Long distance relationship : शादी दो लोगों का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का भी मिलन है और जब दो अनजाने लोग पतिपत्नी बनकर साथ रहते हैं तो उनके बीच प्यार, समझ और भरोसा धीरेधीरे मजबूत होता जाता है. लेकिन आज के समय में कई शादियां ऐसी होती हैं जहां पति-पत्नी अलग-अलग शहरों में रहते हैं. इसे लौन्ग डिस्टेंस मैरिज कहा जाता है. कई बार यह दूरी मजबूरी होती है, जैसे नौकरी, पढ़ाई या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण. लेकिन जब यह दूरी धीरे-धीरे रिश्ते में भावनात्मक दूरी बन जाती है, तब समस्या शुरू हो जाती है.

ऐसा ही हुआ रीमा और अर्जुन के साथ इनकी शादी बड़े धूमधाम से हुई लेकिन शादी के बाद कुछ ही दिनों में अर्जुन को अपने काम की वजह से दूसरे शहर जाना पड़ा. रीमा अपने ससुराल में रह गई. शुरुआत में दोनों रोज फोन पर बात करते, हँसी-मजाक करते और एक-दूसरे को बहुत याद करते.समय बीतता गया. अर्जुन काम में व्यस्त रहने लगा और रीमा घर की जिम्मेदारियों में. अब पहले जैसी लंबी बातें कम होने लगीं. छोटी-छोटी गलतफहमियाँ बढ़ने लगीं. रीमा को लगता अर्जुन उसे समय नहीं देता, और अर्जुन को लगता रीमा उसकी मजबूरी नहीं समझती.

जब रिश्ता बीच रास्ते में अटक जाता है

कुछ मामलों में ऐसा भी देखा जाता है कि पत्नी अपने माता-पिता के प्रभाव में आकर पति के साथ रहने से मना कर देती है. वह अपने मायके में ही रहना चाहती है और पति के साथ नया जीवन शुरू करने से कतराती है. कई बार माता-पिता की सलाह या दबाव के कारण पत्नी अपने निर्णय खुद नहीं ले पाती. इस स्थिति में पति खुद को अकेला और असहाय महसूस करता है.

सबसे कठिन स्थिति तब बनती है जब पत्नी न तो पति के साथ रहना चाहती है और न ही तलाक देने के लिए तैयार होती है. इससे दोनों का जीवन बीच में अटक जाता है. पति आगे बढ़ना चाहता है लेकिन कानूनी और सामाजिक कारणों से ऐसा कर नहीं पाता. वहीं पत्नी भी अपने मायके में रहकर रिश्ते को अधर में रख देती है.

ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है खुलकर बातचीत. पति-पत्नी को एकदूसरे से ईमानदारी से अपनी भावनाएं और समस्याएं साझा करनी चाहिए. अगर परिवार के लोग बीच में आकर गलतफहमी बढ़ा रहे हों, तो पति-पत्नी को मिलकर फैसला लेना चाहिए कि उनके रिश्ते के लिए क्या सही है.

ऐसे में काउंसलिंग भी है मददगार

कई बार काउंसलिंग या परिवार के समझदार लोगों की सलाह भी रिश्ते को संभालने में मदद कर सकती है. शादी एक जिम्मेदारी और समझ का रिश्ता है, इसलिए इसे ईगो या दूसरों के दबाव में टूटने नहीं देना चाहिए.अंत में यही कहा जा सकता है कि शादी तभी सफल होती है जब पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के साथ खड़े हों. अगर रिश्ते में दूरी आ जाए, तो उसे बातचीत, भरोसे और समझ से कम किया जा सकता है.

परिवार भी है जिमेदार

परिवार का कर्तव्य भी यही होना चाहिए कि वे अपने बच्चों का घर बसाने में मदद करें, न कि रिश्ते को और उलझा दें. माता-पिता की सलाह महत्वपूर्ण होती है, लेकिन शादी का असली आधार पति-पत्नी का आपसी भरोसा और समझ ही होता है.

अंत में यही कहा जा सकता है कि रिश्ते तब तक मजबूत रहते हैं जब तक उनमें सच्चाई, संवाद और सम्मान बना रहता है. अगर इन तीन चीजों की कमी हो जाए, तो दूरी सिर्फ शहरों की नहीं बल्कि दिलों की भी हो जाती है.

दूरी की वजह से कुछ नकारात्मक बातें धीरेधीरे जो रिश्ते में आ जाती है.

गलतफहमियां बढ़ने लगीं – आमने-सामने बात न होने से छोटी बात भी बड़ी लगने लगती है

भरोसा कम होने लगा – दोनों को एक-दूसरे पर शक होने लगता है

अकेलापन महसूस होने लगा – दोनों  को लगता है कि शादी के बाद भी वह अकेली है.

परिवार का दखल बढ़ गया – आसपास के लोगों की बातों से रिश्ता और कमजोर होने लगा.

प्यार की जगह दूरी बढ़ गई – समय के साथ दोनों के बीच भावनात्मक दूरी का आ जाना.

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