन्य रूप में बच्चे को दें.

बैरीज: ब्लूबेरी और स्ट्राबेरी में पोटैशियम, विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और ऐंटीऔक्सीडैंट होता है. इस में फैट और कोलैस्ट्रौल नहीं होता. इन का स्वाद मीठा होता है इसलिए बच्चे इन्हें पसंद करते हैं. इन्हें आप ओटमील, दही, दलिया आदि में मिक्स कर सकती हैं.

शकरकंद: यह आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इस में विटामिन ए, सी, ई, कैल्सियम, पोटैशियम और आयरन होता है.

#coronavirus: संतुलित आहार से बढ़ाएं इम्युनिटी 

14 साल की समीक्षा का हाथ जल गया था, उसने कई जगह इलाज करवाई पर ठीक न हो सकी. एक डॉक्टर ने उसकी जांच कर बताया कि उसकी इम्युनिटी कम है उसका प्रोटीन लॉस हो रहा था, क्योंकि उसे मोटापा था, इसलिए उसके हाथ के घाव भर नहीं रहे है, ऐसे में समीक्षा न्यूट्रिशनिस्ट के पास गयी. दवा और डाइट को फोलो करने के बाद उसकी इम्म्युनिटी बढ़ाई गयी और घांव ठीक हो गया.

ये सही है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से व्यक्ति कम बीमार पड़ता है या बीमार होने पर जल्दी ठीक भी हो जाता है. वर्ल्ड इम्युनिटी वीक पर मुंबई की अपोलो हॉस्पिटल की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिंशियन जिनल पटेल कहती है कि आज हर उम्र के व्यक्ति की इम्युनिटी कम हो चुकी है, इसकी वजह समय से भोजन न करना, जंक फ़ूड का अधिक सेवन करना और तनाव युक्त जीवन बिताने से है.

हालाँकि हमारे यहां खाने की पारंपरिक पद्यति बहुत अच्छी है, जिसमें हर प्रकार के मसाले और हर्ब्स प्रयोग होते है. जिससे रोगप्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति में बढती है, लेकिन आज की जीवन शैली में बदलाव की वजह से इसमें कमी आने लगी है. ये क्षमता हर इंसान में अलग-अलग होती है, जिसमें जलवायु में परिवर्तन और मोटापा सबसे अधिक जिम्मेदार है. मोटापे से शरीर की इम्युनिटी कम हो जाती है, जिसे कंट्रोल करने की जरुरत है.

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आज कोरोना वायरस भी उन्ही लोगों पर अधिक हावी हो रही है, जिनकी इम्युनिटी कम है. इसलिए ये कम न हो, इसका ख्याल सबको रखने की आवश्यकता है. इसके अलावा मौसम के बदलाव की वजह से कफ कोल्ड अधिक होता है, जो व्यक्ति की इम्युनिटी को कम करती है. खासकर मानसून में रोगप्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति में कम हो जाती है, जबकि ठण्ड में ये बढ़ जाया करती है. कुछ सुझाव निम्न है, जिसके द्वारा इम्युनिटी को बढाया जा सकता है,

  • खान-पान में विटामिन को जोड़ते जाय, जैसे विटामिन ए, सी ,बी 12, जिंक, आयरन, कॉपर आदि है. खाने में वैरायटी का होना बहुत अधिक जरुरी है. लोग वैरायटी के लिए अधिकतर बाहर जाते थे, लेकिन घरपर भी इसे बनाया रखा जा सकता है,
  • हमेशा कलरफुल फ़ूड से अपने प्लेट को सजायें,  नट्स, स्प्राउट्स को भी इसमें शामिल करें, इससे इम्युनिटी बढती है,
  • हर तरह के मौसमी फल जिसमें पपीता, किवी, सेव, अनार,संतरा, आम आदि जो मिले उसे हमेशा लेने की कोशिश करें,
  • सब्जियों में गाजर, मूली, गोबी, ब्रोकोली, चुकंदर आदि सभी को अलग-अलग रूप में शामिल करें,
  • खाने में संतुलित आहार हमेशा लेनी चाहिए, जिसमें दाल, चावल, सब्जी, चपाती खास होती है,
  • एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बेक्टेरियल वाले पदार्थ जिसमें अदरक, लहसुन और हल्दी को अपने खाने में रोज प्रयोग करें, ये बहुत सारे रोगों से व्यक्ति को सुरक्षित रखता है.

बहुत सारे माता-पिता बच्चों को खाने पीने से परहेज करते है, जो ठीक नहीं उन्हें बचपन से ही हर तरह के भोजन, चोकलेट, आइसक्रीम सब खिलाएं, इससे उन्हें उस चीज को खाने की आदत पड़ती है. बाहर का खाना भी कभी-कभी देना उचित होता है. कुछ बच्चों में इम्युनिटी बचपन से ही कम होती है इसकी वजह उनका सही डाइट न लेना या माँ की इम्युनिटी का कम होना भी हो सकता है, पर सही डाइट और दवा से इसे बढाया भी जा सकता है. इन्युनिटी कम होने के खास लक्षण बच्चों और यूथ में इस प्रकार है,

  • बच्चे में चिढचिढापन का होना,
  • बार-बार बीमार पड़ना,
  • ठीक से नींद न लेना,
  • किसी चीज से बार-बार एलर्जी का होना,
  • अधिक थकान महसूस करना,
  • यूथ में ग्रे हेयर का जल्दी होना आदि है.

जरुरत होने पर सप्लीमेंट भी लेना पड़े तो गलत नहीं, पर उसे डॉक्टर की सलाह से ही लें. शाकाहारी को पोषण हमेशा कम ही मिल पाता है, जबकि नॉनवेज खाने वालों का पोषण अच्छा रहता है.

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5 जरुरी टिप्स, जिससे कोरोना समय में अच्छी इम्युनिटी बनी रहे,

  • हमेशा पॉजिटिव रहे, मानसिक तनाव न लें,
  • स्ट्रेस को मेनेज करने के लिए योगा करें, नियमित वर्कआउट करना,
  • सही समय पर संतुलित आहार लेना,
  • 7 से 8 घंटे नींद पूरी करना,
  • इस लॉक डाउन में हमारे पास समय है, इसलिए सारे रिश्तों को फिर से रिफ्रेश करना.

Winter Special: ऐसे बढ़ाएं शरीर की इम्यूनिटी

जाड़े के मौसम में अकसर जिन की इम्यूनिटी कमजोर होती है वे बीमार पड़ जाते हैं. इस मौसम में पौल्यूशन भी अपने चरम पर होता है. हवाओं की ठंडक अलग शरीर के काम करने की क्षमता घटा देती है. ऐसे में इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है.

क्या है इम्यूनिटी

दरअसल, इम्यूनिटी हमारे शरीर में मौजूद टौक्सिंस से लड़ने की क्षमता होती है. शरीर में टौक्सिन के बहुत सारे कारण हो सकते हैं, मसलन बैक्टीरिया, वायरस या फिर अन्य नुकसानदेह पैरासाइट्स. शरीर के आसपास बहुत सारे बैक्टीरिया और वायरस मौजूद होते हैं जो हमें कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त कर देते हैं. वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़े और सांस से जुड़ी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं.

शरीर को इन बाहरी संक्रमणों, प्रदूषण जनित तकलीफों और बीमारियों से बचा कर रखने के लिए शरीर के अंदर एक रक्षा प्रणाली होती है जिसे इम्यून सिस्टम या रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं. अगर आप की इम्यूनिटी मजबूत है तो आप बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से बचे रहते हैं.

