Anti-Aging Tips : उम्र बढ़ने के साथ स्किन में नैचुरल बदलाव आते हैं. कोलेजन और इलास्टिन का प्रोडक्शन धीरेधीरे कम होता है, स्किन की मौइस्चर होल्ड करने की क्षमता घट सकती है और स्किन पहले की तरह टाइट और स्मूद नहीं रहती. इस के साथ धूप, प्रदूषण, गरम पानी और हार्श साबुन जैसी चीजें भी ड्राईनैस और समय से पहले एजिंग को बढ़ा सकती हैं. यही कारण है कि उम्रदराज महिलाओं की बाजुओं या हाथों की स्किन कई बार पतली, ढीली और रिंकल्ड दिखाई देती है. यह केवल उम्र का असर नहीं बल्कि लंबे समय तक धूप और स्किन केयर पर ध्यान न देने का भी परिणाम हो सकता है.
बौडी सीरम इसी जरूरत को ध्यान में रख कर बनाया गया है. यह आम बौडी लोशन की तुलना में हलका और कई बार ज्यादा कंसंट्रेट फौर्मूलेशन होता है, जिस में अलगअलग स्किन कंसर्न के हिसाब से ऐक्टिव इनग्रीडिऐंट्स शामिल किए जाते हैं. इस का काम केवल स्किन को चिकना बनाना नहीं बल्कि हाइड्रेशन, टैक्स्चर और ओवरआल स्किन हैल्थ को सपोर्ट करना भी हो सकता है.
अच्छी लुक के लिए
अगर आप की बौडी स्किन ड्राई रहती है तो ह्यालूरोनिक ऐसिड, ग्लिसरीन और सेरामाइड्स जैसे इनग्रीडिऐंट्स वाले सीरम अच्छे विकल्प हो सकते हैं. ह्यालूरोनिक ऐसिड स्किन में मौइस्चर को होल्ड करने में मदद करता है, जबकि सेरामाइड्स स्किन बैरियर को सपोर्ट करते हैं. आसान भाषा में कहें तो ये इनग्रीडिऐंट्स स्किन को मौइस्चर देने और उसे ज्यादा देर तक बनाए रखने में मदद करते हैं.
अगर स्किन डल दिखाई देती है या शरीर के खुले हिस्सों जैसे हाथ, गरदन या बाजुओं पर अनइवन स्किन टोन और पिगमैंटेशन दिखाई देता है तो नियासिनामाइड और विटामिन सी जैसे इनग्रीडिऐंट्स वाले बौडी प्रोडक्ट्स मददगार हो सकते हैं.
नियासिनामाइड स्किन बैरियर को सपोर्ट करने के साथसाथ स्किन के टैक्स्चर और टोन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. लेकिन यहां यह सम?ाना जरूरी है कि कोई भी सीरम स्किन का नैचुरल कलर बदलने के लिए नहीं होता. इस का उद्देश्य स्किन को हैल्दी, ईवन और ब्राइटर लुक देना है.
अगर बाजुओं, पैरों या शरीर के दूसरे हिस्सों की स्किन रफ है और अनइवन टैक्स्चर दिखाई देता है तो लैक्टिक ऐसिड या ग्लाइकोलिक ऐसिड जैसे ऐक्सफौलिएटिंग इनग्रीडिऐंट्स वाले बौडी प्रोडक्ट्स कुछ महिलाओं के लिए उपयोगी हो सकते हैं.
ये डैड स्किन सैल्स को हटाने और स्किन टैक्स्चर को स्मूद करने में मदद करते हैं. लेकिन इन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादा ऐक्सफौलिएशन से स्किन इरिटेटेड और ड्राई हो सकती है.
सीरम लगाने का समय
बौडी सीरम लगाने का अच्छा समय बाथिंग के बाद होता है. जब स्किन पूरी तरह सूखने के बजाय हलकी डैंप हो तब सीरम लगाना अच्छा रहता है. इस के बाद जरूरत हो तो मौइस्चराइजर या बौडी क्रीम भी लगाई जा सकती है. बहुत ड्राई स्किन में सीरम के ऊपर मौइस्चराइजर लगाने से स्किन में मौइस्चर को बनाए रखने में मदद मिलती है.
कुछ आसान घरेलू तरीकों से भी बौडी स्किन की बेसिक केयर की जा सकती है. बहुत ड्राई स्किन पर नहाने से पहले थोड़ी मात्रा में नारियल तेल, तिल का तेल या बादाम का तेल हलके हाथों से लगाया जा सकता है. इस से स्किन को सौफ्ट रखने और ड्राइनैस कम करने में मदद मिल सकती है. लेकिन हर स्किन एकजैसी नहीं होती, इसलिए अपनी स्किन के हिसाब से ही कोई घरेलू उपाय चुनना चाहिए.
बौडी केयर में नहाने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है. बहुत ज्यादा गरम पानी से न नहाएं क्योंकि इस से स्किन के नैचुरल औयल कम हो सकते हैं और ड्राईनैस बढ़ सकती है. नहाने के लिए बहुत गरम पानी की जगह सामान्य या कुनकुना पानी बेहतर रहता है. साथ ही बहुत हार्श साबुन का लगातार इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए.
पर्सनैलिटी का हिस्सा
आज हम फेस को यंग दिखाने के लिए बहुत कुछ करते हैं लेकिन बौडी भी हमारी उम्र की कहानी कहती है. चेहरा, गरदन, हाथ, बाजू और पैर सब हमारी पर्सनैलिटी का हिस्सा हैं.
मेरे हिसाब से बौडी केयर सीरम का सब से अच्छा पहलू यह है कि इस ने हमें यह याद दिलाया है कि ब्यूटी केवल फेस तक सीमित नहीं है. हमारी बौडी की स्किन भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है. थोड़ी सी रैग्युलर केयर, सही इनग्रीडिऐंट्स, सन प्रोटैक्शन और अच्छा लाइफस्टाइल मिल कर स्किन को लंबे समय तक सौफ्ट, स्मूद और हैल्दी रखने में मदद कर सकते हैं.
