Winter Special: ताकि ठंडी हवाएं स्किन की नमी न चुराएं

हौलेहौले सर्दियों ने दस्तक दे दी है. इस मौसम का ठंडापन और रूखापन त्वचा से नमी को चुरा लेने वाला होता है, जिस से त्वचा सूखीसूखी, फटीफटी सी लगने लगती है और थोड़ी सैंसिटिव भी हो जाती है. लेकिन ऐसे मौसम में अगर आप चाहें तो सर्द हवाओं को अपनी त्वचा का दोस्त भी बना सकती हैं, जिस के उपाय बता रही हैं साकेत सिटी हौस्पिटल की डर्मैटोलौजिस्ट डाक्टर लिपि गुप्ता:

1. त्वचा क्यों होती है ड्राई

सर्दियों के मौसम में त्वचा इसलिए ड्राई हो जाती है क्योंकि खुश्क हवा त्वचा के नीचे से नमी सोख लेती है. त्वचा में नमी की कमी होने से सेल्स की बाहरी सतह सूखी हो कर चटकने लगती है, तो नमी का सुरक्षा कवच हट जाता है. इस से अंदरूनी त्वचा पर भी मौसम का असर होने लगता है. ऐसी त्वचा पर स्थायी या अस्थायी लकीरें अपना स्थान बनाने लगती हैं. ऐसा न हो इस के लिए आप आगे बताए जा रहे उपाय अपना कर त्वचा की देखभाल कर उस की नमी बरकरार रख सकती हैं.

2. हौट शौवर स्नान

इस मौसम में हर सुबह स्फूर्तिदायक गरम पानी से स्नान बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा स्नान आप को ताजगी प्रदान करता है और त्वचा की हाइजीन को बनाए रखता है. पर यह ध्यान रहे कि पानी बहुत ज्यादा गरम नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह त्वचा की कुदरती नमी को सोख लेता है. अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा के लिए कुनकुना पानी सब से बेहतर उपाय है.

3. बौडी औयलिंग

सर्दी के मौसम में खुश्क हवा से त्वचा को बचाने व सूखेपन को दूर करने का असरदार तरीका है कुनकुने तेल से मालिश करना. लेकिन मालिश के लिए ऐसे तेल का चुनाव करें जो बहुत ज्यादा चिकनाईयुक्त न हो और शरीर में जल्दी मर्ज हो जाने वाला हो. जैसे औलिव, जोजोबा और ऐलोवेरा औयल. तेल की मसाज सोने से पहले या नहाने से 1 घंटा पहले करें, जिस से तेल का असर बौडी पर अच्छी तरह से हो जाए.

4. फेसवाश कैसा हो

सरदी के मौसम में सब से ज्यादा चेहरे की देखभाल की जरूरत पड़ती है. इस के लिए संतुलित, सौम्य व हाइडे्रटिंग फेसवाश का इस्तेमाल करें, जिस में क्लींजिंग व मौइश्चराइजिंग जड़ीबूटियों के साथसाथ ऐलोवेरा पर्याप्त मात्रा में हो. ये तत्त्व त्वचा को हाइड्रेट करते हैं.

5. साबुन का चुनाव

त्वचा की नियमित सफाई व नमी के लिए ऐसे सौफ्ट साबुन का चुनाव करें जिस में औलिव औयल और ऐलोवेरा के गुण हों.

6. घरेलू मौइश्चराइजर

आधा चम्मच गुलाबजल में 1 चम्मच शहद मिलाएं और चेहरे पर आहिस्ताआहिस्ता मलें. इसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर पानी से साफ कर लें. शहद से सूखी त्वचा की नमी लौट आएगी. इस के अलावा नाखूनों के आसपास मौइश्चराइजर लगाएं क्योंकि पानी में ज्यादा देर काम करने से वे भुरभुरे और सूखे हो सकते हैं. आप दस्तानों का प्रयोग भी कर सकती हैं.

7. स्क्रबिंग

सर्दी के मौसम में धूलमिट्टी से त्वचा को बचाने के लिए सप्ताह में 2 बार स्क्रबिंग जरूर करवाएं. स्क्रबिंग त्वचा से जमा मैल और डैडस्किन प्रभावी तरीके से निकालने और त्वचा से अतिरिक्त मौइश्चर को सोखने में सक्षम होती है, इसलिए आप की त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाए रखती है.

8. टोनर और क्लींजिंग मिल्क

सर्दी के मौसम में पसीना न आने की वजह से लोग फेसवाश करने पर कम ध्यान देते हैं, जिस से त्वचा की सफाई बेहतर ढंग से नहीं हो पाती. ऐसे में अच्छी क्वालिटी के टोनर और क्लींजिंग मिल्क प्रभावी तरीके से त्वचा की गहराई से सफाई करते हैं और सूखी त्वचा को स्वच्छ, नर्म व नमीयुक्त बनाते हैं.

9. मौइश्चराइजर

सर्दी के मौसम में ऐसे मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें जो धूप से सुरक्षा दे. आप नौर्मल मौइश्चराइजर की जगह सेरेमाइकयुक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. सैलिब्रिटीज मेकअप ऐक्सपर्ट, आशमीन मुंजाल के अनुसार, मौइश्चराइजर त्वचा में पीएच बैलेंस को मैंटेन करता है. अगर पीएच बैलेंस बढ़ता है, तो ऐक्ने की शुरुआत होती है और अगर कम होता है, तो फेस पर रिंकल्स उभर आते हैं. इसलिए ऐसे मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें, जो त्वचा में पीएच बैलेंस सही बनाए रखे. इस के अलावा बादाम क्रीम, वैसलीन व ग्लिसरीन का इस्तेमाल करें. ये त्वचा पर एक सुरक्षा कवच बना देते हैं जिस से उस पर शुष्क हवाओं का असर नहीं पड़ता. अच्छा मौइश्चराइजर त्वचा की खोई नमी तो लौटाता ही है, साथ ही नए ऊतकों को पैदा करने में भी मददगार होता है. यह धूल, धूप और मौसम की तीखी मार से बचाते हुए मेकअप की नमी बनाए रखता है. जहां सूखी त्वचा के लिए सामान्य मौइश्चराइजर मददगार साबित होता है, वहीं तैलीय त्वचा के लिए औयलफ्री मौइश्चराइजर बेहतर विकल्प है.

10. सनस्क्रीन लोशन जरूर इस्तेमाल करें

डाक्टर लिपि के अनुसार, जाड़े में धूप भी आप की त्वचा पर सीधा असर डालती है, इसलिए गरमी की तरह ही जाड़े में भी सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल जरूर करें. दरअसल, सर्दी में भी अल्ट्रावायलेट किरणें नुकसानदेह होती हैं और चूंकि आप जाड़े में धूप में ज्यादा समय बिताती हैं, इसलिए त्वचा पर अल्ट्रावायलेट किरणों का असर भी ज्यादा होता है. सनस्क्रीन लोशन उस के असर से तो त्वचा को बचाता ही है, उस की वजह से आप की खुली त्वचा पर होने वाली फाइनलाइन झुर्रियों और ऐज स्पौट वगैरह से भी बचाता है.