आइए, जानते हैं इम्यूनिटी मजबूत करने के तरीकों के बारे में:

शारीरिक सक्रियता है जरूरी

खुद को स्वस्थ रखने और अपनी इम्यूनिटी को सुधारने के लिए शरीर का सक्रिय रहना जरूरी है. शारीरिक गतिविधि से ऐंडोर्फिन नामक हारमोन का स्राव होता है जिस से तनाव दूर होता है, मन आनंदित रहता है और शरीर की क्षमता बढ़ती है. जब आप काम नहीं करते हैं और भूख लगने पर खाना खा लेते हैं तो आप पेट से जुड़े बहुत सारे रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं. शारीरिक निष्क्रियता आप के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती है. इस से बचने के लिए नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.

व्यायाम करने से आप का स्टैमिना बढ़ता है. पाचन क्षमता दुरुस्त रहती है. नियमित व्यायाम से पुरानी बीमारियों जैसे मोटापा, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग के साथसाथ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण होने का खतरा भी कम होता है. अपने व्यायाम में योग और साइक्लिंग के साथ सैर को भी शामिल करें. वयस्कों को प्रति सप्ताह कम से कम ढाई घंटे मध्यम तीव्रता वाले.

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ऐरोबिक व्यायाम: जैसे चलना, टहलना और साइकिल चलाना और सवा घंटा, उच्च तीव्रता वाले ऐरोबिक व्यायाम जैसे दौड़ना चाहिए. इसी तरह हमें प्रतिदिन 4-5 मील चलने की आदत भी रखनी चाहिए. मार्च, 2020 में ‘जर्नल औफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक रोज आप जितना अधिक चलते हैं आप के समय से पहले मरने की संभावना उतनी ही कम हो जाती है. चलना और व्यायाम करना आप की जिंदगी बढ़ाते हैं.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, सप्ताह में कम से कम 2 बार स्ट्रैंथ ट्रेनिंग भी आप के स्वास्थ्य के लिए वरदान है. यह आप की हड्डियों को मजबूत करती है, बीमारी को दूर रखती है और पाचन में सुधार करती है. क्लीनिकल ऐंड एक्सपैरिमैंटल मैडिसिन में जुलाई, 2020 में प्रकाशित एक समीक्षा के मुताबिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और कोविड-19 जैसे वायरल संक्रमणों से बचाने के लिए मसल्स बिल्डिंग सहित दूसरे व्यायाम भी जरूरी हैं.

भरपूर नींद लें

नींद एक ऐसा समय है जब आप का शरीर प्रमुख प्रतिरक्षा कोशिकाओं और अणुओं जैसे साइटोकिंस (एक प्रकार का प्रोटीन जो सूजन से लड़ सकता है, या बढ़ावा दे सकता है), टी कोशिका (एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिका जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती है) और इंटरल्यूकिन 12 को नियंत्रित करती है. पर्याप्त आराम पाने से हमारे शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा मजबूत हो जाती है.

जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से अपने ये काम नहीं कर पाती और आप के बीमार होने की संभावना अधिक होती है.

बिहेवियरल स्लीप मैडिसिन के जुलाईअगस्त, 2017 अंक में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि स्वस्थ युवा वयस्कों की तुलना में (जिन्हें नींद की समस्या नहीं थी), अनिद्रा से पीडि़त स्वस्थ युवा वयस्कों में टीका लगवाने के बाद भी फ्लू की आशंका अधिक थी.

नींद की कमी भी कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाती है जो निश्चित रूप से इम्यून सिस्टम के लिए भी अच्छा नहीं है. नींद की कमी से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली खराब हो जाती है और हमारे पास बीमारी से लड़ने या ठीक होने की क्षमता कम हो जाती है.

‘नैशनल स्लीप फाउंडेशन’ सभी वयस्कों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रति रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह देता है. सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले इलैक्ट्रौनिक्स बंद करना, फोन से दूरी रखना और हिंसक या तनावपूर्ण सीरियल्स अथवा बातचीत से बचना जरूरी है.

खानपान में बदलाव

अपनी दिनचर्या और खानपान में थोड़ा बदलाव कर आप खुद को स्वस्थ रखने के साथसाथ अपनी इम्यूनिटी को भी सुधार सकते हैं. अपने आहार में उन चीजों को शामिल करें जो आप के शरीर को पोषण प्रदान करने के साथसाथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली हों. चिप्स, मैगी, फ्रैंचफ्राइज, पास्ता, पिज्जा, डब्बाबंद आहार, सोडा ड्रिंक आदि को भूल कर भी शामिल न करें. उबले अंडे, मौसमी ताजे फल, दलिया, नट्स, अंकुरित अनाज, सीड्स, मेवे आदि के साथसाथ जूस, लस्सी वगैरह शामिल करें.

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अपने आहार में टमाटरों को जरूर शामिल करें. इन में मौजूद लाइकोपीन, विटामिन के, विटामिन सी और फाइबर इम्यूनिटी सुधारने में मददगार साबित होते हैं. इसी तरह संतरा, नीबू, आंवला जैसे खट्टे फलों में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो हर तरह के संक्रमण से लड़ने वाली श्वेत रक्त कणिकाओं का निर्माण करने में सहायक होती है.

इन सारी चीजों को अपने आहार का नियमित हिस्सा बनाएं. लहसुन भरपूर मात्रा में ऐंटीऔक्सिडैंट बना कर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है. इस में एलिसिन नामक ऐसा तत्त्व पाया जाता है जो शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है. इसी तरह पालक, मशरूम, स्प्राउट्स आदि भी आप को अंदर से मजबूत बनाते हैं.

खुश रहें

जब भी मौका मिले खुल कर हंसने का प्रयास करें. ऐसा करने से आप तनाव को कम कर सकती हैं और लंबे समय तक बीमारी के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं. इस के अलावा अपने रिश्तों को समय दें. सामाजिक संबंधों से सामाजिक समर्थन की भावना बढ़ सकती है. दिल से खुश रहेंगे तो शरीर मजबूत रहेगा और वातावरण में मौजूद बीमारियों के वायरस आप पर आक्रमण नहीं कर सकेंगे.

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प्रकृति के साथ समय बिताएं

अपने इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए प्रकृति के साथ अधिक समय बिताएं. प्राकृतिक वातावरण हमें शुद्ध वायु और प्रसन्न मन देता है. पेड़पौधों का सामीप्य हमें कई तरह से रोगमुक्त करता है, हमारे श्वसनतंत्र को मजबूत बनाता है. रोजाना थोड़ी देर धूप में बैठें ताकि आप का सामना सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से हो. धूम विटामिन डी का बेहतरीन स्रोत होती है जो हड्डियों को मजबूती देने के साथसाथ प्रतिरक्षा प्रणाली को भी दुरुस्त करती है.

गंदगी से रहें दूर

अपने आसपास का वातावरण साफसुथरा रखने के अलावा अपनी शारीरिक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें क्योंकि बहुत सारी बीमारियों का कारण गंदगी होती है.

