साल 2000 में ‘कभी तो नजर मिलाओं…’ और ‘थोड़ी सी तो लिफ्ट करा दे…’ वीडियो सोंग से पोपुलर होने वाले सिंगर अदनान सामी ने सिर्फ 5 वर्ष की उम्र में अपने पिता से पियानो बजाना सीखना शुरू किया था. अदनान को 35 वाद्य यंत्रों का ज्ञान है. उन्होंने संगीत की शिक्षा पंडित शिवकुमार शर्मा से ली है. उनके ‘थोड़ी सी तो लिफ्ट करा दे…’ गाने को गोविंदा पर फिल्माया गया था. जो काफी हिट रहा और ये गाना उनके कैरियर का टर्निंग प्वाइंट बना, जिसके बाद से अदनान के पास फिल्मों की लाइन लग गयी. अदनान का बौलीवुड कैरियर बहुत शानदार रहा, उन्होंने कई बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम किया, जिसमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, यश चोपड़ा, शाहरुख खान, सलमान खान आदि शामिल हैं.

अदनान के संगीत का कैरियर जितना शानदार था, उतना उनका निजी जीवन नहीं था. उन्होंने 4 शादियां की हैं, जिसमें से तीन शादियां विफल रहीं. उन्होंने पहली शादी जेबा बख्तियार से की थी, जिनसे उनका बेटा अजान सामी खान है.

अदनान को बचपन से संगीत अच्छा लगता था, जिसमें साथ दिया उनके माता-पिता ने. अदनान आज भी समय मिलने पर संगीत सुनना पसंद करते हैं. अभी वे स्टार प्लस के रियलिटी शो ‘द वौइस्’ में एक कोच हैं. उनसे मिलकर बात करना रोचक था, पेश है कुछ अंश.

इस शो में आने की खास वजह क्या है?

इस शो में मैं एक कोच हूं. यहां जो भी बच्चे आते हैं, उन्हें गुरु शिष्य परंपरा के अन्तर्गत प्रशिक्षण केवल गायिकी में ही नहीं दिया जाता, बल्कि उसके पूरे विकास की भी बात सोची जाती है, ताकि वह एक परफेक्ट सिंगर बन सके. इसके अलावा यहां हम ब्लाइंड औडिशन करते हैं, जिसमें मैं गाने वाले को सीधे तौर पर देख नहीं सकता, केवल उसकी आवाज के आधार पर चयन करता हूं, व्यक्ति का रंग रूप या शारीरिक बनावट इसमें हावी नहीं होता और चुनाव सही होता है. ये कांसेप्ट मुझे बहुत पसंद आया.

यहां से जीतकर कलाकार आगे बढने में असमर्थ होता है, इसकी वजह क्या समझते हैं?

हर इंसान की एक स्किल होती है, यहां अपने आपको साबित करने के लिए एक मंच आपको मिलता है, जिसे सारी दुनिया सुनती है. उसके बाद अगर आप में प्रतिभा है, तो उसके बाद आप मेहनत कर आगे बढ़ जाते हैं. कई लोगों ने इसे सिद्ध भी किया है. ये शो किसी के जिंदगी की गारंटी नहीं लेती, पर उन्हें एक अच्छा मंच देती है. हमारे समय में तो ये सुविधा भी नहीं थी. हम अपनी कैसेट लेकर लोगों के दरवाजे खटखटाते थे और उन्हें गाना सुनने के लिए सिफारिश करते थे. कई लोग कहते भी थे कि मेरे पास वक्त नहीं है या कभी सुन लेंगे और उनका इंतजार हमें करना पड़ता था. अभी तो मिडिल मैन हट गया है और एक विज्ञापन के जरिये सबको औडिशन का पता चलता है. अगर हुनर है, तो मंच तक आप पहुंच जाते हैं. आज के दौर में ये मिलना बड़ी बात है.

इसके अलावा अभी आप और क्या कर रहे हैं?

इस शो के अलावा मैं एक फिल्म का गाना एक एक्टर और म्यूजिशियन के दोनों रूप में कर  रहा हूं.

आप हर तरह के वाद्य बजाना जानते है,ये कैसे संभव हुआ और संगीत की प्रेरणा कहाँ से मिली?

बचपन से मुझे अलग-अलग वाद्ययंत्र बजाने का शौक था. मैंने पियानो से शुरू किया था और फिर कंपोजर बना. इसके अलावा जब समय मिलता था, तो कुछ और बजा लेता था. गाना तो बाद में गाया. ऐसा करते-करते यहां तक पहुंचा. इस दौरान मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मैंने जो सीखा, उसे मैं लोगों तक बांटू और इस शो में आ गया.

अभी फिल्मों में गानों का दौर कम हो चुका है, ऐसे में गायकों को गाने का कितना मौका मिल पाता है और इसके जिम्मेदार किसे मानते हैं?

