कौम्पिटिशन के इस समय में आजकल लोग एक दूसरे से आगे निकले में अपनी सेहत पर ध्यान देना बंद कर चुके हैं. साथ ही काम और पढ़ाई में प्रेशर बढ़ने के कारण किशोरों और युवाओं में डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ते जा रहा हैं. डिप्रेशन का मुख्य कारण काम, पढ़ाई का प्रेशर, ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की ललक होता है. खासकर अगर हम युवाओं की बात करें तो भारत में सबसे ज्यादा डिप्रेशन के शिकार युवा हो रहे हैं. हाल ही में एक आईआईटी-हैदराबाद में पढ़नेवाले मार्क एंड्रयू चार्ल्स ने पढ़ाई और करियर  के  तनाव की वजह से सुसाइड कर लिया. आज हम आपको बताते है कि डिप्रेशन क्या है, क्यों बढ़ रहा है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है.

क्या होता है डिप्रेशन

वैसे तो किसी ना किसी वजह से उदास होना आम बात है, लेकिन जब यह एहसास ज्यादा समय तक बन रहा है तो समझ जाइए कि डिप्रेशन की स्थिती बनती जा रही हैं. डिप्रेशन एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नही लगता और उसे लगने लग जाता है कि उसकी जिंदगी में सिर्फ दुख है या उसकी जिंदगी में जीने के लिए अब कुछ नही बचा है.

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महिलाओं को होता है डिप्रेशन का सबसे ज्यादा खतरा

वर्ल्ड हेल्थ ऑग्रजेइशेन के रिपोर्ट मुताबिक महिलाओं के डिप्रेशन के चपेट में आने का खतरा पुरूषों के मुकाबले में कही ज्यादा होता हैं. आधुनिक समय में महिलाओं पर घर, परिवार, बच्चे और करियर के साथ ही अन्य और जिम्मेदारियां होती हैं. साथ ही वीकेंड के दिन भी महिलाएं घर का काम करती है, जिसके कारण उन्हें आराम नही मिलता. महिलाओं मे डिप्रेशन ज्यादा होने का एक मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव भी होता है, जिसके कारण वे ज्यादा डिप्रेशन का शिकार होती है.

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