ऑलिव पत्तियों वाली चाय दिलाए स्ट्रेस से राहत

आज स्ट्रेस हमारे जीवन का हिस्सा बन गई है, क्योंकि आज वर्क फ्रॉम होम का बढ़ता चलन, बच्चे घरों में रहने पर मजबूर हैं, महिलाओं पर काम की ज्यादा जिम्मेदारी है. साथ ही बहुत सारी खबरें हमारे चारों तरफ फैली हुई हैं. हम इस बात से भी अनजान हैं कि बढ़ते स्ट्रेस के कारण हमारी इम्युनिटी कमजोर हो रही है. जो बाल झड़ने व दिल की समस्या के साथ सिर दर्द व तनाव का भी कारण बन रही है. कोई नहीं चाहता कि स्ट्रेस उस पर हावी हो और उसका सुकून छिन जाए. यही नहीं बल्कि आज लोग पहले के मुकाबले में ज्यादा हैल्थ कॉन्सियस हो गए हैं. वे हर सूरत में खुद को व अपनों को स्ट्रेस से दूर रखना चाहते हैं. इस के लिए अपनी डाइट में उन सभी चीजों को शामिल करते हैं, जिससे उनकी इम्युनिटी बूस्ट हो. वे स्ट्रेस से दूर रहने के लिए दिन में कई कप चाय व कॉफी का सेवन कर लेते हैं. लेकिन हम आपको एक ऐसी खास चाय के बारे में बताते हैं, जो ऑलिव की पत्तियों से युक्त है. जो आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करने के साथसाथ आपके स्ट्रेस को भी कम करने में मददगार साबित हो सकती है.

क्यों है खास

आज के लाइफस्टाइल में स्ट्रेस से बचना शायद मुश्किल हो, लेकिन अगर आप रोजाना ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय का सेवन करेंगे, तो ये आपके दिमाग को रिलैक्स करने, नसों को शांत करने, आपके मूड को ठीक करने व आपकी स्लीप क्वालिटी को ठीक करने में मदद कर सकती है. यकीन मानिए आप खुद बदलाव महसूस करेंगे.

इम्युनिटी को बढ़ाए

हालिया अनेक अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि ऑलिव की पत्तियों में पोलीफेनोल एन्टिऑक्सीडेंट होता है, जिसमें बहुत ज्यादा फ्री रेडिकल्स से लड़ने की क्षमता होती है. इसमें मुख्य फेनोल तत्व ओलियूरोपियन होता है, जो इम्युनिटी को बढ़ाने का काम करता है. साथ ही फेनोल के साथ फ्लेवोनोइड्स इसे और पावरफुल एन्टिऑक्सीडेंट बना देता है. इसमें ग्रीन टी की तुलना में दोगुने एन्टिऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो इसे ग्रीन टी से खास बनाते हैं.

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ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में सहायक

इसमें ओलियूरोपियन तत्व होता है. जो नेचुरल तरीके से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम करता है. बता दें कि ब्लड प्रेशर व स्ट्रेस सीधे तौर पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. जबकि ऑलिव की पत्तियों को स्ट्रेस को कंट्रोल करने के लिए बहुत ही असरदार थेरेपी माना जाता है.

दिल को रखे सेहतमंद

अनेक अध्ययनों से यह पता चला है कि ऑलिव लीफ के नियमित सेवन से यह बैड कोलेस्ट्रॉल को आपकी रक्त धमनियों में जमने से रोक सकता है. जिससे शरीर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. जिससे यह आपके दिल की सेहत का खास ध्यान रखने का काम करता है.

वजन का भी ध्यान

आज हमारे खराब लाइफस्टाइल की वजह से हम में से अधिकांश लोग मोटापे की समस्या से परेशान हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑलिव की पत्तियों में पाया जाने वाला ओलियूरोपियन तत्व बॉडी के फैट को कम करने में सहायक है, साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है. जिससे धीरेधीरे शरीर फिगर में आने लगता है, क्योंकि ये हमारी बारबार की भूख को शांत करके हमें ओवरईटिंग की आदत से दूर जो रखता  है.

डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक

आज बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई डायबिटीज का शिकार हो रहा है. और इसके लिए हमारा खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार है. लेकिन ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय आपकी शुगर को भी कंट्रोल करने में मददगार हो सकती है. ये ब्लड में इंसुलिन के लेवल को रेगुलेट करता है, जिससे ब्लड शुगर को अच्छे से मैनेज कर पाता है.

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नो कैफीन ओरिजिनल फ्लेवर

हम खुद को स्ट्रेस से दूर रखने के लिए दिन में कईकई बार चाय, कॉफी व ग्रीन टी का सेवन करते हैं. जिससे भले ही आप खुद को तरोताजा और ऊर्जावान पाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अधिक सेवन से आपको बेचैनी, नींद में खलल, सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. फिर चाहे बात हो ग्रीन टी की, क्योंकि इसमें भी कैफीन होता है, जिससे आपको इसकी लत पड़ जाती है. लेकिन ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय आपके पूरे दिन को फ्रैश बनाने का तो काम करेगी ही, साथ ही आपको बीमारियों से दूर रखकर आपके स्ट्रेस को भी कम करेगी. इसमें कैफिन भी नहीं होता. तो फिर हो जाए दिन की शुरुआत ऑलिव की पत्तियों की खूबियों से भरपूर चाय से.

बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जुटा उत्तर प्रदेश

कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए योगी सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. विशेषज्ञ तीसरी लहर में बच्चोंर के लिए खतरनाक बना रहे हैं. ऐसे में अस्पोतालों में अभी से बच्चों के इलाज से जुड़ी तैयारियां शुरू हो गई है. वहीं, आयुष विभाग ने भी कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. आयुष विभाग अपने सभी अस्पोतालों में बच्चोंी के स्व स्य्ं श को लेकर एक हेल्प डेस्कभ बनाने जा रहा है. साथ ही आयुष कवच एप पर बच्चों की सेहत से जुड़ा एक नया फीचर भी जोड़ने जा रहा है.

तीसरी लहर की तैयारी :

मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ ने आयुष विशेषज्ञों से आयुर्वेद की पुरानी परम्पोराओं से कोरोना संक्रामित लोगों के इलाज की बात कहीं थी. इसके बाद से आयुष विभाग लगातार होमआइसोलेटेड मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं, काढ़ा आदि वितरित करा रहा है. अब आयुष विभाग ने अब संभावित कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी शुरू कर दी है. आयुष विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ अशोक कुमार दीक्षित के मुताबिक कोरोना काल में आयुष कवच मोबाइल एप लोगों में काफी लोकप्रिय हुआ है. ढ़ाई लाख से अधिक लोग इसका इस्तेोमाल कर रहे हैं.

उन्होंसने बताया कि आयुष कवच एप पर जल्दीह बच्चों़ की सेहत से जुड़ा एक फीचर जोड़ने की तैयारी चल रही है. इसमें बच्चों की सेहत का मौसम के हिसाब से कैसे ख्याजल रखें, किस तरह से बच्चोंह में रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाया जाए, कौनसी घरेलू औषद्यीय के जरिए उनकी सेहत बेहतर बनाए, इसकी जानकारी लोगों को दी जाएगी.

अस्परतालों में बनेगी बच्चों के लिए हेल्पो डेस्कम

डॉ अशोक बताते हैं कि प्रदेश में आयुष विभाग के करीब 2104 चिकित्साकलय हैं. इनमें से लखनऊ, बनारस, पीलीभीत समेत अन्यक जिलों में 8 बड़े अस्पाताल है. इन सभी अस्प तालों में बच्चोंक के स्व स्य्ीत से जुड़ी एक हेल्पिडेस्कल बनाई जाएगी. जहां पर आयुष डॉक्टार लोगों को बच्चों् की सेहत और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाई जाए इसकी जानकारी देंगे. इसके अलावा यहां से बच्चोंी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का वितरण भी किया जाएगा. अस्प‍तालों में ओपीडी खुलने पर बच्चों का इलाज भी यहां शुरू किया जाएगा.

