Lalita Goyanka : ललिता गोयनका एक पुरस्कार विजेता गीतकार, कवयित्री, साहित्यकार और लेखिका हैं. वे अपने गीतों, गजलों, कव्वालियों, भावपूर्ण कविताओं को सहेजने के प्रयासों के लिए जानी जाती हैं. उन के लेखन में मानवीय संवेदनाओं और भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक खूबसूरत संगम देखने को मिलता है.

उन्हें साहित्य विरासत में मिली है क्योंकि वे मशहूर कवि और लेखक श्याम सुंदर गोयनका की पुत्रवधू हैं और उन से काफी प्रेरित रही हैं. उन्होंने मशहूर सितार वादक उस्ताद सुजात खान और मीर मुख्तियार अली जैसे नामचीन संगीतकारों के लिए गीत लिखे हैं. उस्ताद सुजात खान के साथ निर्मित उन का साल 2025 का अल्बम ‘हैरत’ गजल के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि रही है.

स्वभाव से शांत, हंसमुख और विनम्र ललिता इन दिनों सोनू निगम की बहन मीनल निगम के साथ ‘नाद यात्रा ए जर्नी विदिन’ शो शुरू किया है, जिसे आज की युवा पीढ़ी से शुरू हो कर हरकोई पसंद कर रहा है। इस में कविता को संगीत के जरीए अनूठे रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

मिली प्रेरणा

ललिता को बचपन से ही कविता लिखने की रुचि थी, जिस के जरीए वे समाज की हर बात को आसानी से कह सकती हैं, लेकिन उन की यह जर्नी देर से शुरू हुई.

वे कहती हैं कि मुझे लिखने की रुचि बचपन से ही थी। स्कूल कालेज के टाइम से ही मैं लिख रही थी और मेरे आर्टिकल्स कई जगह छप भी चुके थे, लेकिन इसे लोगों तक पहुंचाने में देर लगी क्योंकि मुझे वह मौका नहीं मिल रहा था, जिसे मैं चाहती थी, लेकिन मैं धीरज बनाए रखी और अंत में मैं यहां तक पहुंच पाई हूं.

मैं जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, साहिर लुधियानवी आदि की कविताओं से काफी प्रेरित हूं क्योंकि उन की कविताएं सहज भाषा में लिखी हुई छायावादी शैली, प्रकृति के सुंदर चित्रण, दार्शनिक गहराई और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर हुआ करती थीं.

निजी लेखन से पब्लिक तक

वे कहती हैं कि पहले मेरा निजी लेखन था, लेकिन समय के साथ मुझे लगा कि दूसरों की भावनाएं भी मुझ से मेल खा रही हैं। इस से निजी लेखन अब पब्लिक बन गया. मैं ने इस में अपना एक संकल्प बना लिया था, जिस से मुझे कोई भी चुनौती स्वीकार करने में मुश्किलें नहीं हुईं. सुजात खान, मीर मुख्तियार अली जसविंदर सिंह, विद्या गोपाल, मीनल निगम आदि सभी ने मेरे गीतों को गाए हैं. अनूप जलोटा ने भी मेरे गीतों पर गाए हैं.

इन सभी से मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है क्योंकि इतने मशहूर लोग जब आप के शब्दों को आवाज देते हैं, तो उन शब्दों को एक नई पहचान मिलती है.

परिवार का सहयोग

ललिता का कहना है कि परिवार के सहयोग के बिना काम करना मुश्किल होता है। मेरे परिवार ने हमेशा मुझे बहुत सहयोग दिया है, जिस के परिणामस्वरूप मैं यहां तक पहुंच पाई हूं. मेरे बच्चे भी मेरे काम की सराहना करते हैं. यह सही है कि जिस काम को मैं बच्चों से करवाना चाहती हूं, उस के लिए मुझे खुद उसे करना पड़ेगा, तभी वे उस का अनुसरण करेंगे.

रही चुनौतियां

आजकल फिल्मों में गानों की संख्या कम हो चुकी है। गीतकारों को वह मौका नहीं मिलता, जो पहले मिला करता था। ऐसे में आप को किनकिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? इस सवाल पर वे कहती हैं कि फिल्मों में गानों के कम होने से कोई अधिक असर मुझ पर नहीं पड़ा क्योंकि मैं रोजमर्रा की जिंदगी से प्रेरित हो कर कविताएं लिखती हूं, जिस के गीत और कव्वाली गाए जाते हैं. अल्बम बनता है, जिसे लोग पसंद करते हैं क्योंकि कई सालों बाद आज फिर से अल्बम का दौर आया है, जिस में मैं हर प्रकार के गीत लिखती हूं.

मैं ने हर चुनौती को सहजता से लिया है. पहले जिन गीतों को 2 लोगों ने पसंद किया, बाद में उसे ही 2 हजार लोगों ने पसंद किया, इस तरह मैं आगे बढ़ती गई.

यूथ में अटैंशन स्पैन की कमी

सोशल मीडिया का यूथ पर गलत प्रभाव पड़ने को ले कर ललिता कहती हैं कि आज की जैनरेशन बुद्धिमान है, लेकिन सोशल मीडिया की वजह से उन में अटैंशन स्पैन की कमी आ गई है, जिस से वे किसी भी क्षेत्र में पूरी लगन से काम नहीं कर पाते. वे किताबों से दूर होते जा रहे हैं और सोशल मीडिया की छोटीछोटी रील्स देख कर खुशी का अनुभव करते हैं. उसे ही अपनी दुनिया समझ लेते हैं, जबकि दुनिया काफी बड़ी है और इसी भीड़भाड़ वाली दुनिया के पीछे हमारी गहरी खामोशी है और उस खामोशी को मैं शब्दों के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाना चाहती हूं.

यूथ के लिए संदेश

आज की युवा पीढ़ी से मैं कहना चाहती हूं कि हमारी संस्कृति में भाषा का बहुत बड़ा योगदान है. भाषा साहित्य, समाज और संस्कृति तीनों को जोड़ती है. भाषा के द्वारा ही यूथ इन सब से खुद को कनैक्ट कर पाते हैं, लेकिन कई बार वे कठिन शब्दों की वजह से थोड़े दूर हो कर सहज भाषा जो सोशल मीडिया पर होती है, उस से जुड़ जाते हैं, लेकिन मन की भाषा किसी भी रूप में कही जाए, लोग खुद को जोड़ ही लेते हैं.

आगे की योजनाएं

ललिता को खुशी इस बात से है कि कुलदीप सिंह जैसे प्रतिष्ठित संगीतकार ने उन्हें, उन के लिए कुछ लिखने के लिए कहा था.

वे कहती हैं कि मैं ने उन के लिए लिखा और गजलों की अल्बम बनी. यह मेरे लिए गर्व की बात है. आगे मैं फिल्मों के लिए भी लिखना चाहती हूं. मुझे हर क्षेत्र में लिखने के लिए औफर आज मिल रहे हैं.

पढ़ने की आदत है जरूरी

हिंदी साहित्य की दशा के बारे में मेरी सोच यह है कि पेड़ों की जड़ें मजबूत होने पर अगर किसी कारणवश उसे तूफान नष्ट भी कर दें, तो जड़ें रहने पर वह वापस फिर से उग आता है. वैसा ही साहित्य के साथ भी होगा। लोग इस के महत्त्व को अवश्य समझ सकेंगे. इस के लिए सभी साहित्यकार और लेखकों को धैर्य के साथ प्रयास करते रहना चाहिए. परिवार में बचपन से ही बच्चों में पढ़ने की आदत को डालने से होगा, तभी जा कर आगे उस का फल देखने को मिलेगा.

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