Tia Bajpai: टिया बाजपेयी सिंगर और ऐक्ट्रैस हैं. कैरियर की शुरुआत उन्होंने विक्रम भट्ट की फिल्म ‘हौंटेड 3डी’ से की थी. फिल्मों के अलावा टिया ने कई टीवी सीरीज में भी काम किया है. टिया सिंगर बनना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने साल 2005 में ‘सारेगामापा चैलेंज’ में भी भाग लिया था.
लखनऊ के आरटिस्टिक परिवार में जन्मीं टिया को बचपन से ही अपनी इच्छानुसार काम करने की आजादी मिली है, जिस से वे यहां तक पहुंच पाई हैं. उन की मां आरती बाजपेयी और पिता मदन बाजपेयी दोनों ही सिंगर रह चुके हैं.
इन दिनों टिया हौलीवुड में पहली बार डैब्यू कर रही हैं और हौरर फिल्म ‘लिली रोज’ को ले कर काफी ऐक्साइटेड हैं, जिस की शूटिंग चल रही है. यह फिल्म अंगरेजी के अलावा हिंदी में भी डब की जाएगी.
टिया की नानी और मां सभी लोग गृहशोभा पढ़ती हुई आगे बढ़ी हैं. वे इसे एक बेहतरीन मैगजीन बताती हैं, जिसे हर वर्ग की महिलाएं पढ़ना पसंद करती हैं.
उन्होंने खास गृहशोभा के लिए बात की. आइए, जानते हैं, उन की कहानी उन की ही जबानी.
हौरर फिल्म पहली पसंद
इस फिल्म को करने की खास वजह के बारे में पूछने पर टिया बताती हैं कि यह एक इंटरनैशनल हौरर थ्रिलर फिल्म है. इस की शूटिंग विदेशों में शुरू हो चुकी है. यह मेरी पहली इंटरनैशनल फिल्म है, इसलिए मैं बहुत ऐक्साइटेड हूं. इस के अलावा बहुत दिनों से लोग हौरर फिल्मों की डिमांड मुझ से सोशल मीडिया पर कर रहे थे, क्योंकि वे एक बार फिर से मुझे हौरर फिल्म में देखना चाहते हैं. इस से मुझे लगा कि मुझे एक बार फिर ऐसी फिल्मों में काम कर लेना चाहिए. ऐसे में जब यह फिल्म मिली, जिस की कहानी वाकई बहुत अच्छी है, तो मैं ने हां कर दी.
टिया कहती हैं कि अभी तो मुझे चाहने वालों ने मेरा नाम ‘हौरर क्वीन’ तक रख दिया है. मुझे सीरियस हौरर बहुत पसंद है. साथ ही इस फिल्म में मैं एक नए अवतार में आ रही हूं. उम्मीद है कि दर्शक मुझे पसंद करेंगे.
बदली है कौंसैप्ट
टिया कहती हैं कि आज से 10 साल पहले जब मैं ने ‘हौंटेड 3डी’ किया था, तब सभी ने कहा था कि हौरर कोई जोनर नहीं होता और कोई बनाना नहीं चाहता, लेकिन आज यह कौंसैप्ट पूरी तरह से बदल चुका है. आज हौरर और थ्रिलर पर काफी फिल्में बन रही हैं. फिल्ममेकर करोड़ों खर्च कर ऐसी फिल्में बनाते हैं और इसे देखने वाले दर्शक भी खूब होते हैं. इन के दर्शक बहुत लौयल होते हैं और मैं खुद भी ऐसी फिल्में देखना पसंद करती हूं. चाहे बड़ी हो या छोटी मैं हौरर फिल्में अवश्य देखती हूं.
काम करना चुनौती
टिया ने हिंदी हौरर फिल्म की है. अब हौलीवुड हौरर फिल्म कर रही हैं. ऐसे में वे बहुत अंतर महसूस नहीं करतीं. वे कहती हैं कि दोनों में कोई अधिक फर्क नहीं है, क्योंकि हिंदी मेरी मातृभाषा है और बोलने में आसानी होती है, जिस से किसी भी संवाद को याद रखना आसान होता है, जबकि अंगरेजी भले ही हम कितनी भी बोल लें, लेकिन अमेरिकन फिल्म में इंग्लिश बोलने का तरीका हमेशा अलग होता है. इस ऐक्सैंट पर काम करना ही मेरे लिए सब से बड़ी चुनौती रही है. उस की ट्रैनिंग मैं ने ली है. इस के अलावा संवाद की डिलीवरी और एटिट्यूड हौरर में बहुत आवश्यक है.
अलग दर्शक
विदेशों में बनने वाली हौरर फिल्में और देश में बनाई जाने वाली ऐसी फिल्मों में अंतर की वजह के बारे में टिया कहती हैं कि ये फिल्में दर्शकों के हिसाब से बनती हैं. यहां के लोग काफी इमोशनल होते हैं. वे किसी हार्डकोर चीज को देखना पसंद नहीं करते. इस में वे रोमांस और इमोशंस को पसंद करते हैं और हिंदी सिनेमा हमेशा इमोशंस पर चली है, उसे बदला नहीं जा सकता.
वे कहती हैं कि किसी की जिंदगी में कोई समस्या है और वह उसे लड़ कर ठीक कर रहा है, ऐसी फिल्मों को दर्शकों को देखने में मजा आता है. हौलीवुड की फिल्में अच्छी इसलिए लगती हैं, क्योंकि वे अंगरेजी में बनी होती हैं, जो ग्लोबल है, उन के दर्शक यहां से अलग और अधिक होते हैं और वे हार्डकोर चीज को आसानी से दिखा पाते हैं.