Summer Special: इम्यूनिटी के साथ ऐसे बढ़ाएं ब्यूटी

खू बसूरती का सीधा संबंध बेदाग, दमकती त्वचा और प्राकृतिक निखार से है. मौसम भले आग बरसाती गरमी का ही क्यों न हो, खूबसूरती के साथ सम झौता नहीं किया जा सकता. अत: गरमियों में भी खूबसूरत बने रहने के लिए अपनाएं सही डाइट.

रोज लें हैल्दी डाइट

हर मौसम में हैल्दी डाइट लेने की आदत डालें. सर्दियों में तो लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हैल्दी चीजें खाते हैं, मगर गरमी का मौसम आते ही लापरवाह होने लगते हैं. यदि आप के साथ भी ऐसा है तो सावधान हो जाएं, क्योंकि यदि आप की डाइट डिस्टर्ब रहेगी तो स्किन अनहैल्दी टिशूज प्रोड्यूस करेगी यानी त्वचा की जो नई कोशिकाएं बनती हैं वे अस्वस्थ होंगी.

जाहिर है ऐसे में आप की त्वचा पर वह रौनक नजर नहीं आएगी जो हैल्दी खानपान से आती है. इसलिए खूबसूरती बरकरार रखने के लिए खानपान पर ध्यान देना सब से ज्यादा जरूरी है.

खूबसूरत त्वचा के लिए अपनी डाइट में शामिल करें  ये चीजें:

हरे पत्तों से दोस्ती

खूबसूरत स्किन के लिए सब से पहले अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें. गरमियों में स्किन प्रदूषण और धूप के कारण ज्यादा खराब होती है. कैमिकल्स और जंक फूड्स भी नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए नियम बना लें कि तीनों मील में कोई एक हरी सब्जी जरूर खाएंगी.

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डार्क चौकलेट से बढ़ाएं खूबसूरती

चौकलेट सिर्फ फैट और वेट बढ़ाने का काम ही नहीं करती है. अगर आप डार्क चौकलेट सही तरीके से और संतुलित मात्रा में खाएंगी तो यह स्किन को खूबसूरत बनाने का काम भी करती है. डार्क चौकलेट ऐंटीऔक्सीडैंट्स से भरपूर होती है, इसलिए यह गरमियों में सूर्य की किरणों के कारण हुए एजिंग इफैक्ट्स को स्किन पर नहीं आने देती.

खट्टे फलों का फायदा

मौसमी, संतरा, नीबू, कीवी, आलूबुखारा, आम, आंवला, बेरीज जैसे खट्टे फल स्किन को फ्लालैस ग्लो देने का काम करते हैं. अगर आप प्राकृतिक रूप से बेदाग और निखरी त्वचा चाहती हैं तो रोज इन में से किसी एक फ्रूट का सेवन जरूर करें. गरमियों में ये फल आसानी से मिल जाते हैं. इन्हें नियमित रूप से खाने से स्किन अंदर से खूबसूरत बनी रहेगी.

ओमेगा-3 और विटामिन डी

अखरोट जैसे सूखे मेवों, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, सोयाबीन, स्प्राउट्स, गोभी, ब्रोकली, शलगम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्राबेरी जैसे कई फलों में ओमेगा-3 उच्च मात्रा में पाया जाता है. विटामिन डी के मुख्य स्रोतों में अंडे का पीला भाग, मछली का तेल, विटामिन डी युक्त दूध, मक्खन आदि होते हैं. ओमेगा-3 फैटी ऐसिड, विटामिन डी और प्रोटीन ये तीनों बेहद जरूरी हैं, जो स्किन को खूबसूरत बनाए रखते हैं.

ड्राईफ्रूट्स लाएं अंदर से निखार

ड्राईफ्रूट्स में खासतौर पर अखरोट और बादाम स्किन को खूबसूरत बनाने का काम करते हैं. अखरोट ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी ऐसिड से भरपूर होता है तो बादाम विटामिन ई का अच्छा स्रोत है. ग्लोइंग स्किन के लिए इन्हें डेली डाइट में शामिल करें.

गरमियों में इम्यूनिटी बूस्टर डाइट

इस गरमी के मौसम में आप डाइट में बदलाव कर रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ा सकती हैं. कोरोना नए स्ट्रेन और नई तीव्रता के साथ एक बार फिर फैल रहा है. हम कोरोना के साथ दूसरी बीमारियों से भी लड़ सकें इस के लिए अच्छी इम्यूनिटी जरूरी है और इम्यूनिटी के लिए एक अच्छी डाइट की आवश्यकता पड़ती है. आइए जानते हैं गरमियों के इस मौसम में आप की डाइट कैसी हो ताकि आप तंदुरुस्त भी रहें और बीमारियों से भी लड़ सकें:

दही

दही ऐसा खाद्यपदार्थ है, जो सभी के लिए फायदेमंद होता है. गरमी के मौसम में दही, छाछ या मट्ठे आदि का खूब प्रयोग करना चाहिए. दही स्वाद भी बढ़ाता है और इस के सेवन से प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

सीड्स

1 बड़ा चम्मच मिक्स सीड्स लें. इन में सूर्यमुखी, अलसी, चिया सीड्स आदि मिक्स करें. अलसी में ओमेगा -3 और फैटी ऐसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. शाकाहार करने वालों के लिए सीड्स ओमेगा-3 और फैटी ऐसिड का सब से अच्छा स्रोत है. इस के प्रयोग से बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.

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विटामिन सी

संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी को सब से अच्छा औप्शन माना जाता है. यह एक स्ट्रौंग ऐंटीऔक्सीडैंट है. रोजाना 40 से 60 मिलिग्राम तक इसे अपनी डाइट में लें. नीबू, आंवला, अमरूद, संतरे के अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे धनियापत्ती, पुदीनापत्ती आदि खाने में किसी न किसी रूप में शामिल करें. ये दोनों रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होती हैं.

गाजर

गाजर का काम शरीर में खून बढ़ाने के साथ कई हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने का भी होता है. यह विटामिन ए, कैरोटेनौइड और ऐंटीऔक्सीडैंट का स्रोत है.

ग्रीन टी और ब्लैक टी 

ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मदद करती हैं. लेकिन गरमियों में एक दिन में इन के 1-2 कप ही पीएं. इन का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

कच्चा लहसुन

कच्चा लहसुन भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी फायदेमंद होता है. इस में काफी मात्रा में ऐलिसिन, जिंक, सल्फर और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं. गरमी के मौसम में भी सब्जियों में इस का प्रयोग जरूर करें.

भरपूर पानी

गरमियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए रोजाना 10 से 12 गिलास पानी जरूर पीएं. छाछ, नारियल पानी, नीबू पानी, आम का पना आदि भी ले सकती हैं.

हलदी वाला दूध

गरमी का मौसम हो या जाड़े का, रोज रात में सोने से पहले हलदी मिला 1 गिलास दूध लें. हलदी में करक्यूमिन होता है, जो रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है.

