फिल्म ‘मर्डर’ से चर्चा में आई अभिनेत्री मल्लिका शेरावत हरियाणा के एक छोटे से गांव की है. वह अपने ग्लैमरस रोल और बोल्ड अंदाज के लिए जानी जाती है. उन्होंने हौलीवुड में भी अपनी पहचान बनायीं है. विदेश में कई सालों तक रहने और ट्रेवलिंग करने के बाद वह फिर से एक वेब सीरीज ‘बू..सबकी फटेगी’ में मुख्य भूमिका निभा रही है. पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

सवाल- इस वेब सीरीज को करने की खास वजह क्या है?

ये एक हॉरर कॉमेडी की वेब सीरीज है,जिसमें मैं भूतनी, हसीना की भूमिका निभा रही हूँ. मुझे बहुत अच्छा लगा. इसके निर्देशक के साथ मैंने पहले भी काम किया है. वो जब मेरे पास इसे लेकर आये तो मुझे बहुत अच्छा लगा,क्योंकि ये एक नयी कांसेप्ट है,जिसे मैंने कभी किया नहीं है.

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सवाल- भूत-प्रेत या सुपर नैचुरल इन सब पर आप कितना विश्वास करती है?

मैं इसमें विश्वास नहीं करती पर बचपन से ऐसी कहानियां जरुर सुनी है. हो सकता है कि ये लोगों की कल्पना है, जिसे हमें करने या सुनने में मज़ा आता है. ये वेब सीरीज कौमेडी है, जिसमें डरें या हँसे समझना मुश्किल है.

सवाल- क्या लोगों को हंसाना मुश्किल होता है?

हंसाना हमेशा से ही मुश्किल होता है. ये चुनौती होती है. इसमें सही टाइमिंग का होना बहुत जरुरी होता है. थोड़ी सी भूल कौमेडी के टेम्पर खो देती है, लेकिन तुषार कपूर जैसे कलाकार होने पर ये आसान हो जाता है.

सवाल- इतने दिनों से आप फिल्म इंडस्ट्री से दूर रही है, इसकी वजह क्या है और क्या कर रही है?

मैं अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आना चाहती थी. इसलिए मैंने बहुत ट्रेवल किया है. एक एक्टर के तौर पर अधिक ग्रो करना चाहती थी, इसलिए मैं कई कलाकारों से मिली एक्टिंग के क्लासेस ज्वाइन किया. पूरे विश्व में ट्रेवल किया और वहां की संस्कृति को जानने की कोशिश की. यहां पर लोग कुएं की मेंढक हो जाते है. वही जाने पहचाने लोग, एक ही तरह की स्क्रिप्ट सारे ग्लैमर वाले किरदार मिल रहे था. अभी इसमें नए प्लेटफार्म के आने से बदलाव आया है. कहानियां बदली है. ओटीटी प्लेटफौर्म गेम चेंजर का काम कर रही है.

सवाल- वेब सीरीज में सेंसरशिप न होने की वजह से गाली-गलौज और सेक्स खूब परोसा जाता है, क्या इस आज़ादी को वेब सीरीज मेकर को ध्यान देने की जरुरत नहीं?

बहुत अधिक जरुरत है, क्योंकि वेब सीरीज की आज़ादी का गलत प्रयोग करना उचित नहीं. आर्टिस्टिक फ्रीडम को अपने हिसाब से तोड़ने-मरोड़ने की जरुरत नहीं. इसमें निर्माता और निर्देशक की बड़ी जिम्मेदारी होती है,क्योंकि हमारे समाज और संस्कृति को उन्हें समझने और ध्यान देने की जरुरत है. दिल्ली गैंग रेप पर बनी वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ एक ऐसी सेंसिटिव वेब सीरीज बनी है, जिसमें हर संवाद अपनी जगह पर फिट है. अभिनेत्री शेफाली छाया उसकी हीरो है और ऐसा किसी फिल्म में होना संभव नहीं था. इसके अलावा हम खुद भी इसके जिम्मेदार है, क्योंकि हम भी वैसी ही वल्गर सीरीज को देखते है. अगर हम उसे न देखे तो उसका बनना भी बंद हो जायेगा. मार्केट है इसीलिए वे उसे बनाते है. आज के समय में अच्छी क्वालिटी की फिल्में बनाने की जरुरत है.

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सवाल- आप अपनी हिंदी सिनेमा की कैरियर को कैसे देखती है?