सिंगर से ऐक्ट्रैस बनने का सफर
टिया कहती हैं कि सिंगर से ऐक्ट्रैस बनना मेरे लिए एक डैस्टिनी है क्योंकि मैं ‘सारेगामापा’ में आई थी. वहां मैं ने जाना कि विक्रम भट्ट का म्यूजिक लेबल भी है. मैं ने उन के लिए गानों की अलबम बनाई, जिस में मेरा फोटोशूट हुआ था. उन्होंने मेरी पिक्चर देखी क्योंकि उस दौरान वे ‘हौंटेड 3डी’ बना रहे थे. उन्हें मैं पसंद आई और मुझे उस में कास्ट किया, क्योंकि फिल्म में मेरा चरित्र पियानो बजाने वाली का ही था. इस प्रकार ऐक्टिंग ने मुझे चुना है क्योंकि तब तक तो मैं एक म्यूजिशियन ही थी. म्यूजिक ने मुझे टीवी पर ऐक्टिंग का मौका दिया. इस के अलावा मेरी संगीत की पूरी टीम यूरोप की है. मैं इंग्लिश गानों पर अधिक काम कर रही हूं. कई अलबम निकाले हैं और आगे मेरी एक इंग्लिश वीडियो अलबम ‘लव माफिया’ निकलने वाली है, जिस पर काम हो रहा है. यह एफरो हाउस, जो एक नया जोनर है जिस के गाने सोलफुल हैं, उस पर आधारित है. इस प्रकार संगीत पर काम करतेकरते ही मैं ऐक्ट्रैस बन गई.
मिली प्रेरणा
टिया आगे कहती हैं कि मेरे मातापिता दोनों सिंगर हैं. मेरी मां लखनऊ में पहले थिएटर की ऐक्ट्रैस रह चुकी हैं, उन्होंने दूरदर्शन पर काफी नाटकों में काम किया है. रेडियो पर उन का शो आरती बाजपेयी के नाम से आता था. मेरी बुआ दूरदर्शन पर न्यूज ऐंकर थीं. मेरी नानी भी गाना गाती थीं. परिवार वालों ने ही मुझे संगीत की तालिम दी है. जब मेरे पेरैंट्स संगीत की रियाज करते थे, तो मैं भी उन के साथ 3 साल की उम्र से ही संगीत सीखती थी.
परिवार का सहयोग
टिया को परिवार का सहयोग हमेशा मिला है. वे कहती हैं कि हिंदी फिल्मों में काम करना अपनेआप में बड़ी बात होती है. लोग आप को अच्छे नजरिए से देखते हैं. जब मैं लखनऊ से मुंबई आई थी, तो मां मेरे साथ आई थीं. मेरी नानी ने 10 हजार रुपए का एक इनवेलप बना कर मेरे बैग में रख दिया था. मुझे बहुत अधिक सहयोग नानी का मिला है.
ऐक्टिंग और सिंगिंग को मैनेज करना नहीं मुश्किल
टिया हंसती हुई कहती हैं कि मैं 3 साल की उम्र से ही संगीत के क्षेत्र में आ गई. मैं ने संगीत में विशारद किया है. मैं रात को 3 बजे भी उठ कर सुर में गा सकती हूं क्योंकि इतनी ट्रैनिंग मैं ने ले रखी है. मैं ने पढ़ाई के साथसाथ संगीत की ट्रैनिंग ली है. जब बच्चे बाहर खेलने जाते हैं, उस समय मेरा ध्यान पढ़ाई और संगीत पर रहा है. मैं संगीत और ऐक्टिंग को ले कर सैल्फ ऐश्योर्ड हूं. आज भी मैं सुबह उठ कर 1 घंटा रियाज करती हूं.
नहीं कोई रिग्रेट
टिया अपनी जर्नी से बहुत खुश हैं, किसी प्रकार की रिग्रेट नहीं है. वे कहती हैं कि मेरी लाइफ में मैं किसी बात से रिग्रेट नहीं करती, क्योंकि मैं ने हर गलती से कुछ न कुछ सीख ली है और आज यहां तक पहुंच पाई हूं. मैं एक कलकार हूं और काम पर अधिक फोकस्ड रह कर खुश रहती हूं. ऐसा ही मैं ने किसी स्क्रिप्ट या फिल्म को ले कर समस्या फेस किया है. मुझे थोड़ा अपने बारे में सावधान रहने की जरूरत है और खासकर महिलाओं को हमेशा ही खुद के बारे में सतर्क होना चाहिए.
रीमेक में काम करना पसंद
टिया लीजेंड अभिनेता धर्मेंद्र की बहुत बड़ी फैन हैं. बिना किसी मेकओवर के वे उस समय के हैंडसम अभिनेता रहे हैं. उन की फिल्म ‘अनपढ़’ मैं ने कई बार देखी है, जिस में अभिनेत्री माला सिन्हा हैं. यह फिल्म उस समय में एक जबरदस्त मैसेज के साथ रही, जिस में स्त्री शिक्षा के महत्त्व पर जोर दिया गया था. इस के अलावा फिल्म ‘शोले’ को कभी भी मैं देख सकती हूं.
वे कहती हैं कि फिल्म ‘अनपढ़‘ की अगर रीमेक हो, तो मैं उस में मैं माला सिन्हा की भूमिका निभाना चाहती हूं.
Tia Bajpai