प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा

शरीर की मांसपेशियों और कोशिकाओं की मरम्मत और मैटाबोलिज्म को बेहतर करने के लिए प्रोटीन जरूर लें. रोज 1-2 कटोरी दाल या अंकुरित दालें, दूध, दही, पनीर या उबला अंडा ले सकती हैं. इन से अमीनो ऐसिड्स मिलते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं.

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बच्चों की इम्युनिटी को बढाएं कुछ ऐसे 

 4 साल का रोहन बहुत ही दुबला है, क्योंकि वह खाना ठीक से नहीं खाता, उसकी माँ कोमल 2 से 3 घंटे घूम घूमकर हर रोज उसे खाना खिलाती है, वह बेटे को बहुत बार डॉक्टर के पास भी ले गयी, पर डॉक्टर की दवाई का कुछ खास फायदा नहीं हुआ. उसे चिप्स, बिस्किट , चोकलेट और बाज़ार के जंक फ़ूड  पसंद है, लेकिन दाल, चावल, सब्जी नहीं खाना है. परेशान होकर माँ  डॉक्टर के पास जाना भी बंद किया और वह जो भी खाता है, उसी में संतुष्ट रहने लगी. ये सही है कि आज छोटा बच्चा हो या शिशु उन्हें सही पोषण के लिए सही मात्रा में खाना खिलाना बहुत मुश्किल होता है.

घरेलू माँ घंटो बैठकर खाना खिलाती है, जबकि वर्किंग वुमन  को केयर टेकर के उपर निर्भर रहना पड़ता है, अगर बच्चा खाना न खाए, तो खुद खा लेती है, या फिर फेंक देती है. इसका सही इलाज न तो पेरेंट्स के पास है और न ही डॉक्टर के पास. ऐसे बच्चे हमेशा बीमार रहते है और उनकी इम्युनिटी कम होती जाती है. इस बारें में एड्रोइट बायोमेड लिमिटेड के प्रमुख डॉ. सुनैना आनंद कहती है कि पिछले कुछ सालों में चेचक, पोलियो, और स्पेनिश फ्लू जैसी कई महामारियों को इन्युनिटी बढाकर ही निजात पायी गयी है. यही बात कोरोना वायरस के साथ भी लागू होती है. हालाँकि ये नया वायरस है और मानव में इसकी इम्युनिटी नहीं है. इसलिए ये सबके लिए घातक सिद्ध हो रही है. रोग प्रतिरोधक क्षमता ही शरीर को किसी संक्रमण से बचाती है. 

इसके आगे डॉ. सुनैना कहती  है कि छोटे बच्चों में इम्युनिटी कम होने की वजह से वे किसी भी इन्फेक्शन के लिए अति संवेदनशील होते है. इन्फेंट को माँ से ब्रैस्ट फीडिंग के द्वारा इम्युनिटी  ट्रान्सफर होती रहती है, लेकिन  समय से पहले अगर बच्चे का जन्म हुआ हो, तो उसकी इम्युनिटी अधिकतर कम होती है, क्योंकि उन्हें पूरा पोषण पेट में रहते हुए नहीं मिला है,जिससे उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. इसलिए ऐसे बच्चों की देखभाल भी अच्छी तरीके से की जानी चाहिए, इम्युनिटी बढ़ाने के कुछ सुझाव निम्न है,

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  • अगर बच्चा छोटा है, तो उसे स्तनपान नियमित कराएं, इससे उसकी इम्युनिटी बढती है, क्योंकि माँ के दूध में प्रोटीन, वसा, शर्करा, एंटीबॉडी, प्रोबायोटिक्स आदि होता है, जो बच्चे के लिए खास जरुरी होता है.
  • छोटे बच्चों का टीकाकरण निर्देशों के अनुसार करवाते रहना चाहिए, क्योंकि ये गंभीर बीमारी से बच्चे को बचाने का एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका है, हालाँकि कोरोना संक्रमण के दौरान बहुत सारे पेरेंट्स ने इन्फेक्शन के डर से बच्चों का टीकाकरण समय से नहीं करवाया, जो बच्चों के लिए ठीक नहीं रहा,  बच्चे अधिकतर  फर्श पर पड़ी वस्तुओं को हाथ लगते या मुंह में डालते रहते है, जिससे उन्हें कई बार खतरनाक बीमारी लग जाती है, इसके अलावा समय -समय पर उनके हाथों को धोते रहना भी बहुत जरुरी है, ताकि ये उनकी आदतों में शामिल हो जाय, खासकर भोजन से पहले और भोजन के बाद.
  • उचित मात्र में नींद भी बच्चों की इम्युनिटी को बढ़ाती है, अपर्याप्त नीद शरीर में साइटोकिंस नामक प्रोटीन के उत्पादन करने की क्षमता को सीमित करती है, जो संक्रमण से लड़ने और उसके प्रभाव को कम करने में मदद करती है, बच्चों को एक दिन में कम से कम 8 से 10 घंटे की नन्द लेनी चाहिए,
  • बच्चे की इम्युनिटी उम्र के साथ-साथ लगातार बदलती रहती है, इसमें खाने की आदतों से उन्हें प्राकृतिक रूप से इम्युनिटी मिलती है, जो किसी भी इन्फेक्शन से लड़ने में सक्षम बनाती है, संतुलित भोजन और पूरक आहार बच्चों को हमेशा संक्रमण से दूर रखती है.

बच्चे को संतुलित और पोषक आहार देना आज की माओं के लिए एक समस्या है, क्योंकि अधिकतर बच्चों को घर का बना खाना पसंद नहीं होता, पर इससे मायूस होने की कोई बात नहीं. जब आप किचन या मार्केट में जाएँ तो बच्चे को भी साथ लेकर काम करें और बच्चे से भी उसके अनुसार काम करवाएं, इससे उसकी खाना खाने की रूचि बढती है. इस बारें में डॉ. अनीश देसाई कहते है कुछ पोषक तत्व नियमित देने से बच्चे की  रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे -धीरे बढती जाती है, जो निम्न है,

  • एस्कार्बिक एसिड के रूप में जाना जाने वाला विटामिन सी है, जो खट्टे फल, जामुन, आलू और मिर्च में पाया जाता है, इसके अलावा यह टमाटर, मिर्च, ब्रोकोली आदि प्लांट के स्त्रोतों में पाया जाता है, विटामिन सी एंटीबॉडी के गठन को एक्साईट कर इम्युनिटी को मजबूत बनाती है,
  • विटामिन ई एक एंटी ओक्सिडेंट के रूप में काम करता है और रोग प्रतिरोधक समझता को बढ़ाती है, फोर्टिफाईड अनाज, सूरजमुखी के बीज, बादाम तेल (सूरजमुखी या कुसुम तेल) हेजलनट्स और पीनटबटर  के साथ बच्चे के आहार में विटामिन ई जोड़ने से इम्युनिटी को बढ़ावा देने में मदद मिलती है,  
  • जिंक इम्युनिटी को प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करता है, इसके लिए जिंक के स्त्रोत पोल्ट्री, ओसेनिक फ़ूड, दूध, साबूत अनाज, बीज और नट्स है,
  • प्रोटीन बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाती है, जो किसी बीमारी से लड़ने में मदद करती है, इसके लिए अंडे, बीन्स, मटर, सोया उत्पाद, अनसाल्टेड नट्स, बीज आदि प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना अच्छा रहता है,
  • प्रोबायोटिक्स भी इम्युनिटी को बढ़ाने में  कारगर सिद्ध होती है, जो दही, किमची, फरमेंटेड सोया प्रोडक्ट आदि में होता है, क्योंकि वे हानिकारक बैक्टेरिया को दूर रखते और उन्हें आंत में बसने से रोकती है, 
  • विटामिन ए, डी, बी 12, फोलेट, सेलेनियम और आयरन सहित अन्य पोषक तत्व भी बच्चों की इम्युनिटी को मजबूत करती है.

