Kleptomania Symptoms : अभी हाल ही में नोएडा के DLF मॉल में चोरी की एक घटना सामने आयी. जिसमें शक होने पर जब महिला का मँहगा पर्स खोला गया.. तो उसमें एक किलो घी और एक रिफाइंड की बोटल बरामद हुई…स्टॉफ ने फिर महीने भर का सी.सी.टी.वी फुटेज पर ध्यान दिया तो पता लगा एक महीने में यह महिला चार बार इस स्टोर में आयी और हर बार एक किलो घी और रिफाइंड उठा कर ले गयी..हंगामा बढ़ा तो मैडम के पतिदेव भागते दौड़ते आए…और पुराना सारा बिल देकर…मैडम को मॉल से ले गये…
अब मैडम के विडियों… सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है…और लोग उसमें अलग अलग राय दे रहे है…
आपको क्या लगता है…सच में यह महिला चोरी की नियत से बार बार मॉल जा रही थी या बात कुछ और थी.
क्या आप जानते है ऐसा करना उसका शोक नहीं था और ना ही जरुरत. बल्कि अपने फोन की मदद से मुँह छुपाती महिला.. शायद उस बीमारी से पीड़ित हो..जिसमें सबकुछ होते हुए भी इन्सान छोटी मोटी चोरियाँ करता है… जी हां, हम सही कह रहें है यह एक मानसिक बीमारी क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित है. आइये जाने इसी बीमारी के बारे में कि यह क्या -होती है ताकि अगली बार हर चोर को आप चोर समझने की गलती ना करें.
कई सेलिब्रिटीज भी इस बीमारी से पड़ित है-
इतिहास और मनोरंजन जगत में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य या आवेग नियंत्रण से जुड़ी ऐसी समस्याओं का शिकार रहे हैं. भारतीय मीडिया और फिल्मी गलियारों में कई बार ऐसी अनौपचारिक चर्चाएं होती रही हैं कि अत्यधिक काम के तनाव, डिप्रेशन, या मानसिक दबाव के कारण कई अन्य कलाकारों या प्रसिद्ध हस्तियों ने भी अजीब या आवेगपूर्ण व्यवहार का सामना किया है. हालांकि, भारत में सामाजिक छवि और गोपनीयता के डर के कारण इन मामलों को अक्सर सार्वजनिक नहीं किया जाता है या इन्हें कानूनी रूप से दबा दिया जाता है, जिससे इनके पुख्ता और आधिकारिक रिकॉर्ड कम ही बाहर आ पाते हैं.
भारतीय सिनेमा की दिग्गज और क्लासिक अभिनेत्री नरगिस से जुड़ा एक प्रसिद्ध वाकया है. रिपोर्ट्स और उनकी जीवनी के अनुसार, एक बार विदेश यात्रा के दौरान उन पर दुकान से कुछ सामान बिना भुगतान किए ले जाने का आरोप लगा था. बाद में यह बात सामने आई कि वह इस तरह की मानसिक स्थिति से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्हें ऐसी अनपेक्षित परिस्थिति का सामना करना पड़ा था. इस घटना के सामने आने पर बाद में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उनके करीबियों ने इसे एक सामान्य अपराध के रूप रूप में नहीं, बल्कि आवेग नियंत्रण विकार यानी क्लेप्टोमेनिया के रूप में समझा.
उस दौर में मानसिक स्वास्थ्य और इस तरह की बीमारियों के प्रति समाज में जागरूकता बहुत कम थी. ऐसी स्थितियों को लोग बीमारी मानने के बजाय अक्सर गलतफहमी या चरित्र की कमजोरी समझ लेते थे, जिसके कारण इन बातों को बहुत ज्यादा सार्वजनिक नहीं किया जाता था.
हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री विनोना राइडर का मामला क्लेप्टोमेनिया के सबसे चर्चित मामलों में से एक है. साल 2001 में उन्हें एक महंगे डिपार्टमेंटल स्टोर से बिना भुगतान किए हजारों डॉलर के कपड़े और सामान ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अदालत की प्रक्रिया और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के दौरान यह बात सामने आई कि वह इस तरह के मानसिक और आवेग नियंत्रण के दबाव से जूझ रही थीं.
क्या है क्लेप्टोमेनिया?
क्लेप्टोमेनिया एक प्रकार का मानसिक और आवेग नियंत्रण विकार है, जिसमें व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक जरूरत या व्यक्तिगत लाभ के, चीजें चुराने की एक बेकाबू इच्छा महसूस होती है. यह आम चोरी से बिल्कुल अलग है. सामान्य चोर पैसों के लालच, जरूरत या आपराधिक प्रवृत्ति के कारण चोरी करते हैं. इसके विपरीत, क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति अक्सर चुराई गई चीजों का मूल्य भी नहीं होता या वे उन्हें आसानी से खरीद सकते हैं.
इस बीमारी के लक्षण क्या होते है-
इसमें व्यक्ति के अंदर से ही चोरी करने की तीर्व इच्छा होती है.
इस इच्छा को वह रोक नहीं पाता है.
