मौनसून यानी चिलचिलाती गरमी और पसीने से राहत दिलाने वाला खूबसूरत मौसम, जिस में हमें खाने और घूमने में खूब मजा आता है. लेकिन यह मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लाता है, जिस से सारा मजा किरकिरा हो जाता है. मौनसून के दौरान ज्यादातर बीमारियां दूषित पानी पीने या उस के संपर्क में आने और मच्छरों के काटने से होती हैं.

मुंबई के जनरल फिजिशियन डा. गोपाल नेने कहते हैं कि ऐसी कई बीमारियां हैं, जो मुख्य रूप से मौनसून में लापरवाही बरतने से होती हैं और शुरुआती लक्षणों के पहचान में न आने से गंभीर रूप ले लेती हैं. ये निम्नलिखित हैं:

इन्फ्लुएंजा: मौनसून के दौरान इन्फ्लुएंजा यानी सर्दीजुकाम होना आम बात है. यह एक संक्रामक बीमारी है जो हवा में फैले वायरस के सांसों के जरीए अंदर जाने से तेजी से फैलती है. ये वायरस हमारे श्वसनतंत्र को संक्रमित करते हैं, जिस से विशेष रूप से नाक और गला प्रभावित होता है. नाक बहना, गले में जलन, शरीर में दर्द, बुखार इत्यादि इस के लक्षण होते हैं. इस के होने पर जल्द से जल्द डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

सावधानियां: सर्दीजुकाम से बचने के लिए सब से अच्छा तरीका है नियमित रूप से स्वच्छ, संतुलित और पौष्टिक आहार लें, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को विकसित कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए.

वायरल फीवर: अचानक मौसम परिवर्तन के कारण थकान, ठंड, शरीर में दर्द और बुखार को वायरल बुखार कहते हैं. यह बुखार एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित हवा या संक्रमित शारीरिक स्राव के संपर्क में आने से फैलती है. वायरल बुखार सामान्यतया 3 से 7 दिनों तक रहता है. यह आमतौर पर अपनेआप भी ठीक हो जाता है, लेकिन दोबारा संक्रमण में ऐंटीबायोटिक लेने की आवश्यकता होती है.

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