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Winter Special: इन 5 जूस से बढ़ाएं इम्यूनिटी

कुछ लोगों को मौसम के बदलते ही मौसमी बीमारियों का शिकार होना पड़ता है. उन्हें सर्दीजुखाम, बुखार तुरंत अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं. ऐसे में वे बस यही सोचते हैं कि ऐसा हमारे साथ ही क्यों होता है, जबकि हमारी डाइट तो अच्छीखासी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ खाने से काम नहीं चलता, बल्कि हैल्दी चीजों को अपनी डाइट में शामिल करने की जरूरत होती है ताकि आप की इम्यूनिटी बूस्ट हो सके.

अगर आप की इम्यूनिटी स्ट्रौंग होगी तो आप बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो पाते हैं. इस के लिए आप अपनी डाइट में ऐसे जूस शामिल कर सकती हैं, जो आप को फिट रखने के साथसाथ आप की इम्यूनिटी को भी बूस्ट करने का काम करते हैं.

आइए, जानते हैं इम्यूनिटी बूस्टर के बारे में:

वैजिटेबल व फ्रूट जूस हैं बैस्ट

आप ने हर घर में किसी न किसी को यह कहते जरूर सुना होगा कि मु?ो सब्जियां व फ्रूट्स पसंद नहीं हैं. मु?ो तो बाहर का खाना व फास्ट फूड ही ज्यादा पसंद आता है. ऐसे में उन के लिए वैजिटेबल व फ्रूट जूस बैस्ट औप्शन हैं, ताकि उन्हें जूस के जरीए वैजिटेबल्स व फू्रट्स भी मिल जाएं, जिस से उन्हें जरूरी न्यूट्रिऐंट्स मिलने के साथसाथ उन की इम्यूनिटी भी बूस्ट हो सके.\

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ये जूस आप की टम्मी को लंबे समय तक फुल रख कर आप के पेट की हैल्थ के साथसाथ आप की पूरी हैल्थ का भी खयाल रखने का काम करते हैं. ये हर उम्र के लोगों के लिए परफैक्ट हैं. खासकर बच्चों के लिए काफी अच्छा रहते हैं, क्योंकि पेरैंट्स के लिए बच्चों को सब्जियां खिलाना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में जूस टेस्टी होने के कारण उन में बिटामिंस व मिनरल्स की कमी को पूरा कर के उन्हें हैल्दी बनाए रखने का काम करते हैं. ये ऐंटीऔक्सीडैंट्स से भरपूर होने के कारण पूरा दिन ऊर्जा से भरपूर रखते हैं.

इन से लिवर क्लीन होने के साथसाथ ये बौडी को डीटौक्स करने का भी काम करते हैं, जिस से शरीर अंदर से हैल्दी रह कर आप बीमारियों से बच पाते हैं. ये आप की अनहैल्दी स्नैक्स की हैबिट को छुड़ा कर आप को पूरा दिन लाइट फील करवाने का भी काम करते हैं.

जानते हैं इम्यूनिटी बूस्टर जूस के बारे में

टमाटर का जूस

टमाटर लाइकोपीन नामक ऐंटीऔक्सीडैंट में रिच होने के कारण इम्यूनिटी को बूस्ट करने के साथसाथ आप की हैल्थ के लिए भी मैजिक का काम करता है.

इस में लाइकोपीन नामक तत्त्व आप के सैल्स को फ्री रैडिकल्स से बचा कर शरीर में सूजन को कम करता है व कैंसर से बचाने के साथसाथ दिल की सेहत का भी खास खयाल रखता है, क्योंकि इस में मैग्नीशियम व पोटैशियम मिनरल्स दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं. साथ ही इस में विटामिन बी और फौलेट होने के कारण यह मैटाबोलिज्म को बूस्ट करने के साथ ही आप के वजन को भी नियंत्रित रखने का काम करती है.

कैसे बनाएं सामग्री

–  3-4 टमाटर

–  थोड़ा सा भुना जीरा

–  थोड़ा सा कद्दूकस किया लहसुन.

विधि

सब से पहले टमाटरों को उबाल कर ठंडा कर लें. फिर मिक्सी में पीस कर छलनी से छान कर इस में थोड़ा पानी डालें. फिर कड़ाही में कुछ बूंदें घी की डाल कर उस में कद्दूकस किए लहसुन को थोड़ा चलाएं. फिर इस में टमाटर सूप डाल कर थोड़ा पकाएं और स्वाद बढ़ाने के लिए इस में जीरा पाउडर ऐड करें.

आप चाहें तो इसे गरम भी पी सकते हैं या फिर ठंडा कर के भी. इस से आप को विटामिन ए, बी, सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम मिल जाएगा. इस में ऐंटीऔक्सीडैंट््स और ऐंटीइनफ्लैमेटरी प्रौपर्टीज होने के कारण यह जूस आप के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा.

गाजर, सेब व संतरे का जूस

इन तीनों का कौंबिनेशन आप को बीमारियों से लड़ने में मददगार साबित होगा, क्योंकि सेब व संतरा विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं. वहीं गाजर में विटामिन ए और विटामिन बी6 होने के कारण ये इम्यून सैल्स को बनाने के साथसाथ ऐंटीबौडीज बनाने में मददगार साबित होते हैं. इसलिए इसे इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक कहा जाए तो गलत नहीं होगा.

कैसे बनाएं सामग्री

–  2 गाजर छिली हुए

–  2 सेब

–  3 संतरे छिले.

विधि

सारी सामग्री को जूसर में डाल कर जूस तैयार करें. फिर ऊपर से इस के स्वाद को बढ़ाने के लिए चाट मसाला या फिर काला नमक डाल कर सर्व करें. इस से आप को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6, विटामिन बी12, पोटैशियम, फाइबर, ऐंटीऔक्सीडैंट्स मिल जाएंगे, जो आप की हैल्थ का खयाल रखने का काम करेंगे.

वाटरमैलन व लौकी जूस

इस में 90% वाटर कंटैंट होने के कारण यह आप को रिफ्रैश करने के साथसाथ इस में ढेरों न्यूट्रिऐंट्स भी होते हैं, जो आप की भूख को कंट्रोल करने में मदद करते है. साथ ही टेस्टी होने के कारण आप इसे बड़े चाव से अपनी डाइट  मेें ऐड कर सकते हैं.

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अगर आप को कब्ज, डायबिटीज की शिकायत है तो आप इस ड्रिंक को जरूर अपनी डाइट में शामिल करें. लौकी सैचुरेटेड फैट व कोलैस्ट्राल में लो होने के साथ फाइबर में रिच होता है, जिस से आप को न्यूट्रिशन भी मिल जाता है और इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है. इन में आयरन, मिनरल, विटामिन बी, ऐंटीऔक्सीडैंट्स होने के कारण ये आप की इम्यूनिटी को बूस्ट करने का भी काम करते हैं.