11. खानपान का रखें खास खयाल

सर्दी के मौसम में अपने खानेपीने का खास खयाल रखें. अपनी त्वचा को हाइड्रेट करने के लिए दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं. इस मौसम में प्यास कम लगती है फिर भी आप कुछकुछ देर में कोई न कोई लिक्विड जरूर लेती रहें. गरम पानी में नीबू डाल कर भी पीएं. इस से शरीर से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है. इस के अलावा ग्रीन टी, नारियल पानी, स्प्राउट, फल वगैरह लें. खानपान में संतुलन रखें व पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें.

12. पर्याप्त नींद लें

त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए 7-8 घंटे नींद जरूर लें क्योंकि यह हमारी ऊर्जा को ताजा करती है और शरीर को फुरतीला बनाए रखती है.

Winter Special: सर्दियों में ऐसे करें स्किन की देखभाल

त्वचा की नियमित देखभाल करना मेकअप से ज्यादा जरूरी है. सर्दियों में त्वचा की देखभाल और जरूरी हो जाती है. अपनी कुछ आदतों को बदलकर आप इस मौसम में होने वाली त्वचा संबंधी परेशानियों से आसानी से निपट सकती हैं.

– चेहरे की सफाई पर नियमित ध्यान देना जरूरी है.

– सुबह-शाम फेसवाश से चेहरा धोएं और बाहर से लौटकर चेहरे की सफाई का खास ध्यान रखें क्योंकि बाहर का प्रदूषण चेहरे को नुकसान पहुंचा सकता है.

– चेहरा धोने के बाद चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगाना न भूलें. मुलायम हाथों से चेहरे पर मसाज करें और अतिरिक्त मॉइश्चराइजर को कॉटन या टिश्यू पेपर से पोछ लें.

– क्लेंजिंग, टोनिंग व मॉइश्चराइजिंग का सिद्धांत कभी न भूलें. बाहर से घर लौटने पर चेहरा अवश्य साफ करें और सुबह-शाम त्वचा की अच्छे से सफाई करें.

– क्लेंजिंग के लिए कच्चे दूध का इस्तेमाल करें. कच्चे दूध में कॉटन डुबोकर चेहरे को साफ करने से भी त्वचा की बेहतर सफाई की जा सकती है.

– सप्ताह में कम से कम एक बार स्क्रब का इस्तेमाल करें.

– घर पर भी स्क्रब बनाया जा सकता है. इसके लिए चीनी में थोड़ा-सा शहद और बादाम का तेल डालकर स्क्रब बना लें. इसे चेहरे पर लगाएं और हल्के-नर्म हाथों से नीचे से ऊपर की ओर मसाज करें. इसके अलावा नमक और चीनी को जैतून के तेल साथ मिलाकर भी स्क्रब की तरह प्रयोग किया जा सकता है. इससे मृत त्वचा आसानी से हट जती है.

– दिन भर में सात-आठ गिलास पानी अवश्य पिएं. जाड़ों में अक्सर लोग पानी पीना कम कर देते हैं. पानी से त्वचा को कुदरती चमक मिलती है.

– खूबसूरत और दमकती त्वचा के लिए खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है. फलों और हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें. जूस व दूध का प्रयोग भी भरपूर मात्रा में करें. इससे त्वचा और चेहरे में प्राकृतिक निखार बढ़ेगा.

– व्यायाम व योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. इससे रक्त संचार तेज होता है और चेहरे की चमक बढ़ती है.

– खानपान में पर्याप्त फल और सब्जियों को शामिल करें. त्वचा व शरीर को भरपूर पोषण देने के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त आहार लें. मछली और बादाम विटामिन ई और ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत हैं.

– घर से बाहर निकलते वक्त एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन का प्रयोग करें.

गरबा 2022: एक्सपर्ट से जानें किस तरह की है अपनी स्किन

खूबसूरत दिखने के लिए सिर्फ मेकअप की जरूरत नही होती हमारी स्किन का खूबसूरत होना भी बेहद जरूरी है. और उसके लिए स्किन की देखभाल बहुत आवश्यक स्किन की देखभाल एक कला और विज्ञान दोनों है, जिसे सावधानीपूर्वक और सोच-समझकर करने की आवश्यकता है.

स्किन की देखभाल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 10 लम्बे स्टेप्स की दिनचर्या या विदेशी सामग्री का उपयोग नहीं करना है, बल्कि सही उत्पाद ढूंढना है जो आपके लिए प्रभावी ढंग से काम करते हैं. स्किन की देखभाल वाले उत्पादों में वो जादुई एक-आकार-फिट-सभी वाला विकल्प नहीं होता है, इसलिए अपनी स्किन की देखभाल की दिनचर्या का अधिकतम लाभ उठाने और इसकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपनी स्किन के प्रकार को जानना अनिवार्य है.

इस बारे में बता रहीं हैं-रिया वशिष्ठ सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट प्रोस्थेटिक FX व् स्पेशल इफेक्ट्स एक्सपर्ट USA  सर्टिफाइड.

क्यों है जरुरी ये जानना की मेरी स्किन किस प्रकार की है ?

जहाँ बात हमारी स्किन की आती है तो हम सभी अच्छे से अच्छे प्रोडक्ट्स खरीदना व इस्तेमाल करना चाहते हैं, मगर ये नहीं जानते की कौन सा प्रोडक्ट ले और कौनसा नही. बाज़ारों में बड़ी मात्रा में काफी स्किनकेयर प्रोडक्ट्स हैं जो हर तरह की स्किन के लिए बने हैं. इसीलिए आपका ये जानना बेहद जरुरी है कि आपकी स्किन किस प्रकार कि है ताकि जब आप किसी भी प्रोडक्ट का उपयोग करें तो उससे आपकी नेचुरल स्किन को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंच पाए. बिना ये जाने कि आपकी स्किन पर किस प्रकार का प्रोडक्ट इस्तेमाल करना सुरक्षित हैं और आपकी स्किन किस प्रकार कि है, यदि आप कोई भी मनभावन प्रोडक्ट का उपयोग करते हैं तो उससे भविष्य में आपकी स्किन पर स्किन एलर्जी, मुहांसे, चेहरे पर ज्यादा आयल आना, अधिक मात्रा में स्किन का सूखेपन से खिचाव व लाल पड़ जाना, इत्यादि तकलीफों से गुजरना पड़ सकता है.

इन सभी तरह कि परेशानियों से बचने के लिए तथा अपनी स्किन को नैचुरली स्वस्थ रखने के लिए आइये जानते हैं कि हम घर पर ही टेस्ट करने के बहुत आसान से टिप्स.