इसमें किसी एक की जिम्मेदारी नहीं. वक्त बदलता रहता है. ट्रेंड्स आते और जाते रहते हैं. इसमें भी संगीत अपनी जगह अवश्य बना लेता है. अभी परिस्थितियां बदल गयी हैं. पहले रिकौर्ड थे, फिर कैसेट और सी डी का दौर आया और अब तो सब कुछ डिजिटल हो चुका है. उसमें फोर्मेट और एप्रोच अलग हो चुका है. अब अधिकतर फिल्में रियल हो चुके हैं. हर फिल्म में गाने नहीं होते. वे अभी रियलिटी के अधिक करीब हो चुके हैं. पहले एक खुशमिजाज हीरो किसी की ऐसी तैसी करते हुए अचानक गाना गाने लगता था. उस समय उसे ही दर्शक स्वीकार कर लेते थे, अब वे नहीं करते. समय के साथ सब बदलता है. अभी एल्बम से अधिक लोग सिंगल्स पर अधिक जोर दे रहे हैं और ये भी ठीक है. कभी फिल्मों में 16 गाने हुआ करते थे, फिर धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गयी.

आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का कितना सहयोग रहा है?

इसमें मैं अपने पिता अरशद सामी खान को सबसे अधिक तवज्जों देना चाहता हूं. उनका मेरे जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है. मैं संगीत के परिवार से संबंध नहीं रखता था. मेरे पिता एक डिप्लोमेट थे और 14 देशों के एम्बेसेडर थे. मैंने बिल्कुल एक अलग जिंदगी देखी है, जिसका एंटरटेनमेंट से कोई सम्बन्ध नहीं था, लेकिन मेरे पिता कला के बहुत प्रेमी थे. संगीत और शायरी उन्हें बहुत पसंद थी. जब उन्होंने मेरी प्रतिभा को देखा, तो उन्होंने कहीं रुकावट आने नहीं दिया, सिर्फ एक बात कही कि संगीत के क्षेत्र में मेरा कोई ज्ञान नहीं है, पर मैं तुम्हे सहयोग अवश्य दूंगा, लेकिन इसके लिए मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ेगी, क्योंकि इस क्षेत्र में कामयाब न होने पर मेरा भविष्य खराब हो सकता है. मैंने उनकी बात मानी. मैंने इंग्लैंड से बैरिस्टरी पास किया है. शिक्षा किसी न किसी रूप में आपको अवश्य काम आती है. मैं अपने सारे कौन्ट्रैक्ट खुद देखकर साइन करता हूं. आज भी मैं अपने सभी शिष्यों को अपनी पढ़ाई पूरी करने की सलाह देता हूं. शिक्षा बहुत जरुरी है.

कभी आपका वजन काफी हुआ करता था, लेकिन अब आप फिट हैं, आपकी फिटनेस का राज क्या है?

मैं एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका था, जहां मेरा वजन 230 किलो था. जिसमें जिंदगी मौत की तरह हो चुकी थी. मुझे डाक्टर्स ने जवाब दे दिया था. ऐसे में मैंने कदम उठाया. लोग समझते हैं कि मैंने कोई सर्जरी करवाई है, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. मैंने डाइट और व्यायाम के साथ 160 किलो कम किया है. मुझे इसके लिए डेढ़ साल लगा. मैंने जिंदगी में बहुत खाया है अब उसकी तलब नहीं होती. अभी बिरयानी के दो तीन निवाले ही मेरे लिए काफी होते हैं. वजन कम होने से मेरे संगीत में बहुत परिवर्तन हुआ पहले मैं मंच पर गाना गाने के बाद 15 मिनट तक बात नहीं कर पाता था, मेरी सांस फूलने लगती थी, पर अब ऐसा नहीं होता.

आप किस सिंगर को अधिक सुनते हैं?

इसकी लिस्ट बहुत बड़ी है. हिन्दुस्तानी क्लासिकल में भीमसेन जोशी, उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, गुरु पंडित शिव कुमार शर्मा, उस्ताद विलायत खान आदि. फिल्मी गानों में किशोर कुमार, मोहम्मद रफी आदि. कंपोजर की बात करें तो एस डी बर्मन, आर डी बर्मन और मदन मोहन. विदेश की बात करें तो लुडविग वान बीथोवेन आदि कई हैं.

सिंगिंग कैरियर को अपनाने वाले यूथ को क्या मेसेज देना चाहते हैं?

अगर आप इस प्रोफेशन में आना चाहते हैं, तो टैलेंट के अलावा उतार-चढ़ाव को भी सहने की हिम्मत रखें. हताशा भी बहुत होती है. उस समय भी अपनी प्रतिभा को बनाये रखना और पढ़ाई को पूरा किये बगैर यहां कभी मत आना.

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