कैसे बनाएं सामग्री

–  1 कप कद्दूकस की लौकी

–  1 कप टुकड़ों में कटा तरबूज

–  थोड़ी सी धनियापत्ती

–  थोड़ा सा काला नमक

–  थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर.

विधि

सारी सामग्री को जूसर में डाल कर उस का स्मूद पेस्ट तैयार करें. फिर इसे जीरा पाउडर से गार्निश कर के सर्व करें. इस से आप को मैग्नीशियम, जिंक, आयरन, गुड फैट्स, विटामिन सी, कैल्सियम, विटामिन बी 3, विटामिन बी 5, विटामिन 6 मिल जाएगा, यह ड्रिंक आप के अंदर की कमजोरी को भी दूर करेगा और आप को हैल्दी बनाने में मददगार होगा.

खीरा व पाइनऐप्पल जूस

बता दें कि पाइनऐप्पल में ब्रोमेलाइन ऐंजाइम्स होते हैं, जो दर्द व सूजन से लड़ने में मददगार होते हैं. साथ ही यह जूस विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के कारण आप की इम्यूनिटी को स्ट्रौंग बनाने का काम भी करता है. वहीं खीरे में 95% वाटर होने के कारण यह आप को हाइड्रेट रखने का काम करता है.

इस में विटामिन ए की मौजूदगी आप की इम्यूनिटी को स्ट्रौंग बनाने के साथ ही आप की किडनियों, लंग, हार्ट के कार्यों को सुचारु रखने में मददगार है.

कैसे बनाएं सामग्री

–  1 छोटा खीरा

–  2 बड़े टुकड़े पाइनऐप्पल के

–  थोड़ी सी पुदीनापत्ती

–  आधे नीबू का रस

–  थोड़ा सा काला नमक.

विधि

सारी सामग्री को मिला कर ब्लैंड करें. फिर इस में थोड़ा सा पानी डाल कर तुरंत सर्व करें. इस से आप को विटामिन ए, के, बी, सी, जिंक, कैल्सियम मिल जाएगा. यह जूस आप की इम्यूनिटी के साथसाथ आप की स्किन की हैल्थ के लिए भी अच्छा होता है.

बीटरूट जूस

बीटरूट गुड बैक्टीरिया की क्वांटिटी को इंप्रूव करने के साथसाथ आप के पेट की हैल्थ को भी ठीक रखता है. यह विटामिन सी में रिच होने के साथ आप की स्ट्रौंग इम्यूनिटी के लिए अच्छा माना जाता है. इन में मौजूद मिनरल्स आप दांतों को हैल्दी रखने का काम करता है.

यही नहीं ब्लड सर्कुलेशन को इंपू्रूव करने के साथ ही आप के हीमोग्लोबिन को बढ़ाने का काम करती हैं, जिस से आप को थकान व कमजोरी महसूस नहीं होती है और आप की कार्यक्षमता बढ़ती है.

कैसे बनाएं सामग्री

–  1-2 मध्यम आकार के बीटरूट

–  थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा

–  थोड़ा सा नीबू का रस

–  थोड़ा सा काला नमक.

विधि

सब से पहले बीटरूट व अदरक को छील कर इन का जूसर में जूस तैयार करें. फिर उस में नीबू का रस व काला नमक डाल कर सर्व करें. इस जूस से आप को कैल्सियम, आयरन, विटामिन ए, सी, फौलिक ऐसिड, मैग्नीशियम, पोटैशियम मिल जाएगा. यह वजन को कम करने के साथ ही कैंसर से भी बचाता है, दिल के लिए भी अच्छा होता है. आप के ऐक्सरसाइज करने के स्टैमिना को बढ़ाता है. इस जूस के रोज सेवन से आप को तुरंत सुधार दिखने लगेगा.

एक दिन में कितना जूस लें

अगर आप अपनी हैल्थ को ठीक रखना चाहते हैं, इम्यूनिटी को बूस्ट करना चाहते हैं तो रोज 1 गिलास जूस बैस्ट है. यह आप को हाइड्रेट रखेगा, फिटनैस का खयाल रखेगा, साथ ही आप की न्यूट्रिशन संबंधित जरूरतों को भी काफी हद तक पूरा करने का काम करेगा.

इन जूस का ज्यादा फायदा लेने के लिए हमेशा फ्रैश फू्रट्स और वैजिटेबल्स का ही इस्तेमाल करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि इस की अति से बचें. यह न सोचें कि आप रोटी, सब्जी, दाल की जगह पूरा दिन जूस पर ही टिके रहें. इस से आप की हैल्थ को नुकसान पहुंच सकता है.

किस समय लेना ज्यादा फायदेमंद

जूस को सुबह के ब्रेकफास्ट के साथ लेना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इस से आप पूरा दिन हाइड्रेट रहने के साथसाथ ज्यादा फुरती के साथ काम कर सकते हैं. आप की इम्यूनिटी बूस्ट होने में मदद मिलती है, जिस से आप किसी भी तरह के इन्फैक्शन व बीमारी से बच सकते हैं. बस खाली पेट जूस लेने से बचें, क्योंकि यह एसिडिटी, तुरंत शुगर लैवल को बढ़ाने का काम करता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए ठीक नहीं होता है.

पैक्ड जूस फ्रैश जूस

अगर आप हैल्दी औप्शन के बारे में सोच रहे हैं तो आप के लिए फ्रैश जूस ही बैस्ट है. चूंकि पैक्ड जूस शुगर व कैलोरीज में काफी हाई होता है, इसलिए यह वेट को कंट्रोल करने वालों व डायबिटीज के मरीजों के लिए सही है.

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बता दें कि इस में न्यूट्रिशन वैल्यू भी काफी कम होती है, क्योंकि प्रोसैसिंग व स्टोरेज के कारण इस में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स खत्म हो जाते हैं, जिस से न तो यह आप की इम्यूनिटी को बूस्ट कर पाता है, साथ ही मोटापे का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, जबकि फ्रैश जूस से आप को उस के पूरे न्यूट्रिशन का फायदा मिल पाता है. साथ ही आप उस में जरूरत होने पर ही शुगर डालते हैं, जिस से आप का कैलोरीज पर कंट्रोल रहता है.

 इम्यूनिटी बढ़ाने के 7 टिप्स

2020 हम सब के लिए काफी अलग रहा. घूमनेफिरने पर रोक, लोगों से मिलनेजुलने की मनाही यानी लाइफस्टाइल पूरी तरह से बदल गई थी. लेकिन अब जब हम 2021 में नई उम्मीदों के साथ कदम रख चुके हैं तो हमें अपने अंदर पौजिटिविटी लाने के साथसाथ न सिर्फ अपनी मैंटल, बल्कि फिजिकल हैल्थ पर भी काफी ध्यान देना होगा ताकि खुद को फिट रख कर हर बीमारी से लड़ सकें.

तो आइए जानते हैं उन 7 चीजों के बारे में, जिन्हें आप अपने लाइफस्टाइल में ला कर अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट कर सकते हैं.

खानपान का रखें खास खयाल

जब भी हमारा ब्रेन थक जाता है तो वह सिगनल जरूर देता है जैसे आप काम में मन नहीं लगा पाते, अच्छी तरह नहीं सोच पाते. ऐसा अकसर तब होता है जब आप भरपूर नींद नहीं लेते हैं या फिर सोने के समय को टीवी या फिर मोबाइल देखने में लगा देते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप का ऐसा करना आप की इम्यूनिटी को भी कमजोर बनाने का कारण बन सकता है? एक रिसर्च में यह साबित हुआ है कि नींद और हमारी इम्यूनिटी सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं, क्योंकि जब हम सोते हैं तो हमारा इम्यून सिस्टम कुछ खास तरह के कीटौकिंस रिलीज करता है, जो इन्फैक्शन, जलन, सूजन और तनाव को कम करने में सहायक होता है.

