Comedy Movies : शायद यही वजह है कि जब कोई इंसान बहुत ज्यादा टैंशन में रहता है तो अपने दिमाग को हलकाफुलका करने के लिए कौमेडी फिल्में देखना पसंद करता है. हास्य से भरी कौमेडी फिल्में किस भाषा में हैं इस से कोई फर्क नहीं पड़ता. कौमेडी फिल्मों का एक ही लक्ष्य होता है सामने वाले के चेहरे पर हंसी लाना.
वैसे तो दर्शकों की अपनी अलगअलग पसंद होती है. किसी को कौमेडी पसंद है तो किसी को ऐक्शन और थ्रिलर फिल्म, लेकिन कौमेडी फिल्में ऐसी होती हैं जिसे हरकोई देखना पसंद करता है। कुछ समय के लिए ही सही लेकिन ये फिल्में दुख और टैंशन को दूर करने में सफल रहती हैं.
बौलीवुड की कई ऐसी फिल्में हैं जिसे लोग कई बार देखने के बाद भी बोर नहीं होते जैसे गोविंदा की फिल्में 'दूल्हे राजा', 'राजा बाबू', 'साजन चले ससुराल', 'कुली नंबर वन', 'दीवाना मस्ताना...' तो आमिर खान की फिल्में 'अंदाज अपनाअपना', 'इश्क...' अमिताभ बच्चन की फिल्म 'नमक हलाल', 'बड़े मियां छोटे मियां...' संजय दत्त की 'मुन्ना भाई एमबीबीएस...' शाहरुख खान की 'बादशाह' और अजय देवगन की 'गोलमाल' आदि कई फिल्में हैं जिसे दर्शक बारबार देख कर ऐंजौय करते हैं और बिलकुल भी बोर नहीं होते।
