Ubtan for Glowing Skin : आजकल जब स्किनकेयर ट्रेंड्स ‘क्लीन ब्यूटी’ और नैचुरल चीजों पर केंद्रित हैं तो उबटन भी मौडर्न रूटीन में अपनी जगह बना रहा है. लेकिन इस की लोकप्रियता सिर्फ पुरानी यादों तक सीमित नहीं है. उबटन स्किन केयर के बारे में सोचने का एक बिलकुल अलग नजरिया पेश करता है- एक ऐसा नजरिया जो जोरदार ऐक्सफौलिएशन के बजाय संतुलन, कोमलता, नैचुरल चीजों और ध्यानपूर्वक देखभाल को प्राथमिकता देता है.
उबटन: भारत का पारंपरिक ब्यूटी रिचुअल
उबटन को बारीक पिसी हुई नैचुरल चीजों को मिला कर पेस्ट के रूप में तैयार किया जाता है. इलाके और परंपरा के आधार पर इस की रैसिपी में काफी अंतर हो सकता है.
कुछ सब से आम चीजों में शामिल हैं:
बेसन (चने का आटा): त्वचा को साफ करने और धीरेधीरे पौलिश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
हलदी: हर्बल स्किनकेयर उत्पादों में अकसर शामिल की जाने वाली चीज.
चंदन: अपनी ठंडक देने वाली, आराम पहुंचाने वाली और खुशबूदार खूबियों के लिए.
गुलाबजल: ताजगी देने वाले गुणों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
हर्बल पाउडर: उबटन में शामिल बोटैनिकल्स (पौधों से मिलने वाली चीजों) को व्यक्ति की स्किनकेयर जरूरतों के अनुसार बदला जा सकता है.
उबटन की खूबसूरती इस की सादगी में है. कुछ नैचुरल पाउडर को ताजे पेस्ट में बदलना, उसे धीरेधीरे चेहरे पर लगाना और इस रिचुअल को सुकून के पल में बदलना- इन सब में एक अद्भुत जुड़ाव महसूस होता है.
यह स्किनकेयर तो है ही लेकिन यह सुंदरता और खुद की देखभाल की पुरानी भारतीय परंपरा से जुड़ाव जैसा भी महसूस हो सकता है.
माडर्न फेस स्क्रब मुख्य रूप से ऐक्सफौलिएशन पर केंद्रित होते हैं. फिजिकल स्क्रब घर्षण के जरीए डैड स्किन सैल्स को हटाने के लिए कणों का इस्तेमाल करते हैं जबकि उबटन ऐक्सफौलिएशन के लिए कहीं ज्यादा कोमल और समग्र तरीका अपनाता है.
जबकि आज स्किनकेयर की दुकानों पर कैमिकल वाली चीजों से बने कैमिकल ऐक्सफौलिएंट भी मिलते हैं. उबटन पूरी तरह से नैचुरल चीजों का मिश्रण है.
नैचुरल चीजों की खूबसूरती
उबटन में फिर से बढ़ती दिलचस्पी नैचुरल ब्यूटी की ओर एक बड़े मूवमैंट को भी दर्शाती है. कंज्यूमर्स पौधों से मिलने वाली चीजों और आसान स्किनकेयर रूटीन में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और उबटन स्वाभाविक रूप से उस सोच में फिट बैठता है.
उन चीजों में एक खास आकर्षण होता है जो पीढि़यों से भारतीय घरों और परंपराओं का हिस्सा रही हैं.
बेसन पारंपरिक पेस्ट में मिट्टी जैसी अद्भुत खूबी लाता है. हलदी अपना खास सुनहरा रंग जोड़ती है. चंदन अपनी खास खुशबू देता है. गुलाबजल इस मिश्रण को एक ताजगी भरा एहसास देता है.
ये सभी चीजें मिल कर स्किनकेयर को एक सुखद अनुभव में बदल देती हैं.
क्यों ज्यादा ऐक्सफौलिएशन से मकसद पूरा नहीं होता
बहुत ज्यादा ऐक्सफौलिएशन से त्वचा रूखी, खिंचीखिंची या संवेदनशील हो सकती है. ऐसा पारंपरिक उबटन और मौडर्न स्क्रब, दोनों के साथ हो सकता है अगर उन्हें बहुत जोर से या बहुत बार इस्तेमाल किया जाए. इसलिए आयुर्वेदिक तरीके से बने रूटीन में ऐक्सफौलिएशन को हलका ही रखना चाहिए.
याद रखें
जोर से रगड़ने के बजाय हलके हाथों से मसाज करें.
रोज ऐक्सफौलिएट करने से बचें.
एक ही रूटीन में कई ऐक्सफौलिएटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें.
रूखापन, लालिमा, जलन या संवेदनशीलता के संकेतों पर ध्यान दें.
ऐक्सफौलिएशन सेशन के बीच अपनी त्वचा को आराम करने का समय दें.
क्लींजिंग और ऐक्सफौलिएशन के बाद मौइस्चराइज करें.
मकसद ज्यादा से ज्यादा चीजें हटाना नहीं है. मकसद ऐसी त्वचा बनाए रखना है जो आरामदायक, संतुलित और अच्छी तरह से देखभाल की गई महसूस हो.
इस की सदाबहार अपील इस की सादगी में है: मिट्टी से जुड़ी चीजें, पारंपरिक ज्ञान, हलके हाथों से इस्तेमाल और खुद की देखभाल का एक पल. कभीकभी सब से शानदार ब्यूटी रूटीन सब से सरल वाला ही होता है