टेस्ट करने के आसान टिप्स-

1 )  एक रात पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह से धो लें और उसके बाद किसी भी तरह के नाईट केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें न ही कोई और क्रीम या टोनर या कुछ भी लगाएं.

2 )  चेहरे को अच्छी तरह से धोने के बाद, अब आप जाके सो जाएं मगर बिना किसी आर्टिफीसियल एयर कंडीशनिंग के.

3 ) सुबह जब आप उठें तो सबसे पहले अपने चेहरे को एकदम बीचों बीच यानी कि ‘ टी ” जोन हिस्से को छू कर देखें. ये ‘ टी ‘ जोन वाला हिस्सा हमारे चेहरे का बीच वाला भाग होता है जिसमें माथा, नाक वे ठोड़ी आते हैं. और उसके बाद अपने चेहरे का ‘ सी ‘ जोन यानी कि बाहरी आउटलाइन वाला भाग छू कर देखें.

यदि आपका ‘ टी ‘ जोन चिपचिपा या ऑयली है तो समझें कि आपकी स्किन ऑयली स्किन है.  और यदि आपका ‘ टी ‘ जोन ऑयली है परन्तु ‘ सी ‘ जोन ड्राई है तो इसका मतलब ह कि आपकी स्किन नार्मल है.

इस टेस्ट के बाद यदि आपको अपनी स्किन में सूखापन महसूस हो रहा है या फिर खुजली या तनाव महसूस हो रहा है बोलने, हंसने पर, तो ये साबित होता है कि आपकी स्किन ड्राई है.

इस टेस्ट के आलावा एक और तरीका है जोकि इसी तरह बेहद आसान है. आप अपने चेहरे को शीशे में निहार कर भी समझ सकते हैं कि आपकी स्किन किस प्रकार कि है.

टेस्ट करने का दूसरा तरीका-

1 ) जैसे ही आप अपने चेहरे को शीशे में देखेंगे और आपको दिखता है कि ‘ टी ‘ जोन वाला भाग में रोम छिद्र चौड़े खुले हुए हैं तथा चेहरा दिखने में फ्रेश नहीं लग रहा है बल्कि काफी थका हुआ वो पहले से थोड़ा काला पड़ा हुआ है, तो आपकी स्किन ऑयली है जिसपे मुहांसे बड़ी ही आसानी से हो जाते हैं.

2 ) यदि आपको आपकी स्किन सही तरह से फैली हुई, फ्रेश, चिकनी व काफी सुकून भरा चेहरा लग रहा है तो यक़ीनन आपकी स्किन नार्मल है या साथ में बहुत हलकी सी ड्राई है.

3 ) ध्यान देने वाली बात अब है कि अगर आपकी स्किन को ज़रा सा भी चिड़चिड़ापन महसूस हो रहा हो या फिर चेहरे पे लालपन आ रहा हो किसी भी भाग में परतदार लग रही हो तो समझ जाएं कि आपकी स्किन ड्राई है और काफी नाजुक है.

यदि आप अपने चेहरे को अब पानी से अच्छे से धो लेते हैं और फिर भी आपको स्किन पर एक जलन सी महसूस होती हैं, उसके बाद अगर आप अपनी रोज़ाना लगाने वाली डे क्रीम लगाते हैं मगर फिर भी जलन होती है, तो निश्चित रूप से आपकी स्किन काफी ड्राई है, जिसकी रक्षा व सुरक्षा दोनों ही महत्वपुर्ण हैं.

देखिये इतना ही आसान है अपनी स्किन के प्रकार का पता लगाना वे उसके हिसाब से प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना. मगर साथ साथ ये समझना भी जरुरी है कि हमारी स्किन हमेशा ऐसी ही नहीं रहती, वह और भी कई तथ्यों पर निर्भर करती है, जैसे कि -:

– हमारा स्वास्थ्य

– हमारी उम्र

– मौसम

– तापमान ( अंदर, बहार, ऐसी कि कूलिंग, इत्यादि )

– प्रदूषण

– स्मोकिंग, इत्यादि.

स्किन में उम्र के साथ बदलाव-

उम्र के साथ हमारी स्किन में बदलाव आते रहते हैं इसीलिए ये जानना बहुत जरुरी है कि स्किन में बदलाव कब आ रहा है और किस वजह से आ रहा है, और आपको कैसे अपने स्किनकेयर कि रोजमर्या के दिनचर्या को बदलना है स्किन के अनुसार.

यदि आप अपनी स्किन को अच्छे से पहचान जायेंगे तो आपको ये भी बहुत अच्छे से ध्यान रहेगा कि उसका ख्याल कैसे रखना है.

क्या आप करती हैं अपनी स्क‍िन की नियमित देखभाल

ग्लोइंग स्किन पाना किसकी ख्वाहिश नहीं होती, लेकिन हममें से ज्‍यादातर लोग अपनी स्किन का ठीक से ध्‍यान नहीं रखते हैं. ऐसे में होता ये है कि आपके समझते समझते इतनी देर हो जाती है कि आपकी स्क‍िन पूरी तरह से डैमेज हो जाती है.

यूं तो स्क‍िन डैमेज होने के बहुत से कारण होते हैं लेकिन धूल, धुंआ और प्रदूषण हमारी स्क‍िन पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं. ऐसे में स्क‍िन को नियमित देखभाल और पोषण की जरूरत होती है. थोड़ी सी सावधानी अपनाकर, आप पिग्मेंटेशन, सेंसिटिविटी और एंटी एजिंग जैसी समस्याओं से बच सकती हैं.

ज्यादातर मामलों में होता ये है कि लोग समय रहते अपनी स्क‍िन पर ध्यान नहीं देते और तब तक प्रॉब्लम इतनी बढ़ जाती है कि उसका असर नजर आने लगता है. ऐसे में देर करने से बेहतर है कि आप अभी से अपनी त्वचा पर ध्यान देना शुरू कर दीजिए.

1. क्‍लींजिंग

अपना चेहरा साफ करने के लिए नारियल पानी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. क्‍लींजिंग के बाद स्किन के पोर्स बंद करने के लिए अल्कोहल फ्री टोनर का इस्तेमाल करना चाहिए.

2. मॉइश्चराइजर

मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल सर्दियों और गर्मियों दोनों में करना चाहिए. अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको वॉटर बेस्ड जेल और मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए. चेहरे को ठंडे पानी से धोएं. इससे आपके चेहरे का तापमान सही रहेगा, चेहरे पर ऑयल कम आएगा और मुहांसे भी नहीं होंगे.

3. सनस्क्रीम

सनस्‍क्रीन लोशन लगाना कभी ना भूलें. भारतीय स्किन के हिसाब से SPF 20 सबसे अच्छा रहता है. UVA प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन नॉर्मल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है. अगर आपकी सेंसिटिव स्किन है तो सनब्लॉक UVB प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल कर सकते हैं.

4. नाइट क्रीम

रात को सोने से पहले चेहरा धोकर नाइट क्रीम जरूर लगाएं. इससे आपकी त्वचा हमेशा कुदरती बनी रहती है और आसानी से प्रभावित नहीं होती है.

