क्यों होता है होंठों के पास कालापन
सन ऐक्सप्रोजर है बड़ी वजह
जब हम सनस्क्रीन का प्रयोग कम करते हैं और धूप में निकल जाते हैं तो सूरज की रौशनी से मुंह के आसपास मेलानिन बढ़ने लगता है. अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणें होंठों के आसपास के हिस्से को सब से ज्यादा प्रभावित करती हैं. इस वजह से वह हिस्सा ज्यादा डार्क लगने लगता है.
हारमोनल असंतुलन
प्रैगनैंसी, गर्भनिरोधक गोलियों (Birth control pills) के सेवन, या PCOD/PCOS जैसी समस्याओं के कारण शरीर में हारमोनल उतारचढ़ाव होते हैं, जिस से चेहरे के आसपास कालापन आ सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो हारमोन बिगड़ने से स्किन पर पिगमैंटेशन बढ़ सकती है.
एलर्जी और एक्जिमा
बारबार खुजली, रैश या एलर्जी होने से स्किन में इंफ्लेमेशन आती है, जिस से कालापन रह सकता है.
विटामिन की कमी
शरीर में विटामिन B12, B9, B3 और विटामिन D की कमी से होने पर भी त्वचा का रंग असमान होने लगता है और होंठों के आसपास डार्कनैस बढ़ जाती है.
टूथपेस्ट से एलर्जी
कुछ टूथपेस्ट में बहुत ज्यादा फ्लोराइड, तेज फ्लैवर जैसे मिंट या हानिकारक कैमिकल्स होते हैं. ब्रश करते समय जब इन का झाग होंठों के आसपास लगता है, तो त्वचा में जलन (Contact Dermatitis) हो सकती है, जो बाद में कालेपन में बदल जाती है.
सस्ते या ऐक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स
लिपस्टिक, लिपबाम या फेशियल क्रीम में मौजूद सिंथेटिक खुशबू और कैमिकल्स से एलर्जी होने के कारण भी पिगमैंटेशन हो सकती है.
होंठों पर बारबार जीभ लगाने से
बारबार होंठों या उस के आसपास लार लगाने से त्वचा अधिक रूखी और काली हो जाती है.
त्वचा का सूखापन
होंठों के आसपास औयल ग्लैंड्स बनाने वाली ग्रंथियां बहुत कम होती हैं. सर्दियों में या पानी कम पीने की वजह से जब यह हिस्सा ज्यादा ड्राई हो जाता है, तो वहां की त्वचा फटने और खिंचने लगती है. इस लगातार रहने वाले रूखेपन और जलन के कारण वहां की त्वचा का रंग गहरा होने लगता है.
कालेपन को दूर करने के लिए लेजर थेरैपी
आसपास की त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना गहरे पिगमैंटेशन को टारगेट कर के लेजर थेरैपी से धब्बों का इलाज किया जा सकता है.
क्या करती है लेजर थेरैपी
लेजर मशीन से निकलने वाली लाइट बीम त्वचा की गहराई में जा कर उन सैल्स (Melanocytes) को टारगेट करती है, जो बहुत ज्यादा मेलेनिन (कालापन) बना रहे होते हैं. लेजर इस पिगमैंटेशन को छोटेछोटे कणों में तोड़ देता है, जिसे हमारी बौडी की नैचुरल हीलिंग प्रोसेस धीरेधीरे साफ कर देती है. इस के साथ ही यह कोलेजन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जिस से वहां की त्वचा नई और चमकदार हो जाती है.
लेजर के प्रकार :
क्यू स्विच्ड लेजर्स (Q-Switched Lasers) यह सब से आम और प्रभावी लेजर है, जो त्वचा की गहरी परतों में जा कर मेलेनिन (पिगमैंटेशन) को तोड़ता है.
पीकोसैकंड लेजर्स (Picosecond Lasers) यह तकनीक कम समय में बेहतर परिणाम देती है और आसपास की त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना कालेपन को साफ करती है.
फ्रैक्शनल सीओ2 लेजर्स (Fractional CO2 Lasers) : यह लेजर त्वचा की ऊपरी परत को हटा कर नई, स्वस्थ त्वचा के निर्माण को बढ़ावा देती है.
समय कितना लगता है
एक सैशन पूरा होने में आमतौर पर 15 से 30 मिनट का समय लगता है.
कितने सैशन लगते हैं
बेहतर परिणाम के लिए 3 से 6 सैशन की आवश्यकता पड़ सकती है, जो कालेपन की गहराई पर निर्भर करता है.
हर सैशन के बीच कितना गैप होता है
हर सैशन के बीच 3 से 4 सप्ताह का अंतराल दिया जाता है.
कितना खर्च आता है
प्रति सैशन का खर्च क्लिनिक, डाक्टर के अनुभव और मशीन की क्वालिटी के आधार पर ₹3,000 से ₹10,000 के बीच हो सकता है.
लेजर करने के बाद इन बातों का ख्याल रखें :
-लेजर करने के बाद वहां की स्किन रैड हो सकती है और थोड़े सैंसिटिव भी हो जाती है लेकिन इस में घबराने की कोई बात नहीं है. यह प्रौब्लम कुछ समय बाद ठीक भी हो जाती है.
-अगर आप घर से बहार जा रहे हैं तो डाक्टर का बताया हुआ संस्करण आप की स्किन के अनुसार ही यूज करें. लेजर के बाद डाक्टर से इस बारे में बात कर के एक अच्छा सनस्क्रीन लिखवा लें.
लेजर थेरैपी हमेशा किसी प्रमाणित डर्मेटोलौजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से ही कराएं, ताकि आप की त्वचा के अनुसार सही लेजर और सैटिंग का चयन किया जा सके.
लेजर के बाद 4-5 दिनों तक चेहरे पर कोई भी कड़क क्रीम (जैसे ग्लाइकोलिक एसिड, रेटिनौल या स्क्रब) न लगाएं. केवल डाक्टर द्वारा दिया गया मोइस्चराइजर और हीलिंग क्रीम ही लगाएं.
लेजर थेरैपी के फायदे
घरेलू उपाय और साधारण क्रीम त्वचा की सिर्फ ऊपरी परत पर काम करती है. लेकिन लेजर की लाइट बीम त्वचा की गहराई में जा कर उस जिद्दी मेलेनिन कालेपन को टारगेट करती है और उसे छोटेछोटे कणों में तोड़ देती है, जिस से कालापन जड़ से हलका होने लगता है.
यह केवल काले हिस्से पर काम करता है, आसपास की नौर्मल स्किन को कोई नुकसान नहीं होता.
ट्रीटमैंट से पहले त्वचा पर सुन्न करने वाली क्रीम (Numbing Cream) लगाई जाती है, जिस से सिर्फ हलकी सी चींटी काटने जैसा (Pricking) महसूस होता है.
लेजर थेरैपी त्वचा में इलास्टिन और नए कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देती है. इस से कालेपन के साथसाथ होंठों के आसपास की महीन रेखाएं यानी फाइन लाइंस भी कम हो जाती हैं और त्वचा जवां दिखती है.
