सांस की समस्या बुजुर्गों के साथ कम उम्र के युवाओं में भी देखने को मिल रही है. ऐसे में यह जानना बहुत आप के लिए जरूरी है आखिर ऐसा हो क्यों रहा है?

आमतौर पर अधिक समय तक एक्सरसाइज करने से सांसे तेज हो जाती हैं, कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने वक्त सांस में दिक्कत की समस्या का सामना करना पड़ता है कई बार ज्यादा तनाव में रहने कारण भी ऐसी दिक्कत हो जाती है. यह देखा गया है कि सऐसी स्थितियों में जल्दी ही सब नॉर्मल भी हो जाता है. अगर आप को भी सांस लेने में परेशानी हो रही है और उपर्युक्त परेशानी हो रही है तो ध्यान देना बहुत जरूरी है. आइए, जानते हैं फिजीशियन डौक्टर अनीता पौल से आखिर क्यों होती सांस लेने में दिक्कत-

1.  कहीं हृदय रोग तो नहीं

दिल की बीमारियों के चलते भी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. दिल के रोग मसलन, एन्जाइना, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, जन्मजात दिल में परेशानी या एरीथीमिया आदि में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. दिल की मांसपेशियां कमजोर होने पर वे सामान्य गति से पंप नहीं कर पातीं, जिससे फेफड़ों पर दबाव बढ़ जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है. इसमें पैरों में भी सूजन और रात सोते वक्त बार-बार खांसी भी आती है.

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2. जब वजन हो ज्यादा

मोटे लोगों को सांस फूलने की बहुत ही ज्यादा समस्या रहती है. वजन बढ़ जाने के कारण सांस के लिए मस्तिष्क से आने वाले निर्देश का पैटर्न बदल जाता है. सीढ़ियां चढ़ते-उतरते वक्त, अक्सर इन की सांसें फूलने लगती हैं. यह सब मोटापे के कारण होता है. जिसका वजन जितना ज्यादा होता है, उसे सांस लेने में उतनी ही दिक्कत होती है.

3. एलर्जी भी हो सकता है कारण

कई लोगों का इम्युनिटी सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) सेंसिटिव होता है, जिससे उन्हें प्रदूषण, धूल, मिट्टी, और जानवरों के बाल आदि से एलर्जी रहने लगती है. ऐसे लोगों को मौसम में बदलाव आने पर एलर्जी का अटैक पड़ने लगता है. सांस लेने में परेशानी होती है. सीने में जकड़न आने लगती है. सांस फूलने लगता है. कभी-कभी यह समस्या गंभीर रूप भी ले लेती है. ऐसे में मरीज को तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए.

4. जिन्हें अस्थमा हैं

अस्थमा एक गंभीर बीमारी है. इस में सांस की नली में सूजन आ जाती हैं जिससे सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या शुरू हो जाती है. प्रदूषण और खान-पान में मिलावट के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. यह बीमारी किसी को भी हो सकती है. बच्चे-बूढ़े सभी इसके चपेट में आते जा रहे हैं.

अस्थमा होने के कई कारण हो सकते हैं घर में या उसके आसपास धूल का होना, घर में पालतू जानवर का होना, वायु प्रदूषण, तनाव या भय के कारण, सर्दी के मौसम में अधिक ठंड होने के कारण, अधिक मात्रा में जंक फूड खाने के कारण, ज्यादा नमक खाने के कारण इत्यादि.

5. क्रौनिक औब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी)

इस स्थिति में सांस नली बलगम या सूजन की वजह से पतली हो जाती है. जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है. सिगरेट पीने वालों, फैक्टरी में रसायनों के बीच काम करने वालों और प्रदूषण में रहने वाले लोगों को यह खासतौर पर होती है.

इन बातों का रखें ध्यान

  • घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें खास ध्यान. कार्पेट, तकिए और गद्दों पर धूप लगाएं. परदों की साफ-सफाई करें. रसोई और बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन लगाएं. एसी का इस्तेमाल कम करें.
  • धूम्रपान न करें, सिगरेट पीने वालों से दूरी बनाएं.
  • हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें. ब्रोकली, गोभी, पत्ता गोभी, पालक और चौलाई को खाने में शामिल करें.

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  • प्रदूषण से दूरी बना कर रखें. धूल मिट्टी वाली जगह पर न जाएं. बाहर का काम शाम के समय करें.
  • सुबह वॉक पर जरूर जाएं.
  • वजन कम करने पर ध्यान दें.
  • यदि अस्थमा है तो इनहेलर साथ रखें.
  • कम दूरी वाले कामों के लिए वाहन का इस्तेमाल न करें. अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर व्यक्ति को तुरंत खाने या पीने की कोई चीज न दें
  • सिर के नीचे तकिया न रखें, इससे सांस नली पर असर पड़ता है. व्यक्ति को हवादार खुले जगह में ले जाएं.
  • कपड़े अगर टाइट है तो ढीला कर दें.
  • छती या गले पर कोई खुली चोट है तो उसे तुरंत ढक दें.
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