dengue care tips : मुंबई में मौनसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के मामलों में पिछले साल की तुलना में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. बीएमसी (बीएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी से 14 जुलाई 2026 के बीच डेंगू के 938 और चिकनगुनिया के 28 मामले सामने आए हैं, जो चिंता का विषय है क्योंकि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही गंभीर बीमारियां हैं और ये सेहत को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

इस स्थिति में खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखना सब से महत्त्वपूर्ण होता है. आइए, जानते हैं इस समय खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के उपाय कौनकौन से हैं।

मुंबई की ग्लेनेईगल्स अस्पताल के इंटरनल मैडिसिन कंसल्टेंट डाक्टर मंजूषा अग्रवाल कहती हैं कि डेंगू की शुरुआत आमतौर पर अचानक तेज बुखार से होती है, लेकिन इस के लक्षण कई हैं, मसलन :

-तेज सिरदर्द।
-आंखों के पीछे दर्द।
-शरीर और जोड़ों में तेज दर्द।
-उलटी जैसा महसूस होना।
-कई बार शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखाई देना आदि.

ये लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसा लग सकते हैं, लेकिन डेंगू में शरीर का दर्द और कमजोरी ज्यादा होती है. अगर मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही हो या बारबार उलटी हो, उस में खून आए, पेट में तेज दर्द हो, चक्कर आए, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो या शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.

जांच

डेंगू की सही पहचान केवल ब्लड टेस्ट से ही हो सकती है. अगर डेंगू हलका है, तो ज्यादातर मरीज घर पर आराम कर के, पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पी कर तथा डाक्टर की सलाह के अनुसार इलाज ले कर ठीक हो सकते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह, किडनी या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को ज्यादा सावधानी और नियमित जांच की जरूरत होती है.

घर पर देखभाल करते समय बरतें सावधानी

डाक्टर आगे कहती हैं कि बीमारी के पहले 3 से 5 दिन बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इसी समय बीमारी गंभीर हो सकती है. मरीज को भरपूर पानी और दूसरे तरल पदार्थ पिलाएं, पूरा आराम करने दें और डाक्टर द्वारा बताई गई दवाएं ही दें, हलका और पौष्टिक भोजन खिलाएं. डाक्टर की सलाह के अनुसार समयसमय पर जांच भी कराते रहें.

कुछ बातों पर खास ध्यान दें

1.डेंगू में शरीर में पानी की कमी होना बीमारी को गंभीर बना सकता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीना बहुत जरूरी है.

2.मरीज को पानी, नारियल पानी, ओआरएस, घर का बना सूप, नीबू पानी और बिना ज्यादा चीनी वाला ताजा फलों का रस देना चाहिए.

3.कितना तरल पदार्थ पीना है, यह मरीज की उम्र, वजन और दूसरी बीमारियों पर निर्भर करता है.

4.पूरे दिन थोड़ाथोड़ा कर के बारबार तरल पदार्थ पीना सब से अच्छा रहता है. शराब, बहुत ज्यादा चाय या कौफी, कोल्डड्रिंक और ऐनर्जी ड्रिंक पीने से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं.

देखभाल के मुख्य नियम सभी के लिए एकजैसे हैं, लेकिन कुछ लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है. छोटे बच्चों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है. बुजुर्गों में कई बार बीमारी गंभीर होने के बाद भी लक्षण देर से दिखाई देते हैं.

गर्भवती महिलाओं को शुरू से ही डाक्टर की निगरानी में रहना चाहिए क्योंकि डेंगू मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को प्रभावित कर सकता है. वहीं मधुमेह, किडनी या दिल की बीमारी वाले मरीज डाक्टर की सलाह के बिना ज्यादा तरल पदार्थ न लें क्योंकि कुछ मामलों में यह नुकसान भी पहुंचा सकता है.

इस के अलावा डेंगू से संक्रमित एडीज मच्छर व्यक्ति को अगर काट ले, तो वही मच्छर दूसरे लोगों में भी संक्रमण फैला सकता है. डेंगू फैलाने वाला एडीज (Aedes) मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटता है. इसलिए मरीज को दिन में भी मच्छरदानी में सोना चाहिए, मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट लगाना चाहिए और पूरे बाजू के कपड़े पहनने चाहिए, चाहे दिन का समय ही क्यों न हो.

घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। पानी के बरतनों नों को हमेशा ढंक कर रखें और खिड़कियों पर जाली लगाएं. हाथों की साफसफाई का भी ध्यान रखें. अगर किसी को वायरल, खांसीजुकाम या फ्लू है, तो उसे मास्क पहनना चाहिए और छोटे बच्चों, बुजुर्गों तथा कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों से थोड़ी दूरी रखनी चाहिए.

सुरक्षित दवाइयां

डाक्टर मंजूषा आगे कहती हैं कि डेंगू में बुखार और शरीर दर्द के लिए पैरासिटामोल अच्छी दवा है. यह डाक्टर की सलाह से लेना चाहिए. इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, एस्पिरिन और नेप्रोक्सेन जैसी दर्द की दवाएं नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इन से शरीर में खून बहने का खतरा बढ़ सकता है. बिना डाक्टर की सलाह के ऐंटीबायोटिक्स या दूसरी कोई दवा भी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि ऐंटीबायोटिक्स वायरल संक्रमण पर असर नहीं करती.

ज्यादातर वायरल संक्रमण आराम करने, पर्याप्त पानी और दूसरे तरल पदार्थ पीने, पौष्टिक खाना खाने और डाक्टर की बताई हुई दवाएं लेने से ठीक हो जाते हैं.

ध्यान रहे कि बिना डाक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए और इलाज बीच में नहीं छोड़ना चाहिए. बुखार 3 दिन से अधिक रहने पर डाक्टर की सलाह लेना उचित होता है.

पोस्ट डेंगू फटीग सिंड्रोम

अधिकतर लोगों का बुखार 1 सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार मरीज को ठीक होने में 1 से 3 सप्ताह का समय लगता है. मरीज को फल, हरी सब्जियां, दालें, प्रोटीन से भरपूर भोजन और पर्याप्त पानी व दूसरे तरल पदार्थ लेने चाहिए. अच्छी नींद और पूरा आराम भी बहुत जरूरी है.

डेंगू का प्रभाव शरीर में 3 हफ्तों से लेकर 6 महीने तक रह सकता है. इसे ‘पोस्ट डेंगू फटीग सिंड्रोम’ कहा जाता है। इस में जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी, बालों का झड़ना, लिवर पर असर व भूख की कमी आदि हो सकती है. डाक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां ले कर व्यक्ति काम पर लौट सकता है.

अंधविश्वासी न बनें

कई लोग ऐसा मानते हैं कि पपीते की पत्ती का रस, कीवी, बकरी का दूध या कुछ खास चीजें खाने से प्लेटलेट्स जल्दी बढ़ जाते हैं और डेंगू ठीक हो सकता है, जबकि अब तक ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है. ज्यादातर मरीजों में संक्रमण ठीक होने के साथ प्लेटलेट्स अपनेआप सामान्य होने लगते हैं.

इसलिए सब से ज्यादा ध्यान पानी पीने, पौष्टिक भोजन करने, डाक्टर की सलाह मानने और समयसमय पर जांच कराने पर देना चाहिए. सिर्फ घरेलू नुसखों के भरोसे इलाज करना और डाक्टर के पास जाने में देरी करना खतरनाक हो सकता है.

इस प्रकार डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो एक संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता, लेकिन सही देखभाल से इसे ठीक किया जा सकता है और व्यक्ति फिर से नौर्मल काम पर लौट सकता है.

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