शेविंग करते वक्‍त कभी ना करें ये 6 गलतियां

कई बार लड़कियों को वैक्‍सिंग की बजाए पैरों को शेविंग करने में ही ज्‍यादा आसानी महसूस होती है. सैलून में घंटे बैठ कर दर्द सहने से अच्‍छा होता है शेविंग कर के कुछ ही मिनटों में काम खतम कर दिया जाए.

पर क्‍या आप जानती हैं कि कई लड़कियां पैरों को शेविंग करते वक्‍त कई गलतियां कर जाती हैं, जिसके बारे में उन्‍हें पता ही नहीं होता. ये गलतियां त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और इससे पैरों में आने वाले बाल थोड़े सख्‍त हो सकते हैं. आइये जानते हैं कौन सी हैं वे गलतियां, जिसे रोक कर आप शेविंग को एक आरामदायक प्रक्रिया बना सकती हैं.

1. बहुत तेजी से शेव करना

इस आदत की वजह से आपको घाव हो सकता है और रेजर की वजह से जलन महसूस हो सकती है. शेविंग हमेशा धीरे और सवधानी से करनी चाहिये.

2. क्रीम ना लगाना

क्रीम या साबुन लगा कर शेविंग ना करने से बाल ठीक तरह से नहीं निकल पाते.

त्‍वचा को गीला ना करना शेविंग करने से पहले अपने पैरों को कुछ देर के लिये पानी में भिगोएं या फिर शावर लेने के बाद ही शेव करें. इससे बाल नरम हो जाते हैं और आराम से शेव हो जाते हैं.

3. एक ब्‍लेड वाला रेजर प्रयोग करना

कई लोग एक ब्‍लेड वाला रेजर प्रयोग करते हैं, जिससे बाल ठीक प्रकार से साफ नहीं होते. वहीं पर दो दो ब्‍लेड वाला रेजर आपना काम बड़ी आसानी से करता है.

4. नियमित स्‍क्रब ना करना

अगर आप अपने पैरों को नियमित शेव करती हैं, तो आपको उन्‍हें स्‍क्रब भी करते रहना चाहिये जिससे उसमें धंसे हुए बाल निकल आएं.

5. मॉइस्‍चराइजन ना लगाना

शेविंग करने के बाद आपको पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिये और फिर उस पर मॉइस्‍चराइजर लगाना चाहिये, जिससे रैश ना पड़े या फिर उसमें जलन ना हो.

6. रेजर शेयर करना

अपना खुद का रेजर कभी भी शेयर नहीं करना चाहिये क्‍योंकि इससे इंफेक्‍शन और बीमारियां होने का डर रहता है.

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अच्छे बाल और स्किन के लिए डाइट बताएं?

सवाल- 

मैं 44 साल की महिला हूं. मुझे बाल झड़ने, महीन रेखाएं और झुर्रियों की काफी समस्या है. बेहतर त्वचा और बालों का झड़ना रोकने के लिए मुझे अपने आहार में क्या बदलाव लाने चाहिए?

जवाब-

जैसेजैसे उम्र बढ़ती है, वैसेवैसे हमारा मैटाबौलिज्म रेट कम होता जाता है. हमारी मांसपेशियां कम होने लगती हैं और हारमोन का स्तर थोड़ा कम हो जाता है, जिस से वजन बढ़ने, मूड में बदलाव आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

ऐंटीऔक्सिडैंट युक्त खाना खाने से आप को अपने समग्र स्वास्थ्य में सुधार करते हुए भूख और क्रेविंग पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है. अलसी, चिया सीड्स, सालमन, ऐवोकाडो, नट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, गोभी, डार्क चौकलेट, बेरीज, ग्रीक योगर्ट, ऐक्स्ट्रा वर्जिन औलिव औयल, अंडे, चिकन, बींस, खट्टे फल शरीर को पोषण देने में मदद कर सकते हैं.

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महिलाओं को 2 चीजें सब से ज्यादा प्यारी होती हैं- हैल्दी बौडी और मेकअप. इस से न केवल उन में निखार आता है, बल्कि वे स्मार्ट और ऐक्टिव भी नजर आती हैं और अगर वे औफिस में काम करती हैं तो अपनी ब्यूटी को ले कर ज्यादा ही सतर्क रहती हैं.

इस सतर्कता में अच्छा खाना और सही मेकअप बहुत ज्यादा माने रखता है वरना स्वाति जैसा हाल भी हो सकता है.

स्वाति एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम करती है, पर औफिस में किस तरह का मेकअप करना है या क्या खानापीना है, इसे ले कर वह बेपरवाह हो जाती है. एक तो वह अपने आकार में कुछ ज्यादा ही हैल्दी है और उस पर मेकअप भी हैवी कर लेती है, इसलिए पीठ पीछे उस का बहुत मजाक बनता है.

मगर इस का हल क्या है? क्या औफिस के लिए कोई खास तरह का मेकअप होता है? क्या सही खानपान किसी औफिस गर्ल को सब की चहेती बना सकता है? ऐसा क्या किया जाए  कि कोई महिला अपने औफिस में हंसी का पात्र न बने?

इन सब सवालों के जवाब देते हुए डाइटीशियन और मेकअप आर्टिस्ट नेहा सागर कहती हैं, ‘‘किसी लड़की खासकर औफिस गर्ल के लिए अच्छा खानपान और मेकअप में बैलेंस बनाना कोई रौकेट साइंस यानी मुश्किल काम नहीं है. औफिस में काम का तनाव होने की वजह से अपनी डाइट पर पूरा ध्यान देना चाहिए. कुछ छोटीछोटी बातों का ध्यान रख कर कोई भी औफिस गर्ल खुद को सेहतमंद रख सकती है.

‘‘जहां तक मेकअप की बात है तो औफिस में ज्यादा हैवी मेकअप जरूरी नहीं है. अपने रंगरूप और बौडी शेप के हिसाब से मेकअप करने से भी बात बन सकती है.’’

Summer Special: जानिए कैसी है आपकी स्किन

स्किन का वह असामान्य हिस्सा, जहां के रंग में बदलाव आ गया हो, एक आम समस्या है जिस के कई संभावित कारण हो सकते हैं. हो सकता है कि आप की स्किन के उस हिस्से के मेलानिन के स्तर में अंतर की वजह से पिग्मैंटेशन में बदलाव आ गया हो. दागधब्बे वाली स्किन के भी कई संभावित कारण होते हैं, जो साधारण से जटिल भी हो सकते हैं, जैसे कीलमुंहासे, धूप या अन्य किसी कारण से झुलसना, संक्रमण, ऐलर्जी, हारमोन में बदलाव, जन्मजात निशान आदि. परंतु आम धारणा के उलट, आप के चेहरे के दाग सिर्फ मुंहासों की वजह से ही नहीं होते.