मैं हरियाणा की हूं और मेरा बचपन बहुत ही रिग्रेसिव था. मुझे मेरे भाई की तरह सबकुछ करने की आजादी नहीं थी. मेरे लिए आत्मनिर्भर होना, अपना ख्याल रखना, अपने हिसाब से जीना आदि करना मेरे लिए बड़ी अचीवमेंट थी. जिसे हिंदी सिनेमा ने दिया. इंडिया मुंबई नहीं है. छोटे शहरों और गावों में लड़कियों के साथ कसाई जैसे वर्ताव होता है. उन्हें कुछ करने का का मौका नहीं मिलता. मेरे लिए किसी लड़की का मुझे देखकर आगे बढ़ने की हिम्मत जुटाना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है.

सवाल- आप लड़कियों के लिए काफी काम कर रही है, उस दिशा में अभी क्या चल रहा है?

‘फ्री ए गर्ल’ एक संस्था है, जिसकी मैं ब्रांड एम्बेसेडर हूं. इसमें बाल वेश्यावृत्ति में फंसी लड़कियों को कानून की शिक्षा दी जाती है और लॉ फार्म के साथ उन्हें जोड़ा जाता है, ताकि उनकी खोयी हुई गरिमा को वे वापस ला सकें. इसमें केवल 15 लड़कियां है. ये संस्था कोलकाता और मुंबई में काम कर रही है. धीरे-धीरे इसे और और आगे ले जाने की कोशिश चल रही है. फण्ड बहुत मिलते है इसलिए काम करने में असुविधा नहीं होती. मैंने साल 2018 में कान फिल्म फेस्टिवल में एक केज में अपने आप को लौक इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया था, क्योंकि भारत के वेश्यालयों में रहने वाली छोटी लड़कियां उसी साइज के कमरे में रहने के लिए विवश होती है. मैंने इस तरह से लोगों को यौन अपराधों से पीड़ित लड़कियों के दयनीय दशा को समझाने की कोशिश की थी. कोलकाता हो या मुबई सभी स्थानों पर ऐसी ही व्यवस्था है.

सवाल- आपको बौलीवुड में स्टारडम मिला जिससे आपकी एंट्री हौलीवुड में भी हुई, लेकिन आपको भावपूर्ण भूमिका कम मिले, इसकी वजह क्या मानती है?

इंडस्ट्री में मैं टाइपकास्ट की शिकार हुई हूं. बोल्ड और ग्लैमरस कहकर सभी ने मुझे वैसी ही भूमिका दी. कुछ फिल्में सफल रही कुछ नहीं. मर्डर मेरी हिट फिल्म थी, मैंने कई फिल्मों में कौमेडी भी की, लेकिन मुझे लेकर किसी फिल्म मेकर ने अलग फिल्म नहीं लिखी, जिससे मुझे वैसी भूमिका नहीं मिली. अब समय बदल गया है. आपको याद होगा कि एक ‘किस’ और बिकिनी को लेकर कितना बवाल मचा था. अब तो ये कौमन हो गया है.

सवाल- आप देश और विदेश में रह चुकी है, दोनों जगहों में महिलाओं को देखने की नजरिये को आप कैसे देखती है? क्या किसी पुरुष को ये अधिकार है कि वे किसी महिला के पहनावे और रहन-सहन के बारें में निर्धारण करें?

हमारा समाज पितृसत्ता है और ये हमारी डीएनए में बस चुका है. पुरुष ही नहीं महिलाएं भी महिलाओं को उनके रहन-सहन पर कोसती है. मेरी सबसे अधिक आलोचक औरतें ही है. उनके सोच को बदलने की जरुरत है. कठुआ गैंग रेप को धर्म का नाम दे दिया. 8 साल की बच्ची के लिए धर्म क्या है? कुछ गलत काम होने पर महिला को ही उसका जिम्मेदार ठहराया जाता है. जो मुद्दा है उससे भटककर लोग कुछ और ही कहने लगते है. ऐसे लोगों को सुधारने में मां की भूमिका सबसे बड़ी होती है, उन्हें अपने बेटे को बचपन से किसी भी महिला को इज्जत देने की सीख देनी पड़ेगी. महिलाएं कोई औब्जेक्ट नहीं, उसे सम्मान देने की जरुरत है और ये शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से ही बदल सकती है.

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सवाल- अभी आपने वेब सीरीज से काम फिर से शुरू किया है, आगे आने वाले समय में आप अपने आप में कितना परिवर्तन लाना चाहती है,ताकि पहले जैसी मुश्किलें न आयें?

अभी मैंने रजत कपूर के साथ एक पीरियड फिल्म की है. जिसमें मैं फिफ्टी की अभिनेत्री की भूमिका निभा रही हूं. बहुत अच्छी फिल्म है, जो अभी रिलीज पर है. मैंने अभी सोचा है कि मैं अलग-अलग भूमिका करूंगी.

सवाल- क्या किसी बायोपिक में काम करने की इच्छा रखती है?

मुझे कल्पना चावला की बायोपिक में काम करने की इच्छा है, क्योंकि मैं हरियाणा की हूं.

Edited by Rosy

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