चोरी करने से ठीक पहले अत्यधिक तनाव या उत्तेजना महसूस होना.
चोरी करते समय राहत, संतोष या आनंद की प्राप्ति होना.
चोरी के बाद अत्यधिक अपराधबोध, पछतावा या डर महसूस होना.
इस तरह की चोरी करने का मन करता ही क्यूँ है?
मस्तिष्क के रसायन –
दरअसल, चोरो करने वाले व्यक्ति को उस वस्तु की जरूरत नहीं होती और वे उसे आसानी से खरीद सकते हैं. इसके बावजूद मस्तिष्क की रासायनिक स्थिति के कारण उन्हें एक अजीब सी खींचतान महसूस होती है. मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक रसायन असंतुलन होने पर आवेगों को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है. साथ ही चोरी करने या जोखिम उठाने के दौरान दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जो व्यक्ति को एक तरह का तात्कालिक ‘थ्रिल’ या किक देता है. इसके आलावा कई बार जीवन में अत्यधिक तनाव, भावनात्मक आघात या किसी अपने को खोने का दुख इस विकार को ट्रिगर कर सकता है.
चोरी करके कैसे उन्हें गुड फील होता है-
चोरी करने से ठीक पहले व्यक्ति के मन में भारी बैचेनी और मानसिक तनाव पैदा होता है. लेकिन जैसे ही वे वस्तु को उठाते हैं, उनके दिमाग में एक क्षणिक संतोष या राहत महसूस होती है. जब व्यक्ति चोरी करता है, तो मस्तिष्क में डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे एक क्षणिक खुशी या राहत मिलती है. यह प्रक्रिया किसी नशे की लत की तरह काम करती है.
क्लेप्टोमेनिया में कैसी “किक” मिलती है मरीज को-
क्लेप्टोमेनिया में चोरी करने पर मिलने वाली “किक” या संतोष का अहसास किसी सामान्य लालच, फायदे या चोरी से मिलने वाली खुशी से बिल्कुल अलग होता है. यह पूरी तरह से हमारे मस्तिष्क की रसायन शास्त्र और न्यूरोलॉजिकल रिस्पांस से जुड़ा हुआ है.
क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति के मन में चोरी करने से ठीक पहले अत्यधिक मानसिक दबाव, बेचैनी और घबराहट पैदा होती है. यह तनाव तब तक बढ़ता रहता है जब तक वे उस कार्य को पूरा नहीं कर लेते.
किक का अहसास कैसे होता है-
जैसे ही वे उस वस्तु को उठाते हैं, वह जमा हुआ पूरा मानसिक तनाव एक ही सेकंड में छूमंतर हो जाता है. मस्तिष्क इस अचानक मिलने वाली राहत को बहुत बड़े सुख या ‘जीत’ के रूप में महसूस करता है.
दरअसल, शरीर में एड्रेनालाईन हार्मोन को अचानक बढ़ा देती हैं, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और एक प्रकार का उत्साह महसूस होता है.
मस्तिष्क का ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ सक्रिय हो जाता है और डोपामाइन रिलीज होता है. डोपामाइन वही रसायन है जो किसी नशे, जुए या बहुत बड़ी सफलता मिलने पर दिमाग को खुशी देता है. यही कारण है कि यह अनुभव किसी लत की तरह काम करने लगता है.
इस किक या चोरी के बाद गिल्ट भी होता है-
इस “किक” का जो मज़ा है या रोमांच है उसकी समय सीमा बहुत ही क्षणिक होती है. कुछ मिनटों के बाद ही व्यक्ति को अहसास हो जाता है कि उसने गलत किया है. इसलिए घटना के तुरंत बाद चोरी करने वाले को भयंकर पछतावा, शर्मिंदगी और डर सताने लगता है कि कहीं वे पकड़े न जाएं. कई बार पीड़ित व्यक्ति चुपचाप उस सामान को वापस लौटा भी देते हैं या छिपा देते हैं. यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उनका उद्देश्य वस्तु पाना नहीं, बल्कि उस मानसिक चक्र और आवेग से गुजरना होता है.
इसका इलाज क्या है?
साइकोथैरेपी- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद से रोगी को सिखाया जाता है कि जब ऐसा आवेग उठे, तो खुद को कैसे संभाला जाए.
दवाइयां- डॉक्टर सेरोटोनिन के स्तर को संतुलित करने वाली दवाइयां जैसे एंटीडिप्रेसेंट्स या मूड स्टेबलाइजर्स दे सकते हैं, जिससे आवेग की तीव्रता कम हो जाती है.
परिवार कैसे मदद कर सकते है- यदि आपको किसी अपने में ऐसे लक्षण दिखें, तो उन्हें डांटने, चोर कहने या समाज के डर से डांट-फटकार लगाने के बजाय यह समझें कि यह एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है.
मनोचिकित्सक की मदद लें: किसी अच्छे काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श लें. सही समय पर थेरेपी और डॉक्टर की देखरेख मिलने से इस आवेग और मानसिक चक्र को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है.