लेकिन जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो ये सुरक्षा प्रदान करने वाले टौक्सिंस और संक्रमण से लड़ने वाली ऐंटीबौडीज बननी कम हो जाती हैं, जो हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाने का काम करती हैं. इसलिए जरूरी है कि रोज 6-7 घंटे की नींद जरूर लें खासकर रात की नींद से बिलकुल सम?ौता न करें.

दिमाग को दें आराम

कोरोना महामारी के कारण पिछले कुछ महीनों से घर में रहने के कारण हमारा लाइफस्टाइल काफी खराब हो गया है. ज्यादा खाने की हैबिट व ऐसे स्नैक्स को पसंद करने लगे हैं, जिन में न्यूट्रिऐंट्स बहुत कम होते हैं और फैट्स, शुगर व साल्ट की मात्रा काफी होती है, जो शरीर को अंदर से खोखला बनाने के साथसाथ आप को बीमारियों की गिरफ्त में भी ला देती है.

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रिसर्च में यह साबित हुआ है कि प्लांट बेस्ड फूड्स, सब्जियां, फल ऐंटीऔक्सीडैंट्स में रिच होने के साथसाथ बीटा कैरोटिन, विटामिन सी, डी और ई जैसे न्यूट्रिऐंट्स प्रदान करते हैं, जो इम्यूनिटी को बूस्ट करने के साथसाथ औक्सिडेटिव स्ट्रैस को भी कम करने में मदद करते हैं.

बीटा कैरोटिन में ऐंटीऔक्सीडैंट्स होने के कारण ये शरीर में बीमारियों से लड़ने वाले सैल्स को बढ़ा कर जलन व सूजन को कम करने तथा इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का काम करते हैं. इस के लिए आप अपनी डाइट में गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें.

विटामिन ए और सी शरीर में फ्री रैडिकल्स को खत्म कर के इम्यून सिस्टम को सुचारु रूप से काम करने में मदद करते हैं. इस के लिए आप अपनी डाइट में संतरा, ब्रोकली, नट्स, पालक, नीबू, स्ट्राबेरी तथा फलों व सब्जियों को शामिल करें. आप विटामिन डी के लिए सुबह की धूप लेने के साथसाथ सप्लिमैंट्स भी लें, जो इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं.

इस से आप की बौडी इन्फैक्शन से लड़ने में सक्षम बन जाती है. अत: आप बीमारियों से बचना है तो अपने खानपान में हैल्दी चीजों को जरूर शामिल करें.

से नो टु अलकोहल

शराब का एक जाम आप की रात को सुहावना बना देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप की रोजाना शराब पीने की आदत आप की इम्यूनिटी को भी प्रभावित करने का काम करती है? एक अध्ययन के अनुसार, अलकोहल के ज्यादा सेवन करने से फेफड़ों व ऊपरी स्वशन तंत्र में इम्यून सैल्स को काफी नुकसान पहुंचता है. इसलिए नए साल से अलकोहल को अपनी जिंदगी से करें आउट.

हो सकता है शुरुआत में आप को इसे छोड़ने में दिक्कत हो, लेकिन आप की विल पावर इसे छोड़ने में आप की मदद करेगी. जब भी आप का मन शराब पीने का करे तो नीबू पानी, सूप, जूस लें, क्योंकि ये शरीर को डीटौक्स करने के साथसाथ आप को अलकोहल से दूर करने में भी आप की मदद करेंगे.

बूस्ट योर इम्यूनिटी

कुछ शोधों में साबित हुआ है कि ऐक्सरसाइज से इम्यूनिटी बूस्ट होती है. लेकिन आजकल लोगों का रूटीन इतना बिजी हो गया है कि वे खुद के लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं. ऐसे में अगर आप के पास मौडरेट ऐक्सरसाइज करने के लिए समय नहीं है तो आप रोज 15 मिनट ऐक्सरसाइज जरूर करें. इस में आप ब्रिस्क वाक, जौगिंग, साइक्लिंग को शामिल कर सकते हैं.

अगर आप को स्विमिंग का शौक है तो यह आप के लिए काफी अच्छी ऐक्सरसाइज साबित होगी. रिसर्च में यह भी साबित हुआ है कि अगर आप हफ्ते में 150 मिनट मौडरेट ऐक्सरसाइज करते हैं तो यह आप के इम्यून सैल्स के पुनर्निर्माण में मदद करती है.

पानी से रखें खुद का खयाल

क्या आप जानते हैं कि 60% तक वयस्क शरीर पानी से बना होता है, जिस में फेफड़ों में 83% पानी और हार्ट और ब्रेन में 73% पानी होता है? आप के शरीर के हर सिस्टम को ठीक से काम करने के लिए पानी की जरूरत होती है. लेकिन जब हम खाना खाते हैं, सांस लेते हैं या फिर जब शरीर से पसीना निकलता है तो हमारे शरीर से पानी कम होता है, जिस की पूर्ति हम जो पानी या फिर फ्लूड लेते हैं उस से पूरी होती है.

इसलिए जरूरी है कि दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं. पानी के जरीए औक्सीजन और न्यूट्रिऐंट्स पूरी बौडी में पहुंच कर विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल कर आप को बीमारियों से बचाते हैं. इसलिए खूब पानी, नीबू पानी, कुनकुना पानी पीएं. क्योंकि ये ब्लड सर्कुलेशन को इंप्रूव करने, बौडी को डीटौक्स कर के आप की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का काम करते हैं.

मैंटेन करें हैल्दी वेट

इम्यून सिस्टम विभिन्न तरह के सैल्स से बनता है, जो शरीर को बैक्टीरिया, वायरस से बचाने का काम करता है. इन सब को शरीर में एकसाथ संतुलन के साथ रहना होता है ताकि शरीर फिट रहे. लेकिन शरीर में जब फैट की मात्रा अधिक हो जाती है तो यह इम्यून सैल्स को कमजोर बनाने का काम करता है, जिस से शरीर बीमारियों से अच्छी तरह लड़ नहीं पाता और कई बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है.

इसलिए इम्यून सिस्टम को ठीक से कार्य करने के लिए अपने वेट को मैंटेन रखें.

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स्ट्रैस को कहें बायबाय

हमारी लाइफ में कब कैसी स्थिति आ जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसे में न चाहते हुए भी हम स्ट्रैस की गिरफ्त में आ जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस के कारण शरीर में जलन व सूजन होने से हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, क्योंकि जब हम तनाव में रहते हैं तो हमारे इम्यून सिस्टम की एंटीजन्स से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, जिस से हमें इन्फैक्शन होने का डर काफी बढ़ जाता है.

इसलिए स्ट्रैस में न रहें. स्ट्रैस को कम करने के लिए चाहे जैसी भी परिस्थिति हो पौजिटिव सोचें, ब्रेन को आराम दें, नियमित ऐक्सरसाइज करें, हैल्दी ईटिंग हैबिट्स फौलो करें. इस तरह अपने लाइफस्टाइल में बदलाव ला कर अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट कर सकते हैं.

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