कीलमुंहासों की वजह से होने वाले घाव भी दाग छोड़ सकते हैं. यहां तक कि उन्हें आप नहीं छेड़ते तो भी आप उन से नहीं बच सकते. कुछ द्रव से भरे घाव ऐसे होते हैं, जिन की वजह से स्किन के भीतर दर्द महसूस होता है और वास्तव में ऐसे घाव स्किन की बाहरी सतह पर नहीं होते. जलन सा दर्द देने वाले ये मुंहासे ऐसे होते हैं, जिन में श्वेत रक्तकण की मात्रा अधिक जमा होती है और इस वजह से उस क्षेत्र में ज्यादा ऐंजाइम इकट्ठा हो जाते हैं और ये ज्यादा घातक होते हैं. ऐसी स्थिति में आप की स्किन स्वयं ही घाव भरने की कोशिश करती है और इस की वजह से दागधब्बे उभर आते हैं. मुंहासे अकेले स्किन पर बदरंग दाग के कारक नहीं होते. अन्य गहरे रंग के धब्बे और ज्यादा पिग्मैंटेशन वाली स्किन के प्रकार के लिए आप की ढलती उम्र, धूप से होने वाला नुकसान, यहां तक कि गर्भनिरोधक गोलियां तक जिम्मेदार हो सकती हैं. अगर धब्बे, ऐलर्जी या हाइपरपिग्मैंटेशन जैसी स्किन की गंभीर समस्या है तो स्किन रोग विशेषज्ञ के पास जाने से गुरेज न करें.

निशान और धब्बों में फर्क

मुंहासों के निशान और स्किन के धब्बों में बहुत फर्क होता है. इन के बीच फर्क समझने में जिस एक बिंदु पर लोग भ्रमित होते हैं, वे हैं वास्तविक मुंहासे के दाग और उस के फटने के बाद लाल धब्बा अथवा डिसकलरेशन. स्किन की उपरी सतह पर जो गुलाबी, लाल अथवा भूरे निशान होते हैं वे तो समय के अंतराल के साथ ठीक हो जाते हैं. वे असल में मुंहासे होते ही नहीं, पर वास्तविक मुंहासों के धब्बे स्किन के अंदरूनी नुकसान का परिणाम होते हैं, और अपने पीछे धब्बे छोड़ सकते हैं.

दरअसल, स्किन की अंदरूनी परत में नुकसान के ही परिणाम होते हैं ये धब्बे, जो स्किन को सहारा देने वाली संरचना में टूटफूट की वजह से होते हैं. ये कोलेजन और ऐलेस्टिन के टूटने के कारण बनते हैं. स्वाभाविक तौर पर स्किन पर आए निशान बिना चिकित्सीय इलाज के ठीक नहीं होते. उन्हें खत्म होने में ज्यादा समय लगता है और सिर्फ लेजर उपचार के जरीए ही उन्हें हटाया जा सकता है, क्योंकि ये स्किन के अंदरूनी हिस्सों में पहुंच कर नुकसान पहुंचाते हैं, जो प्राय: मुंहासों को छेड़ने की वजह से होता है. हालांकि हमेशा ही ऐसा नहीं होता.

रक्ताल्पता के परिणामस्वरूप बने ऐट्रौफिक निशान खरोंच या गहराई जैसे दिखते हैं. जिन्हें प्राय: आइस पिक के नाम से जाना जाता है. वहीं हाइपरट्रौफिक निशान ज्यादा मोटे दिखते हैं. ये स्किन की ऊपरी सतह पर उभार लिए फोड़े की तरह होते हैं. सांवले रंग की स्किन वाले लोगों में प्राय: पोस्टइनफ्लैमेटरी हाइपरपिग्मैंटेशन का मामला देखने को मिलता है. इस के निशान भूरे रंग के होते हैं. तुलनात्मक तौर पर गोरे रंग के लोगों में पोस्टइनफ्लैमेटरी ऐरीथेमा होता है, जो पर्पल और लाल रंग का होता है.

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सचेत रहना जरूरी

वास्तव में मुंहासे के दाग उस चरण में दिखते हैं, जब शरीर के भीतर घाव भरने की प्रक्रिया चल रही होती है और इस वजह से सामान्य तरीके से कोलेजन नहीं बन पाता. मुंहासे के घाव अपने आसपास मौजूद कोलेजन और ऐलेस्टीन जैसे सारे ऐंजाइम को खत्म कर देते हैं. इस दौरान स्किन में बहुत ज्यादा जलन महसूस होती है. कोलेजन और ऐलेस्टीन के ऊतक और अधिक कोलेजन और ऐलेस्टीन उत्पन्न करने में नाकाम रहते हैं या फिर यों कहें कि वे विकृत और लचर ढंग से ऐसा कर पाते हैं और चेहरे पर दागधब्बे छोड़ जाते हैं.

स्वस्थ और सुंदर स्किन पाना बहुत मुश्किल काम नहीं है. बस, आप को स्किन की देखभाल के मामले में लगातार गंभीर रहने की जरूरत है. पिग्मैंटेशन, काला धब्बा, झांइयां और असमान स्किन टोन आदि कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिन का हम सामना करते हैं. यहां तक कि एक दाग के साथ भी बाहर निकलना बहुत परेशान करने वाली स्थिति होती है. इसलिए सब से पहले आप अपनी स्किन के प्रकार के बारे में जानें और फिर उस के अनुसार ही उत्पाद का इस्तेमाल करें. सामान्य, तैलीय, मिश्रित, शुष्क व संवेदनशील आदि स्किन के प्रकार हैं. कुछ लोगों के मामले में उन की स्किन विभिन्न जगहों पर भिन्नभिन्न प्रकार की होती है. बदलते वक्त के साथ स्किन के प्रकार में भी परिवर्तन हो सकता है. स्किन के प्रकार का बदलना विभिन्न तथ्यों पर निर्भर करता है मसलन:

पानी के अवयव, जो स्किन को आराम पहुंचाते हैं. इन से इस की लोच प्रभावित होती है.

तेल (लिपिड) सामग्री, जो स्किन की कोमलता को प्रभावित करती है.

संवेदनशीलता का स्तर.

सामान्य स्किन

सामान्य स्किन न तो ज्यादा शुष्क और न ही ज्यादा तैलीय होती है. इस में न के बराबर खामियां होती हैं. इस में ज्यादा संवेदनशीलता नहीं होती और मुश्किल से दिखने लायक रोमछिद्र होते हैं. इस का रंग चमकदार होता है.

मिश्रित स्किन

मिश्रित प्रकार की स्किन का कुछ हिस्सा शुष्क या सामान्य हो सकता है, तो दूसरे हिस्से जैसे टीजोन (नाक, माथा और ठुड्डी) तैलीय हो सकते हैं. कई लोगों की स्किन मिश्रित प्रकार की होती है, जो अपने भिन्नभिन्न हिस्सों की स्किन के अलगअलग प्रकार के लिए अलगअलग तरह की देखभाल का लुत्फ ले सकते हैं. मिश्रित स्किन के मामले में निम्न बातें दिख सकती हैं:

ज्यादा फैले हुए रोमछिद्र.

कीलमुंहासे.

चमकदार स्किन.

शुष्क स्किन

शुष्क स्किन के मामले में निम्न बातें दिख सकती हैं:

लगभग न दिखने वाले रोमछिद्र.

बिना चमक का रूखा रंग.

लाल धब्बे.

कम लोचदार.

ज्यादा दिखने वाली धारियां.

शुष्क स्किन के निम्न कारण हो सकते हैं या इन की वजह से स्थिति और बदतर हो सकती है:

आनुवंशिक कारक.

ढलती उम्र या हारमोन में बदलाव.

तेज हवा, धूप या ठंड जैसे मौसम.

पराबैगनी विकिरण.

बंद कमरे को गरम करना.

लंबे समय तक गरम पानी से नहाना.

साबुन, सौंदर्य प्रसाधन या क्लींजर्स की सामग्री.

दवा का प्रयोग.

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स्किन की देखभाल

ज्यादा देर तक न नहाएं.

हलके व कोमल साबुन अथवा क्लींजर्स का इस्तेमाल करें.

नहाने के बाद मौइचराइजर जरूर लगाएं. शुष्क स्किन के मामले में लोशन की तुलना में मरहम और क्रीम ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं, परंतु लोग प्राय: इन से दूर रहते हैं. दिन भर में जरूरत पड़ने पर इन्हें दोहराएं.

बंद कमरे का तापमान ज्यादा न बढ़ने दें.

तैलीय स्किन

तैलीय स्किन के मामले में निम्न बातें दिख सकती हैं:

बढ़े हुए रोमछिद्र.

चमकदार या बिना चमक वाली स्किन.

कीलमुंहासे और अन्य दागधब्बे.

मौसम के परिवर्तन पर तैलीय स्किन में परिवर्तन आ सकता है. निम्न तथ्य तैलीय स्किन के कारक हो सकते हैं या स्किन को और अधिक तैलीय बना सकते हैं:

प्रौढता या हारमोन में असंतुलन.

तनाव.

गरमी या बहुत ज्यादा आर्द्रता का होना.

स्किन की देखभाल

दिन भर में 2 बार से ज्यादा चेहरे को न धोएं.

हलके क्लींजर का इस्तेमाल करें और स्किन को न रगड़ें.

मुंहासों को न छेड़ें. इस से उन्हें ठीक होने में ज्यादा समय लगता है.

संवेदनशील स्किन

अगर आप की स्किन संवेदनशील है, तो यह पता लगाने की कोशिश करें कि संवेदनशीलता किनकिन चीजों को ले कर है. फिर उन से परहेज करें. संवेदनशील स्किन के कई कारक हो सकते हैं परंतु कई मामलों में स्किन की देखभाल से संबंधित उत्पाद भी इस के कारण हो सकते हैं.

स्किन में अगर लाली, खुजलाहट, जलन व रूखापन हो तो ये लक्षण संवेदनशील स्किन के हो सकते हैं.

डा. पंकज चतुर्वेदी स्किन रोग विशेषज्ञ, मेडलिंक्स

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सौफ्ट & शाइनी स्किन के लिए अपनाएं ये 10 टिप्स

अंजली का चेहरा हमेशा बुझाबुझा सा नजर आता था. अरे यार, वह अपने चेहरे पर ध्यान देगी तभी तो उस की त्वचा साफ, कोमल और दमकी नजर आएगी. क्या आप को भी लगता है कि आप अपने चेहरे को साफ रखती हैं, तब भी उस में चमक नहीं आ पाती है? कई बार ऐसा होता है कि त्वचा पर से डेड सेल्स ठीक से न निकलने पर त्वचा बेजान और धुंधली दिखाई देने लगती है.

इस के अलावा त्वचा की नमी और तैलीयता बनाए रखने की शक्ति भी कम होती जाती है. डेड सेल्स ठीक से न निकलने पर नए सेल्स को निकलने के लिए जगह नहीं मिलती, जिस के कारण त्वचा पर कई तरह की समस्याएं जैसे मुंहासे, ब्लैकहेड्स और दागधब्बे दिखाई देने लगते हैं. त्वचा को पानी या साबुन से धोने से उस पर जमी धूलमिट्टी और चिकनाई तो दूर हो जाती है लेकिन डेड सेल्स अच्छी तरह से नहीं निकल पाते हैं. इसलिए त्वचा पर से डेड सेल्स को अच्छी तरह से निकालने के लिए कुछ खास उपायों की आवश्यकता होती है.

1. एस्ंट्रिजेंट

बाजार में कई प्रकार के एस्ट्रिंजेंट उपलब्ध हैं. अल्कोहल बेस्ड एस्ट्रिंजेंट त्वचा पर से डेड सेल्स को हटाता है.

2. प्यूमिक स्टोन

त्वचा पर हलके हाथों से प्यूमिक स्टोन को रगड़ने से डेड सेल्स निकल जाते हैं. प्यूमिस स्टोन जब इस्तेमाल करें तब इसे त्वचा पर जोरजोर से न रगड़ें. इस से त्वचा के डेड सेल्स तो हट जाते हैं, लेकिन नए सेल एमीलोइड नामक एक प्रकार के प्रोटीन का निर्माण करते हैं और यही प्रोटीन त्वचा पर काले दागधब्बे के रूप में उभर आता है.

3. बौडी ब्रशिंग

पूरे शरीर पर साबुन लगाने के बाद लूफा या ब्रश से हलके हाथों से त्वचा को रगड़ना चाहिए. बौडी ब्रशिंग से त्वचा पर जमे डेड सेल्स अच्छी तरह से निकल जाते हैं.

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4. स्क्रब

स्क्रब द्वारा त्वचा के डेड सेल्स को आसानी से निकाला जा सकता है. स्क्रब करने से पहले त्वचा को माइल्ड सोप से अच्छी तरह धो लें. होममेड स्क्रब त्वचा के लिए काफी अच्छे रहते हैं. इन्हें आप आसानी से घर पर ही बना कर इस्तेमाल कर सकती हैं. सप्ताह में एक बार त्वचा पर होममेड स्क्रब करना चाहिए. इस से त्वचा दमकती रहती है.

5. फेस पैक और फेस मास्क

फेस पैक और फेस मास्क चेहरे और गरदन के डेड सेल्स को हटाने के अच्छे उपाय हैं. फेस पैक को चेहरे पर लगाया जाता है. सूख जाने पर हलके हाथ से रगड़ कर निकाल दिया जाता है. इस के बाद ठंडे पानी से त्वचा को साफ कर लिया जाता है. फेस मास्क को त्वचा की प्रकृति के हिसाब से इस्तेमाल कर सकती हैं.

6. फेशल

फेशल एक प्रकार की मसाज है. यह भी त्वचा पर से डेड सेल्स निकालने का अच्छा उपाय है. फेशल से त्वचा में निखार आता है. चेहरे की त्वचा में रक्तसंचार ठीक से होने लगता है. त्वचा की झुर्रियां नष्ट हो जाती हैं. आंखों के डार्क सर्कल्स खत्म हो जाते हैं.

7. प्रिजरवेटिव फेशल

स्वस्थ त्वचा पर प्रिजरवेटिव फेशल किया जाता है.

8. हर्बल फेशल

हर्बल फेशल में कुकुंबर, रोज, लैमन, संदल आदि मिला होता है. घरेलू हर्बल फेशल आप खुद भी घर पर कर सकती हैं.

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9. यों करें फेशल

हलके हाथों से त्वचा पर मालिश करें. हाथों की दिशा को अप एंड आउट चलाएं, जिस से त्वचा को टोन मिलेगा. आउट यानी बाहर की ओर स्ट्रोक करें. इस से त्वचा के जहरीले पदार्थ हट जाएंगे. त्वचा पर मुंहासे हैं, तो फेशल से पहले स्टीम अवश्य लें. त्वचा पर संक्रमण, एक्ने तथा त्वचा अधिक संवेदनशील होने पर फेशल न करें.

10. पैडीक्योर और मैनीक्योर

हाथपैरों के डेड सेल्स को निकालने के लिए पैडीक्योर और मैनीक्योर सब से आसान और अच्छे उपाय हैं. सप्ताह में एक बार पैडीक्योर और मैनीक्योर अवश्य करना चाहिए. 

वैक्सिंग कराने के बाद खुजली और दानों की प्रौब्लम हो जाती है, मैं क्या करुं?

सवाल-

मेरी उम्र 21 साल है. मेरी बाजुओं पर बहुत सारे बाल हैं जिन्हें रिमूव करने के लिए मैं वैक्सिंग कराती हूं. पर हर बार वैक्सिंग कराने पर मुझे इचिंग होने लगती है और कभीकभी दाने भी हो जाते हैं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

वैक्सिंग से इचिंग होती है तो इस का कारण वैक्सिंग से ऐलर्जी होना होता है. अगर आप को वैक्सिंग से ऐलर्जी है तो वैक्सिंग से पहले आप कोई ऐंटीऐलर्जिक गोली खा सकती हैं ताकि ऐलर्जी न हो. अगर वैक्सिंग के बाद दाने निकल आते हैं तो चांसेज हैं कि वैक्सिंग करने वाला सही नहीं है या वह सफाई से काम नहीं कर रहा. वैक्सिंग के लिए हाइजीन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

वैक्सिंग करने के लिए डिस्पोजेबल पट्टी का इस्तेमाल करवाएं. वैक्सिंग करने से पहले फ्री वैक्स जैल और करने के बाद पोस्ट वैक्स जैल दोनों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. इन बातों का ध्यान रखा जाए तो दाने होने के चांसेज बहुत कम हो जाते हैं. आप चाहें तो इन बालों से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती हैं. इस के लिए पल्स लाइट ट्रीटमैंट या लेजर ट्रीटमैंट ले सकती हैं. यह बहुत सेफ और पेनलैस है और इस से हमेशा के लिए बालों से छुटकारा पाया जा सकता है.

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टीनऐजर्स की स्किन सौफ्ट होती है, छोटी उम्र में वैक्सिंग बिलकुल नहीं, हाथपैर खराब हो जाएंगे, सैंसिटिव स्किन पर रैशेज पड़ने का डर रहेगा, वैक्स करवाने से स्किन लटक जाएगी आदि बातें की जाती हैं.

सचाई यह है कि प्यूबर्टी के कारण शारीरिक व मानसिक रूप से काफी परिवर्तन होते हैं. खासकर, बालों की ग्रोथ तेजी से बढ़ती है. इस का कारण हार्मोनल चैंजेस होते हैं. ऐसे में टीनऐजर्स अपने शरीर में हुए इन बदलावों को स्वीकार नहीं कर पाते हैं और खुद की तुलना दूसरी लड़कियों से कर के कौंपलैक्स के शिकार होने लगते हैं. वैक्सिंग व उन की स्किन की सही जानकारी ले कर उन की इस समस्या का समाधान करें.

कैसी है स्किन

आप की स्किन की सौफ्टनैस व लचीलापन सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कैसा प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हैं, बल्कि इस के लिए एक्स्टर्नल व इंटरनल दोनों कारण जिम्मेदार होते हैं.

जैसे, स्किन की इलास्टिसिटी कितना वाटर रिटेन करने में सक्षम है इस बात पर डिपैंड करती है तो वहीं सीबम के उत्पादन पर स्किन की सौफ्टनैस निर्भर करती है. स्किन की सैंसिटिविटी के लिए हमारा खानपान व हार्मोंस जिम्मेदार होते हैं, इसलिए स्किन टाइप को ध्यान में रख कर ही हमेशा वैक्सिंग करवानी चाहिए ताकि किसी तरह के रिऐक्शन का डर न हो. लेकिन ऐसा तभी हो पाएगा जब आप को इस की जानकारी होगी.

स्किन टाइप के हिसाब से वैक्सिंग

नौर्मल स्किन : नौर्मल स्किन वालों में वाटर व लिपिड कंटैंट काफी अच्छा होता है, जिस के कारण उन की स्किन ड्राई नहीं होती. यह अतिरिक्त सीबम का उत्पादन भी करता है. इस से स्किन पर किसी भी तरह का रिऐक्शन नहीं होता. ऐसी स्किन वाले टीनऐजर्स के लिए सौफ्ट व हार्ड वैक्स बैस्ट विकल्प है, जो उन की स्किन को नरिश करने का काम करता है.

Winter Special: सर्दियों में स्किन को कैसे संभालें 

सर्दियों के मौसम में स्किन को अतिरिक्त केयर की जरूरत होती है. क्योंकि मौसम व तापमान में आए बदलाव के कारण हमारी स्किन बहुत अधिक ड्राई हो जाती है और ड्राई स्किन कई अन्य चुनौतियों जैसे फटे होंठ, स्किन की ऊपरी लेयर निकलना , स्किन का रूखापन जैसी समस्याओं को न्यौता दे सकती है. इसलिए ऐसे समय में स्किन को पोषण देने की खास आवश्यकता होती है, ताकि वह स्किन में मोइस्चर को लौक करके उसकी नमी को बनाए रख सके. डर्मटोलोजिस्ट वैशाली श्रद्धा के अनुसार तापमान में गिरावट के साथ हमारी स्किन अधिक शुकस हो जाती है और अगर इसे सही से , सही इंग्रीडिएंट्स से बने मॉइस्चराइजर से मॉइस्चराइज नहीं किया जाता तो यह परतदार स्किन का कारण बन सकती है. इसलिए सर्दियों में एक अच्छे स्किनकेयर रूटीन का पालन करते हुए नेचुरल इंग्रीडिएंट्स से युक्त उत्पादों का उपयोग करना फायदेमंद साबित होता है. तो जानते हैं सर्दियों में कैसे करें केयर.

1. मॉइस्चराइजर है जरूरी 

वैसे तो सभी जानते हैं कि स्किन को नमी प्रदान करने के लिए बारह महीने स्किन को मॉइस्चराइजर की जरूरत होती है, लेकिन इसकी खास तौर पर जरूरत तब महसूस होती है , जब तापमान में गिरावट देखने को मिलती है.  मॉइस्चराइजर से स्किन हाइड्रेट रहती है. वरना नमी के अभाव व रूखेपन की वजह से स्किन में इंफेक्शंस व ऑउटब्रेक्स की समस्या भी खड़ी हो जाती है. इसलिए स्किन को करें  मॉइस्चराइज .

 इंग्रीडिएंट्स इन गुड मॉइस्चराइजर

– हुमेक्टेंट्स , आपकी स्किन की टोप लेयर में जिसे एपिडर्मिस कहते हैं , हवा से और आपकी स्किन की गहरी परतों से पानी खींचते हैं. जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है.  हुमेक्टेंट्स में शामिल हैं , ग्लिसरीन, ह्यलुरोनिक एसिड और प्रोपाइलिन ग्लाइकोल.

– एमोलिएंट्स जैसे शिया बटर, कोको बटर एपिडर्मिस में होने वाले क्रैक्स को हील करके स्किन में मोइस्चर को लौक करने में मदद करता है.

बेस्ट टाइम 

– नहाने के तुरंत बाद व रात को सोने से पहले मॉइस्चराइजर अप्लाई करने से स्किन को ज्यादा फायदा मिलता है.

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2. लिप बाम है जरूरी 

सर्दियों में लिप्स का ड्राई होना आम है. क्योंकि लिप्स में आयल ग्लैंड्स नहीं होते हैं , जिसके कारण  ठंड , हवा का सीधा व पहला असर लिप्स पर ही पड़ता है, जबकि लिप बाम आपके लिप्स और सर्द हवाओं के बीच एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाने का काम करता है.  इसलिए ही लिप्स की खास केयर के लिए लिप बाम की खास जरूरत होती है.

इंग्रीडिएंट्स इन गुड लिप बाम 

– शिया और कोको बटर नेचुरल टाइप के फैट्स होने के कारण ये आपके लिप्स में मोइस्चर को होल्ड करने के साथ उन्हें फटने से बचाने का काम करते हैं.

– हनी को हुमेक्टैंट के रूप में जाना जाता है. जो मोइस्चर को अपनी ओर खींचने का काम करता है. साथ ही इस इंग्रीडिएंट से युक्त लिप बाम अपनी एक्सफोलिएशन प्रोपर्टीज के कारण लिप्स को एक्सफोलिएट करने के साथ उसे हाइड्रेट रखने का  काम करती है.

– कैस्टर आयल स्किन में आसानी से घुसकर उसे हाइड्रेट रखने का काम करता है. तभी तो लिप्स की ड्राईनेस को दूर करने के लिए  कैस्टर आयल युक्त लिप बाम लगाने की सलाह दी जाती है.  क्योंकि इसमें है जरूरी फैटी एसिड्स , जो एन्टिओक्सीडैंट्स में रिच होते हैं.

3. प्रोटेक्शन के लिए सनस्क्रीन 

सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों में भी स्किन को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन की जरूरत होती है. क्योंकि सर्दियों में यूवीए किरणों के प्रभाव से स्किन पर डार्क स्पोट्स , टैनिंग व यहां तक कि झुर्रियां तक पड़ जाती है. इसलिए भूलकर भी सर्दियों में सनस्क्रीन से स्किन को प्रोटेक्ट करना न भूलें.

बेस्ट इन सनस्क्रीन 

मामा एअर्थ इंडियन सनस्क्रीन विद कैरेट सीड, टर्मेरिक एंड एसपीएफ

बता दें कि कैरेट सीड आयल स्किन में अंदर तक जाकर न सिर्फ सनप्रोटेक्शन देने का काम करता है बल्कि स्किन को मॉइस्चराइज भी करता है. वहीं हलदी में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होने के कारण ये स्किन को हील करने के साथसाथ सभी तरह की स्किन के लिए परफेक्ट है. वहीं ऑरेंज आयल नोन ग्रीसी होने के साथ इसमें हैं एंटीइंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज , जो यूवीए और यूवीबी किरणों से प्रोटेक्ट करने का काम करता है.

न्यूट्रोजेना हाइड्रो बूस्ट सनस्क्रीन 

इसका हाइड्रो बूस्ट फार्मूला , जिसमें है ह्यलुरोनिक एसिड और ग्लिसरीन. जो स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ उसकी यूवी किरणों से प्रोटेक्शन करने का भी काम करता है.

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4. बोडी लोशन 

सिर्फ फेस को ही नहीं बल्कि सर्दियों में पूरे शरीर को मोइस्चर प्रदान करने की जरूरत होती है. ऐसे में अकसर लोग फेस क्रीम व बोडी लोशन को एक ही समझ कर अप्लाई करने लगते हैं. लेकिन आपको बता दें कि बोडी लोशन क्रीम के मुकाबले में कम गाढ़ा होता है. इसमें प्यूरीफाई पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण ये काफी पतले होते हैं. ये शरीर पर आसानी से फैलने के साथसाथ उसके रूखेपन को दूर करने का काम करते हैं. हमेशा ऐसे बोडी लोशन का इस्तेमाल करना चाहिए , जो डेड स्किन को रिमूव करने के साथ पोर्स को ब्लोक न करे.

इंग्रीडिएंट्स इन गुड बोडी लोशन 

– जरूरी फैटी एसिड्स , जो स्किन को हैल्दी व ग्लोइंग बनाने का काम करते हैं. बता दें कि शरीर खुद से फैटी एसिड्स नहीं बनाता है बल्कि इसे डाइट व स्किन क्रीम्स के जरिए प्राप्त किया जाता है. ऐसे में जरूरी फैटी एसिड्स के लिए आपके बोडी लोशन में शिया बटर, ओलिव आयल , एवोकाडो , आलमंड आयल जैसे इंग्रीडिएंट्स का होना बेहद जरूरी है, ताकि वे स्किन में मोइस्चर को लौक कर सके.

– ग्लिसरीन, ग्ल्य्कोल्स और पोलियोल्स ये तीनों हुमेक्टेंट्स फैमिली के सदस्य होते हैं. ये तीनों स्किन में एक्स्ट्रा मोइस्चर को लौक करते हैं.

– ह्यलुरोनिक एसिड की त्वरित और प्रभावी हाइड्रेटेड क्रिया कोलेजन और इलास्टिन को नम और कार्यशील रखती है. जिससे स्किन सोफ्ट, स्मूद व यंग बनती है. इस तरह से आप सर्दियों में अपनी स्किन का खास खयाल रख सकते हैं.

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